गंगा नदी की सहायक नदियों का पश्चिम से पूर्व की ओर सही अनुक्रम क्या है ?
- (a)यमुना, घाघरा, सोन, गंडक और कोसी
- (b)घाघरा, यमुना, गंडक, कोसी और सोन
- (c)यमुना, घाघरा, गंडक, सोन और कोसी
- (d)घाघरा, यमुना, कोसी, गंडक और सोन
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) यमुना, घाघरा, सोन, गंडक और कोसी — यही क्रम पश्चिम से पूर्व की ओर, अर्थात् गंगा में मिलने के स्थानों के क्रम में, सही बैठता है। संगम-स्थल इस प्रकार हैं : यमुना गंगा में प्रयागराज पर मिलती है, जो इन पाँचों में सबसे पश्चिम का संगम है; घाघरा बिहार के सारण ज़िले में रेवेलगंज के पास मिलती है; सोन पटना से कुछ पश्चिम में मनेर के आसपास मिलता है; गंडक पटना के सामने सोनपुर-हाजीपुर के पास मिलती है, अर्थात् सोन के संगम से थोड़ा पूर्व में; और कोसी सबसे पूर्व में, कटिहार ज़िले में कुरसेला के पास मिलती है। इस प्रकार पश्चिम से पूर्व का क्रम यमुना, घाघरा, सोन, गंडक और कोसी बनता है, और वही विकल्प (a) है। इस प्रश्न की पूरी कठिनाई बीच के दो पदों में है — सोन और गंडक — क्योंकि उनके संगम-स्थल पटना के आसपास बहुत पास-पास हैं और मानचित्र पर उन्हें अलग करना ध्यान माँगता है। एक बात याद रखने से यह गुत्थी सुलझ जाती है : सोन दक्षिण से आने वाली प्रायद्वीपीय नदी है और पटना से पश्चिम की ओर मिलती है, जबकि गंडक उत्तर से, नेपाल की ओर से आने वाली नदी है और पटना के सामने मिलती है। शेष तीन पद तुलनात्मक रूप से सरल हैं : यमुना का संगम सबसे पश्चिम में और कोसी का सबसे पूर्व में है, और यही दो लंगर मिलकर तीन विकल्प तुरंत काट देते हैं, क्योंकि केवल दो विकल्प यमुना से आरंभ होते हैं और उनमें से भी केवल एक कोसी पर समाप्त नहीं होता।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)घाघरा, यमुना, गंडक, कोसी और सोन — इस विकल्प में दो बड़ी भूलें हैं। पहली, यह घाघरा को यमुना से पहले रख देता है, जबकि यमुना का संगम प्रयागराज पर है और घाघरा का संगम बिहार के सारण ज़िले में — अर्थात् घाघरा का संगम यमुना के संगम से कहीं अधिक पूर्व में है। दूसरी, यह सोन को सबसे अंत में रख देता है, जबकि सोन का संगम पटना से कुछ पश्चिम में है और कोसी का संगम उससे बहुत आगे पूर्व में। ये दोनों भूलें एक ही मूल कारण से आती हैं : नदियों के उद्गम और उनके संगम को एक मान लेना। सोन का उद्गम मध्य भारत के पठार में है, जो भौगोलिक दृष्टि से पश्चिम-दक्षिण की ओर पड़ता है, पर प्रश्न उद्गम नहीं, संगम का क्रम पूछ रहा है। इसी प्रकार घाघरा का उद्गम तिब्बत में है, पर उसका संगम बिहार में। ऐसे प्रश्न में सदैव यह तय कर लीजिए कि क्रम किस बिंदु का पूछा गया है।
- (c)यमुना, घाघरा, गंडक, सोन और कोसी — यह चारों विकल्पों में सबसे निकट है और इसी कारण सबसे ख़तरनाक भी : इसमें केवल सोन और गंडक की जोड़ी आपस में बदली हुई है, शेष तीनों पद सही स्थान पर हैं। निर्णय इस पर टिकता है कि पटना के आसपास इन दोनों के संगम में कौन-सा पश्चिम में है। सोन गंगा में पटना से कुछ पश्चिम में, मनेर के आसपास मिलता है, जबकि गंडक पटना के सामने सोनपुर-हाजीपुर के पास — इसलिए सोन पहले आता है और गंडक बाद में। यह भेद इसलिए भी छूट जाता है कि दोनों संगम एक ही नगर के आसपास हैं और मानचित्र पर पास-पास दिखते हैं। स्मरण की एक सरल कड़ी यह है कि सोन दक्षिण से आता है और गंगा के दाहिने तट पर मिलता है, जबकि गंडक उत्तर से आती है और बाएँ तट पर; और गंगा के दाहिने तट की यह भेंट पटना से पहले हो जाती है।
