a1, a2, a3, a4, a5, ..., a24 संख्याएँ समांतर श्रेढ़ी में हैं और a1 + a5 + a10 + a15 + a20 + a24 = 225 है । a1 + a2 + a3 + a4 + a5 + ... a23 + a24 का मान क्या है ?
- (a)525
- (b)725
- (c)850
- (d)900
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) 900 — यह प्रश्न समांतर श्रेढ़ी के एक ही गुण पर टिका है : सिरों से समान दूरी पर पड़ने वाले पदों का योग सदैव बराबर होता है। चौबीस पदों की श्रेढ़ी में पहला और चौबीसवाँ पद एक जोड़ी बनाते हैं, पाँचवाँ और बीसवाँ दूसरी, तथा दसवाँ और पन्द्रहवाँ तीसरी — और तीनों जोड़ियों का योग समान होता है, क्योंकि हर जोड़ी में सूचकांकों का योग 25 है। इसे जाँचना भी सरल है : यदि पहला पद a और सार्व अंतर d हो, तो पहला और चौबीसवाँ मिलकर 2a + 23d देते हैं, पाँचवाँ और बीसवाँ भी 2a + 23d, और दसवाँ तथा पन्द्रहवाँ भी वही। दिया गया है कि इन छह पदों का योग 225 है, अर्थात् तीन जोड़ियाँ मिलकर 225, इसलिए एक जोड़ी का योग 75 हुआ — यानी पहला और चौबीसवाँ पद मिलकर 75। अब चौबीस पदों का योग निकालना केवल एक पंक्ति का काम है, क्योंकि समांतर श्रेढ़ी के n पदों का योग (n/2) × (पहला पद + अंतिम पद) होता है : (24/2) × 75 = 12 × 75 = 900। इसलिए उत्तर (d) है। इसी बात को औसत की भाषा में और भी छोटा किया जा सकता है : चुने गए छह पद मध्य के सापेक्ष सममित हैं, इसलिए उनका औसत पूरी श्रेढ़ी के औसत के बराबर है; छह पदों का योग 225 होने से औसत 37·5 आता है, और चौबीस पदों का योग 37·5 × 24 = 900। ध्यान दीजिए कि न a का मान चाहिए और न d का — यही इस प्रश्न की डिज़ाइन है, और जो अभ्यर्थी दो अज्ञात राशियों के लिए समीकरण बनाने बैठता है वह अनावश्यक समय गँवाता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)525 — यह मान सही उत्तर से बहुत कम है और चौबीस पदों के योग के रूप में असंगत है। एक मोटी जाँच से यह तुरंत हट जाता है : छह पदों का योग 225 है, अर्थात् इन पदों का औसत लगभग साढ़े सैंतीस; चूँकि चुने गए छह पद पूरी श्रेढ़ी में सममित रूप से फैले हैं, पूरी श्रेढ़ी का औसत भी लगभग उतना ही होगा, इसलिए चौबीस पदों का योग लगभग साढ़े सैंतीस गुणा चौबीस, अर्थात् नौ सौ के आसपास बैठना चाहिए। इससे 525 और 725 दोनों बहुत कम दिखते हैं। ऐसे प्रश्नों में यह औसत वाली जाँच सबसे उपयोगी है, क्योंकि वह बिना पूरी गणना किए ही विकल्पों को छाँट देती है। यहाँ यह भी ध्यान रखिए कि 525 जैसा मान तब बन सकता है जब कोई चौबीस के बजाय किसी और संख्या से गुणा कर बैठे — पर उस स्थिति में भी वह पूछी गई राशि नहीं होगी।
- (b)725 — यह मान सही उत्तर के अपेक्षाकृत निकट है, इसलिए यह उस अभ्यर्थी को पकड़ता है जिसकी दिशा तो ठीक है पर कोई एक चरण चूक गया। सबसे आम चूक यह होती है कि जोड़ियों की संख्या ग़लत गिन ली जाए : यदि कोई मान ले कि दिए गए छह पदों में दो ही सममित जोड़ियाँ हैं, या यदि 225 को तीन के बजाय किसी और संख्या से भाग दे दे, तो जोड़ी का योग बदल जाता है और अंतिम उत्तर भी। इसलिए जोड़ियाँ बनाते समय सूचकांकों का योग जाँच लेना चाहिए — यहाँ 1 और 24, 5 और 20, तथा 10 और 15, तीनों में योग 25 है, इसलिए तीनों वैध जोड़ियाँ हैं और उनकी संख्या ठीक तीन है। यह जाँच केवल कुछ सेकंड लेती है और पूरे प्रश्न को सुरक्षित कर देती है, क्योंकि यदि कोई पद ऐसा होता जिसकी जोड़ी न बनती, तो यह विधि ही लागू नहीं होती।
