खिलाफत कमेटी ने अपनी किस स्थान पर संपन्न बैठक में महात्मा गाँधी के, सरकार के विरुद्ध अहिंसात्मक असहयोग विरोध के सुझाव को स्वीकार किया था ?
- (a)बंबई
- (b)नागपुर
- (c)इलाहाबाद
- (d)कानपुर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) इलाहाबाद — खिलाफत आंदोलन के नेतृत्व ने महात्मा गाँधी के अहिंसात्मक असहयोग के सुझाव को जून 1920 में इलाहाबाद में हुई अपनी बैठक में स्वीकार किया था, और यहीं से असहयोग का कार्यक्रम — सरकारी उपाधियों का त्याग, विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा न्यायालयों का बहिष्कार — औपचारिक रूप से तय हुआ। इस निर्णय का क्रम में स्थान समझना उत्तर से अधिक महत्त्वपूर्ण है। खिलाफत का प्रश्न प्रथम विश्व युद्ध के बाद उठा, जब पराजित तुर्की के साथ की जाने वाली संधि और उस्मानी ख़लीफ़ा की स्थिति को लेकर भारतीय मुसलमानों में असंतोष फैला; 1919 में खिलाफत दिवस मनाया गया और उसी वर्ष अखिल भारतीय खिलाफत सम्मेलन हुआ, जिसमें गाँधी सम्मिलित हुए। गाँधी ने इसे केवल एक समुदाय का प्रश्न न मानकर हिन्दू-मुस्लिम एकता के आधार पर व्यापक सत्याग्रह का अवसर देखा, विशेषकर इसलिए कि रौलट अधिनियम और जलियाँवाला बाग़ के बाद सरकार के प्रति असंतोष पहले से ही गहरा था। जून 1920 की इलाहाबाद बैठक इसी दिशा का निर्णायक मोड़ थी : वहीं असहयोग को कार्यक्रम के रूप में स्वीकार किया गया। इसके बाद अगस्त 1920 में आंदोलन आरंभ हुआ, सितंबर 1920 में कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में कांग्रेस ने उसे स्वीकृति दी और दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में उसकी पुष्टि हुई। इसलिए इलाहाबाद वह स्थान है जहाँ खिलाफत समिति ने सुझाव स्वीकार किया, और नागपुर वह स्थान जहाँ कांग्रेस ने। यही भेद इस प्रश्न की धुरी है और उत्तर (c) है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)बंबई — बंबई खिलाफत आंदोलन के संगठन का केंद्र अवश्य था — केंद्रीय खिलाफत समिति वहीं बनी और वहीं से आंदोलन का संचालन होता रहा — पर प्रश्न संगठन का केंद्र नहीं पूछ रहा, बल्कि वह बैठक पूछ रहा है जिसमें गाँधी का असहयोग वाला सुझाव स्वीकार किया गया। यही इस विकल्प का जाल है : जो अभ्यर्थी 'खिलाफत समिति' सुनते ही उसके मुख्यालय का नगर याद कर लेता है, वह यहीं रुक जाता है। बंबई भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के अनेक निर्णयों का स्थल रहा है — 1885 में कांग्रेस का पहला अधिवेशन और 1942 का भारत छोड़ो प्रस्ताव भी वहीं हुए — और इसी परिचय के कारण यह विकल्प हर ऐसे प्रश्न में सुरक्षित दिखता है। संगठन का केंद्र, अधिवेशन का स्थल और किसी विशेष निर्णय की बैठक तीन अलग बातें हैं, और परीक्षा प्रायः इन्हीं तीनों को आपस में बदलकर पूछती है।
- (b)नागपुर — नागपुर का संबंध इसी घटनाक्रम से है, पर एक चरण आगे का : दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने असहयोग के कार्यक्रम की पुष्टि की और अपने संविधान में भी परिवर्तन किए। इसलिए यह विकल्प कालक्रम की भूल पर टिका है — नागपुर में कांग्रेस ने स्वीकार किया, खिलाफत समिति ने नहीं, और वह भी उस बैठक के महीनों बाद जिसकी बात यह प्रश्न कर रहा है। ऐसे प्रश्नों में यह पूछना सबसे उपयोगी होता है कि 'किसने' स्वीकार किया और 'कब' — क्योंकि 1920 का पूरा वर्ष स्वीकृतियों की शृंखला है : जून में इलाहाबाद में खिलाफत समिति, अगस्त में आंदोलन का आरंभ, सितंबर में कलकत्ता का विशेष अधिवेशन और दिसंबर में नागपुर की पुष्टि। इस शृंखला को क्रम में याद रखने पर नागपुर और इलाहाबाद कभी नहीं बदलते।
