उत्पादन के कारक की माँग को व्युत्पन्न माँग कहा जाता है, क्योंकि 1. यह किसी उद्यम की लाभप्रदता का फलन है 2. यह पूरक कारकों की पूर्ति पर निर्भर है 3. यह अंतिम उत्पाद की माँग से उत्पन्न होती है 4. यह आवश्यकताओं के सापेक्ष साधनों के दुर्लभ होने से उत्पन्न होती है उपर्युक्त कारणों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a)केवल 1
- (b)केवल 3
- (c)केवल 2 और 4
- (d)1, 2, 3 और 4
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) केवल 3 — उत्पादन के कारक की माँग को व्युत्पन्न माँग इसी कारण कहा जाता है कि वह अंतिम उत्पाद की माँग से उत्पन्न होती है। उपादान अपने आप में किसी की आवश्यकता नहीं होता : कोई उद्यमी श्रमिक, मशीन या कच्चा माल इसलिए नहीं ख़रीदता कि उसे वे वस्तुएँ चाहिए, बल्कि इसलिए कि उनसे बनने वाली वस्तु की माँग है। इसलिए उपादान की माँग उत्पाद की माँग से 'व्युत्पन्न' होती है, अर्थात् उससे निकलती है — यही पद का शाब्दिक और तकनीकी अर्थ है। इसका सीधा परिणाम यह होता है कि यदि किसी वस्तु की माँग गिरे तो उसे बनाने वाले श्रमिकों, कच्चे माल और मशीनों की माँग भी गिरती है, चाहे उन उपादानों में स्वयं कोई परिवर्तन न हुआ हो; और यदि किसी उद्योग का उत्पाद अचानक लोकप्रिय हो जाए तो उससे जुड़े उपादानों की माँग बढ़ जाती है। इसी विचार को औपचारिक रूप में सीमांत आगम-उत्पाद के रूप में लिखा जाता है, जिसमें उपादान की एक अतिरिक्त इकाई से होने वाली उत्पादन-वृद्धि को उत्पाद की क़ीमत से गुणा किया जाता है — अर्थात् उपादान का मूल्य उत्पाद के मूल्य से ही निकलता है। शेष तीनों कारण उपादान-माँग से किसी न किसी रूप में जुड़े हो सकते हैं, पर वे यह नहीं बताते कि उसे 'व्युत्पन्न' क्यों कहा जाता है, और प्रश्न ठीक यही पूछ रहा है। इसलिए केवल कारण 3 सही है और उत्तर (b) है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1 — उद्यम की लाभप्रदता उपादान की माँग को प्रभावित अवश्य करती है — लाभ में चल रहा उद्यम अधिक श्रमिक रख सकता है और हानि में चल रहा उद्यम छँटनी करता है — पर यह वह कारण नहीं है जिससे इस माँग को व्युत्पन्न कहा जाता है। 'व्युत्पन्न' शब्द माँग के स्रोत की बात करता है, उसकी मात्रा को प्रभावित करने वाले कारकों की नहीं। यहाँ भेद सूक्ष्म पर निर्णायक है : प्रश्न यह नहीं पूछ रहा कि उपादान की माँग किन बातों पर निर्भर करती है, बल्कि यह पूछ रहा है कि उसे व्युत्पन्न माँग क्यों कहा जाता है। ऐसे प्रश्नों में सबसे उपयोगी जाँच यह है कि पद का नाम स्वयं क्या संकेत देता है — यहाँ नाम में ही 'व्युत्पन्न' है, अर्थात् किसी और चीज़ से निकली हुई, और वह दूसरी चीज़ अंतिम उत्पाद की माँग है। लाभप्रदता उस निकलने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है।
- (c)केवल 2 और 4 — इस विकल्प के दोनों कारण अपने आप में सही बातें कहते हैं, पर दोनों प्रश्न की पूछ से बाहर हैं — और यही इसे भ्रामक बनाता है। कारण 2 कहता है कि उपादान की माँग पूरक कारकों की पूर्ति पर निर्भर है : यह सच है, क्योंकि श्रम की उत्पादकता मशीनों और कच्चे माल के साथ मिलकर बनती है, इसलिए पूरक कारकों की उपलब्धता माँग की मात्रा और उसकी लोच दोनों को प्रभावित करती है। पर यह भी माँग के स्रोत की बात नहीं, उसे प्रभावित करने वाली परिस्थिति की बात है। कारण 4 और भी दूर है : साधनों का आवश्यकताओं की तुलना में दुर्लभ होना अर्थशास्त्र की मूल समस्या की परिभाषा है, जिससे हर आर्थिक माँग जुड़ी है — केवल उपादान की माँग नहीं। यदि यही कारण व्युत्पन्न माँग का आधार होता, तो प्रत्येक माँग व्युत्पन्न कहलाती, और पद का कोई विशिष्ट अर्थ ही न बचता।