- (c)850 — यह मान सही उत्तर के सबसे निकट है और इसीलिए सबसे भ्रामक भी : नौ सौ के आसपास का कोई मान देखकर अभ्यर्थी को लगता है कि उसकी गणना लगभग ठीक है और वह उसे स्वीकार कर लेता है। पर समांतर श्रेढ़ी का योग यहाँ अनुमान का विषय है ही नहीं — वह ठीक-ठीक निकलता है, क्योंकि पहला और अंतिम पद का योग 75 सिद्ध हो जाता है और उसके बाद योग 12 × 75 = 900 एक ही गुणा में मिल जाता है। इस प्रकार के प्रश्न में सही उत्तर के निकट रखा गया विकल्प वस्तुतः यह परखता है कि अभ्यर्थी ने गणना पूरी की या बीच में अनुमान लगा लिया। एक सुरक्षा यह भी है कि 12 × 75 का गुणनफल मन में सत्यापित किया जा सकता है — 75 का बारह गुना, अर्थात् 75 × 12 = 900 — इसलिए अंतिम चरण में भूल की गुंजाइश लगभग नहीं बचती।
अवधारणा
समांतर श्रेढ़ी के तीन सूत्र और एक गुण याद रखने से इस विषय के अधिकांश प्रश्न निकल आते हैं। सूत्र ये हैं : n-वाँ पद = a + (n − 1)d; n पदों का योग = (n/2) × [2a + (n − 1)d]; और वही योग = (n/2) × (पहला पद + अंतिम पद)। गुण यह है कि सिरों से समान दूरी पर स्थित पदों का योग सदैव बराबर होता है, अर्थात् पहले और अंतिम का योग, दूसरे और उपांत्य का योग, इत्यादि — सब समान। इसी गुण से एक और उपयोगी बात निकलती है : समांतर श्रेढ़ी का औसत उसके पहले और अंतिम पद के औसत के बराबर होता है, और यदि पदों की संख्या विषम हो तो वह ठीक बीच वाला पद होता है। परीक्षा में इसी गुण पर आधारित प्रश्न बार-बार आते हैं, जिनमें कुछ चुने हुए सममित पदों का योग देकर पूरी श्रेढ़ी का योग पूछा जाता है; ऐसे प्रश्नों में पहला पद और सार्व अंतर निकालने की आवश्यकता ही नहीं होती, और यही उनकी असली परीक्षा है। साथ में यह भी जान लीजिए कि तीसरे सूत्र का दूसरा रूप — योग = पदों की संख्या × औसत — गणना को प्रायः सबसे छोटा कर देता है।
यह श्रेढ़ी का प्रश्न है और इसकी बनावट में सूचना जानबूझकर अधूरी रखी गई है : न पहला पद दिया है, न सार्व अंतर — केवल छह पदों का योग। यह अधूरापन ही संकेत है कि प्रश्न किसी संरचनात्मक गुण से हल होना चाहिए, न कि समीकरण बनाकर। ऐसे संकेत पहचानना संख्यात्मक अभियोग्यता में सबसे मूल्यवान कौशल है, क्योंकि वह लंबी गणना और छोटी गणना के बीच का अंतर तय कर देता है। छपाई के विषय में एक बात ज्यों की त्यों दर्ज करने योग्य है : प्रश्न में दूसरे व्यंजक को 'a5 + ... a23 + a24' के रूप में छापा गया है, अर्थात् दीर्घवृत्त के बाद a23 से पहले जोड़ का चिह्न नहीं है, जबकि पहले व्यंजक में सभी जोड़-चिह्न मौजूद हैं। यही छपाई-दोष अंग्रेज़ी स्तंभ में भी है, इसलिए यह अनुवाद की चूक नहीं। इसका आशय स्पष्ट है — दोनों व्यंजक क्रमशः चुने हुए छह पदों का योग और चौबीसों पदों का योग हैं — और उत्तर इससे नहीं बदलता। सभी सूचकांक पुस्तिका में अधोलिखित रूप में छपे हैं और हिन्दी स्तंभ में भी संकेतन रोमन ही है।
मुख्य तथ्य
- समांतर श्रेढ़ी में सिरों से समान दूरी पर स्थित पदों का योग सदैव बराबर होता है; इसी कारण पहला और चौबीसवाँ, पाँचवाँ और बीसवाँ, तथा दसवाँ और पन्द्रहवाँ पद तीनों जोड़ियों का योग समान है।
- इस प्रश्न में छह पदों का योग 225 है और वे तीन सममित जोड़ियाँ बनाते हैं, इसलिए एक जोड़ी का योग 75 है, अर्थात् पहला और अंतिम पद मिलकर 75।
- n पदों का योग = (n/2) × (पहला पद + अंतिम पद), इसलिए चौबीस पदों का योग = 12 × 75 = 900।
