विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (FIPB) के निम्नलिखित कार्यों में से कौन-से सही हैं ? 1. विदेशी निवेश के लिए प्रस्तावों की शीघ्र निकासी (क्लियरैंस) सुनिश्चित करना 2. बोर्ड द्वारा निकासी (क्लियर) किए गए प्रस्तावों के कार्यान्वयन का आवधिक पुनरीक्षण करना 3. FDI के संवर्धन तथा सुगमीकरण के लिए समय-समय पर आवश्यक समझे गए अन्य सभी क्रियाकलाप करना 4. उद्योग मंत्रालय द्वारा अलग से गठित किए जा रहे FIPC के साथ अन्योन्यक्रिया करना नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1, 2 और 3
- (b)केवल 1, 2 और 4
- (c)1, 2, 3 और 4
- (d)केवल 3 और 4
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) 1, 2, 3 और 4 — चारों कथन विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड के कार्यों के मानक विवरण में आते हैं, इसलिए कोई भी छोड़ा नहीं जा सकता। यह बोर्ड 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद उस व्यवस्था के रूप में बना जिसमें सरकारी अनुमोदन माँगने वाले विदेशी निवेश के प्रस्तावों पर एक ही मंच से विचार हो सके; आरंभ में यह प्रधान मंत्री कार्यालय के अधीन गठित हुआ और बाद में वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग के अधीन काम करता रहा, तथा 2017 में इसे समाप्त कर दिया गया, जिसके बाद ऐसे प्रस्ताव संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय देखते हैं। कथन 1 इसका सबसे बुनियादी कार्य है : प्रस्तावों की शीघ्र निकासी सुनिश्चित करना, ताकि निवेशक को एक ही जगह से समयबद्ध निर्णय मिले। कथन 2 उसका स्वाभाविक विस्तार है : जिन प्रस्तावों को बोर्ड ने निकासी दे दी, उनके कार्यान्वयन का आवधिक पुनरीक्षण करना — अर्थात् केवल अनुमति देकर छोड़ नहीं देना। कथन 3 सामान्य कार्य-खंड है : प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के संवर्धन तथा सुगमीकरण के लिए समय-समय पर आवश्यक समझे गए अन्य सभी क्रियाकलाप करना। कथन 4 पर विशेष ध्यान दीजिए, क्योंकि यहीं सबसे अधिक भ्रम होता है : वह कहता है कि बोर्ड उद्योग मंत्रालय द्वारा अलग से गठित किए जा रहे FIPC के साथ अन्योन्यक्रिया करेगा। FIPB और FIPC दो अलग निकाय हैं — पहला विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड है, जो प्रस्तावों पर निर्णय करता है, और दूसरा विदेशी निवेश संवर्धन परिषद्, जो उद्योग मंत्रालय में संवर्धन के कार्य के लिए गठित की गई। दोनों के बीच समन्वय की अपेक्षा स्वयं बोर्ड के कार्यों में लिखी गई थी, इसलिए कथन 4 भी सही है और उत्तर (c) है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1, 2 और 3 — यह इस प्रश्न का सबसे प्रबल चारा है, क्योंकि यह पहले तीन स्पष्ट कार्यों को स्वीकार करके केवल चौथे को गिरा देता है — और चौथा ठीक वही कथन है जिसमें एक कम परिचित संक्षेप आता है। बहुत से अभ्यर्थी FIPC को FIPB का ग़लत छपा हुआ रूप मान लेते हैं और सोचते हैं कि कोई निकाय स्वयं अपने साथ अन्योन्यक्रिया कैसे करेगा; इसी तर्क से वे कथन 4 को असंगत ठहरा देते हैं। पर ये दो अलग निकाय हैं : विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड प्रस्तावों पर निर्णय करने वाला निकाय था, जबकि विदेशी निवेश संवर्धन परिषद् उद्योग मंत्रालय में संवर्धन के कार्य के लिए अलग से गठित की गई थी — अर्थात् एक अनुमोदन का काम करता था और दूसरा प्रचार तथा निवेशक-संपर्क का। दोनों के बीच समन्वय की अपेक्षा बोर्ड के कार्यों में लिखी गई थी, इसलिए कथन 4 को गिराना ठीक नहीं।
- (b)केवल 1, 2 और 4 — यह विकल्प उस कथन को छोड़ देता है जो सबसे व्यापक है : प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के संवर्धन तथा सुगमीकरण के लिए समय-समय पर आवश्यक समझे गए अन्य सभी क्रियाकलाप करना। ऐसे सामान्य कार्य-खंड को छोड़ देने की प्रवृत्ति इसलिए बनती है कि वह अस्पष्ट लगता है और उसमें कोई विशिष्ट क्रिया नहीं दिखती। किन्तु संस्थाओं के कार्यों की सूची में ऐसा खंड लगभग सदैव रहता है, क्योंकि वही उन्हें बदलती परिस्थितियों में काम करने की छूट देता है; उसके बिना संस्था केवल गिनाए हुए कामों तक बँध जाती और हर नई आवश्यकता के लिए नया आदेश निकालना पड़ता। इसलिए कथन-सूची में जब कोई सामान्य कार्य-खंड दिखे, तब उसे केवल अस्पष्ट होने के कारण मत गिराइए — उसे तभी गिराइए जब वह उस संस्था के क्षेत्र से ही बाहर की बात कह रहा हो।
