जब भी देश कोई मुक्त व्यापार क्षेत्र स्थापित करते हैं, वे अपने बीच व्यापार पर सभी प्रतिबन्धों को समाप्त कर देते हैं तथा
- (a)वे बाहरी देशों से होने वाले आयातों पर एक सर्व-सामान्य बाह्य प्रशुल्क स्थापित कर देते हैं
- (b)वे बाहरी देशों से होने वाले आयातों पर सभी प्रतिबन्धों को समाप्त कर देते हैं
- (c)वे अन्य मुक्त व्यापार क्षेत्रों से होने वाले आयातों पर सभी प्रतिबन्धों को समाप्त कर देते हैं
- (d)प्रत्येक देश, बाहरी देशों से होने वाले आयातों पर अपने-अपने प्रशुल्क तथा कोटा के समुच्चय बनाए रखता है
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) वे बाहरी देशों से होने वाले आयातों पर एक सर्व-सामान्य बाह्य प्रशुल्क स्थापित कर देते हैं — आयोग की कुंजी इसी विकल्प को लेती है, और इस प्रश्न से जो पढ़ना है वह क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण की पूरी सीढ़ी है, क्योंकि उसी सीढ़ी में सर्व-सामान्य बाह्य प्रशुल्क का स्थान तय होता है। स्टेम का पहला भाग सभी प्रकार के एकीकरण पर लागू होता है : सदस्य देश आपस के व्यापार पर प्रतिबंध — प्रशुल्क और कोटा — समाप्त कर देते हैं। इसके आगे की सीढ़ियाँ इस प्रकार पढ़ाई जाती हैं। मुक्त व्यापार क्षेत्र में सदस्य आपसी व्यापार खोल देते हैं; सीमा-शुल्क संघ में इसके साथ बाहरी दुनिया के लिए एक ही सर्व-सामान्य बाह्य प्रशुल्क अपनाया जाता है; साझा बाज़ार में उसके ऊपर श्रम तथा पूँजी की मुक्त आवाजाही जुड़ती है; और आर्थिक संघ में मौद्रिक तथा राजकोषीय नीतियों का समन्वय भी। इसी क्रम के कारण उदाहरण भी अलग-अलग बनते हैं : यूरोपीय संघ इस सीढ़ी में बहुत ऊपर है और उसका बाहरी प्रशुल्क साझा है, जबकि क्षेत्रीय व्यापार समझौतों की बड़ी संख्या केवल आपसी व्यापार खोलने तक सीमित रहती है। एक और धारणा यहीं से निकलती है और उसे अवश्य जान लीजिए — उद्भव-नियम। ये वे नियम हैं जो तय करते हैं कि कोई वस्तु किस देश की मानी जाएगी; इनकी आवश्यकता उसी व्यवस्था में पड़ती है जहाँ सदस्यों के बाहरी प्रशुल्क समान न हों, क्योंकि तब कम प्रशुल्क वाले सदस्य के रास्ते माल भीतर आकर पूरे क्षेत्र में फैल सकता है। इसलिए इस प्रश्न को हल करने से अधिक महत्त्वपूर्ण यह है कि सीढ़ी के दोनों पड़ावों के नाम और उनकी पहचान अलग-अलग याद रहें : आपसी व्यापार का खुलना एक बात है, और बाहरी दुनिया के लिए एक ही प्रशुल्क अपनाना दूसरी।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)वे बाहरी देशों से होने वाले आयातों पर सभी प्रतिबन्धों को समाप्त कर देते हैं — यह विकल्प क्षेत्रीय व्यवस्था को एकपक्षीय मुक्त व्यापार में बदल देता है, जो दोनों ही अर्थों में असंगत है। किसी भी क्षेत्रीय व्यवस्था का पूरा तर्क यह है कि सदस्यों को आपस में वह सुविधा मिले जो बाहर वालों को नहीं मिलती — यही अधिमान की धारणा है, और यही उसे व्यापक बहुपक्षीय व्यवस्था से अलग करती है। यदि सदस्य देश बाहर के सभी देशों से भी सारे प्रतिबंध हटा दें, तो सदस्यता का कोई आर्थिक अर्थ ही न बचे और समझौते की आवश्यकता समाप्त हो जाए। व्यवहार में भी ऐसा नहीं होता : प्रत्येक देश अपने संवेदनशील क्षेत्रों — कृषि, कुछ विनिर्माण उद्योग — के लिए बाहरी प्रशुल्क बनाए रखता है। इसके अतिरिक्त विश्व व्यापार व्यवस्था में क्षेत्रीय समझौतों को इसी शर्त पर छूट मिलती है कि वे सदस्यों के बीच व्यापार को सारभूत रूप से खोलें, न कि यह कि वे बाहर के सभी देशों के लिए भी अपने द्वार खोल दें।
