निम्नलिखित घटनाक्रमों का कालानुक्रम क्या है ? 1. भारतीय कपास के निर्यात में ह्रास 2. भारत में कपास उत्पादन में तेज़ी 3. अमेरिका में गृह युद्ध नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a)1, 3 और 2
- (b)2, 3 और 1
- (c)1, 2 और 3
- (d)2, 1 और 3
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) 2, 3 और 1 — इस प्रश्न को हल करने की निर्णायक कसौटी एक ही है : भारतीय कपास के निर्यात में ह्रास सबसे अंत में आता है, और यह बात हर मानक विवरण में एक जैसी मिलती है। उन्नीसवीं शताब्दी के छठे दशक में ब्रिटेन के सूती वस्त्र उद्योग को कच्ची कपास मुख्यतः अमेरिका से मिलती थी। अमेरिका में गृह युद्ध छिड़ने पर वह आपूर्ति कट गई और लंकाशायर में कपास का अकाल पड़ा; ब्रिटेन ने वैकल्पिक स्रोत के रूप में भारत की ओर देखा, भारतीय कपास की माँग और क़ीमतें तेज़ी से बढ़ीं, और यही वह उछाल है जिसे कथन 2 'कपास उत्पादन में तेज़ी' कहता है। दक्कन के कपास-क्षेत्र में इस दौर में बोआई बढ़ी, साहूकारों से ऋण लेकर किसानों ने कपास बोई, और बंबई के व्यापारियों ने भारी लाभ कमाया। युद्ध समाप्त होते ही अमेरिकी कपास फिर बाज़ार में लौट आई, भारतीय कपास की माँग गिरी और निर्यात में ह्रास आया — यही कथन 1 है, और इसी के साथ दक्कन में ऋण-संकट गहराया, जो आगे चलकर 1875 के दक्कन दंगों की पृष्ठभूमि बना। इसलिए ह्रास अंतिम पद है। अब विकल्पों को इसी एक कसौटी पर परखिए : (a) और (c) दोनों ह्रास को सबसे पहले रख देते हैं, और (d) युद्ध को सबसे अंत में — जबकि युद्ध का प्रकरण ह्रास से पहले का है, क्योंकि ह्रास उसी की समाप्ति के बाद आया। केवल (b) ऐसा विकल्प है जिसमें ह्रास अंत में है और युद्ध उससे पहले, इसलिए वही कुंजी का उत्तर है। ध्यान दीजिए कि यह प्रश्न तीन ही पदों का है, इसलिए यहाँ अंतिम पद तय कर लेना ही पूरा उत्तर दे देता है — यही तीन-पद वाले कालानुक्रम प्रश्नों की सबसे तेज़ विधि है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)1, 3 और 2 — यह विकल्प ह्रास को सबसे पहले और उछाल को सबसे अंत में रख देता है, अर्थात् पूरी कारण-शृंखला उलट जाती है। इस प्रकरण का तर्क यह है कि पहले माँग बढ़ी और उछाल आया, और बाद में माँग गिरने पर ह्रास हुआ; ह्रास को पहले रखने का अर्थ होगा कि निर्यात पहले गिरा और फिर बढ़ा, जिसके लिए कोई कारण इस प्रकरण में नहीं है। यह चारा उस अभ्यर्थी के लिए है जो कथनों को उसी क्रम में पढ़ लेता है जिसमें वे छपे हैं और मान लेता है कि छपाई का क्रम ही कालक्रम है। ऐसे प्रश्नों में छपाई का क्रम जानबूझकर उलटा-पुलटा रखा जाता है, ताकि सूची पढ़ते ही उत्तर न बन जाए। सही आदत यह है कि पहले कारण-संबंध पहचानिए — कौन-सी घटना किसके कारण हुई — और फिर उसी क्रम में पदों को बैठाइए।
- (c)1, 2 और 3 — यह विकल्प भी ह्रास को सबसे पहले रखता है और उसके ऊपर गृह युद्ध को सबसे अंत में ले जाता है, जिससे पूरी शृंखला दो जगह टूट जाती है। यह ठीक वही क्रम है जिसमें कथन प्रश्न में छपे हैं, अर्थात् 1, 2, 3 — और यही इसका आकर्षण भी है, क्योंकि जल्दबाज़ी में 'जैसा छपा है वैसा ही होगा' मान लेना सहज है। कालानुक्रम वाले प्रश्नों में यह विकल्प प्रायः रखा ही इसलिए जाता है : वह सूची के क्रम को दोहराता है और परीक्षक जानता है कि दबाव में कुछ अभ्यर्थी उसे चुन लेंगे। यहाँ इसे हटाने के लिए केवल इतना पूछना पर्याप्त है कि क्या भारतीय कपास के निर्यात में ह्रास अमेरिकी गृह युद्ध से पहले हुआ था — उत्तर नहीं है, क्योंकि ह्रास उसी युद्ध की समाप्ति के बाद की परिघटना है।