- (d)1, 2, 3 और 4 — यह विकल्प चारों कारणों को स्वीकार कर लेता है और इसी कारण पद की परिभाषा को धुँधला कर देता है। कथन-सूची वाले प्रश्नों में 'सभी सही' चुनने की प्रवृत्ति तब सबसे प्रबल होती है जब सभी कथन विषय से जुड़े दिखें — और यहाँ चारों कथन उपादान-माँग की चर्चा से जुड़े हैं ही। पर प्रश्न कारण पूछ रहा है, संबंध नहीं : 'क्योंकि' शब्द स्टेम में स्पष्ट रूप से छपा है, इसलिए वही कथन सही होगा जो नाम की व्याख्या करता हो। यहाँ यह भी ध्यान देने योग्य है कि परिभाषा-मूलक प्रश्न में एक ही कथन का सही होना असामान्य नहीं है, यद्यपि अभ्यर्थी को वह अटपटा लगता है और वह बड़ा विकल्प चुनने की ओर झुक जाता है। सुरक्षित विधि यह है कि प्रत्येक कथन के आगे यह लिखिए कि वह परिभाषा है, कारण है, परिणाम है या केवल संबंधित तथ्य — और फिर वही चुनिए जो पूछ के अनुरूप है।
अवधारणा
उपादान-बाज़ार को समझने की कुंजी यही है कि वहाँ माँग व्युत्पन्न होती है। वस्तु-बाज़ार में उपभोक्ता वस्तु इसलिए माँगता है कि वह उससे संतुष्टि पाता है; उपादान-बाज़ार में उद्यमी उपादान इसलिए माँगता है कि उससे बनने वाली वस्तु बिकती है। इसी से तीन परिणाम निकलते हैं, जो परीक्षा में बार-बार काम आते हैं। पहला, उपादान की माँग उत्पाद की माँग के साथ ऊपर-नीचे होती है, इसलिए किसी उद्योग की मंदी उसके श्रमिकों और आपूर्तिकर्ताओं तक पहुँचती है। दूसरा, उपादान की माँग का औपचारिक माप सीमांत आगम-उत्पाद है, अर्थात् उपादान की एक अतिरिक्त इकाई से होने वाली उत्पादन-वृद्धि को उत्पाद की क़ीमत से गुणा करने पर जो मिले; प्रतिस्पर्धी बाज़ार में उद्यमी उस बिंदु तक उपादान लगाता है जहाँ यह मान उपादान की क़ीमत के बराबर हो जाए। तीसरा, उपादान-माँग की लोच कई बातों पर निर्भर करती है — उत्पाद की माँग की लोच, कुल लागत में उस उपादान का हिस्सा, प्रतिस्थापन की संभावना, और पूरक उपादानों की उपलब्धता। इनमें अंतिम बात वही है जो इस प्रश्न के कारण 2 में आई है, और वह सही होते हुए भी 'व्युत्पन्न' नाम की व्याख्या नहीं है।
यह कारण पूछने वाला कथन-प्रश्न है और इसकी बनावट इस पुस्तिका की उस शैली में है जिसमें प्रश्न-वाक्य सूची के बाद आता है और 'नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर' वाली पंक्ति छपती ही नहीं। इस बनावट के बारह प्रश्न इस प्रश्नपत्र में हैं, इसलिए कूट-पंक्ति का न होना कोई चूक नहीं। पढ़ने की दृष्टि से इसका अर्थ यह है कि अंतिम पंक्ति — 'उपर्युक्त कारणों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?' — पहले पढ़ लेनी चाहिए, क्योंकि वही बताती है कि सूची को किस कसौटी पर परखना है। इस प्रश्न की असली कसौटी स्टेम का 'क्योंकि' है : पूछा गया है कि इस माँग को व्युत्पन्न क्यों कहा जाता है, न कि यह कि वह किन-किन बातों पर निर्भर करती है। इस भेद को पकड़ते ही तीन कारण अपने आप बाहर हो जाते हैं। हिन्दी स्तंभ में दो जगह तिर्यक रेखा से युग्म बने हैं — 'कौन-सा/से' और 'है/हैं' — जबकि अंग्रेज़ी में ऐसा एक ही स्थान पर है; किसी कथन के अंत में दण्ड नहीं छपा है।
मुख्य तथ्य
- उत्पादन के कारक की माँग को व्युत्पन्न माँग इसलिए कहा जाता है कि वह अंतिम उत्पाद की माँग से उत्पन्न होती है — उपादान स्वयं किसी की आवश्यकता नहीं होता।
- इसका सीधा परिणाम यह है कि किसी वस्तु की माँग गिरने पर उसे बनाने वाले श्रमिकों, कच्चे माल और मशीनों की माँग भी गिरती है, चाहे उन उपादानों में स्वयं कोई परिवर्तन न हुआ हो।
- उपादान-माँग का औपचारिक माप सीमांत आगम-उत्पाद है : उपादान की एक अतिरिक्त इकाई से होने वाली उत्पादन-वृद्धि को उत्पाद की क़ीमत से गुणा करने पर जो मिले।
