r1 और r2 त्रिज्याओं (r1 < r2) के दो वृत्त हैं । बड़े वृत्त का क्षेत्रफल 693/2 cm2 है । उनकी परिधियों का अन्तर 22 cm है । दोनों वृत्तों के व्यासों का योगफल क्या है ?
- (a)17·5 cm
- (b)22 cm
- (c)28·5 cm
- (d)35 cm
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) 35 cm — गणना दो चरणों की है और दोनों में π को 22/7 लेने पर अंक स्वच्छ आते हैं, जो स्वयं संकेत है कि प्रश्न इसी मान से बनाया गया है। पहला चरण : बड़े वृत्त का क्षेत्रफल 693/2 cm2 दिया है, इसलिए πr2² = 693/2, अर्थात् (22/7) × r2² = 693/2। इससे r2² = (693 × 7) ÷ (2 × 22) = 4851 ÷ 44 = 110·25, और r2 = 10·5 cm। दूसरा चरण : परिधियों का अन्तर 22 cm दिया है, और परिधि 2πr होती है, इसलिए 2π(r2 − r1) = 22, अर्थात् (44/7) × (r2 − r1) = 22। इससे r2 − r1 = (22 × 7) ÷ 44 = 3·5 cm, और r1 = 10·5 − 3·5 = 7 cm। अब पूछा गया है दोनों वृत्तों के व्यासों का योगफल, अर्थात् 2r1 + 2r2 = 2 × (7 + 10·5) = 2 × 17·5 = 35 cm। इसलिए उत्तर (d) है। इस प्रश्न में दो बातें ध्यान देने योग्य हैं। पहली, अंत में पूछा गया है व्यासों का योग, न कि त्रिज्याओं का — और त्रिज्याओं का योग 17·5 है, जो विकल्पों में मौजूद है; इसलिए गणना ठीक करके भी अंतिम चरण भूल जाना यहाँ बहुत सहज है। दूसरी, परिधियों के अन्तर से सीधे त्रिज्याओं का अन्तर निकल आता है, क्योंकि 2π एक अचर गुणक है; यही इस प्रश्न की सबसे उपयोगी युक्ति है और इसे सामान्य रूप में याद रखना चाहिए : परिधियों का अन्तर 2π से भाग देने पर त्रिज्याओं का अन्तर देता है, और π से भाग देने पर व्यासों का अन्तर।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)17·5 cm — यह इस प्रश्न का सबसे तैयार किया हुआ चारा है, क्योंकि यह एक वास्तविक और सही राशि है — पर वह राशि है त्रिज्याओं का योग, जबकि पूछा गया है व्यासों का योग। जिस अभ्यर्थी ने r1 = 7 और r2 = 10·5 ठीक-ठीक निकाल लिए, वह यदि अंतिम पंक्ति दोबारा नहीं पढ़ता तो 17·5 पर रुक जाता है और पूरी सही गणना के बाद अंक गँवा देता है। इसीलिए ऐसे प्रश्नों में एक अनुशासन बहुत काम आता है : हल आरंभ करने से पहले प्रश्न का अंतिम वाक्य अलग से पढ़ लीजिए और यह लिख लीजिए कि निकालना क्या है, और हल पूरा होने पर उसी पंक्ति से मिलाइए। क्षेत्रमिति में यह चूक सबसे अधिक होती है, क्योंकि त्रिज्या, व्यास, परिधि और क्षेत्रफल — चारों राशियाँ एक ही गणना में साथ-साथ चलती हैं और परीक्षक जानबूझकर बीच की कोई राशि विकल्पों में रख देता है।
- (b)22 cm — यह प्रश्न में दी गई राशि है — परिधियों का अन्तर — और उसे उत्तर के रूप में रख देना दूसरे प्रकार का चारा है : दिया हुआ अंक ही उत्तर के विकल्पों में लौटा देना। ऐसा विकल्प उस अभ्यर्थी को पकड़ता है जो समय के दबाव में केवल आँकड़े देखता है और उन्हीं में से कोई परिचित संख्या चुन लेता है। तर्क की दृष्टि से भी यह असंभव है : व्यासों का योग बड़े वृत्त के व्यास से बड़ा होना चाहिए, और बड़े वृत्त का व्यास ही 21 cm है, इसलिए उत्तर 21 से पर्याप्त अधिक होना चाहिए। यह मोटा अनुमान बिना पूरी गणना किए भी 22 को हटा देता है, और यही इस प्रश्न में समय बचाने का सबसे तेज़ रास्ता है — पहले सीमाएँ तय कीजिए, फिर गणना कीजिए।