- (d)2, 1 और 3 — यह विकल्प चारों में सबसे निकट है, क्योंकि यह उछाल को पहले रखता है — और वहीं तक ठीक भी है। भूल अंतिम दो पदों में है : यह ह्रास को युद्ध से पहले ले आता है, अर्थात् अमेरिकी गृह युद्ध को पूरे प्रकरण के अंत में रख देता है। यह असंभव है, क्योंकि भारतीय कपास के निर्यात में ह्रास का कारण ही यह था कि युद्ध समाप्त होने पर अमेरिकी कपास बाज़ार में लौट आई; युद्ध का प्रकरण ह्रास से पहले का है। इस विकल्प को हटाने की सबसे सरल जाँच यही है कि अंतिम पद देखिए — तीन पदों वाले प्रश्न में यदि अंतिम पद तय हो जाए तो प्रायः एक ही विकल्प बचता है, और यहाँ अंतिम पद ह्रास है। यही कारण है कि इस प्रश्न में पूरा क्रम बनाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।
अवधारणा
उन्नीसवीं शताब्दी में भारतीय कृषि का बड़ा भाग विश्व-बाज़ार से जुड़ चुका था, और कपास इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण है। ब्रिटेन का सूती वस्त्र उद्योग कच्ची कपास के लिए मुख्यतः अमेरिका के दास-श्रम वाले बागानों पर निर्भर था। अमेरिकी गृह युद्ध के कारण वह आपूर्ति बाधित हुई और लंकाशायर में कच्चे माल का अकाल पड़ा; ब्रिटिश उद्योग तथा व्यापारियों ने भारत की ओर रुख़ किया और भारतीय कपास की क़ीमतें तेज़ी से चढ़ीं। इसका असर दक्कन के कपास-क्षेत्र में सबसे गहरा पड़ा : किसानों ने साहूकारों से ऋण लेकर कपास की बोआई बढ़ाई, बंबई के व्यापारियों और दलालों ने भारी लाभ कमाया, और नगर में सट्टेबाज़ी का दौर चला। युद्ध समाप्त होने पर अमेरिकी कपास लौट आई, क़ीमतें गिरीं, निर्यात घटा और वही ऋण किसानों के गले की फाँस बन गया। यही पृष्ठभूमि 1875 के दक्कन दंगों की है, जिनमें किसानों ने साहूकारों के बही-खाते और ऋण-पत्र नष्ट किए और जिनकी जाँच के लिए सरकार ने आयोग बैठाया। इस पूरे प्रकरण की सीख यह है कि औपनिवेशिक भारत में किसान की समृद्धि और विपत्ति दोनों दूर के बाज़ारों की घटनाओं से बँधी थीं, और यही औपनिवेशिक कृषि-अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता मानी जाती है।
यह तीन पदों वाला कालानुक्रम प्रश्न है, और तीन पद होने के कारण इसकी हल-विधि पाँच पदों वाले प्रश्न से भिन्न है : यहाँ प्रायः एक ही निर्णय — कौन-सा पद अंत में आएगा — पूरा उत्तर दे देता है। इस प्रश्न में तीनों पद एक ही कारण-शृंखला की कड़ियाँ हैं, इसलिए तिथियाँ याद न हों तब भी कारण-संबंध से क्रम निकाला जा सकता है, और यही इस प्रकार के प्रश्नों में सबसे भरोसेमंद सहारा है। इसी प्रश्नपत्र में एक और कालानुक्रम प्रश्न है जिसमें पाँच घटनाएँ हैं और वहाँ विकल्पों की बनावट से काम लेना पड़ता है; दोनों की तुलना करने पर यह स्पष्ट होता है कि कालानुक्रम प्रश्न दो प्रकार के होते हैं — तिथि-आधारित और कारण-आधारित। हिन्दी स्तंभ की एक बात दर्ज करने योग्य है : यहाँ तीनों कथनों के अंत में कोई दण्ड नहीं छपा है, जबकि इसी प्रश्नपत्र के पिछले कथन-प्रश्न में हर कथन दण्ड पर समाप्त होता है। साथ ही हिन्दी कथन 2 'भारत में कपास उत्पादन में तेज़ी' है, जबकि अंग्रेज़ी स्तंभ में वही कथन 'Cotton boom in India' — शब्द भिन्न हैं, आशय एक ही।
मुख्य तथ्य
- अमेरिकी गृह युद्ध के कारण ब्रिटेन को अमेरिका से मिलने वाली कच्ची कपास की आपूर्ति बाधित हुई और लंकाशायर में कपास का अकाल पड़ा, जिससे ब्रिटिश उद्योग ने भारत की ओर रुख़ किया।
- इस दौर में भारतीय कपास की माँग और क़ीमतें तेज़ी से बढ़ीं; दक्कन में किसानों ने साहूकारों से ऋण लेकर कपास की बोआई बढ़ाई और बंबई के व्यापारियों ने भारी लाभ कमाया।
- युद्ध समाप्त होने पर अमेरिकी कपास बाज़ार में लौट आई, क़ीमतें गिरीं और भारतीय कपास के निर्यात में ह्रास हुआ — इसी क्रम के कारण ह्रास तीनों घटनाओं में अंतिम है।
- उछाल के समय लिया गया ऋण क़ीमतें गिरने पर किसानों के लिए संकट बन गया; यही पृष्ठभूमि 1875 के दक्कन दंगों की है, जिनमें किसानों ने साहूकारों के बही-खाते और ऋण-पत्र नष्ट किए।
