जब सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सरकारी स्वामित्व कम किया जाता है, तो इसे क्या कहते हैं ?
- (a)निजीकरण
- (b)सार्वजनिक-निजी भागीदारी
- (c)विनिवेश
- (d)अवस्फीति
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) विनिवेश — जब सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के किसी उपक्रम में अपनी हिस्सेदारी का कुछ भाग बेचकर स्वामित्व कम करती है, तब उसे विनिवेश कहा जाता है। यहाँ निर्णायक शब्द 'कम किया जाता है' है : स्वामित्व घटता है, समाप्त नहीं होता, और उपक्रम का प्रबंधन-नियंत्रण सामान्यतः सरकार के पास ही रहता है। विनिवेश के उद्देश्य कई हो सकते हैं — राजकोषीय संसाधन जुटाना, उपक्रम के शेयरों को बाज़ार में लाकर उसके कामकाज पर बाज़ार की निगरानी बढ़ाना, तथा जनता और संस्थागत निवेशकों को स्वामित्व में भागीदारी देना। इसके अनेक तरीक़े हैं : शेयरों की सार्वजनिक बिक्री, संस्थागत निवेशकों को अल्पांश हिस्सेदारी बेचना, और विनिमय-व्यापारित निधियों के माध्यम से कई उपक्रमों के शेयर एक साथ बेचना। इससे आगे की अवस्था सामरिक विनिवेश कहलाती है, जिसमें बड़ी हिस्सेदारी के साथ प्रबंधन-नियंत्रण भी हस्तांतरित होता है — और वही व्यवहार में निजीकरण बन जाता है। भारत में विनिवेश से जुड़े कार्य वित्त मंत्रालय के अधीन निवेश तथा लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग देखता है, और प्रत्येक वर्ष के बजट में विनिवेश से प्राप्त होने वाली राशि का लक्ष्य रखा जाता है। इस प्रकार प्रश्न में दी गई परिभाषा — सार्वजनिक उपक्रमों में सरकारी स्वामित्व का कम होना — ठीक विनिवेश की परिभाषा है, इसलिए उत्तर (c) है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)निजीकरण — यह इस प्रश्न का सबसे निकट का चारा है, क्योंकि दोनों प्रक्रियाएँ एक ही दिशा में चलती हैं — सरकारी स्वामित्व घटता है। भेद मात्रा और नियंत्रण का है। विनिवेश में सरकार अपनी हिस्सेदारी का कुछ भाग बेचती है और प्रबंधन-नियंत्रण सामान्यतः अपने पास रखती है; निजीकरण में स्वामित्व के साथ प्रबंधन-नियंत्रण भी निजी हाथों में चला जाता है, अर्थात् उपक्रम की दिशा तय करने का अधिकार बदल जाता है। इसी कारण सामरिक विनिवेश को व्यवहार में निजीकरण माना जाता है, जबकि शेयरों की सामान्य बिक्री को नहीं। प्रश्न की भाषा भी यही संकेत देती है : वहाँ कहा गया है कि स्वामित्व 'कम किया जाता है', न कि हस्तांतरित किया जाता है या समाप्त कर दिया जाता है। जहाँ दो पद एक ही दिशा के हों, वहाँ स्टेम की क्रिया पढ़ना ही निर्णायक होता है — यही इस प्रश्न की मुख्य सीख है।
- (b)सार्वजनिक-निजी भागीदारी — सार्वजनिक-निजी भागीदारी में सरकार किसी विद्यमान उपक्रम में अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचती; वह किसी परियोजना या सेवा के लिए निजी पक्ष के साथ अनुबंध करती है, जिसमें निवेश, निर्माण, संचालन और जोखिम का बँटवारा पहले से तय होता है और एक निश्चित अवधि के बाद परिसंपत्ति प्रायः सरकार को लौट आती है। राजमार्ग, बंदरगाह, हवाई अड्डे और नगरीय अवसंरचना की अनेक परियोजनाएँ इसी ढाँचे में बनी हैं। इस प्रकार यहाँ प्रश्न स्वामित्व का नहीं, कार्य के निष्पादन का है — सरकार परिसंपत्ति की स्वामी रहते हुए भी निर्माण तथा संचालन निजी पक्ष से करा सकती है। प्रश्न में जो बात पूछी गई है वह विद्यमान उपक्रम में सरकारी स्वामित्व के घटने की है, इसलिए यह विकल्प विषय से ही अलग है, यद्यपि वह भी निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने का ही एक रूप है।