- (c)वे अन्य मुक्त व्यापार क्षेत्रों से होने वाले आयातों पर सभी प्रतिबन्धों को समाप्त कर देते हैं — ऐसा कोई नियम है ही नहीं। कोई भी क्षेत्रीय समझौता केवल अपने सदस्यों को बाँधता है, और उससे यह नहीं निकलता कि दुनिया के अन्य समूहों के साथ स्वतः कोई रियायत बन जाएगी। दो समूहों के बीच व्यापार खोलने के लिए अलग से समझौता करना पड़ता है, और ऐसे समझौते होते भी हैं — पर वे स्वतंत्र वार्ताओं का परिणाम होते हैं, किसी समूह की सदस्यता का स्वाभाविक परिणाम नहीं। यह विकल्प संभवतः इस भ्रम से बनाया गया है कि 'मुक्त व्यापार' का अर्थ सर्वत्र मुक्त व्यापार होगा। इसीलिए इन पदों को ठीक-ठीक पढ़ना आवश्यक है : यहाँ 'मुक्त' का विस्तार सदस्यों तक सीमित है, और बाहर की दुनिया के साथ संबंध अलग नियमों से चलता है। यही कारण है कि आज विश्व में सैकड़ों क्षेत्रीय व्यापार समझौते एक साथ चल रहे हैं और एक ही देश कई समूहों का सदस्य हो सकता है।
- (d)प्रत्येक देश, बाहरी देशों से होने वाले आयातों पर अपने-अपने प्रशुल्क तथा कोटा के समुच्चय बनाए रखता है — आयोग की कुंजी इस विकल्प को नहीं लेती। इस पंक्ति में जो कहा गया है वह मानक व्यापार-सिद्धांत में मुक्त व्यापार क्षेत्र की परिभाषित विशेषता के रूप में पढ़ाया जाता है : सदस्य आपस का व्यापार खोल देते हैं, पर बाहरी दुनिया के लिए प्रत्येक सदस्य अपनी अलग प्रशुल्क-अनुसूची बनाए रखता है, और जब सभी सदस्य एक ही बाहरी प्रशुल्क अपना लेते हैं तब वह व्यवस्था सीमा-शुल्क संघ कहलाती है। इसी भेद से उद्भव-नियमों की आवश्यकता भी जुड़ी है, क्योंकि अलग-अलग बाहरी प्रशुल्क होने पर यह तय करना पड़ता है कि कोई वस्तु सचमुच किसी सदस्य देश में बनी है या केवल वहाँ से होकर आई है। इसलिए इस पंक्ति को पढ़ते समय इसे ग़लत जानकारी मानकर मत छोड़िए — यह क्षेत्रीय एकीकरण की सीढ़ी का एक वास्तविक पड़ाव है, और परीक्षा में जब मुक्त व्यापार क्षेत्र तथा सीमा-शुल्क संघ का भेद पूछा जाता है, तब यही भेद उत्तर तय करता है।
अवधारणा
क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण की एक सीढ़ी है और उसके पड़ावों के नाम अलग-अलग हैं, इसलिए इस विषय के प्रश्न प्रायः नाम और विशेषता के मिलान पर टिकते हैं। सबसे नीचे अधिमान्य व्यापार व्यवस्था आती है, जिसमें सदस्य कुछ वस्तुओं पर एक-दूसरे को प्रशुल्क में रियायत देते हैं। उसके ऊपर मुक्त व्यापार क्षेत्र है, जिसमें सदस्य आपस के व्यापार पर प्रशुल्क तथा कोटा समाप्त कर देते हैं। उसके ऊपर सीमा-शुल्क संघ है, जिसमें आपसी व्यापार खुला रहता है और बाहरी दुनिया के लिए सब सदस्य एक ही सर्व-सामान्य