किसी भी अर्थव्यवस्था में परिवहन एक बड़ी भूमिका निभाता है । परिवहन के निम्नलिखित प्रकारों में से किसकी लोच उच्चतम है ?
- (a)वायु
- (b)रेल
- (c)सड़क
- (d)जल
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) सड़क — परिवहन के चार प्रकारों में लोच अर्थात् परिस्थिति के अनुसार ढल जाने की क्षमता सड़क परिवहन में सबसे अधिक होती है। लोच का अर्थ यहाँ यह है कि माँग बदलने पर सेवा कितनी जल्दी और कितनी कम लागत पर बदली जा सकती है — मार्ग बदलना, फेरे घटाना-बढ़ाना, छोटी खेप ढोना, नए क्षेत्र तक पहुँचना। सड़क परिवहन इन सब में सबसे आगे है, और इसके तीन कारण हैं। पहला, मार्ग की स्वतंत्रता : वाहन किसी भी सड़क से जा सकता है, किसी निश्चित पटरी या जलमार्ग से बँधा नहीं है, और आवश्यकता पड़ने पर मार्ग तुरंत बदला जा सकता है। दूसरा, इकाई का छोटा आकार : एक ट्रक या बस अपने आप में एक इकाई है, इसलिए सेवा एक-एक वाहन की मात्रा में घटाई-बढ़ाई जा सकती है, जबकि रेलगाड़ी, जहाज़ या वायुयान बड़ी अविभाज्य इकाइयाँ हैं। तीसरा, द्वार-से-द्वार सेवा : सड़क परिवहन माल को उत्पादक के परिसर से लेकर उपभोक्ता तक बिना किसी अन्य साधन में बदले पहुँचा सकता है, जबकि शेष तीनों साधनों में आरंभ और अंत की दूरी प्रायः सड़क से ही तय होती है। इसी कारण सड़क परिवहन शेष साधनों का पूरक भी है और प्रतिस्पर्धी भी, और यही उसे सबसे अधिक लोचदार बनाता है। इसका उलटा पक्ष भी जानना चाहिए : सड़क परिवहन में प्रति टन-किलोमीटर लागत भारी माल के लिए रेल या जल की तुलना में अधिक बैठती है, इसलिए लोच का लाभ लागत की क़ीमत पर मिलता है। प्रश्न लोच पूछ रहा है, लागत नहीं, इसलिए उत्तर (c) है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)वायु — वायु परिवहन गति में सबसे आगे है, पर लोच में नहीं। इसकी सेवा केवल उन स्थानों के बीच संभव है जहाँ हवाई अड्डे हों, और नया हवाई अड्डा बनाना लंबा तथा महँगा काम है; इसलिए मार्ग-जाल का विस्तार धीमा और बँधा हुआ रहता है। इकाई भी बड़ी और अविभाज्य है — एक वायुयान की उड़ान पूरी क्षमता के साथ चलती है, चाहे माँग कम हो — और उड़ानों का समय, वायु-यातायात नियंत्रण तथा अनुमति की व्यवस्था इसे और कठोर बना देती है। लागत सबसे अधिक होने के कारण इसका उपयोग भी सीमित वर्ग के माल तक रहता है : शीघ्र नष्ट होने वाली, हल्की और अधिक मूल्य वाली वस्तुएँ। इस प्रकार वायु परिवहन उस स्थिति में अद्वितीय है जहाँ समय सबसे महत्त्वपूर्ण हो, पर माँग के उतार-चढ़ाव के अनुसार ढलने में वह सड़क से बहुत पीछे है।
- (b)रेल — रेल परिवहन भारी माल को लंबी दूरी तक कम लागत पर ढोने का सबसे उपयुक्त साधन है, पर उसकी सारी सामर्थ्य एक कठोर ढाँचे से बँधी है : वह केवल बिछी हुई पटरी पर चल सकता है, समय-सारणी से चलता है, और नई पटरी बिछाना बहुत बड़ा तथा दीर्घकालिक निवेश है। इसका अर्थ यह हुआ कि माँग किसी नए क्षेत्र में बढ़े तो रेल तुरंत वहाँ नहीं पहुँच सकती, और माँग घटे तो सेवा उसी अनुपात में घटाना कठिन होता है। इसके अतिरिक्त रेल प्रायः स्थानक-से-स्थानक सेवा देती है, इसलिए आरंभ और अंत की दूरी के लिए सड़क परिवहन की आवश्यकता बनी रहती है, जिससे माल को एक साधन से दूसरे में बदलना पड़ता है। यही कारण है कि रेल की तुलना लागत और क्षमता में उत्तम बैठती है, पर लोच में नहीं — और प्रश्न लोच पूछ रहा है।
