निम्नलिखित कथनों में से कौन-से, छठी शताब्दी BCE के गणों या संघों के विशिष्ट अभिलक्षणों को प्रतिबिंबित करते हैं ? 1. प्राचीन भारतीय गण अल्पतंत्र थे । 2. प्राचीन भारतीय गण ग़ैर-राजतंत्रीय राज्य थे । 3. मगध, कोसल, वत्स तथा अवंति उस युग के सर्वाधिक शक्तिशाली राज्य थे । 4. बौद्ध मठ व्यवस्था (संघ) की कार्यविधियाँ संघ राजनीति पर प्रतिरूपित होती थीं । नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1, 2 और 3
- (b)1, 2, 3 और 4
- (c)केवल 1, 2 और 4
- (d)केवल 3 और 4
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) 1, 2, 3 और 4 — चारों कथन छठी शताब्दी ईसा पूर्व के उस राजनीतिक परिदृश्य के सही विवरण हैं जिसमें गण या संघ पनपे, इसलिए कोई भी कथन छोड़ा नहीं जा सकता। कथन 1 और कथन 2 वस्तुतः एक ही बात के दो पक्ष हैं : गण-संघ अल्पतंत्र थे, अर्थात् वहाँ शासन किसी एक राजा के हाथ में नहीं, बल्कि कुल-प्रमुखों के एक समूह के हाथ में था, जिन्हें राजा कहा जाता था और जो सामूहिक रूप से निर्णय लेते थे; और इसी कारण वे ग़ैर-राजतंत्रीय राज्य कहलाते हैं। वज्जि या वृज्जि संघ, जिसकी राजधानी वैशाली थी, और मल्ल तथा शाक्य इसी प्रकार के राज्य थे — ध्यान रहे कि महावीर और बुद्ध दोनों ऐसे ही गण-संघों से आए थे। कथन 3 उसी युग का दूसरा पक्ष है : महाजनपदों में सर्वाधिक शक्तिशाली मगध, कोसल, वत्स और अवंति थे, और यही चार नाम मानक विवरण में गिनाए जाते हैं। ये राजतंत्र थे, और गण-संघों की विशिष्टता इन्हीं के सामने रखकर समझी जाती है, इसलिए यह कथन उसी प्रसंग का अंग है। कथन 4 इस युग की सबसे रोचक कड़ी है : बौद्ध मठ व्यवस्था, जिसे संघ कहा जाता है, अपनी कार्यविधियाँ इन्हीं गण-संघों की राजनीति से लेती है — सभा की बैठक, गणपूर्ति, प्रस्ताव पर विचार और सहमति से निर्णय, तथा सहमति न बनने पर मतगणना की व्यवस्था। इस प्रकार चारों कथन सही हैं और उत्तर (b) है। बनावट की दृष्टि से यह ध्यान देने योग्य है कि यहाँ 'सभी सही' वाला विकल्प ही उत्तर है, और शेष तीन विकल्प एक-एक कथन गिराकर बनाए गए हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1, 2 और 3 — यह विकल्प कथन 4 को छोड़ देता है, अर्थात् उस कड़ी को जो गण-संघों की राजनीति और बौद्ध मठ व्यवस्था को जोड़ती है। बौद्ध संघ की कार्यविधियाँ — भिक्षुओं की सभा का बैठना, गणपूर्ति की अपेक्षा, प्रस्ताव रखकर सहमति जुटाना और सहमति न बनने पर मत गिनना — उन्हीं प्रक्रियाओं पर बनी हैं जो गण-संघों में प्रचलित थीं। यह संबंध आकस्मिक नहीं था : बुद्ध स्वयं शाक्य गण से थे और उनका जीवन-क्षेत्र वही था जहाँ ये राज्य थे, इसलिए संघ के नियम बनाते समय परिचित राजनीतिक प्रक्रिया ही आदर्श बनी। जो अभ्यर्थी बौद्ध संघ को केवल धार्मिक संस्था मानता है, उसे यह कथन बाहरी लगता है और वह इसे छोड़ देता है — यही इस विकल्प का आधार है। सही दृष्टि यह है कि उस युग की धार्मिक और राजनीतिक संस्थाएँ एक ही समाज से निकली थीं और उनकी प्रक्रियाएँ एक-दूसरे से ली गई थीं।