बाह्य प्रशुल्क अपनाते हैं। उसके ऊपर साझा बाज़ार है, जिसमें वस्तुओं के साथ श्रम तथा पूँजी की आवाजाही भी खुल जाती है, और सबसे ऊपर आर्थिक संघ है, जिसमें मौद्रिक तथा राजकोषीय नीतियों का समन्वय भी होता है; यूरोपीय संघ इसका सबसे विकसित उदाहरण है और उसके अनेक सदस्य एक साझा मुद्रा भी चलाते हैं। इसी सीढ़ी से जुड़ी दो और धारणाएँ महत्त्वपूर्ण हैं : उद्भव-नियम, जो यह तय करते हैं कि कोई वस्तु किस देश की मानी जाएगी और जिनकी आवश्यकता तब पड़ती है जब सदस्यों के बाहरी प्रशुल्क अलग-अलग हों; तथा व्यापार-सृजन और व्यापार-विपथन, जो यह बताते हैं कि क्षेत्रीय व्यवस्था से व्यापार सचमुच बढ़ा या केवल सस्ते बाहरी स्रोत से हटकर महँगे भीतरी स्रोत की ओर चला गया।
यह पूर्ति-वाक्य वाली बनावट का प्रश्न है : स्टेम संयोजक 'तथा' पर बिना विराम-चिह्न के छूटता है और चारों विकल्प उसे पूरा करते हैं, इसलिए हर विकल्प अपना कर्ता दोहराता है। इस बनावट में स्टेम का पहला भाग — आपसी व्यापार पर सभी प्रतिबंधों की समाप्ति — चारों विकल्पों के लिए समान रहता है और निर्णय केवल दूसरे भाग पर होता है, अर्थात् इस पर कि बाहरी दुनिया के साथ क्या होता है। इसीलिए इस प्रश्न की तैयारी का सार यही है कि क्षेत्रीय एकीकरण की सीढ़ी के पड़ाव और उनकी पहचान अलग-अलग याद रहें, क्योंकि इसी विषय पर प्रश्न कई रूपों में लौटते हैं — कभी नाम देकर विशेषता पूछी जाती है, कभी विशेषता देकर नाम, और कभी उदाहरण देकर पड़ाव। हिन्दी स्तंभ में 'मुक्त व्यापार क्षेत्र' का अनुवाद किया गया है, जबकि अंग्रेज़ी स्तंभ में वह बड़े अक्षरों से आरंभ होने वाला नाम है; 'प्रशुल्क' अंग्रेज़ी के tariff का अनुवाद है और 'कोटा' लिप्यन्तरण में रखा गया है।
मुख्य तथ्य
- क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण की सीढ़ी इस क्रम में पढ़ाई जाती है — अधिमान्य व्यापार व्यवस्था, मुक्त व्यापार क्षेत्र, सीमा-शुल्क संघ, साझा बाज़ार, और आर्थिक संघ।
- सर्व-सामान्य बाह्य प्रशुल्क, अर्थात् बाहरी दुनिया के लिए सब सदस्यों का एक ही प्रशुल्क, मानक वर्गीकरण में सीमा-शुल्क संघ की पहचान माना जाता है।
- साझा बाज़ार में वस्तुओं के साथ श्रम तथा पूँजी की आवाजाही भी खुलती है, और आर्थिक संघ में मौद्रिक तथा राजकोषीय नीतियों का समन्वय भी होता है; यूरोपीय संघ इसका सबसे विकसित उदाहरण है।
- उद्भव-नियम यह तय करते हैं कि कोई वस्तु किस देश की मानी जाएगी; इनकी आवश्यकता उस व्यवस्था में पड़ती है जहाँ सदस्यों के बाहरी प्रशुल्क समान न हों।
- क्षेत्रीय व्यवस्थाओं के मूल्यांकन के दो मानक पद हैं — व्यापार-सृजन, अर्थात् नया व्यापार बनना, और व्यापार-विपथन, अर्थात् सस्ते बाहरी स्रोत से हटकर महँगे भीतरी स्रोत की ओर व्यापार का खिसकना।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- मुक्त व्यापार क्षेत्र और सीमा-शुल्क संघ की पहचान आपस में बदल देना; मानक वर्गीकरण में सर्व-सामान्य बाह्य प्रशुल्क दूसरे पड़ाव की विशेषता है।