- (d)अवस्फीति — अवस्फीति का संबंध स्वामित्व से नहीं, क़ीमतों से है : यह वह स्थिति है जिसमें अर्थव्यवस्था में क़ीमतों का सामान्य स्तर गिरता है, अर्थात् मुद्रास्फीति की दर ऋणात्मक हो जाती है। इसे उस स्थिति से अलग रखना चाहिए जिसमें क़ीमतें बढ़ तो रही हों पर पहले से धीमी गति से — वह मुद्रास्फीति की दर में कमी है, अवस्फीति नहीं। अवस्फीति सामान्यतः माँग की कमी का लक्षण मानी जाती है और उसके साथ उत्पादन तथा रोज़गार में गिरावट का जोखिम रहता है, इसलिए केंद्रीय बैंक उसे भी उतना ही गंभीरता से लेते हैं जितना ऊँची मुद्रास्फीति को। इस विकल्प का इस प्रश्न से कोई संबंध नहीं है और वह केवल इसलिए रखा गया है कि चारों विकल्प अर्थव्यवस्था के परिचित पद लगें। ऐसे विकल्प को तुरंत हटाकर शेष तीन पर ध्यान देना चाहिए।
अवधारणा
सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े चार पद परीक्षा में बार-बार आते हैं और उनका भेद स्पष्ट रखना चाहिए। विनिवेश का अर्थ है सरकार द्वारा किसी उपक्रम में अपनी इक्विटी हिस्सेदारी का कुछ भाग बेचना; इसमें प्रबंधन-नियंत्रण सामान्यतः सरकार के पास रहता है और उद्देश्य संसाधन जुटाना, स्वामित्व का विस्तार तथा बाज़ार-अनुशासन लाना होता है। सामरिक विनिवेश में हिस्सेदारी के साथ प्रबंधन-नियंत्रण भी हस्तांतरित होता है, और वही व्यवहार में निजीकरण है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी एक भिन्न व्यवस्था है, जिसमें सरकार किसी परियोजना के लिए निजी पक्ष से अनुबंध करती है और निवेश, संचालन तथा जोखिम का बँटवारा पहले से तय होता है; परिसंपत्ति का स्वामित्व प्रायः सरकार के पास रहता है। इनसे अलग एक और धारणा राष्ट्रीयकरण की है, जो उलटी दिशा की प्रक्रिया है — निजी उपक्रमों को सरकारी स्वामित्व में लेना, जैसा भारत में बैंकों के संदर्भ में हुआ। भारत में विनिवेश की नीति 1991 के सुधारों के बाद आगे बढ़ी, इसके लिए अलग विभाग बना, प्राप्तियों के उपयोग के लिए निधि बनी, और प्रत्येक बजट में विनिवेश से प्राप्त होने वाली राशि का लक्ष्य रखा जाता है।
यह परिभाषा-प्रकार का प्रश्न है, जिसमें एक प्रक्रिया का वर्णन देकर उसका नाम पूछा गया है, और इसकी पूरी कठिनाई दो निकट पदों के बीच है — विनिवेश और निजीकरण। ऐसे प्रश्न में स्टेम की क्रिया ही निर्णायक होती है : यहाँ कहा गया है कि स्वामित्व 'कम किया जाता है', जो अंश-विक्रय की ओर संकेत करता है, न कि पूर्ण हस्तांतरण की ओर। यदि स्टेम में प्रबंधन-नियंत्रण के हस्तांतरण की बात होती, तो उत्तर निजीकरण होता। शेष दो विकल्प विषय से दूर हैं और उन्हें हटाने में समय नहीं लगता, इसलिए यह प्रश्न वस्तुतः दो विकल्पों का है। हिन्दी स्तंभ में चारों विकल्प देवनागरी में अनूदित हैं, जबकि अंग्रेज़ी स्तंभ में वे अंग्रेज़ी पदों के रूप में हैं — इसलिए हिन्दी माध्यम के अभ्यर्थी को पदों के हिन्दी पर्याय भी याद रखने चाहिए : विनिवेश, निजीकरण, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और अवस्फीति। हिन्दी स्टेम प्रश्नवाचक है और प्रश्नचिह्न पर समाप्त होता है, जबकि अंग्रेज़ी स्टेम 'it is called' पर बिना विराम-चिह्न के छूटता है।
मुख्य तथ्य
- विनिवेश का अर्थ है सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में अपनी इक्विटी हिस्सेदारी का कुछ भाग बेचना, जिसमें प्रबंधन-नियंत्रण सामान्यतः सरकार के पास रहता है।
- सामरिक विनिवेश में हिस्सेदारी के साथ प्रबंधन-नियंत्रण भी निजी पक्ष को हस्तांतरित होता है, और वही व्यवहार में निजीकरण कहलाता है।