- (d)केवल 3 और 4 — यह विकल्प उन्हीं दो कार्यों को छोड़ देता है जो इस बोर्ड की पहचान थे — प्रस्तावों की शीघ्र निकासी और निकासी दिए गए प्रस्तावों के कार्यान्वयन का आवधिक पुनरीक्षण। बोर्ड बना ही इसीलिए था कि सरकारी अनुमोदन माँगने वाले विदेशी निवेश के प्रस्तावों पर एक ही मंच से, समयबद्ध ढंग से निर्णय हो सके; इसलिए कथन 1 को छोड़ देना उसकी मूल भूमिका को ही छोड़ देना है। कथन 2 भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि अनुमोदन के बाद यह देखना कि निवेश वास्तव में आया या नहीं, नीति के मूल्यांकन के लिए आवश्यक है। संभवतः यह विकल्प उस अभ्यर्थी के लिए है जो बोर्ड को केवल एक संवर्धन-निकाय मानता है, अनुमोदन-निकाय नहीं। यहीं यह भी याद रखिए कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के दो मार्ग होते हैं — स्वचालित मार्ग, जिसमें पूर्व अनुमोदन आवश्यक नहीं, और सरकारी मार्ग, जिसमें आवश्यक है — और यह बोर्ड दूसरे मार्ग के प्रस्तावों से जुड़ा था।
अवधारणा
भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की व्यवस्था को समझने के लिए तीन बातें एक साथ जाननी चाहिए। पहली, निवेश के दो मार्ग हैं : स्वचालित मार्ग, जिसमें निवेशक को पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती और केवल निर्धारित सूचना देनी होती है; और सरकारी मार्ग, जिसमें पूर्व अनुमोदन आवश्यक होता है, तथा जो प्रायः संवेदनशील क्षेत्रों और कुछ विशेष स्थितियों पर लागू होता है। दूसरी, अनुमोदन की व्यवस्था समय के साथ बदली है : 1991 के सुधारों के बाद सरकारी मार्ग के प्रस्तावों पर विचार के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड बना, जो आरंभ में प्रधान मंत्री कार्यालय के अधीन गठित हुआ और बाद में वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग के अधीन रहा; 2017 में इसे समाप्त कर दिया गया और उसके बाद ऐसे प्रस्ताव संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय एक मानक प्रक्रिया के अनुसार निपटाते हैं, जिसके लिए एक ऑनलाइन मंच भी बनाया गया। तीसरी, संवर्धन और अनुमोदन दो अलग काम हैं : अनुमोदन का अर्थ है प्रस्ताव पर निर्णय करना, और संवर्धन का अर्थ है निवेशकों तक पहुँचना, अवसर बताना और प्रक्रिया सरल बनाना; इसी कारण उद्योग मंत्रालय में संवर्धन के लिए अलग परिषद् की व्यवस्था की गई थी, जिसका उल्लेख इस प्रश्न के चौथे कथन में है।
यह संस्था के कार्यों वाला कथन-प्रश्न है और इसका उत्तर 'सभी सही' है, जो इस बनावट में सबसे कम चुना जाने वाला विकल्प होता है। इस प्रश्न की असली कठिनाई एक अक्षर की है : कथन 4 में FIPC छपा है, जबकि स्टेम तथा शेष कथनों में FIPB है, और पहली दृष्टि में यह छपाई की चूक जैसा लगता है। यह चूक नहीं है — ये दो अलग निकाय हैं, और पुस्तिका दोनों संक्षेपों को रोमन लिपि में ही छापती है, हिन्दी स्तंभ में भी। इसलिए यहाँ सबसे बड़ी सीख यह है कि किसी अपरिचित संक्षेप को अपने-आप ग़लत मानकर कथन गिराना जोखिम भरा है; पहले यह पूछिए कि क्या ऐसा कोई अलग निकाय हो सकता है। दूसरी सीख यह है कि सामान्य कार्य-खंड — 'अन्य सभी क्रियाकलाप' — संस्थाओं की कार्य-सूची का सामान्य अंग होता है और उसे अस्पष्ट मानकर गिराना भी भूल है। हिन्दी स्तंभ में कथन 1 और 2 में अंग्रेज़ी शब्दों के देवनागरी लिप्यन्तरण कोष्ठक में जोड़े गए हैं — (क्लियरैंस) तथा (क्लियर) — जो अंग्रेज़ी स्तंभ में नहीं हैं, और किसी कथन के अंत में दण्ड नहीं छपा है।
मुख्य तथ्य
- विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड सरकारी अनुमोदन माँगने वाले विदेशी निवेश के प्रस्तावों पर विचार करने वाला निकाय था; इसका मुख्य कार्य ऐसे प्रस्तावों की शीघ्र निकासी सुनिश्चित करना था।