- उपादान-माँग की लोच उत्पाद की माँग की लोच, कुल लागत में उस उपादान के हिस्से, प्रतिस्थापन की संभावना और पूरक उपादानों की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
- साधनों का आवश्यकताओं की तुलना में दुर्लभ होना अर्थशास्त्र की मूल समस्या है और वह हर माँग पर लागू होता है, इसलिए वह व्युत्पन्न माँग का विशिष्ट कारण नहीं हो सकता।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- स्टेम के 'क्योंकि' को अनदेखा कर देना और उन कथनों को चुन लेना जो माँग को प्रभावित करने वाले कारक बताते हैं, कारण नहीं।
- 'सभी सही' वाला विकल्प चुनना, जो तब सबसे आकर्षक लगता है जब सभी कथन विषय से जुड़े दिखें।
- दुर्लभता की सामान्य समस्या को किसी विशिष्ट पद का कारण मान लेना; उससे तो हर माँग जुड़ी है।
- यह मान लेना कि परिभाषा-मूलक प्रश्न में केवल एक कथन सही नहीं हो सकता; ऐसा होना सामान्य है।
व्यष्टि अर्थशास्त्र के इस भाग से प्रश्न तीन रूपों में आते हैं। पहला, पद की व्याख्या — किसी धारणा को उस नाम से क्यों पुकारा जाता है, जैसा यह प्रश्न है; यहाँ चारे वे कथन होते हैं जो उस धारणा से संबंधित तो हैं पर उसका कारण नहीं बताते। दूसरा, अनुप्रयोग — किसी वस्तु की माँग बढ़ने पर उससे जुड़े उपादानों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, अथवा किसी उपादान की क़ीमत बढ़ने पर उत्पादक क्या करेगा। तीसरा, सिद्धांत का सीधा प्रश्न — सीमांत उत्पादकता का सिद्धांत क्या कहता है, अथवा उपादान की माँग-वक्र किस आधार पर बनती है। तीनों में एक ही अनुशासन काम आता है : पहले यह तय कीजिए कि प्रश्न परिभाषा पूछ रहा है, कारण पूछ रहा है या परिणाम, और फिर हर कथन को उसी कसौटी पर तौलिए। यह अनुशासन इस प्रश्नपत्र के अनेक कथन-प्रश्नों में सीधे अंक बचाता है।
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EPFO_APFC_2016_Q47खोलें व हल करें →Which of the following statements best describes the content of the theory of distribution ?
- (a) The distribution of income among different individuals in the economy
- (b) The distribution of income between the Centre and the State Governments
- (c) The principle of just distribution of wealth and income
- (d) The distribution of income between the owners of factor resources
उत्तर(d) The distribution of income between the owners of factor resources
इसी प्रश्नपत्र का पिछला प्रश्न, जिसमें वितरण के सिद्धांत की अंतर्वस्तु पूछी गई है — उपादान-बाज़ार का वही ढाँचा, जिसकी माँग-पक्ष वाली धारणा यह प्रश्न परखता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सा व्युत्पन्न माँग का उदाहरण है ?
- (a)किसी परिवार द्वारा भोजन की माँग
- (b)किसी निर्माण कंपनी द्वारा राजमिस्त्रियों की माँग
- (c)किसी व्यक्ति द्वारा मनोरंजन की माँग
- (d)किसी विद्यार्थी द्वारा पुस्तक पढ़ने की इच्छा
उत्तर(b) किसी निर्माण कंपनी द्वारा राजमिस्त्रियों की माँग — यह माँग मकानों की माँग से निकलती है, इसलिए वह व्युत्पन्न है। शेष तीनों उदाहरण प्रत्यक्ष माँग के हैं, जिनमें वस्तु या सेवा स्वयं संतुष्टि देती है।
- practice — not a real PYQ
किसी उपादान की माँग की लोच निम्नलिखित में से किस बात पर निर्भर नहीं करती ?
- (a)उत्पाद की माँग की लोच
- (b)कुल लागत में उस उपादान का हिस्सा
- (c)उपादान के स्थान पर किसी अन्य उपादान के प्रतिस्थापन की संभावना
- (d)उत्पादक के निवास-स्थान की दूरी
उत्तर(d) उत्पादक के निवास-स्थान की दूरी — इसका उपादान-माँग की लोच से कोई सैद्धांतिक संबंध नहीं है। शेष तीनों बातें उपादान-माँग की लोच को तय करने वाले मानक कारक हैं।