भारत में ‘हरित क्रांति’ किस क्षेत्र में शीघ्र ही साध्य थी ?
- (a)उच्च वर्षा वाले
- (b)अल्पबल वर्षा वाले
- (c)निश्चित सिंचाई वाले
- (d)उच्चतर जनसंख्या घनत्व वाले
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) निश्चित सिंचाई वाले — हरित क्रांति उन्हीं क्षेत्रों में सबसे शीघ्र सफल हुई जहाँ जल की निश्चित और नियंत्रित उपलब्धता थी, अर्थात् नहर तथा नलकूप से सिंचित क्षेत्रों में। इसका कारण उस तकनीकी पैकेज में है जिस पर यह क्रांति टिकी थी : अधिक उपज देने वाली बौनी क़िस्में, रासायनिक उर्वरक, पीड़कनाशी और सुनिश्चित जल — चारों एक साथ। ये क़िस्में तभी अधिक उपज देती हैं जब उन्हें उर्वरक भरपूर मिले, और उर्वरक तभी काम करता है जब जल ठीक मात्रा में और ठीक समय पर मिले। वर्षा चाहे अधिक हो या कम, वह न तो मात्रा में निश्चित होती है और न समय में; इसलिए वर्षा-आधारित क्षेत्र इस पैकेज के लिए जोखिम भरे थे, जबकि सिंचित क्षेत्र में किसान जल-आपूर्ति स्वयं तय कर सकता था। यही कारण है कि हरित क्रांति सबसे पहले पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सफल हुई, जहाँ नहरों का जाल पहले से था और नलकूपों का तेज़ी से विस्तार हुआ। इसी कारण गेहूँ में सफलता चावल की तुलना में पहले और अधिक मिली, क्योंकि गेहूँ का क्षेत्र ही मुख्यतः सिंचित था। दूसरी ओर पूर्वी भारत के वर्षा-बहुल क्षेत्र, जहाँ जल अधिक था पर उस पर नियंत्रण कम, इस दौड़ में पीछे रह गए — और इसी असमानता को हरित क्रांति की प्रमुख आलोचनाओं में गिना जाता है। इसलिए निर्णायक शब्द 'निश्चित' है, 'जल' नहीं, और उत्तर (c) है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)उच्च वर्षा वाले — यह विकल्प इस भ्रम पर टिका है कि जहाँ जल अधिक है वहाँ उपज भी अधिक होगी। खेती में निर्णायक बात जल की मात्रा नहीं, उस पर नियंत्रण है। उच्च वर्षा वाले क्षेत्रों में जल फ़सल की आवश्यकता के अनुसार नहीं, मानसून के अनुसार आता है; अधिक वर्षा से जल-भराव, मृदा से पोषक तत्त्वों का बह जाना और रोग-कीट की समस्याएँ बढ़ती हैं, और उर्वरक भी बह जाता है। यही कारण है कि भारत के सबसे अधिक वर्षा वाले क्षेत्र हरित क्रांति के अग्रणी क्षेत्र नहीं बने, जबकि अपेक्षाकृत कम वर्षा वाले पंजाब और हरियाणा — जहाँ नहर तथा नलकूप की सिंचाई थी — सबसे आगे रहे। यह तुलना स्वयं इस विकल्प को काट देती है और साथ ही यह भी दिखा देती है कि प्रश्न का निर्णायक शब्द वर्षा नहीं, सिंचाई है।
- (b)अल्पबल वर्षा वाले — यहाँ पहले एक बात दर्ज करना आवश्यक है, क्योंकि यह कार्ड हिन्दी स्तंभ का है : हिन्दी में यह विकल्प 'अल्पबल वर्षा वाले' छपा है, अर्थात् कम या मंद वर्षा वाले क्षेत्र, जबकि अंग्रेज़ी स्तंभ में वही विकल्प 'Moderate rainfall' है। दोनों पाठ एक-दूसरे के सटीक अनुवाद नहीं हैं, और यह कार्ड हिन्दी पाठ के अनुसार पढ़ा रहा है। सौभाग्य से उत्तर इससे नहीं बदलता, क्योंकि दोनों पाठों में विकल्प ग़लत है : कम वर्षा वाले क्षेत्र में सिंचाई के बिना अधिक उपज देने वाली क़िस्में टिक ही नहीं सकतीं, क्योंकि उन्हें अधिक जल चाहिए; और मध्यम वर्षा भी 'निश्चित' नहीं होती, क्योंकि मानसून की मात्रा और समय दोनों बदलते रहते हैं। दोनों ही स्थितियों में जल पर किसान का नियंत्रण नहीं होता, और यही इस पैकेज की मुख्य आवश्यकता थी। इसलिए हिन्दी या अंग्रेज़ी — किसी भी पाठ में यह विकल्प उत्तर नहीं बनता।