- इसके कार्यों में निकासी दिए गए प्रस्तावों के कार्यान्वयन का आवधिक पुनरीक्षण तथा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के संवर्धन और सुगमीकरण के लिए आवश्यक समझे गए अन्य क्रियाकलाप भी सम्मिलित थे।
- FIPB और FIPC दो अलग निकाय हैं : पहला विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड, जो अनुमोदन का काम करता था, और दूसरा विदेशी निवेश संवर्धन परिषद्, जो उद्योग मंत्रालय में संवर्धन के कार्य के लिए गठित की गई थी।
- यह बोर्ड आरंभ में प्रधान मंत्री कार्यालय के अधीन गठित हुआ और बाद में वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग के अधीन रहा; 2017 में इसे समाप्त कर दिया गया और उसके बाद ऐसे प्रस्ताव संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय देखते हैं।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के दो मार्ग हैं — स्वचालित मार्ग, जिसमें पूर्व अनुमोदन आवश्यक नहीं, और सरकारी मार्ग, जिसमें आवश्यक है; यह बोर्ड दूसरे मार्ग से जुड़ा था।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- अपरिचित संक्षेप को छपाई की चूक मान लेना; FIPC एक अलग निकाय है और कथन 4 इसी कारण सही है।
- सामान्य कार्य-खंड को अस्पष्ट मानकर गिरा देना, जबकि 'अन्य आवश्यक क्रियाकलाप' वाला उपबंध संस्थाओं की कार्य-सूची का सामान्य अंग होता है।
- 'सभी सही' वाले विकल्प से बचने की आदत, जो इस बनावट के प्रश्नों में सबसे अधिक अंक कटवाती है।
- अनुमोदन और संवर्धन को एक मान लेना; पहला प्रस्ताव पर निर्णय है और दूसरा निवेशकों तक पहुँचने तथा प्रक्रिया सरल बनाने का काम।
संस्थाओं पर प्रश्न इस परिवार की परीक्षाओं में तीन रूपों में आते हैं। पहला, कार्यों की सूची वाला कथन-प्रश्न, जैसा यह है : किसी निकाय के तीन-चार कार्य गिनाकर पूछना कि कौन-से सही हैं; यहाँ चारा प्रायः वह कथन होता है जिसमें कोई कम परिचित नाम या संक्षेप आता है, अथवा जो बहुत सामान्य भाषा में लिखा होता है। दूसरा, संस्थागत विवरण का प्रश्न — कौन-सा निकाय किस मंत्रालय के अधीन है, कब बना, उसकी अध्यक्षता कौन करता है। तीसरा, परिवर्तन का प्रश्न — कौन-सा निकाय समाप्त कर दिया गया और उसका काम अब कौन करता है; यह रूप उन विषयों में विशेष रूप से आता है जहाँ व्यवस्था बदली हो। तैयारी की दृष्टि से प्रत्येक निकाय के साथ चार बातें लिख लीजिए : उसका उद्देश्य, उसका मंत्रालय, उसके दो-तीन प्रमुख कार्य, और उसकी वर्तमान स्थिति। यही चार पंक्तियाँ तीनों रूपों के लिए पर्याप्त होती हैं, और इस प्रश्न में तीसरी पंक्ति ही सीधे उत्तर दे देती है।
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अभ्यास
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प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के संदर्भ में स्वचालित मार्ग से क्या अभिप्राय है ?
- (a)जिसमें निवेशक को पूर्व सरकारी अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती
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- (d)जिसमें निवेशक को कोई सूचना नहीं देनी होती
उत्तर(a) जिसमें निवेशक को पूर्व सरकारी अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती — निर्धारित सूचना बाद में देनी होती है, इसलिए (d) भी ग़लत है। क्षेत्रवार सीमाएँ स्वचालित मार्ग में भी लागू रहती हैं, और यह मार्ग सरकारी उपक्रमों तक सीमित नहीं है।
- practice — not a real PYQ
विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है ?
- (a)यह सरकारी अनुमोदन माँगने वाले विदेशी निवेश के प्रस्तावों पर विचार करता था और 2017 में इसे समाप्त कर दिया गया
- (b)यह भारतीय कंपनियों के विदेश में निवेश को अनुमोदित करता था
- (c)यह रिज़र्व बैंक का एक विभाग था
- (d)यह आज भी सभी विदेशी निवेश प्रस्तावों को अनुमोदित करता है
उत्तर(a) यह सरकारी अनुमोदन माँगने वाले विदेशी निवेश के प्रस्तावों पर विचार करता था और 2017 में इसे समाप्त कर दिया गया — उसके बाद ऐसे प्रस्ताव संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय देखते हैं। यह रिज़र्व बैंक का विभाग नहीं था, और इसका काम भारत में आने वाले निवेश से जुड़ा था, बाहर जाने वाले निवेश से नहीं।