- यह प्रकरण औपनिवेशिक कृषि-अर्थव्यवस्था का मानक उदाहरण है, जिसमें भारतीय किसान की आय दूर के विश्व-बाज़ार की घटनाओं से सीधे बँधी हुई थी।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- कथनों को छपाई के क्रम में ही कालक्रम मान लेना; विकल्प (c) ठीक वही क्रम छापता है जिसमें कथन दिए गए हैं।
- उछाल और ह्रास को आपस में बदल देना, जबकि ह्रास सदैव बाद की परिघटना है क्योंकि वह अमेरिकी आपूर्ति की वापसी से जुड़ा है।
- गृह युद्ध को शृंखला के अंत में रख देना, जैसा विकल्प (d) करता है — युद्ध का प्रकरण ह्रास से पहले का है।
- तीन पदों वाले प्रश्न में पूरा क्रम बनाने में समय लगाना, जबकि अंतिम पद तय कर लेना ही प्रायः एक ही विकल्प छोड़ देता है।
आधुनिक भारत के आर्थिक इतिहास से प्रश्न प्रायः तीन रूपों में आते हैं। पहला, कारण-परिणाम का सीधा प्रश्न — किस घटना के कारण भारतीय कपास की माँग बढ़ी, या किस घटना के बाद ऋण-संकट गहराया। दूसरा, कालानुक्रम, जैसा यह प्रश्न है, जिसमें एक ही शृंखला की कड़ियाँ उलट-पुलट कर दी जाती हैं; इसका उत्तर तिथियों से भी निकल सकता है और कारण-संबंध से भी, और दूसरा रास्ता अधिक भरोसेमंद है। तीसरा, आंदोलन और विद्रोह से जुड़ा तथ्य-प्रश्न — दक्कन दंगे किस वर्ष हुए, किसके विरुद्ध हुए, उनकी जाँच के लिए क्या बैठाया गया। तैयारी की दृष्टि से सबसे उपयोगी यह है कि हर आर्थिक प्रकरण को एक छोटी शृंखला के रूप में लिखिए — बाहरी घटना, भारत पर उसका असर, और उसका सामाजिक परिणाम — क्योंकि परीक्षक इन्हीं तीन कड़ियों में से किसी एक को हटाकर या क्रम बदलकर प्रश्न बनाता है।
संबंधित PYQ
EPFO_APFC_2016_Q11खोलें व हल करें →What is the chronological sequence of the following events ? 1. First Battle of Panipat 2. Vietnam War 3. French Revolution 4. First Gulf War 5. World War I Select the correct answer using the codes given below :
- (a) 1, 5, 3, 2 and 4
- (b) 3, 1, 5, 4 and 2
- (c) 3, 1, 4, 5 and 2
- (d) 1, 3, 5, 2 and 4
उत्तर(d) 1, 3, 5, 2 and 4
इसी प्रश्नपत्र का दूसरा कालानुक्रम प्रश्न, जिसमें पाँच घटनाएँ हैं और क्रम तिथियों से निकालना पड़ता है — यहाँ का क्रम कारण-संबंध से निकलता है, और दोनों का अंतर देखने योग्य है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
उन्नीसवीं शताब्दी में भारतीय कपास की माँग और क़ीमतों में आई तेज़ी का तात्कालिक कारण निम्नलिखित में से क्या था ?
- (a)भारत में रेलवे का विस्तार
- (b)अमेरिका में गृह युद्ध के कारण ब्रिटेन को होने वाली कपास-आपूर्ति का बाधित होना
- (c)बंगाल में स्थायी बंदोबस्त का लागू होना
- (d)भारत में सूती मिलों की स्थापना
उत्तर(b) अमेरिका में गृह युद्ध के कारण ब्रिटेन को होने वाली कपास-आपूर्ति का बाधित होना — इसी से लंकाशायर में कच्चे माल का अकाल पड़ा और ब्रिटिश उद्योग ने भारत की ओर रुख़ किया। रेलवे के विस्तार तथा मिलों की स्थापना का भी प्रभाव पड़ा, पर तात्कालिक कारण अमेरिकी आपूर्ति का कटना ही था; स्थायी बंदोबस्त 1793 का प्रकरण है।
- practice — not a real PYQ
दक्कन दंगे (1875) मुख्यतः किसके विरुद्ध हुए थे ?
- (a)साहूकारों के विरुद्ध
- (b)नील बागान मालिकों के विरुद्ध
- (c)रेलवे ठेकेदारों के विरुद्ध
- (d)वन विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध
उत्तर(a) साहूकारों के विरुद्ध — कपास के उछाल के दिनों में लिया गया ऋण क़ीमतें गिरने पर किसानों के लिए संकट बन गया, और किसानों ने साहूकारों के बही-खाते तथा ऋण-पत्र नष्ट किए। नील बागान मालिकों के विरुद्ध विद्रोह बंगाल में 1859-60 का प्रकरण है।