- समांतर श्रेढ़ी का औसत उसके पहले और अंतिम पद के औसत के बराबर होता है; यहाँ छह सममित पदों का औसत 37·5 है और वही पूरी श्रेढ़ी का औसत है, जिससे योग 37·5 × 24 = 900 आता है।
- इस प्रश्न में न पहला पद चाहिए और न सार्व अंतर — यही संकेत है कि हल समीकरण से नहीं, श्रेढ़ी के सममिति-गुण से निकलना है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- पहला पद और सार्व अंतर निकालने के लिए दो समीकरण बनाने बैठ जाना, जबकि प्रश्न में वह सूचना दी ही नहीं गई और आवश्यक भी नहीं है।
- जोड़ियों की संख्या ग़लत गिनना; यहाँ सूचकांकों के योग की जाँच से पता चलता है कि तीनों जोड़ियाँ वैध हैं।
- सही उत्तर के निकट का मान देखकर गणना अधूरी छोड़ देना, जबकि अंतिम गुणा मन में ही सत्यापित हो सकता है।
- औसत वाली जाँच न लगाना, जो बिना पूरी गणना किए ही बहुत कम या बहुत अधिक मान वाले विकल्प हटा देती है।
श्रेढ़ी से जुड़े प्रश्न इन परीक्षाओं में तीन रूपों में आते हैं। पहला, सीधा सूत्र-प्रश्न — पहला पद और सार्व अंतर देकर कोई पद या योग पूछना, अथवा उलटकर सार्व अंतर पूछना। दूसरा, यही सममिति वाला रूप, जिसमें कुछ चुने हुए पदों का योग देकर पूरी श्रेढ़ी का योग पूछा जाता है; इसकी पहचान यह है कि दी गई सूचना सामान्य समीकरणों के लिए अपर्याप्त लगती है और चुने गए पद सिरों के सापेक्ष सममित होते हैं। तीसरा, शब्द-प्रश्न, जहाँ श्रेढ़ी किसी वास्तविक स्थिति में छिपी होती है — जैसे इसी प्रश्नपत्र में एक दौड़ के विजेताओं को दिए जाने वाले अंक, जिनमें प्रत्येक स्थान के अंक अगले से पाँच अधिक हैं; वहाँ पहले यह पहचानना पड़ता है कि यह समांतर श्रेढ़ी है, और उसके बाद वही सूत्र लगते हैं। तीनों रूपों की तैयारी के लिए सूत्रों के साथ सममिति-गुण और औसत वाली विधि अवश्य जोड़ लीजिए, क्योंकि वे गणना को कई गुना छोटा कर देते हैं।
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EPFO_APFC_2016_Q72खोलें व हल करें →In a race, the first four winners are to be awarded points. Each winner's points must be 5 more than that of the next position winner. Total sum of the points to be awarded is 50. What will be the points for the third position winner ?
- (a) 30
- (b) 20
- (c) 10
- (d) 5
उत्तर(c) 10
इसी प्रश्नपत्र का वह प्रश्न, जिसमें दौड़ के चार विजेताओं के अंक इस शर्त पर दिए गए हैं कि प्रत्येक के अंक अगले स्थान वाले से पाँच अधिक हों — अर्थात् वही समांतर श्रेढ़ी, शब्द-प्रश्न के रूप में।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
किसी समांतर श्रेढ़ी के 20 पदों में पहले और बीसवें पद का योग 60 है । इन बीस पदों का योग कितना होगा ?
- (a)300
- (b)600
- (c)900
- (d)1200
उत्तर(b) 600 — n पदों का योग (n/2) × (पहला पद + अंतिम पद) होता है, इसलिए (20/2) × 60 = 600। इसके लिए न पहला पद चाहिए और न सार्व अंतर, और यही इस सूत्र की उपयोगिता है।
- practice — not a real PYQ
किसी समांतर श्रेढ़ी के 15 पदों में आठवाँ पद 20 है । इन पन्द्रह पदों का योग कितना होगा ?
- (a)150
- (b)200
- (c)300
- (d)यह दी गई सूचना से ज्ञात नहीं किया जा सकता
उत्तर(c) 300 — पन्द्रह पदों में आठवाँ पद ठीक बीच का पद है, और विषम संख्या वाले पदों की श्रेढ़ी में बीच का पद ही औसत होता है; इसलिए योग = 15 × 20 = 300। इसी कारण (d) भी ग़लत है, क्योंकि सूचना पर्याप्त है।