निम्नलिखित मदों पर विचार कीजिए : 1. उपभोक्ता वस्तुएँ तथा सेवाएँ 2. सकल निजी (प्राइवेट) घरेलू निवेश 3. सरकार द्वारा उत्पादित वस्तुएँ तथा सेवाएँ 4. विदेशों से निवल आय उपर्युक्त मदों में से किन्हें GNP में शामिल किया गया है ?
- (a)केवल 1, 2 और 3
- (b)केवल 1, 2 और 4
- (c)केवल 3 और 4
- (d)1, 2, 3 और 4
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) 1, 2, 3 और 4 — चारों मदें सकल राष्ट्रीय उत्पाद में सम्मिलित होती हैं। व्यय-विधि से राष्ट्रीय आय का लेखा इस प्रकार बनता है : परिवारों का उपभोग-व्यय, अर्थात् उपभोक्ता वस्तुएँ तथा सेवाएँ; निजी क्षेत्र का सकल घरेलू निवेश, जिसमें मशीनें, भवन और स्टॉक में हुई वृद्धि आती है; सरकार का व्यय, अर्थात् सरकार द्वारा उत्पादित वस्तुएँ तथा सेवाएँ, जिन्हें बाज़ार में न बिकने के कारण उनकी लागत पर आँका जाता है; और निवल निर्यात। इन सबका योग सकल घरेलू उत्पाद देता है। इसमें विदेशों से प्राप्त निवल साधन-आय जोड़ने पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद बनता है — यही मद 4 है। दूसरे शब्दों में, सकल राष्ट्रीय उत्पाद = सकल घरेलू उत्पाद + विदेशों से निवल साधन-आय, और इसीलिए मद 4 इस प्रश्न में निर्णायक है : यदि उसे छोड़ दिया जाए तो जो बचेगा वह घरेलू उत्पाद होगा, राष्ट्रीय उत्पाद नहीं। इस निवल साधन-आय का अर्थ है विदेशों में रहने वाले हमारे नागरिकों तथा हमारी पूँजी से अर्जित आय में से वह आय घटाकर जो विदेशी नागरिकों और विदेशी पूँजी ने हमारे देश में अर्जित की। चूँकि चारों मदें इस लेखे में स्थान पाती हैं, उत्तर (d) है। यह भी ध्यान रखिए कि 'सकल' शब्द का अर्थ है मूल्यह्रास घटाने से पहले का मान; मूल्यह्रास घटाने पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद मिलता है, और उसे साधन-लागत पर लाने पर राष्ट्रीय आय।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1, 2 और 3 — यह इस प्रश्न का सबसे सुगठित चारा है, क्योंकि ये तीन मदें मिलकर एक वास्तविक और परिचित राशि बनाती हैं — निवल निर्यात जोड़ने पर वे सकल घरेलू उत्पाद देती हैं। भूल केवल इतनी है कि प्रश्न घरेलू उत्पाद नहीं, राष्ट्रीय उत्पाद पूछ रहा है, और इन दोनों के बीच का पूरा अंतर ही विदेशों से प्राप्त निवल साधन-आय है। यही वह मद है जिसे यह विकल्प छोड़ देता है। यह भेद केवल परिभाषा का नहीं, अर्थ का भी है : घरेलू उत्पाद यह बताता है कि देश की भौगोलिक सीमा के भीतर कितना उत्पादन हुआ, चाहे उत्पादन करने वाले साधन किसी के भी हों; राष्ट्रीय उत्पाद यह बताता है कि देश के निवासियों के साधनों ने कितनी आय अर्जित की, चाहे वे साधन कहीं भी लगे हों। जिन देशों से बड़ी संख्या में लोग बाहर काम करते हैं, वहाँ यह अंतर महत्त्वपूर्ण हो जाता है।
- (b)केवल 1, 2 और 4 — यह विकल्प सरकार द्वारा उत्पादित वस्तुओं तथा सेवाओं को छोड़ देता है, जो राष्ट्रीय आय के लेखे का एक स्वतंत्र और अनिवार्य अंग है। इसके पीछे प्रायः यह भ्रम रहता है कि सरकार जो सेवाएँ देती है — प्रशासन, रक्षा, पुलिस, सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य — वे बाज़ार में बिकती नहीं, इसलिए उनका मूल्य कैसे जोड़ा जाए। लेखा-पद्धति का उत्तर यह है कि ऐसी सेवाओं को उनकी लागत पर आँका जाता है, जिसमें मुख्यतः वेतन तथा उपयोग की गई सामग्री आती है, और वही मूल्य उत्पाद में जोड़ा जाता है। इसे सरकार के उन भुगतानों से अलग रखना चाहिए जो किसी उत्पादन के बदले नहीं होते — जैसे पेंशन के अतिरिक्त दी जाने वाली सहायता या छात्रवृत्ति — क्योंकि ऐसे हस्तांतरण-भुगतान राष्ट्रीय आय में नहीं जोड़े जाते। यह भेद परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।
