एक निश्चित अनुक्रम के पूर्णांक को निम्नलिखित रूप में संरचित किया गया है : मान लीजिए, 0 और 1 आरम्भ की दो संख्याएँ हैं । इन दोनों के योगफल, अर्थात् 1 से अगली अर्थात् तीसरी संख्या संरचित की गई । पिछली दो संरचित संख्याओं के योगफल से अगली संख्या के संरचित किए जाने की यह प्रक्रिया जारी रहती है । यदि ये 0, 1, 1 संख्याएँ इस अनुक्रम में पहली, दूसरी और तीसरी संख्याएँ हैं, तो 7वीं और 10वीं संख्याएँ क्रमशः क्या होंगी ?
- (a)6 और 30
- (b)7 और 33
- (c)8 और 34
- (d)10 और 39
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) 8 और 34 — यहाँ पहला काम अनुक्रम को खोलकर लिख डालना है, क्योंकि नियम सरल है और गिनती ही असली परीक्षा है।
स्टेम स्वयं तय कर देता है कि 0, 1 और 1 इस अनुक्रम की पहली, दूसरी और तीसरी संख्याएँ हैं। इसके बाद हर संख्या पिछली दो का योग है :
पहली 0; दूसरी 1; तीसरी 0 + 1 = 1; चौथी 1 + 1 = 2; पाँचवीं 1 + 2 = 3; छठी 2 + 3 = 5; सातवीं 3 + 5 = 8; आठवीं 5 + 8 = 13; नवीं 8 + 13 = 21; दसवीं 13 + 21 = 34।
अतः सातवीं संख्या 8 और दसवीं संख्या 34 है, जो विकल्प (c) है। यह प्रसिद्ध फ़िबोनाची अनुक्रम है, और उसे पहचान लेने पर काम और छोटा हो जाता है।
पूरे प्रश्न का दाँव-पेंच स्थान-गणना पर है, अंकगणित पर नहीं। यदि कोई शून्य को छोड़कर 1, 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55 से गिनना शुरू कर दे तो उसे सातवीं पर 13 और दसवीं पर 55 मिलेंगे — और यह जोड़ा किसी भी विकल्प में नहीं है। यही इस बात की जाँच भी है कि स्टेम की शर्त ठीक पढ़ी गई या नहीं : वह स्पष्ट कहता है कि गिनती 0 से आरम्भ होती है।
एक और छोटा उपाय है। दसवीं संख्या ही चारों विकल्पों को आपस में अलग कर देती है, इसलिए केवल 34 तक पहुँचना पर्याप्त है; सातवीं संख्या उसी रास्ते में पड़ जाती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)6 और 30 — 6 और 30 — इनमें से कोई भी संख्या इस अनुक्रम में आती ही नहीं। नियम लागू करने पर सातवें स्थान पर 8 बनता है, 6 कहीं नहीं बनता; और दसवें स्थान पर 13 + 21 = 34 आता है, 30 नहीं। ऐसे विकल्प यह जाँचने के लिए रखे जाते हैं कि उत्तर देने वाले ने वास्तव में पद लिखे या केवल अनुमान लगाया, क्योंकि दोनों संख्याएँ सही उत्तर से थोड़ी ही छोटी हैं और सरसरी नज़र में ठीक लगती हैं। एक बार पूरा अनुक्रम काग़ज़ पर उतर जाए तो यह विकल्प एक क्षण में गिर जाता है।
- (b)7 और 33 — 7 और 33 — यही स्थिति यहाँ भी है; अनुक्रम में न 7 आता है, न 33। ध्यान देने की बात यह है कि तीनों ग़लत विकल्प सही मान से 1 से 4 तक ही हटे हैं, यानी वे किसी एक जोड़ में हुई छोटी चूक जैसे दिखते हैं। इसलिए इस प्रकार के प्रश्न में हर पद को अलग पंक्ति में लिखना और साथ-साथ उसका स्थान-क्रमांक लिखते जाना सबसे सुरक्षित तरीक़ा है — जोड़ते समय एक स्थान खिसक जाना ही सबसे आम भूल है।
- (d)10 और 39 — 10 और 39 — ये दोनों भी अनुक्रम से बाहर हैं। यह विकल्प उस पाठक के लिए है जो नियम को ‘हर बार कुछ बढ़ता जाता है’ मान लेता है और पदों को अनुमान से आगे बढ़ाता है। नियम इतना ढीला नहीं है : प्रत्येक पद ठीक पिछले दो पदों का योग है, और उस नियम से 10 या 39 किसी स्थान पर नहीं बनते। जोड़ की श्रृंखला — 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34 — अपने आप में इसका खंडन है।
अवधारणा
यह फ़िबोनाची अनुक्रम है : पहले दो पद दिए जाते हैं और उसके बाद हर पद अपने ठीक पिछले दो पदों के योग के बराबर होता है। सूत्र-रूप में F(n) = F(n−1) + F(n−2)। इस प्रश्न में आरम्भ 0 और 1 से किया गया है, इसलिए अनुक्रम बनता है 0, 1, 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55, 89 …
ऐसे अनुक्रमों को पुनरावर्ती (recursive) कहा जाता है, क्योंकि अगला पद पाने के लिए पहले पिछले पद निकालने पड़ते हैं — कोई सीधा सूत्र लगाकर सातवाँ पद अलग से निकाल लेने की सुविधा यहाँ नहीं है। परीक्षा में इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि पद लिखने ही पड़ेंगे, और चूँकि पूछा गया स्थान बहुत आगे नहीं है, यह काम कुछ ही सेकंड का है।