- (c)केवल 1, 2 और 4 — यह विकल्प कथन 3 को छोड़ देता है, और उसका तर्क पहली दृष्टि में उचित लगता है : मगध, कोसल, वत्स और अवंति राजतंत्र थे, गण-संघ नहीं, इसलिए वे गण-संघों का 'अभिलक्षण' कैसे हुए। पर कथन 3 जो कहता है वह अपने आप में सही है — यही चार उस युग के सर्वाधिक शक्तिशाली राज्य थे — और वह उसी विवरण का अंग है जिसमें गण-संघों की चर्चा आती है, क्योंकि गण-संघ की विशिष्टता इन्हीं शक्तिशाली राजतंत्रों के सामने रखकर स्पष्ट होती है : एक ओर बढ़ती हुई राजतंत्रीय शक्ति, स्थायी सेना, कर-व्यवस्था और विशाल राजधानियाँ, दूसरी ओर कुल-प्रमुखों की सामूहिक सभा से चलने वाले छोटे राज्य। आयोग की कुंजी चारों कथनों को सही मानती है, और तथ्य की दृष्टि से चारों सही हैं भी। यही इस प्रश्न की सीख है : कथन-सूची में यह पूछिए कि कथन सत्य है या असत्य, न कि यह कि वह विषय के किस कोने से आया है।
- (d)केवल 3 और 4 — यह विकल्प उन्हीं दो कथनों को छोड़ देता है जो गण-संघ की परिभाषा हैं। कथन 1 कहता है कि गण अल्पतंत्र थे और कथन 2 कहता है कि वे ग़ैर-राजतंत्रीय राज्य थे — ये दोनों ही गण-संघ की पाठ्यपुस्तक-परिभाषा हैं, इसलिए इन्हें छोड़ देना प्रश्न के मूल विषय को ही छोड़ देना है। संभवतः यह विकल्प उस भ्रम पर टिका है कि अल्पतंत्र और ग़ैर-राजतंत्र एक-दूसरे के विरोधी हैं, या यह कि 'गण' शब्द से लोकतंत्र का अर्थ निकलता है और इसलिए अल्पतंत्र कहना ग़लत होगा। दोनों धारणाएँ ठीक नहीं हैं। गण-संघों में सत्ता सीमित संख्या के कुल-प्रमुखों के पास थी, सारे निवासियों के पास नहीं — दास तथा कर्मकार सभा में सम्मिलित नहीं होते थे — इसलिए उन्हें अल्पतंत्र कहना ही सटीक है, और वे राजतंत्र न होने के कारण ग़ैर-राजतंत्रीय भी हैं। दोनों कथन एक साथ सही हैं।
अवधारणा
छठी शताब्दी ईसा पूर्व का उत्तर भारत सोलह महाजनपदों में बँटा बताया जाता है, और इन महाजनपदों में दो प्रकार के राज्य थे। पहला प्रकार राजतंत्र का था, जिसमें वंशानुगत राजा, स्थायी सेना, नियमित कर-व्यवस्था और नगर-दुर्ग वाली राजधानियाँ विकसित हुईं; मगध, कोसल, वत्स और अवंति इसी प्रकार के और सबसे शक्तिशाली राज्य थे, और अंततः मगध ने शेष सबको अपने में मिला लिया। दूसरा प्रकार गण या संघ का था — ग़ैर-राजतंत्रीय राज्य, जहाँ शासन कुल-प्रमुखों की सभा से चलता था और जिनमें