- (c)28·5 cm — यह मान इस प्रश्न की किसी भी सार्थक राशि से मेल नहीं खाता — न त्रिज्याओं के योग से, न व्यासों के योग से, न किसी एक वृत्त के व्यास या परिधि से — इसलिए यह किसी वैध विधि से निकल ही नहीं सकता। ऐसे विकल्प सही उत्तर के आसपास के मान के रूप में रखे जाते हैं, ताकि जिस अभ्यर्थी की गणना बीच में कहीं टूट जाए उसे कोई निकट-सा दिखने वाला अंक मिल जाए और वह उसे चुन ले। यहाँ बचाव फिर वही जाँच है : बड़े वृत्त का व्यास 21 cm है और छोटे का 14 cm, इसलिए योग ठीक 35 cm ही बनेगा, और उससे कम कोई मान संभव नहीं। दशमलव-चिह्न पर भी ध्यान दीजिए — इस पुस्तिका में वह उठा हुआ मध्य-बिंदु है, साधारण पूर्णविराम नहीं — पर यह केवल छपाई की शैली है और गणना पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
अवधारणा
वृत्त से जुड़ी चार राशियाँ आपस में इस प्रकार बँधी हैं : व्यास d = 2r; परिधि C = 2πr = πd; क्षेत्रफल A = πr²। परीक्षा के प्रश्न प्रायः इनमें से किसी एक राशि से आरंभ करके किसी दूसरी राशि तक ले जाते हैं, इसलिए इन सूत्रों को दोनों दिशाओं में उपयोग करना आना चाहिए — क्षेत्रफल से त्रिज्या निकालना उतना ही आवश्यक है जितना त्रिज्या से क्षेत्रफल। दो वृत्तों वाले प्रश्नों में तीन युक्तियाँ बार-बार काम आती हैं। पहली, परिधियों का अन्तर 2π से भाग देने पर त्रिज्याओं का अन्तर देता है, क्योंकि 2π अचर गुणक है; इसी प्रकार परिधियों का योग 2π से भाग देने पर त्रिज्याओं का योग देता है। दूसरी, क्षेत्रफलों का अनुपात त्रिज्याओं के अनुपात का वर्ग होता है, और परिधियों का अनुपात सीधे त्रिज्याओं का अनुपात। तीसरी, जब संख्याएँ सात के गुणज या सात से भाज्य दिखें, तब π = 22/7 लेना ही अभीष्ट है, क्योंकि प्रश्न उसी मान से बनाया गया होता है — यहाँ 693 और 22 दोनों में यह संकेत स्पष्ट है। इन युक्तियों से ऐसे प्रश्न बिना लंबी गणना के निकल आते हैं।
यह क्षेत्रमिति का प्रश्न है और इसकी बनावट में दो सूचनाएँ दो अलग-अलग सूत्रों से जुड़ी हैं — एक क्षेत्रफल से और दूसरी परिधि से — इसलिए हल में दो स्वतंत्र चरण हैं और उनके बाद एक तीसरा चरण है, जिसमें पूछी गई राशि बनानी है। तीन चरणों वाले प्रश्न में सबसे अधिक अंक अंतिम चरण में कटते हैं, और यहाँ तो विकल्पों में बीच की राशि रख भी दी गई है। इसलिए इस प्रश्न से सीखने योग्य बात गणना नहीं, अनुशासन है : पहले लिखिए कि क्या पूछा गया है, फिर हल कीजिए। छपाई के विषय में तीन बातें दर्ज करने योग्य हैं, क्योंकि वे सादे पाठ में नहीं बचतीं : त्रिज्याएँ पुस्तिका में अधोलिखित अंकों के साथ छपी हैं, अर्थात् r के नीचे 1 और 2; क्षेत्रफल एक द्वि-स्तरीय भिन्न के रूप में छपा है, जिसमें रेखा के ऊपर 693 और नीचे 2 है और उसके बाद cm के साथ उर्ध्वांकित 2; और विकल्पों में दशमलव-चिह्न उठा हुआ मध्य-बिंदु है। इकाई cm हिन्दी स्तंभ में भी रोमन लिपि में ही है, क्योंकि वह गणितीय संकेतन है।
मुख्य तथ्य
- वृत्त के मूल सूत्र हैं — व्यास d = 2r, परिधि C = 2πr = πd, और क्षेत्रफल A = πr²; प्रश्न प्रायः इनमें से किसी एक राशि से दूसरी तक ले जाते हैं।
- इस प्रश्न में बड़े वृत्त का क्षेत्रफल 693/2 cm2 से r2 = 10·5 cm निकलता है, क्योंकि (22/7) × r2² = 693/2 से r2² = 110·25 आता है।
- परिधियों का अन्तर 22 cm होने से 2π(r2 − r1) = 22, अर्थात् r2 − r1 = 3·5 cm, इसलिए r1 = 7 cm; व्यासों का योग 2 × (7 + 10·5) = 35 cm है।