- विनिवेश के तरीक़ों में शेयरों की सार्वजनिक बिक्री, संस्थागत निवेशकों को अल्पांश हिस्सेदारी बेचना, तथा विनिमय-व्यापारित निधियों के माध्यम से कई उपक्रमों के शेयर एक साथ बेचना सम्मिलित हैं।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी में सरकार हिस्सेदारी नहीं बेचती, बल्कि किसी परियोजना के लिए निजी पक्ष से अनुबंध करती है, जिसमें निवेश, संचालन और जोखिम का बँटवारा पहले से तय होता है।
- अवस्फीति का अर्थ है क़ीमतों के सामान्य स्तर का गिरना, अर्थात् मुद्रास्फीति की दर का ऋणात्मक हो जाना; यह मुद्रास्फीति की दर में केवल कमी आने से भिन्न है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- विनिवेश और निजीकरण को पर्याय मान लेना; भेद प्रबंधन-नियंत्रण के हस्तांतरण का है और स्टेम की क्रिया ही उसे तय करती है।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी को स्वामित्व के हस्तांतरण की व्यवस्था समझ लेना, जबकि वह अनुबंध-आधारित निष्पादन की व्यवस्था है।
- अवस्फीति को मुद्रास्फीति की दर में कमी मान लेना; अवस्फीति में क़ीमतों का स्तर स्वयं गिरता है।
- हिन्दी पर्यायों की उपेक्षा करना; हिन्दी स्तंभ में विकल्प अनूदित रूप में आते हैं, इसलिए पदों के दोनों रूप याद रखने चाहिए।
आर्थिक सुधारों के इस खंड से प्रश्न तीन रूपों में आते हैं। पहला, पद-अर्थ का प्रश्न, जैसा यह है, जिसमें दो निकट पदों में से एक चुनना होता है और निर्णय स्टेम की भाषा से होता है। दूसरा, संस्थागत प्रश्न — कौन-सा विभाग या मंत्रालय किस काम के लिए उत्तरदायी है, किस निधि में प्राप्तियाँ जाती हैं, किस उपक्रम को कौन-सा दर्जा मिला है। तीसरा, कथन-सूची, जिसमें किसी नीति के दो-तीन उद्देश्य या विशेषताएँ देकर सही कथन छँटवाए जाते हैं। तीनों के लिए तैयारी की इकाई एक ही है : सुधारों की शब्दावली की एक सूची, जिसमें हर पद की एक-पंक्ति परिभाषा और उसका निकटतम मिलता-जुलता पद साथ लिखा हो — विनिवेश के साथ निजीकरण, अवस्फीति के साथ मुद्रास्फीति-दर में कमी, राष्ट्रीयकरण के साथ अधिग्रहण। जोड़ी बनाकर याद करने से ठीक वही भेद स्मरण रहता है जिस पर परीक्षा प्रश्न बनाती है।
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- (d) Promote investment from domestic and foreign sources
उत्तर(d) Promote investment from domestic and foreign sources
इसी प्रश्नपत्र का वह प्रश्न, जो विशेष आर्थिक क्षेत्रों के उद्देश्य पर है — सुधारों की उसी दिशा का दूसरा उपकरण, जिसमें निजी निवेश को आकर्षित करना केंद्र में है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
विनिवेश और निजीकरण में मुख्य भेद निम्नलिखित में से क्या है ?
- (a)विनिवेश में उपक्रम बंद कर दिया जाता है, निजीकरण में नहीं
- (b)निजीकरण में स्वामित्व के साथ प्रबंधन-नियंत्रण भी निजी हाथों में जाता है, जबकि विनिवेश में सामान्यतः नहीं
- (c)विनिवेश केवल घाटे वाले उपक्रमों में होता है और निजीकरण केवल लाभ वाले उपक्रमों में
- (d)दोनों में कोई भेद नहीं है
उत्तर(b) निजीकरण में स्वामित्व के साथ प्रबंधन-नियंत्रण भी निजी हाथों में जाता है, जबकि विनिवेश में सामान्यतः नहीं — इसी कारण सामरिक विनिवेश को व्यवहार में निजीकरण माना जाता है। शेष तीनों कथन इन दोनों प्रक्रियाओं का सही विवरण नहीं देते।
- practice — not a real PYQ
अवस्फीति की स्थिति से क्या अभिप्राय है ?
- (a)क़ीमतों के सामान्य स्तर का गिरना
- (b)मुद्रास्फीति की दर का बढ़ना
- (c)मुद्रा की पूर्ति का बढ़ना
- (d)रोज़गार का बढ़ना
उत्तर(a) क़ीमतों के सामान्य स्तर का गिरना — अर्थात् मुद्रास्फीति की दर का ऋणात्मक हो जाना। इसे उस स्थिति से अलग रखना चाहिए जिसमें क़ीमतें बढ़ तो रही हों पर पहले से धीमी गति से, क्योंकि वह केवल मुद्रास्फीति की दर में कमी है।