प्रत्येक प्रमुख को राजा कहा जाता था। वज्जि या वृज्जि संघ, जिसका केंद्र वैशाली था और जिसमें लिच्छवि प्रमुख थे, इस प्रकार का सबसे प्रसिद्ध राज्य है; मल्ल तथा शाक्य भी इसी कोटि के थे। ये अल्पतंत्र थे, लोकतंत्र नहीं, क्योंकि सभा में भागीदारी कुछ ही कुलों तक सीमित थी। इनकी प्रक्रियाओं का सबसे स्पष्ट प्रमाण बौद्ध संघ के नियमों में मिलता है, जहाँ सभा, गणपूर्ति, प्रस्ताव और मतगणना की वही व्यवस्थाएँ अपनाई गईं। यह भी उल्लेखनीय है कि बुद्ध और महावीर दोनों गण-संघों के परिवारों से आए थे, और बौद्ध ग्रंथों में वज्जि संघ की एकता तथा उसके नियमों की प्रशंसा आती है।
यह चार कथनों वाला प्रश्न है और इसका उत्तर 'सभी सही' है, जो कथन-सूची वाले प्रश्नों में एक विशेष सावधानी माँगता है। ऐसे प्रश्न में अभ्यर्थी प्रायः यह मान लेता है कि कोई न कोई कथन ग़लत अवश्य होगा, और फिर सबसे अपरिचित दिखने वाले कथन को ग़लत ठहराकर छोटा विकल्प चुन लेता है। यहाँ वह अपरिचित कथन दो हो सकते हैं — कथन 4, जो बौद्ध संघ की कार्यविधि की बात करता है, और कथन 3, जो राजतंत्रों के नाम गिनाता है — और तीनों ग़लत विकल्प ठीक इन्हीं दो को गिराकर बनाए गए हैं। इसलिए यहाँ अनुशासन यह है कि हर कथन को अलग-अलग सत्य या असत्य ठहराइए और यह न पूछिए कि वह विषय के कितने निकट है। हिन्दी स्तंभ में 'BCE' रोमन लिपि में ही छपा है और शताब्दी शब्दों में — 'छठी शताब्दी' — जबकि अंग्रेज़ी स्तंभ में उर्ध्वांकित रूप के साथ अंक में। चारों कथन अलग-अलग पंक्तियों में हैं और प्रत्येक दण्ड पर समाप्त होता है।
मुख्य तथ्य
- गण या संघ ग़ैर-राजतंत्रीय राज्य थे, जिनमें शासन कुल-प्रमुखों की सभा से चलता था और प्रत्येक प्रमुख को राजा कहा जाता था; भागीदारी सीमित होने के कारण इन्हें अल्पतंत्र कहा जाता है।
- वज्जि या वृज्जि संघ, जिसका केंद्र वैशाली था और जिसमें लिच्छवि प्रमुख थे, इस प्रकार का सबसे प्रसिद्ध राज्य है; मल्ल तथा शाक्य भी गण-संघ थे।
- छठी शताब्दी ईसा पूर्व के महाजनपदों में सर्वाधिक शक्तिशाली मगध, कोसल, वत्स और अवंति थे, और अंततः मगध ने शेष राज्यों को अपने में मिला लिया।
- बौद्ध संघ की कार्यविधियाँ — सभा का बैठना, गणपूर्ति, प्रस्ताव पर सहमति और सहमति न बनने पर मतगणना — गण-संघों की राजनीतिक प्रक्रियाओं पर आधारित मानी जाती हैं।
- बुद्ध शाक्य गण से थे और महावीर भी एक गण-संघ के परिवार से आए थे; बौद्ध ग्रंथों में वज्जि संघ की एकता और उसके नियमों की प्रशंसा मिलती है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'सभी सही' वाले विकल्प से बचना और किसी एक कथन को केवल अपरिचित होने के कारण गिरा देना — तीनों ग़लत विकल्प इसी प्रवृत्ति पर बने हैं।