- (d)घाघरा, यमुना, कोसी, गंडक और सोन — यह विकल्प सबसे अधिक अव्यवस्थित है और तीन जगह चूकता है : यह घाघरा को यमुना से पहले रखता है, कोसी को गंडक से पहले, और सोन को सबसे अंत में। कोसी का संगम कटिहार ज़िले में कुरसेला के पास है, जो पाँचों में सबसे पूर्व का संगम है, इसलिए कोसी को बीच में रखना ही ग़लत है; और सोन का संगम पटना से पश्चिम में है, इसलिए उसे अंतिम स्थान देना दिशा को उलट देना है। इस विकल्प को हटाने के लिए किसी सूक्ष्म जानकारी की आवश्यकता नहीं — केवल दो लंगर पर्याप्त हैं : सबसे पश्चिम का संगम यमुना का और सबसे पूर्व का कोसी का। इसी प्रकार के अनुक्रम-प्रश्नों में यही विधि सबसे तेज़ है : पहले और अंतिम पद तय कीजिए, इससे प्रायः दो या तीन विकल्प तुरंत कट जाते हैं, और उसके बाद केवल बीच की किसी एक जोड़ी पर निर्णय बचता है।
अवधारणा
गंगा-तंत्र की सहायक नदियाँ दो वर्गों में बँटती हैं और यह वर्गीकरण अनुक्रम के प्रश्नों में सीधे काम आता है। उत्तर की ओर से आने वाली नदियाँ हिमालय तथा नेपाल से निकलती हैं, सदावाहिनी होती हैं और जल-आयतन में बड़ी हैं — इनमें रामगंगा, घाघरा, गंडक, कोसी और महानंदा आती हैं; ये गंगा के बाएँ तट पर मिलती हैं। दक्षिण की ओर से आने वाली नदियाँ प्रायद्वीपीय पठार से निकलती हैं और वर्षा पर अधिक निर्भर हैं — इनमें यमुना, सोन और पुनपुन प्रमुख हैं; ये दाहिने तट पर मिलती हैं। संगम-स्थल पश्चिम से पूर्व इस क्रम में पड़ते हैं : यमुना प्रयागराज पर, घाघरा सारण ज़िले में रेवेलगंज के पास, सोन पटना से कुछ पश्चिम में, गंडक पटना के सामने सोनपुर-हाजीपुर के पास, और कोसी कटिहार ज़िले में कुरसेला के पास। इन नदियों की अपनी-अपनी पहचान भी याद रखने योग्य है : यमुना गंगा की सबसे लंबी सहायक है और यमुनोत्री से निकलती है; घाघरा जल-आयतन में सबसे बड़ी सहायक है और अवध में सरयू कहलाती है; सोन अमरकंटक के पठारी क्षेत्र से निकलता है; गंडक नेपाल में नारायणी कहलाती है; और कोसी अपनी धारा बदलने तथा बाढ़ के कारण 'बिहार का शोक' कही जाती है।
यह अनुक्रम-प्रश्न है, पर उसका क्रम समय का नहीं, स्थान का है — पश्चिम से पूर्व की ओर। इस प्रकार के प्रश्न में वही विधि चलती है जो कालानुक्रम में चलती है : पहले और अंतिम पद तय कीजिए, फिर बीच की जोड़ी पर निर्णय लीजिए। यहाँ यमुना और कोसी के लंगर सरल हैं और असली निर्णय सोन तथा गंडक के बीच है, जिनके संगम पटना के आसपास बहुत पास-पास पड़ते हैं। यही कारण है कि चारों विकल्पों में से दो केवल इसी जोड़ी में भिन्न हैं। ऐसे प्रश्न की तैयारी मानचित्र से होती है, सूची से नहीं : गंगा की मुख्य धारा पर संगम-स्थलों को एक बार क्रम में देख लेना पर्याप्त है, क्योंकि उसके बाद यह क्रम स्वाभाविक लगने लगता है। हिन्दी स्तंभ की एक छोटी बात दर्ज करने योग्य है : विकल्प (c) में हिन्दी पाठ 'गंडक, सोन और कोसी' छापता है, जिसमें 'और' से पहले कोई अल्पविराम नहीं है, जबकि अंग्रेज़ी स्तंभ के उसी विकल्प में एक अतिरिक्त अल्पविराम छपा है; इससे अर्थ नहीं बदलता।
मुख्य तथ्य
- गंगा में मिलने के स्थानों का पश्चिम से पूर्व क्रम है — यमुना प्रयागराज पर, घाघरा सारण ज़िले में रेवेलगंज के पास, सोन पटना से कुछ पश्चिम में, गंडक सोनपुर-हाजीपुर के पास, और कोसी कटिहार ज़िले में कुरसेला के पास।
