भविष्य निधि योजना की हानियाँ क्या हैं ? 1. कामकाजी जीवन के प्रारम्भ में घटित होने वाले जोखिमों के लिए धन अपर्याप्त होता है । 2. मुद्रास्फीति, बचत के वास्तविक मूल्य का क्षय कर देती है । 3. इससे अनिवार्य बचत होती है जिसका प्रयोग राष्ट्रीय विकास योजनाओं के वित्तीयन के लिए किया जा सकता है । नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1 और 2
- (b)केवल 1 और 3
- (c)केवल 2 और 3
- (d)1, 2 और 3
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) केवल 1 और 2 — पहले दो कथन भविष्य निधि योजना की वास्तविक कमियाँ हैं, जबकि तीसरा कथन उसकी कमी नहीं बल्कि उसका एक गुण है, और यही इस प्रश्न का पूरा निर्णय है। कथन 1 सही है : भविष्य निधि अंशदान-संचय की योजना है, जिसमें कर्मचारी और नियोजक के अंशदान वर्ष-दर-वर्ष जमा होकर एक राशि बनाते हैं; इसलिए यदि जोखिम कामकाजी जीवन के आरंभ में ही घटित हो जाए — मृत्यु, स्थायी अशक्तता अथवा सेवा का असमय अंत — तो उस समय तक जमा राशि बहुत कम होती है और वह परिवार के लिए अपर्याप्त रहती है। यही भविष्य निधि प्रणाली की सबसे बड़ी संरचनात्मक कमी मानी जाती है, क्योंकि उसमें जोखिम का सामूहिक बँटवारा नहीं होता; प्रत्येक सदस्य को वही मिलता है जो उसने जमा किया, ब्याज सहित। कथन 2 भी सही है : संचित राशि का वास्तविक मूल्य मुद्रास्फीति से घटता है, विशेषकर जब भुगतान एकमुश्त हो और उसके बाद उसका कोई सूचकांक-आधारित पुनरीक्षण न होता हो; पेंशन के रूप में मिलने वाला आवधिक भुगतान इस दृष्टि से अधिक सुरक्षित माना जाता है, विशेषकर यदि उसमें महँगाई के अनुसार वृद्धि की व्यवस्था हो। कथन 3 कहता है कि इससे अनिवार्य बचत होती है जिसका उपयोग राष्ट्रीय विकास योजनाओं के वित्तीयन में किया जा सकता है — यह भविष्य निधि प्रणाली के पक्ष में गिनाया जाने वाला तर्क है, कमी नहीं, इसलिए वह इस सूची से बाहर है। इस प्रकार सही कथन 1 और 2 हैं और उत्तर (a) है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)केवल 1 और 3 — यह विकल्प एक सही कमी के साथ उस कथन को जोड़ देता है जो वस्तुतः इस प्रणाली का गुण है। अनिवार्य बचत का तर्क अर्थव्यवस्था की दृष्टि से रखा जाता है : भविष्य निधि में जमा होने वाली राशि दीर्घकालिक बचत का बड़ा भंडार बनाती है, जो सरकारी प्रतिभूतियों तथा अन्य अनुमोदित माध्यमों में निवेशित होकर पूँजी-निर्माण में योगदान देती है। यह इस प्रणाली के पक्ष में गिनाया जाने वाला कारण है, विरुद्ध नहीं। यहाँ एक सूक्ष्म बात अवश्य है, जिसे ईमानदारी से कहना चाहिए : यही व्यवस्था सदस्य के दृष्टिकोण से आलोचना का विषय भी बन सकती है, यदि प्रतिफल कम रहे। पर कथन जिस रूप में लिखा गया है वह लाभ की भाषा में है — 'प्रयोग किया जा सकता है' — इसलिए उसे हानि की सूची में रखना कथन के अपने शब्दों के विरुद्ध होगा। कथन को उसकी अपनी भाषा में पढ़िए, अपनी व्याख्या जोड़कर नहीं।
- (c)केवल 2 और 3 — यह विकल्प उस कमी को छोड़ देता है जो इस प्रणाली की सबसे बुनियादी है — कामकाजी जीवन के आरंभ में घटित होने वाले जोखिमों के लिए राशि का अपर्याप्त होना — और उसके स्थान पर एक गुण उठा लेता है। कथन 1 को छोड़ना इसलिए भी भारी भूल है कि भारत में सामाजिक सुरक्षा का ढाँचा ठीक इसी कमी को पूरा करने के लिए आगे बढ़ा : भविष्य निधि के साथ बाद में निक्षेप-सहबद्ध बीमा की योजना जोड़ी गई, ताकि सेवा के दौरान सदस्य की मृत्यु पर परिवार को एकमुश्त बीमा-राशि मिले, और फिर पेंशन योजना जोड़ी गई, ताकि सेवानिवृत्ति, अशक्तता अथवा मृत्यु की स्थिति में आवधिक भुगतान मिलता रहे। ये दोनों जोड़ ही इस बात का प्रमाण हैं कि अकेली भविष्य निधि आरंभिक जोखिमों के लिए अपर्याप्त मानी गई। इसलिए कथन 1 न केवल सही है, बल्कि इस पूरे विषय की कुंजी है।