- सामान्य युक्ति यह है कि परिधियों का अन्तर 2π से भाग देने पर त्रिज्याओं का अन्तर मिलता है और π से भाग देने पर व्यासों का अन्तर — इससे अलग-अलग त्रिज्याएँ निकाले बिना भी काम चल सकता है।
- दो वृत्तों के क्षेत्रफलों का अनुपात उनकी त्रिज्याओं के अनुपात का वर्ग होता है, जबकि परिधियों का अनुपात सीधे त्रिज्याओं का अनुपात होता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- त्रिज्याओं का योग निकालकर रुक जाना, जबकि पूछा गया है व्यासों का योग — विकल्प (a) ठीक इसी चूक के लिए रखा गया है।
- प्रश्न में दी गई संख्या को उत्तर मान लेना; 22 cm परिधियों का अन्तर है, कोई उत्तर नहीं।
- π का मान 3·14 लेकर गणना को दशमलव में उलझा देना, जबकि संख्याएँ स्पष्ट रूप से 22/7 के लिए बनी हैं।
- मोटा अनुमान न लगाना; बड़े वृत्त का व्यास ही 21 cm है, इसलिए योग उससे पर्याप्त अधिक होना चाहिए और दो विकल्प तुरंत कट जाते हैं।
क्षेत्रमिति के प्रश्न इस प्रश्नपत्र में विषयों के बीच बिखरे हुए हैं और वे तीन स्तरों पर आते हैं। पहला स्तर सीधे सूत्र का है — त्रिज्या देकर क्षेत्रफल या परिधि पूछना। दूसरा स्तर उलटा है, जैसा यह प्रश्न है : क्षेत्रफल या परिधि देकर त्रिज्या निकालना और फिर उससे कोई तीसरी राशि बनाना; यहाँ असली परीक्षा यह है कि अभ्यर्थी अंतिम पंक्ति ठीक से पढ़ता है या नहीं। तीसरा स्तर संरचनात्मक है, जैसा इसी प्रश्नपत्र के सीढ़ीनुमा आकृति वाले प्रश्न में है, जहाँ कोई नियम पहचान लेने पर गणना लगभग समाप्त हो जाती है। तीनों स्तरों के लिए तैयारी की इकाई एक ही है : सूत्रों की एक छोटी सूची, जिसे दोनों दिशाओं में उपयोग करने का अभ्यास हो, और यह आदत कि हल आरंभ करने से पहले यह लिख लिया जाए कि निकालना क्या है। इसी अनुशासन से इस खंड के अधिकांश अंक बचते हैं।
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- (a) 44 cm
- (b) 48 cm
- (c) 54 cm
- (d) 58 cm
उत्तर(a) 44 cm
इसी प्रश्नपत्र का दूसरा क्षेत्रमिति प्रश्न, जिसमें सीढ़ीनुमा आकृति का परिमाप पूछा गया है — वहाँ संरचना पहचानने से गणना बचती है, और यहाँ अंतिम पंक्ति ठीक पढ़ने से अंक बचता है।
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- (a) 9 metres
- (b) 6 metres
- (c) 3 metres
- (d) 1 metre
उत्तर(c) 3 metres
इसी प्रश्नपत्र का बेलनाकार टंकी वाला प्रश्न — क्षेत्रमिति का त्रि-विमीय रूप, जिसमें वही सूत्र-आधारित अनुशासन चाहिए।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
दो वृत्तों की परिधियों का अन्तर 44 cm है । उनकी त्रिज्याओं का अन्तर कितना होगा ? (π = 22/7 लीजिए)
- (a)3·5 cm
- (b)7 cm
- (c)14 cm
- (d)22 cm
उत्तर(b) 7 cm — परिधियों का अन्तर 2π से भाग देने पर त्रिज्याओं का अन्तर मिलता है, अर्थात् 44 ÷ (44/7) = 7 cm। यदि व्यासों का अन्तर पूछा जाता तो उत्तर उसका दुगुना, अर्थात् 14 cm होता, और यही निकटतम चारा है।
- practice — not a real PYQ
किसी वृत्त का क्षेत्रफल 154 cm2 है । उसका व्यास कितना होगा ? (π = 22/7 लीजिए)
- (a)7 cm
- (b)14 cm
- (c)21 cm
- (d)28 cm
उत्तर(b) 14 cm — क्षेत्रफल से (22/7) × r² = 154, इसलिए r² = 49 और r = 7 cm; व्यास उसका दुगुना, अर्थात् 14 cm। यहाँ भी 7 cm वही चारा है जो त्रिज्या पर रुक जाने से चुना जाता है।