इस अनुक्रम की दो और बातें जानने योग्य हैं। लगातार दो पदों का अनुपात आगे बढ़ने पर एक स्थिर संख्या के पास पहुँचता जाता है, जिसे स्वर्णिम अनुपात कहते हैं और जिसका मान लगभग 1·618 है। और यही संख्याएँ भारतीय छंद-शास्त्र की परंपरा में — पिंगल, विरहांक और हेमचंद्र के यहाँ — लघु-गुरु मात्राओं के क्रम गिनने के प्रसंग में यूरोप से बहुत पहले आ चुकी थीं।
संख्यात्मक अभियोग्यता के प्रश्नपत्रों में अनुक्रम दो रूपों में आते हैं। एक वे, जिनमें नियम छिपा होता है और उसे पदों से पहचानना पड़ता है; दूसरे वे, जिनमें नियम शब्दों में दे दिया जाता है और केवल उसे ठीक-ठीक लागू करना होता है। यह प्रश्न दूसरे प्रकार का है — पूरा नियम गद्य में लिखा हुआ है, इसलिए यहाँ कठिनाई पहचान की नहीं, पालन की है।
गद्य में लिखे नियम का एक ख़तरा यह होता है कि शर्तें वाक्यों में बिखरी रहती हैं। यहाँ तीन शर्तें हैं : आरम्भ की दो संख्याएँ 0 और 1 हैं; तीसरी संख्या इन दोनों का योग है; और यही प्रक्रिया आगे चलती रहती है। इसके बाद स्टेम एक बार फिर दोहराता है कि 0, 1, 1 क्रमशः पहली, दूसरी और तीसरी संख्याएँ हैं — यह दोहराव ही संकेत है कि आयोग स्थान-गणना को ही असली परीक्षा मान रहा है।
इस प्रश्नपत्र में गणित और आँकड़ों के प्रश्न किसी एक खंड में बँधे नहीं हैं, वे पूरे पत्र में बिखरे मिलते हैं, इसलिए क्रमांक देखकर विषय का अनुमान लगाना यहाँ काम नहीं आता।
मुख्य तथ्य
- फ़िबोनाची अनुक्रम में हर पद अपने ठीक पिछले दो पदों के योग के बराबर होता है : F(n) = F(n−1) + F(n−2)।
- 0 से आरम्भ करने पर अनुक्रम बनता है 0, 1, 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55, 89 — यानी सातवाँ पद 8 और दसवाँ पद 34।
- आरम्भ का शून्य छोड़ देने पर हर स्थान एक क़दम खिसक जाता है और सातवें पर 13, दसवें पर 55 आता है; इसीलिए स्टेम स्थान-क्रम स्पष्ट कर देता है।
- लगातार दो पदों का अनुपात आगे बढ़ने पर स्वर्णिम अनुपात के पास पहुँचता है, जिसका मान लगभग 1·618 है।
- ये संख्याएँ भारतीय छंद-शास्त्र में पिंगल, विरहांक और हेमचंद्र की परंपरा में लघु-गुरु मात्राओं के क्रम गिनने के प्रसंग में पहले ही आ चुकी थीं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- आरम्भ का 0 छोड़कर गिनना, जिससे हर स्थान एक क़दम खिसक जाता है और सातवें पर 13 तथा दसवें पर 55 आ जाता है।
- पद लिखे बिना अनुमान से उत्तर चुनना — तीनों ग़लत विकल्प सही मान से केवल एक से चार की दूरी पर रखे गए हैं।
- अनुक्रम को समांतर श्रेढ़ी मान लेना, जबकि यहाँ लगातार पदों का अंतर स्थिर नहीं, बढ़ता जाता है।
अनुक्रम के प्रश्न दो तरह से पूछे जाते हैं और दोनों की तैयारी अलग है। नियम छिपा हो तो पहले लगातार पदों का अंतर और अनुपात देखिए; नियम दिया हो, जैसे यहाँ, तो सीधे पद लिखिए और साथ में स्थान-क्रमांक भी लिखते जाइए। दूसरा उपाय यह है कि पहले देखा जाए कि कौन-सी माँगी गई संख्या चारों विकल्पों को आपस में अलग करती है — यहाँ दसवीं संख्या यह काम स्वयं कर देती है, इसलिए उसी तक पहुँचना काफ़ी है। इसी प्रश्नपत्र में संख्याओं की शृंखला पर आधारित और भी प्रश्न हैं, जिनमें एक क्रमागत पूर्णांकों के औसत का है; वहाँ भी हल का पहला क़दम यही है कि नियम को शब्दों से निकालकर संख्याओं में उतार लिया जाए।
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EPFO_APFC_2016_Q99खोलें व हल करें →Consider the sequential integers 27 to 93, both included in the sequence. The arithmetic average of these numbers will be
- (a) 61·5
- (b) 61
- (c) 60·5
- (d) 60
उत्तर(d) 60
इसी प्रश्नपत्र का एक और शृंखला-आधारित प्रश्न, जिसमें 27 से 93 तक के क्रमागत पूर्णांकों का औसत पूछा गया है — वहाँ भी हल नियम को संख्याओं में उतारने से खुलता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
यदि कोई अनुक्रम 0, 1 से आरम्भ होकर इस नियम पर चलता है कि हर अगली संख्या पिछली दो का योग है, तो इसकी बारहवीं संख्या क्या होगी ?
- (a)55
- (b)89
- (c)144
- (d)233
उत्तर(b) 89
- practice — not a real PYQ
उसी अनुक्रम (0, 1, 1, 2, 3, 5, …) की पहली आठ संख्याओं का योगफल क्या है ?
- (a)20
- (b)28
- (c)33
- (d)41
उत्तर(c) 33