- (d)उच्चतर जनसंख्या घनत्व वाले — जनसंख्या घनत्व से यह तय नहीं होता कि कोई क्षेत्र नई कृषि-तकनीक अपनाएगा या नहीं। इस विकल्प के पीछे संभवतः यह तर्क है कि जहाँ अधिक लोग हैं वहाँ खाद्यान्न की माँग अधिक होगी और श्रम भी सुलभ होगा, इसलिए उत्पादन बढ़ेगा — पर हरित क्रांति की बाधा माँग या श्रम नहीं थी, वह तकनीकी पैकेज और उसकी पूर्व-शर्तें थीं : सिंचाई, उर्वरक, बीज, साख और बाज़ार। भारत के कुछ सर्वाधिक सघन आबादी वाले क्षेत्रों में — विशेषकर पूर्वी भारत में — हरित क्रांति देर से पहुँची, क्योंकि वहाँ सिंचाई तथा संस्थागत साख का ढाँचा कमज़ोर था और जोतें छोटी तथा बँटी हुई थीं। इस प्रकार यह विकल्प उस चर को उत्तर बना देता है जिसका इस परिघटना से सीधा कारण-संबंध नहीं है, और परीक्षा में ऐसे विकल्प इसी परीक्षा के लिए रखे जाते हैं कि अभ्यर्थी कारण और सह-संबंध में भेद कर पाता है या नहीं।
अवधारणा
हरित क्रांति भारत में उन्नीस सौ साठ के दशक के मध्य से आरंभ हुई कृषि-तकनीकी क्रांति है, जिसका आधार एक पैकेज था — अधिक उपज देने वाली बौनी क़िस्में, रासायनिक उर्वरक, पीड़कनाशी, सुनिश्चित सिंचाई और संस्थागत साख। गेहूँ की बौनी क़िस्में मैक्सिको के अनुसंधान से आईं, जिनसे नॉर्मन बोरलॉग का नाम जुड़ा है, और चावल की उन्नत क़िस्में फिलीपींस के अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान से; भारत में इस दिशा में एम.एस. स्वामीनाथन का योगदान प्रमुख माना जाता है और नीति के स्तर पर तत्कालीन कृषि मंत्री की भूमिका उल्लेखनीय है। इस पैकेज की सबसे कठोर पूर्व-शर्त जल-नियंत्रण थी, इसलिए इसका विस्तार पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे तेज़ हुआ, जहाँ नहर और नलकूप की सिंचाई थी। परिणाम स्पष्ट थे : खाद्यान्न उत्पादन में बड़ी वृद्धि और आयात पर निर्भरता में कमी, विशेषकर गेहूँ में। आलोचनाएँ भी उतनी ही चर्चित हैं : क्षेत्रीय असमानता, क्योंकि वर्षा-आधारित तथा पूर्वी क्षेत्र पीछे रह गए; भूजल का अत्यधिक दोहन; मृदा-स्वास्थ्य में गिरावट; और बड़े किसानों को अपेक्षाकृत अधिक लाभ। इसी कारण आगे चलकर वर्षा-आधारित क्षेत्रों तथा पूर्वी भारत के लिए अलग कार्यक्रम बनाने पड़े।
यह कारण-आधारित प्रश्न है : पूछा गया है कि हरित क्रांति किस प्रकार के क्षेत्र में शीघ्र साध्य थी, अर्थात् उसकी सबसे कठोर पूर्व-शर्त क्या थी। ऐसे प्रश्न में चार विकल्पों को पर्यावरणीय या सामाजिक चरों के रूप में रखा जाता है और अभ्यर्थी को यह छाँटना होता है कि किसका कारण-संबंध सीधा है। यहाँ तीन विकल्प जल या जनसंख्या के परिमाण की बात करते हैं और केवल एक विकल्प नियंत्रण की — और उत्तर वही है, क्योंकि तकनीकी पैकेज की माँग नियंत्रण की थी। एक बात इस प्रश्नपत्र की छपाई के बारे में स्पष्ट रूप से दर्ज करने योग्य है : विकल्प (b) दोनों स्तंभों में एक जैसा नहीं है — हिन्दी में 'अल्पबल वर्षा वाले' और अंग्रेज़ी में 'Moderate rainfall'। यह कार्ड हिन्दी स्तंभ पढ़ा रहा है और हिन्दी पाठ के अनुसार ही विकल्प की व्याख्या करता है; उत्तर पर इसका कोई असर नहीं पड़ता, क्योंकि दोनों पाठों में वह विकल्प ग़लत ही है। शेष विकल्पों तथा स्टेम में दोनों स्तंभ एक ही बात कहते हैं, और 'हरित क्रांति' एकल उद्धरण-चिह्नों में छपी है।
मुख्य तथ्य
- हरित क्रांति का आधार एक पैकेज था — अधिक उपज देने वाली बौनी क़िस्में, रासायनिक उर्वरक, पीड़कनाशी, सुनिश्चित सिंचाई और संस्थागत साख — और इनमें जल-नियंत्रण सबसे कठोर पूर्व-शर्त थी।
- इसका विस्तार सबसे पहले पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हुआ, जहाँ नहर तथा नलकूप की सिंचाई उपलब्ध थी; इसी कारण गेहूँ में सफलता चावल की तुलना में पहले मिली।