- यमुना और सोन दक्षिण से आने वाली प्रायद्वीपीय नदियाँ हैं और गंगा के दाहिने तट पर मिलती हैं; घाघरा, गंडक और कोसी उत्तर से आती हैं और बाएँ तट पर मिलती हैं।
- यमुना गंगा की सबसे लंबी सहायक नदी है और यमुनोत्री से निकलती है; घाघरा जल-आयतन की दृष्टि से सबसे बड़ी सहायक है और अवध क्षेत्र में सरयू कहलाती है।
- गंडक नेपाल में नारायणी कहलाती है, और कोसी अपनी धारा बदलने तथा बाढ़ लाने के कारण 'बिहार का शोक' कही जाती है।
- सोन का उद्गम अमरकंटक के पठारी क्षेत्र में है; उसका संगम पटना से पश्चिम की ओर पड़ता है, इसलिए वह गंडक से पहले आता है — यही इस प्रश्न का निर्णायक बिंदु है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- उद्गम के क्रम को संगम के क्रम से मिला देना; प्रश्न संगम-स्थलों का पश्चिम से पूर्व क्रम पूछ रहा है।
- सोन और गंडक के संगमों को आपस में बदल देना, जो इस प्रश्न का मुख्य निर्णय-बिंदु है और विकल्प (c) का पूरा आधार।
- कोसी को बीच में रख देना, जबकि उसका संगम इन पाँचों में सबसे पूर्व का है।
- मानचित्र देखे बिना केवल नामों की सूची याद करना; स्थान-आधारित अनुक्रम मानचित्र से ही स्थायी रूप से याद रहता है।
नदियों से जुड़े प्रश्न इन परीक्षाओं में चार रूपों में आते हैं। पहला, नगर और नदी की जोड़ी — जैसा इसी प्रश्नपत्र में अयोध्या को लेकर पूछा गया है। दूसरा, यही अनुक्रम वाला रूप, जिसमें संगम-स्थलों या उद्गमों को दिशा के क्रम में लगाना होता है। तीसरा, सुमेलन — नदी और उसका उद्गम, अथवा नदी और उस पर बनी परियोजना। चौथा, विशेषता-आधारित प्रश्न — कौन-सी नदी सबसे लंबी है, कौन-सी जल-आयतन में सबसे बड़ी, कौन-सी किस नाम से भी जानी जाती है। चारों रूपों के लिए एक ही तैयारी पर्याप्त है : एक मानचित्र, जिस पर गंगा की मुख्य धारा और उसके संगम-स्थल क्रम से अंकित हों, और उसके साथ एक छोटी सूची जिसमें हर नदी का उद्गम, वैकल्पिक नाम और एक विशेषता लिखी हो। इस प्रश्न में मानचित्र की स्मृति ही निर्णायक है, क्योंकि सोन और गंडक का भेद सूची से नहीं, स्थिति से स्पष्ट होता है।
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EPFO_APFC_2016_Q16खोलें व हल करें →Ayodhya is located at the bank of which river ?
- (a) Falgu
- (b) Ganga
- (c) Sarayu
- (d) Yamuna
उत्तर(c) Sarayu
इसी प्रश्नपत्र का वह प्रश्न, जो अयोध्या और सरयू पर है — सरयू वही घाघरा है जो इस अनुक्रम का दूसरा पद है, इसलिए दोनों प्रश्न एक ही नदी को दो अलग रूपों में परखते हैं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सी नदी गंगा के दाहिने तट पर, अर्थात् दक्षिण की ओर से आकर मिलती है ?
- (a)घाघरा
- (b)गंडक
- (c)सोन
- (d)कोसी
उत्तर(c) सोन — यह प्रायद्वीपीय पठार से निकलकर उत्तर की ओर बहती है और गंगा के दाहिने तट पर, पटना से कुछ पश्चिम में मिलती है। घाघरा, गंडक और कोसी तीनों उत्तर से, हिमालय तथा नेपाल की ओर से आती हैं और बाएँ तट पर मिलती हैं।
- practice — not a real PYQ
कोसी नदी को सामान्यतः किस नाम से जाना जाता है ?
- (a)बिहार का शोक
- (b)बंगाल का शोक
- (c)असम का शोक
- (d)ओडिशा का शोक
उत्तर(a) बिहार का शोक — कोसी अपनी धारा बदलने की प्रवृत्ति और बार-बार आने वाली बाढ़ के कारण इस नाम से जानी जाती है। दामोदर को परंपरागत रूप से बंगाल का शोक कहा जाता रहा है, इसलिए ये दोनों नाम प्रायः आपस में बदलकर पूछे जाते हैं।