- (d)1, 2 और 3 — यह विकल्प तीनों कथनों को हानि मान लेता है और इसी कारण कथन 3 पर टूट जाता है। यहाँ एक सामान्य परीक्षा-आदत भी काम करती है : कथन-सूची वाले प्रश्नों में 'सभी सही' वाला विकल्प सुरक्षित लगता है, विशेषकर तब जब तीनों कथन विषय से जुड़े हों। पर इस प्रश्न में तीनों कथनों की दिशा एक नहीं है — दो कथन कमी बताते हैं और एक लाभ, और स्टेम स्पष्ट रूप से 'हानियाँ' पूछ रहा है। इसलिए यहाँ पहला काम कथनों की सत्यता जाँचना नहीं, उनकी दिशा जाँचना है : कौन-सा कथन इस प्रणाली के पक्ष में है और कौन-सा विरुद्ध। यह अंतर पहचान लेने पर उत्तर एक ही चरण में निकल आता है। यही अनुशासन उन सभी प्रश्नों में काम आता है जिनमें गुण, दोष, उद्देश्य अथवा परिणाम पूछे जाते हैं, क्योंकि वहाँ चारा प्रायः एक सही कथन ही होता है, जो पूछी गई दिशा से उलटा होता है।
अवधारणा
भविष्य निधि और पेंशन दो अलग प्रकार की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाएँ हैं और उनका भेद इस प्रश्न की जड़ है। भविष्य निधि अंशदान-संचय की योजना है : कर्मचारी और नियोजक दोनों नियमित अंशदान करते हैं, राशि सदस्य के खाते में जमा होती है, उस पर ब्याज मिलता है, और सेवानिवृत्ति या निकासी के समय एकमुश्त भुगतान होता है। इसमें प्रत्येक सदस्य को उतना ही मिलता है जितना उसके खाते में है, इसलिए जोखिम का सामूहिक बँटवारा नहीं होता — और यही उसकी दो बड़ी कमियों का कारण है : आरंभिक जोखिमों के लिए राशि अपर्याप्त रहती है, और एकमुश्त राशि का वास्तविक मूल्य मुद्रास्फीति से घटता है। पेंशन-प्रकार की व्यवस्था में लाभ पहले से परिभाषित होता है और आवधिक भुगतान मिलता है, जिससे दीर्घायु का जोखिम और कुछ सीमा तक मुद्रास्फीति का जोखिम भी सामूहिक हो जाता है। भारत में यही विकास-क्रम दिखता है : पहले भविष्य निधि की योजना बनी, फिर सेवा के दौरान मृत्यु पर परिवार को एकमुश्त सहायता देने के लिए निक्षेप-सहबद्ध बीमा की योजना जोड़ी गई, और फिर आवधिक पेंशन देने के लिए पेंशन योजना, जिसने पहले की पारिवारिक पेंशन की व्यवस्था का स्थान लिया। इस प्रकार आज एक ही अधिनियम के अधीन तीन योजनाएँ चलती हैं, और तीनों मिलकर वे कमियाँ पूरी करती हैं जो अकेली भविष्य निधि में रह जाती हैं।
यह अवधारणात्मक कथन-प्रश्न है और इसकी बनावट में सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि स्टेम एक दिशा माँगता है — 'हानियाँ'। ऐसे प्रश्न में तीन कथनों को केवल सही या ग़लत ठहराना पर्याप्त नहीं होता; यह भी देखना पड़ता है कि कथन पूछी गई दिशा में है या उससे उलटी दिशा में। यहाँ तीनों कथन अपने आप में सही बातें कहते हैं, पर उनमें से एक इस प्रणाली के पक्ष में है, इसलिए वह उत्तर से बाहर हो जाता है। इस बनावट को पहचान लेना इस प्रश्नपत्र के अनेक प्रश्नों में काम आता है, क्योंकि इसमें गुण-दोष, उद्देश्य और भूमिका पूछने वाले प्रश्न बार-बार आते हैं। यह भी ध्यान रखिए कि यह विषय इस परीक्षा के लिए केवल सामान्य ज्ञान नहीं है : भविष्य निधि संगठन का काम ही इन्हीं योजनाओं का संचालन है, इसलिए यहाँ की अवधारणाएँ आगे के चरणों में भी उपयोगी रहती हैं। हिन्दी स्तंभ में तीनों कथन दण्ड पर समाप्त होते हैं और दण्ड से पहले एक जगह छपी है; अंग्रेज़ी के financing के लिए 'वित्तीयन' शब्द प्रयुक्त हुआ है।