- गेहूँ की बौनी क़िस्में मैक्सिको के अनुसंधान से आईं, जिनसे नॉर्मन बोरलॉग का नाम जुड़ा है, और चावल की उन्नत क़िस्में फिलीपींस के अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान से।
- भारत में इस दिशा में एम.एस. स्वामीनाथन का योगदान प्रमुख माना जाता है; परिणामस्वरूप खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा और आयात पर निर्भरता घटी।
- प्रमुख आलोचनाएँ हैं — क्षेत्रीय असमानता, क्योंकि वर्षा-आधारित तथा पूर्वी क्षेत्र पीछे रह गए; भूजल का अत्यधिक दोहन; मृदा-स्वास्थ्य में गिरावट; और लाभ का बड़े किसानों की ओर झुकाव।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- जल की मात्रा और जल पर नियंत्रण को एक मान लेना; प्रश्न का निर्णायक शब्द 'निश्चित' है, वर्षा नहीं।
- अधिक वर्षा को अधिक उपज का पर्याय समझना, जबकि अत्यधिक वर्षा से जल-भराव और पोषक तत्त्वों का बहाव होता है।
- जनसंख्या घनत्व जैसे सह-संबंधी चर को कारण मान लेना, जबकि बाधा तकनीकी पैकेज और उसकी पूर्व-शर्तें थीं।
- यह मान लेना कि हरित क्रांति सभी फ़सलों और सभी क्षेत्रों में समान रूप से पहुँची; उसका आरंभिक लाभ गेहूँ और सिंचित क्षेत्रों तक सीमित रहा।
भारतीय कृषि से प्रश्न तीन स्तरों पर आते हैं। पहला, तथ्य का स्तर — कौन-सी फ़सल किस ऋतु की है, किस राज्य में सर्वाधिक उत्पादन है, कौन-सी क्रांति किस उत्पाद से जुड़ी है। दूसरा, कारण का स्तर, जैसा यह प्रश्न है — कोई परिघटना किन परिस्थितियों में सफल हुई और क्यों; यहाँ उत्तर याद से नहीं, कारण-संबंध से निकलता है और चारे प्रायः वे चर होते हैं जो साथ-साथ चलते तो हैं पर कारण नहीं होते। तीसरा, नीति का स्तर — न्यूनतम समर्थन मूल्य, उपार्जन, सिंचाई की योजनाएँ और उनके उद्देश्य। इस प्रकार के कारण-प्रश्न में सबसे कारगर विधि यह है कि पहले उस तकनीक या नीति की पूर्व-शर्तें गिनाइए और फिर देखिए कि कौन-सा विकल्प उन्हीं पूर्व-शर्तों में से एक है। हरित क्रांति के लिए वह पूर्व-शर्त जल का नियंत्रण थी, इसलिए वही विकल्प उत्तर बनता है।
संबंधित PYQ
EPFO_APFC_2016_Q35खोलें व हल करें →What is the correct sequence of tributaries of the river Ganga from West to East ?
- (a) Yamuna, Ghaghara, Son, Gandak and Kosi
- (b) Ghaghara, Yamuna, Gandak, Kosi and Son
- (c) Yamuna, Ghaghara, Gandak, Son, and Kosi
- (d) Ghaghara, Yamuna, Kosi, Gandak and Son
उत्तर(a) Yamuna, Ghaghara, Son, Gandak and Kosi
इसी प्रश्नपत्र का भूगोल-प्रश्न, जिसमें गंगा की सहायक नदियों का क्रम पूछा गया है — वही उत्तरी मैदान, जिसकी नहर-सिंचाई ने हरित क्रांति को सबसे पहले सफल बनाया।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
हरित क्रांति के तकनीकी पैकेज की सबसे कठोर पूर्व-शर्त निम्नलिखित में से क्या थी ?
- (a)अधिक वर्षा
- (b)जल की निश्चित और नियंत्रित उपलब्धता
- (c)अधिक जनसंख्या घनत्व
- (d)बड़ी जोतों का होना
उत्तर(b) जल की निश्चित और नियंत्रित उपलब्धता — अधिक उपज देने वाली क़िस्में तभी परिणाम देती हैं जब उर्वरक और जल ठीक मात्रा तथा ठीक समय पर मिलें, और वर्षा इस दृष्टि से अनिश्चित होती है। बड़ी जोतों से सुविधा अवश्य हुई, पर पैकेज की तकनीकी पूर्व-शर्त जल-नियंत्रण ही थी।
- practice — not a real PYQ
भारत में हरित क्रांति का आरंभिक लाभ मुख्यतः किस फ़सल में दिखाई दिया था ?
- (a)गेहूँ
- (b)गन्ना
- (c)कपास
- (d)चाय
उत्तर(a) गेहूँ — बौनी क़िस्मों के आने और सिंचित क्षेत्रों में उनके तेज़ प्रसार के कारण गेहूँ के उत्पादन में सबसे पहले और सबसे बड़ी वृद्धि हुई; चावल में लाभ बाद में और कम मिला, क्योंकि उसका बड़ा क्षेत्र वर्षा-आधारित था।