- (c)केवल 3 और 4 — यह विकल्प उपभोग और निवेश दोनों को छोड़ देता है, अर्थात् राष्ट्रीय आय के दो सबसे बड़े घटकों को — और इसी कारण यह चारों में सबसे दूर है। किसी भी अर्थव्यवस्था में परिवारों का उपभोग-व्यय सामान्यतः कुल व्यय का सबसे बड़ा भाग होता है, और सकल घरेलू निवेश दूसरा बड़ा भाग, क्योंकि वही भविष्य की उत्पादन-क्षमता बनाता है। इन्हें छोड़कर केवल सरकारी उत्पादन और विदेशों से निवल आय को गिनना लेखे की मूल संरचना को ही समाप्त कर देता है। संभवतः यह विकल्प उस अभ्यर्थी के लिए है जो 'राष्ट्रीय' शब्द को केवल सरकार और विदेश से जोड़कर देखता है और यह भूल जाता है कि राष्ट्रीय आय में निजी क्षेत्र की गतिविधि ही सबसे बड़ा योगदान करती है। ऐसे प्रश्नों में सबसे पहले यह पूछिए कि लेखे के चार बड़े घटक कौन-से हैं, और फिर देखिए कि विकल्प उनमें से कितने छोड़ रहा है।
अवधारणा
राष्ट्रीय आय के लेखे में चार बड़े समुच्चय याद रखने चाहिए और उनके बीच का संबंध सरल है। सकल घरेलू उत्पाद देश की भौगोलिक सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं का मूल्य है; व्यय-विधि से वह उपभोग, निवेश, सरकारी व्यय और निवल निर्यात का योग है। इसमें विदेशों से प्राप्त निवल साधन-आय जोड़ने पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद बनता है, अर्थात् वह आय जो देश के निवासियों के साधनों ने अर्जित की, चाहे वे साधन कहीं भी लगे हों। सकल राष्ट्रीय उत्पाद में से मूल्यह्रास घटाने पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद मिलता है, और उसे साधन-लागत पर व्यक्त करने पर राष्ट्रीय आय। लेखा बनाते समय तीन नियम विशेष रूप से ध्यान देने योग्य हैं : केवल अंतिम वस्तुएँ गिनी जाती हैं, ताकि दोहरी गणना न हो; हस्तांतरण-भुगतान नहीं गिने जाते, क्योंकि उनके बदले कोई उत्पादन नहीं होता; और सरकार द्वारा दी जाने वाली उन सेवाओं का मूल्य लागत पर आँका जाता है जो बाज़ार में नहीं बिकतीं। इन नियमों के कारण ही राष्ट्रीय आय के आँकड़े तुलना-योग्य बनते हैं, और इन्हीं पर परीक्षा के अधिकांश प्रश्न टिकते हैं।
यह मदों की सूची वाला प्रश्न है, पर इसकी बनावट इस पुस्तिका के अधिकांश कथन-प्रश्नों से भिन्न है : यहाँ पहले चार मदें छपी हैं और उसके बाद प्रश्न-वाक्य आता है, तथा 'नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर' वाली पंक्ति है ही नहीं। यह इस पुस्तिका की एक नियमित बनावट है — बारह प्रश्न इसी ढंग से छपे हैं — इसलिए कूट-पंक्ति का न होना कोई चूक नहीं, बल्कि प्रश्न का अपना रूप है। पढ़ते समय इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि सूची पढ़ने से पहले यह जान लेना संभव नहीं होता कि पूछा क्या जाएगा, इसलिए ऐसे प्रश्नों में पहले अंतिम पंक्ति पढ़ लेना और फिर सूची पर लौटना अधिक कारगर रहता है। विषय की दृष्टि से यह प्रश्न लेखा-पद्धति की समझ परखता है, न कि किसी आँकड़े की स्मृति। हिन्दी स्तंभ में संक्षेप GNP रोमन लिपि में ही छपा है और मद 2 में 'निजी' के बाद कोष्ठक में लिप्यन्तरण (प्राइवेट) जोड़ा गया है, जो अंग्रेज़ी स्तंभ में नहीं है।
मुख्य तथ्य
- व्यय-विधि से सकल घरेलू उत्पाद = उपभोग-व्यय + सकल घरेलू निवेश + सरकारी व्यय + निवल निर्यात; इसमें विदेशों से निवल साधन-आय जोड़ने पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद बनता है।