- गण-संघ को लोकतंत्र मान लेना; सत्ता सीमित कुलों के प्रमुखों के पास थी, इसलिए अल्पतंत्र कहना ही सटीक है।
- बौद्ध संघ को केवल धार्मिक संस्था मानकर कथन 4 को विषय से बाहर समझ लेना, जबकि उसकी कार्यविधियाँ गण-संघों से ली गई मानी जाती हैं।
- कथन को इस आधार पर गिराना कि वह विषय के दूसरे कोने से आया है — कथन 3 राजतंत्रों के नाम गिनाता है, फिर भी उसी युग का सही विवरण है।
प्राचीन भारत का यह खंड इन परीक्षाओं में तीन ढंगों से आता है। पहला, नाम और स्थान का सुमेलन — कौन-सा महाजनपद, कौन-सी राजधानी, कौन-सा वंश। दूसरा, अवधारणा का भेद — गण-संघ और राजतंत्र में अंतर, अल्पतंत्र और लोकतंत्र में अंतर, या सभा तथा समिति जैसे वैदिक संस्थानों से इनका संबंध। तीसरा, कथन-सूची, जैसा यह प्रश्न है, जिसमें एक ही युग के अलग-अलग पक्षों के कथन एक साथ रखकर सही कथन छँटवाए जाते हैं; ऐसे प्रश्न में उत्तर प्रायः 'सभी सही' या 'तीन सही' होता है, क्योंकि कथन मानक पाठ्यपुस्तक से उठाए जाते हैं। तैयारी की दृष्टि से सबसे उपयोगी वह पृष्ठ है जिसमें महाजनपदों की सूची, चार सर्वाधिक शक्तिशाली राज्यों के नाम, गण-संघ की परिभाषा और बौद्ध संघ से उसका संबंध — चारों बातें एक साथ लिखी हों, क्योंकि प्रश्न प्रायः इन्हीं चार बिंदुओं को आपस में मिलाकर बनते हैं।
संबंधित PYQ
EPFO_APFC_2016_Q16खोलें व हल करें →Ayodhya is located at the bank of which river ?
- (a) Falgu
- (b) Ganga
- (c) Sarayu
- (d) Yamuna
उत्तर(c) Sarayu
इसी प्रश्नपत्र का वह प्रश्न, जो अयोध्या और सरयू पर है — अयोध्या उसी कोसल की राजधानी थी जिसका नाम इस प्रश्न के कथन 3 में सर्वाधिक शक्तिशाली राज्यों में गिनाया गया है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
छठी शताब्दी ईसा पूर्व के गण-संघों के संदर्भ में, वज्जि संघ का केंद्र निम्नलिखित में से कौन-सा था ?
- (a)राजगृह
- (b)वैशाली
- (c)कौशांबी
- (d)उज्जयिनी
उत्तर(b) वैशाली — वज्जि या वृज्जि संघ का केंद्र वैशाली था और उसमें लिच्छवि प्रमुख कुल थे। राजगृह मगध की प्रारंभिक राजधानी थी, कौशांबी वत्स की और उज्जयिनी अवंति की — ये तीनों राजतंत्र थे, गण-संघ नहीं।
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सर्वाधिक शक्तिशाली महाजनपदों का सही उदाहरण है ?
- (a)शाक्य और मल्ल
- (b)कोलिय और मोरिय
- (c)मगध और अवंति
- (d)वज्जि और शाक्य
उत्तर(c) मगध और अवंति — सर्वाधिक शक्तिशाली महाजनपद मगध, कोसल, वत्स और अवंति गिनाए जाते हैं, और ये राजतंत्र थे। शाक्य, मल्ल, कोलिय, मोरिय तथा वज्जि गण-संघ थे, अर्थात् ग़ैर-राजतंत्रीय राज्य, इसलिए वे इस सूची में नहीं आते।