- 'मुक्त व्यापार' का अर्थ सर्वत्र मुक्त व्यापार समझ लेना, जबकि रियायत केवल सदस्यों तक सीमित रहती है।
- यह मान लेना कि एक समूह की सदस्यता से दूसरे समूहों के साथ भी स्वतः रियायत बन जाती है; ऐसी रियायत अलग वार्ता से ही बनती है।
- पूर्ति-वाक्य वाली बनावट में स्टेम का पहला भाग दोबारा पढ़े बिना निर्णय कर देना, जबकि निर्णय केवल दूसरे भाग पर होता है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार के इस खंड से प्रश्न तीन रूपों में आते हैं। पहला, परिभाषा और पहचान का प्रश्न, जैसा यह है : किसी व्यवस्था का नाम देकर उसकी विशेषता पूछना, अथवा विशेषता देकर नाम। दूसरा, उदाहरण-आधारित प्रश्न — कोई संगठन किस पड़ाव का उदाहरण है, अथवा किस वर्ष बना; इसी परिवार के दूसरे प्रश्नपत्रों में संगठनों के गठन-वर्ष सुमेलन के रूप में पूछे गए हैं। तीसरा, प्रभाव का प्रश्न — किसी समझौते से व्यापार-सृजन होगा या व्यापार-विपथन, अथवा उससे किस क्षेत्र को लाभ होगा। तीनों की तैयारी के लिए एक सारणी सबसे उपयोगी है : बाईं ओर सीढ़ी के पाँच पड़ाव, बीच में प्रत्येक की एक-पंक्ति पहचान, और दाईं ओर एक उदाहरण। इस सारणी में सबसे अधिक ध्यान उस पंक्ति पर देना चाहिए जहाँ बाहरी प्रशुल्क की बात आती है, क्योंकि दो निकटवर्ती पड़ावों का भेद वहीं बनता है और परीक्षा प्रायः उसी बिंदु को उठाती है।
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- (a) 1, 2 and 3 only
- (b) 1, 2 and 4 only
- (c) 1, 2, 3 and 4
- (d) 3 and 4 only
उत्तर(c) 1, 2, 3 and 4
इसी प्रश्नपत्र का अगला प्रश्न, जो विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड के कार्यों पर है — बाहरी आर्थिक संबंधों का दूसरा पक्ष, जहाँ व्यापार के बजाय निवेश की व्यवस्था परखी जाती है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण की सीढ़ी में सर्व-सामान्य बाह्य प्रशुल्क अपनाने वाली व्यवस्था को क्या कहा जाता है ?
- (a)अधिमान्य व्यापार व्यवस्था
- (b)सीमा-शुल्क संघ
- (c)साझा बाज़ार
- (d)आर्थिक संघ
उत्तर(b) सीमा-शुल्क संघ — मानक वर्गीकरण में यही वह पड़ाव है जिसमें सदस्य आपसी व्यापार खोलने के साथ-साथ बाहरी दुनिया के लिए एक ही प्रशुल्क अपनाते हैं। साझा बाज़ार में उसके ऊपर श्रम तथा पूँजी की आवाजाही जुड़ती है, और आर्थिक संघ में नीतियों का समन्वय भी।
- practice — not a real PYQ
उद्भव-नियमों की आवश्यकता मुख्यतः किस कारण पड़ती है ?
- (a)क्योंकि सदस्य देशों की मुद्राएँ अलग-अलग होती हैं
- (b)क्योंकि सदस्य देशों के बाहरी प्रशुल्क अलग-अलग हो सकते हैं और यह तय करना पड़ता है कि वस्तु किस देश की है
- (c)क्योंकि सदस्य देशों की भाषाएँ अलग-अलग होती हैं
- (d)क्योंकि सदस्य देशों में कर-दरें समान होती हैं
उत्तर(b) क्योंकि सदस्य देशों के बाहरी प्रशुल्क अलग-अलग हो सकते हैं और यह तय करना पड़ता है कि वस्तु किस देश की है — अन्यथा कम प्रशुल्क वाले सदस्य के रास्ते माल भीतर आकर पूरे क्षेत्र में फैल सकता है। मुद्रा और भाषा का इससे कोई सीधा संबंध नहीं, और कर-दरों का समान होना उलटी स्थिति है।