- विदेशों से निवल साधन-आय का अर्थ है देश के निवासियों तथा उनकी पूँजी द्वारा विदेश में अर्जित आय में से वह आय घटाना जो विदेशी नागरिकों तथा विदेशी पूँजी ने देश के भीतर अर्जित की।
- सरकार द्वारा उत्पादित वे सेवाएँ जो बाज़ार में नहीं बिकतीं — प्रशासन, रक्षा, सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य — उनकी लागत पर आँकी जाती हैं और उत्पाद में जोड़ी जाती हैं।
- हस्तांतरण-भुगतान राष्ट्रीय आय में नहीं जोड़े जाते, क्योंकि उनके बदले कोई उत्पादन नहीं होता; इसी प्रकार केवल अंतिम वस्तुएँ गिनी जाती हैं, ताकि दोहरी गणना न हो।
- 'सकल' का अर्थ है मूल्यह्रास घटाने से पहले का मान; मूल्यह्रास घटाने पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद मिलता है और उसे साधन-लागत पर व्यक्त करने पर राष्ट्रीय आय।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- विदेशों से निवल साधन-आय वाली मद को छोड़ देना, जिससे उत्तर घरेलू उत्पाद का बन जाता है, राष्ट्रीय उत्पाद का नहीं।
- सरकार द्वारा उत्पादित सेवाओं को इसलिए छोड़ देना कि वे बाज़ार में नहीं बिकतीं, जबकि उन्हें लागत पर आँका जाता है।
- हस्तांतरण-भुगतान को सरकारी उत्पादन मान लेना; उनके बदले कोई उत्पादन नहीं होता, इसलिए वे लेखे से बाहर रहते हैं।
- सूची पहले पढ़कर अनुमान लगा लेना; इस बनावट में प्रश्न-वाक्य सूची के बाद आता है, इसलिए पहले अंतिम पंक्ति पढ़नी चाहिए।
राष्ट्रीय आय के लेखे से प्रश्न तीन रूपों में आते हैं। पहला, सम्मिलित या बाहर की मदों का प्रश्न, जैसा यह है : कुछ मदें गिनाकर पूछना कि उनमें से कौन-सी किसी समुच्चय में आती हैं; यहाँ चारा प्रायः वह मद होती है जो दो समुच्चयों के बीच का अंतर बनाती है, जैसे विदेशों से निवल साधन-आय। दूसरा, परिभाषा और संबंध का प्रश्न — किस समुच्चय में से क्या घटाने पर कौन-सा समुच्चय बनता है, अथवा बाज़ार क़ीमत और साधन लागत में क्या अंतर है। तीसरा, संख्यात्मक प्रश्न, जिसमें कुछ आँकड़े देकर कोई एक समुच्चय निकलवाया जाता है; वहाँ भी वही परिभाषाएँ काम आती हैं। तीनों के लिए तैयारी की इकाई एक ही है : एक छोटा चित्र, जिसमें व्यय-विधि के चार घटक लिखे हों और उसके नीचे तीर बनाकर दिखाया गया हो कि निवल साधन-आय जोड़ने पर क्या बनता है और मूल्यह्रास घटाने पर क्या। यह चित्र याद रहने पर इस खंड के प्रश्न कुछ सेकंड में निकल आते हैं।
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अभ्यास
- practice — not a real PYQ
सकल घरेलू उत्पाद और सकल राष्ट्रीय उत्पाद के बीच का अंतर निम्नलिखित में से क्या है ?
- (a)मूल्यह्रास
- (b)विदेशों से प्राप्त निवल साधन-आय
- (c)अप्रत्यक्ष कर घटाकर आर्थिक सहायता
- (d)निवल निर्यात
उत्तर(b) विदेशों से प्राप्त निवल साधन-आय — इसी को जोड़ने पर घरेलू उत्पाद राष्ट्रीय उत्पाद बन जाता है। मूल्यह्रास घटाने पर सकल से निवल बनता है, और अप्रत्यक्ष कर तथा आर्थिक सहायता का समायोजन बाज़ार क़ीमत को साधन लागत में बदलता है।
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सा राष्ट्रीय आय के लेखे में सम्मिलित नहीं किया जाता ?
- (a)सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रशासनिक सेवाएँ
- (b)परिवारों का उपभोग-व्यय
- (c)हस्तांतरण-भुगतान
- (d)सकल घरेलू निवेश
उत्तर(c) हस्तांतरण-भुगतान — इनके बदले कोई उत्पादन नहीं होता, इसलिए इन्हें राष्ट्रीय आय में नहीं जोड़ा जाता। सरकार की प्रशासनिक सेवाएँ लागत पर आँककर जोड़ी जाती हैं, और शेष दोनों मदें व्यय-विधि के मुख्य घटक हैं।