- (d)जल — जल परिवहन भारी और थोक माल के लिए सबसे सस्ता साधन है, विशेषकर लंबी अंतरराष्ट्रीय दूरियों पर, पर उसकी लोच सबसे कम होती है। वह उन्हीं मार्गों तक सीमित है जहाँ नदी, नहर, तटीय मार्ग या समुद्र हो, और आरंभ तथा अंत बंदरगाह पर ही होते हैं; भीतरी क्षेत्रों तक पहुँचने के लिए उसे सड़क या रेल पर निर्भर रहना पड़ता है। गति सबसे धीमी है और सेवा मौसम तथा नदी में जल की उपलब्धता पर भी निर्भर करती है, इसलिए भीतरी जलमार्गों में वर्ष के कुछ महीने कठिनाई रहती है। जहाज़ भी बड़ी अविभाज्य इकाई है, इसलिए छोटी खेप के लिए यह साधन उपयुक्त नहीं। इस प्रकार जल परिवहन का गुण सस्ता होना है और सीमा उसकी अनम्यता — ठीक उलटी दिशा उस गुण से जो यह प्रश्न पूछ रहा है।
अवधारणा
परिवहन के चारों साधनों की तुलना चार कसौटियों पर करनी चाहिए, और परीक्षा इन्हीं में से किसी एक को उठाकर प्रश्न बनाती है : गति, लागत, क्षमता और लोच। गति में वायु सबसे आगे है, फिर रेल और सड़क, और अंत में जल। प्रति टन-किलोमीटर लागत में जल सबसे सस्ता है, फिर रेल, फिर सड़क, और वायु सबसे महँगा। भारी तथा थोक माल को लंबी दूरी तक ढोने की क्षमता में रेल और जल आगे हैं। लोच में सड़क सबसे आगे है, क्योंकि वहाँ मार्ग की स्वतंत्रता है, इकाई छोटी है और द्वार-से-द्वार सेवा संभव है। इन कसौटियों से यह भी समझ में आता है कि साधनों का उपयोग किस प्रकार बँटता है : थोक खनिज, कोयला और अनाज मुख्यतः रेल तथा जल से चलते हैं; तैयार माल, शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुएँ और छोटी खेपें सड़क से; और अधिक मूल्य वाली तथा समय-संवेदी वस्तुएँ वायु से। भारत के संदर्भ में यह भी ध्यान देने योग्य है कि सड़क तथा रेल दोनों ही यहाँ माल और यात्री यातायात का बड़ा भाग वहन करते हैं, और नीति की दिशा बहु-साधन परिवहन की ओर है, जिसमें साधनों को एक-दूसरे का पूरक बनाकर लागत घटाई जाती है।
यह तुलनात्मक प्रश्न है, जिसमें चार साधनों में से किसी एक गुण के आधार पर सर्वोत्तम चुनना है, और इसकी पूरी कठिनाई एक शब्द में है — 'लोच'। यदि प्रश्न लागत पूछता तो उत्तर जल होता, गति पूछता तो वायु, और थोक क्षमता पूछता तो रेल; इसलिए यहाँ विकल्प नहीं, स्टेम का पारिभाषिक शब्द पढ़ना निर्णायक है। ऐसे प्रश्न में सबसे सुरक्षित विधि यह है कि पहले उस गुण की एक-पंक्ति परिभाषा मन में बना लीजिए — लोच अर्थात् माँग बदलने पर सेवा को शीघ्र और सस्ते में बदल सकने की क्षमता — और फिर चारों साधनों को उसी कसौटी पर तौलिए। स्टेम दो वाक्यों का है : पहला वाक्य केवल भूमिका है कि परिवहन अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाता है, और दूसरा वाक्य असली पूछ है। हिन्दी स्तंभ में पहले वाक्य के अंत में दण्ड से पहले एक जगह छपी है और चारों विकल्प एक-एक शब्द के हैं, जिससे यह प्रश्न पढ़ने में जितना सरल दिखता है, निर्णय में उतना ही सूक्ष्म है।
मुख्य तथ्य
- परिवहन में लोच का अर्थ है माँग बदलने पर सेवा को शीघ्र और कम लागत पर बदल सकने की क्षमता — मार्ग बदलना, फेरे घटाना-बढ़ाना, छोटी खेप ढोना और नए क्षेत्रों तक पहुँचना।
- सड़क परिवहन में लोच सबसे अधिक है, क्योंकि उसमें मार्ग की स्वतंत्रता है, वाहन एक छोटी तथा विभाज्य इकाई है, और वह द्वार-से-द्वार सेवा दे सकता है।
- रेल भारी माल को लंबी दूरी तक कम लागत पर ढोने में उत्तम है, पर वह बिछी हुई पटरी तथा समय-सारणी से बँधी होती है और प्रायः स्थानक-से-स्थानक सेवा देती है।