मुख्य तथ्य
- भविष्य निधि अंशदान-संचय की योजना है, जिसमें सदस्य को उतना ही मिलता है जितना उसके खाते में जमा है, इसलिए उसमें जोखिम का सामूहिक बँटवारा नहीं होता।
- इसकी पहली बड़ी कमी यह है कि कामकाजी जीवन के आरंभ में घटित होने वाले जोखिमों — मृत्यु, स्थायी अशक्तता या सेवा के असमय अंत — के लिए संचित राशि अपर्याप्त रहती है।
- दूसरी बड़ी कमी यह है कि एकमुश्त संचित राशि का वास्तविक मूल्य मुद्रास्फीति से घटता है, जबकि आवधिक पेंशन में महँगाई के अनुसार वृद्धि की व्यवस्था संभव होती है।
- अनिवार्य बचत उत्पन्न करना और उसका उपयोग विकास के वित्तीयन में होना इस प्रणाली के पक्ष में गिनाया जाने वाला तर्क है, इसलिए वह हानियों की सूची में नहीं आता।
- भारत में इसी कमी को पूरा करने के लिए भविष्य निधि के साथ निक्षेप-सहबद्ध बीमा की योजना और बाद में पेंशन योजना जोड़ी गई, जिससे एक ही अधिनियम के अधीन तीन योजनाएँ चलती हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- स्टेम की दिशा भूल जाना; यहाँ हानियाँ पूछी गई हैं और चारा एक सही कथन है जो वस्तुतः लाभ बताता है।
- 'सभी सही' वाला विकल्प चुन लेना, जो कथन-सूची में सुरक्षित लगता है पर यहाँ दिशा के कारण टूट जाता है।
- कथन में अपनी व्याख्या जोड़ देना; कथन 3 लाभ की भाषा में लिखा है, इसलिए उसे हानि मानना उसके अपने शब्दों के विरुद्ध है।
- भविष्य निधि और पेंशन को एक मान लेना, जबकि पहली संचय की योजना है और दूसरी आवधिक भुगतान की।
सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रश्न इस परीक्षा में दो स्तरों पर आते हैं और यह प्रश्न पहले स्तर का है। पहला स्तर अवधारणा का है : किसी व्यवस्था के गुण-दोष, दो व्यवस्थाओं का भेद, अथवा किसी सिद्धांत की परिभाषा; ऐसे प्रश्न में सबसे अधिक चूक स्टेम की दिशा पढ़ने में होती है, क्योंकि चारा प्रायः एक सही कथन होता है जो उलटी दिशा का है। दूसरा स्तर सांविधिक विवरण का है : किस अधिनियम की कौन-सी धारा, अंशदान की दर, पात्रता की शर्त, लाभ की मात्रा; इसी प्रश्नपत्र में प्रसूति प्रसुविधा तथा बीमा योजनाओं पर ऐसे ही प्रश्न हैं। दोनों स्तरों की तैयारी अलग होती है, पर एक सूत्र दोनों में काम आता है : प्रत्येक योजना के साथ यह लिखिए कि वह किस जोखिम से रक्षा करती है, लाभ किस रूप में देती है — एकमुश्त या आवधिक — और अंशदान कौन करता है। यही तीन पंक्तियाँ अवधारणात्मक और सांविधिक दोनों प्रकार के प्रश्नों का आधार बन जाती हैं।
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- (a) 1, 2 and 3 only
- (b) 1, 2 and 4 only
- (c) 3 and 4 only
- (d) 1, 2, 3 and 4
उत्तर(d) 1, 2, 3 and 4
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- (b)भविष्य निधि में केवल नियोजक अंशदान करता है, पेंशन में केवल कर्मचारी
- (c)भविष्य निधि केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए होती है
- (d)पेंशन में कोई अंशदान नहीं होता
उत्तर(a) भविष्य निधि में लाभ एकमुश्त मिलता है, जबकि पेंशन में आवधिक भुगतान मिलता है — और इसी कारण पेंशन दीर्घायु तथा मुद्रास्फीति के जोखिम से बेहतर रक्षा देती है। शेष तीनों कथन अंशदान और दायरे के बारे में ग़लत विवरण देते हैं।
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