- वायु परिवहन गति में सबसे आगे है पर लागत में सबसे महँगा, और वह हवाई अड्डों तक सीमित रहता है; इसका उपयोग हल्की, अधिक मूल्य वाली तथा समय-संवेदी वस्तुओं तक रहता है।
- जल परिवहन थोक माल के लिए सबसे सस्ता है, पर वह जलमार्गों तथा बंदरगाहों तक सीमित है, गति में सबसे धीमा है और भीतरी क्षेत्रों तक पहुँचने के लिए सड़क या रेल पर निर्भर रहता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- स्टेम के पारिभाषिक शब्द को अनदेखा करना; यहाँ प्रश्न लोच पूछ रहा है, लागत या गति नहीं, और उत्तर उसी शब्द से बदल जाता है।
- सबसे सस्ते या सबसे तेज़ साधन को ही सर्वोत्तम मान लेना, जबकि प्रत्येक कसौटी का उत्तर अलग साधन है।
- द्वार-से-द्वार सेवा की भूमिका भूल जाना, जो सड़क परिवहन की लोच का सबसे बड़ा आधार है।
- रेल तथा जल की अविभाज्य बड़ी इकाइयों को उनकी शक्ति मान लेना; क्षमता की दृष्टि से वह शक्ति है, पर लोच की दृष्टि से सीमा।
परिवहन से जुड़े प्रश्न इस परिवार की परीक्षाओं में तीन रूपों में आते हैं। पहला यही तुलनात्मक रूप है — किसी एक गुण पर चार साधनों की तुलना — जिसमें उत्तर स्टेम के पारिभाषिक शब्द से तय होता है और चारों विकल्प किसी न किसी कसौटी पर सही होते हैं। दूसरा तथ्यात्मक रूप है : कौन-सा राष्ट्रीय राजमार्ग कहाँ से कहाँ जाता है, कौन-सा जलमार्ग किस नदी पर है, कौन-सा बंदरगाह किस राज्य में है, अथवा किसी प्रस्तावित पुल से कौन-से राज्य जुड़ेंगे। तीसरा नीतिगत रूप है — माल-गलियारे, संभार-तंत्र की लागत घटाने के उपाय और बहु-साधन परिवहन की योजनाएँ। तैयारी की दृष्टि से सबसे उपयोगी एक छोटी तुलना-सारणी है जिसमें चारों साधनों के आगे गति, लागत, क्षमता और लोच लिखी हो; इस सारणी से पहला रूप पूरी तरह सध जाता है और शेष दो के लिए मानचित्र तथा योजनाओं की सूची चाहिए।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2020_Q76Which one of the following States will be directly connected with Assam by the proposed bridge between Dhubri and Phulbari over river Brahmaputra ?
- (a) Arunachal Pradesh
- (b) Meghalaya
- (c) West Bengal
- (d) Mizoram
उत्तर(b) Meghalaya
इसी परिवार का प्रश्न, जो ब्रह्मपुत्र पर प्रस्तावित पुल से जुड़ने वाले राज्य के बारे में है — परिवहन अवसंरचना का वही व्यावहारिक पक्ष, जिसकी सैद्धांतिक तुलना यह प्रश्न पूछता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
भारी तथा थोक माल को लंबी दूरी तक ढोने के लिए प्रति टन-किलोमीटर लागत की दृष्टि से सबसे सस्ता साधन कौन-सा है ?
- (a)सड़क
- (b)रेल
- (c)जल
- (d)वायु
उत्तर(c) जल — थोक माल के लिए जल परिवहन की प्रति टन-किलोमीटर लागत सबसे कम बैठती है, यद्यपि वह सबसे धीमा है और जलमार्गों तथा बंदरगाहों तक सीमित रहता है। रेल इसके बाद आती है, सड़क उससे महँगी है और वायु सबसे महँगा साधन है।
- practice — not a real PYQ
द्वार-से-द्वार सेवा देने की क्षमता निम्नलिखित में से किस परिवहन साधन की प्रमुख विशेषता है ?
- (a)सड़क
- (b)रेल
- (c)जल
- (d)वायु
उत्तर(a) सड़क — केवल सड़क परिवहन माल को उत्पादक के परिसर से उपभोक्ता तक बिना किसी अन्य साधन में बदले पहुँचा सकता है; शेष तीनों साधनों में आरंभ और अंत की दूरी प्रायः सड़क से ही तय होती है, इसलिए वे स्थानक, बंदरगाह या हवाई अड्डे तक की सेवा देते हैं।