- (d)कानपुर — कानपुर का इस प्रकरण से कोई सीधा संबंध नहीं है। राष्ट्रीय आंदोलन में उसका सबसे प्रसिद्ध उल्लेख 1925 के कांग्रेस अधिवेशन का है, जिसकी अध्यक्षता सरोजिनी नायडू ने की थी और जो इस कारण स्मरण रहता है कि वे कांग्रेस की अध्यक्षता करने वाली पहली भारतीय महिला थीं; उसी दिसंबर में कानपुर में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का संगठनात्मक सम्मेलन भी हुआ था। ये दोनों घटनाएँ खिलाफत-असहयोग के प्रकरण से पाँच वर्ष बाद की हैं। इस विकल्प का काम केवल इतना है कि सूची में एक और परिचित उत्तर भारतीय नगर जोड़ दिया जाए, जिससे अभ्यर्थी 'उत्तर प्रदेश का कोई नगर' सोचकर इलाहाबाद और कानपुर के बीच झूल जाए। ऐसे झूलते समय सही सहारा घटना की तिथि है : जून 1920 की बैठक इलाहाबाद में हुई थी।
अवधारणा
खिलाफत और असहयोग को एक ही आंदोलन के दो पहलुओं के रूप में समझना चाहिए। खिलाफत का प्रश्न प्रथम विश्व युद्ध के बाद उठा, जब पराजित उस्मानी साम्राज्य के साथ की जाने वाली संधि और ख़लीफ़ा की स्थिति को लेकर भारतीय मुसलमानों में असंतोष फैला; अली बंधुओं तथा अन्य नेताओं के नेतृत्व में केंद्रीय खिलाफत समिति बनी और 1919 में खिलाफत दिवस मनाया गया। उसी समय रौलट अधिनियम के विरुद्ध सत्याग्रह और जलियाँवाला बाग़ की घटना ने सरकार के प्रति व्यापक असंतोष पैदा किया था। गाँधी ने इन दोनों धाराओं को जोड़ने का अवसर देखा और असहयोग का कार्यक्रम प्रस्तावित किया — उपाधियों का त्याग, सरकारी विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा न्यायालयों का बहिष्कार, विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार और स्वदेशी। जून 1920 में इलाहाबाद की बैठक में खिलाफत नेतृत्व ने यह कार्यक्रम स्वीकार किया, अगस्त 1920 में आंदोलन आरंभ हुआ, सितंबर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन में कांग्रेस ने उसे अपनाया और दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में उसकी पुष्टि हुई। आंदोलन फरवरी 1922 की चौरी-चौरा की घटना के बाद गाँधी द्वारा स्थगित कर दिया गया।
यह तिथि और स्थान वाला तथ्य-प्रश्न है, पर उसकी हल-विधि रटने की नहीं, क्रम की है। 1920 का वर्ष असहयोग की स्वीकृतियों की शृंखला है, और परीक्षक उसी शृंखला की दो कड़ियों को आपस में बदलकर चारा बनाता है — यहाँ इलाहाबाद की खिलाफत बैठक और नागपुर का कांग्रेस अधिवेशन। इसलिए इस विषय की तैयारी में स्थानों की सूची नहीं, घटनाओं की समयरेखा बनानी चाहिए, जिसमें हर कड़ी के साथ तीन बातें लिखी हों : किसने निर्णय लिया, कहाँ लिया और कब लिया। हिन्दी स्तंभ की बनावट पर भी ध्यान दीजिए : यहाँ स्टेम पूरा प्रश्नवाक्य है और प्रश्नचिह्न पर समाप्त होता है, जबकि अंग्रेज़ी स्तंभ का वही स्टेम 'in its meeting at' पर बिना विराम-चिह्न के अधूरा छूटता है और विकल्प उसे पूरा करते हैं। हिन्दी वाक्य में 'महात्मा गाँधी के, सरकार के विरुद्ध' में गाँधी के बाद जो अल्पविराम छपा है वह वाक्य को कुछ कठिन बना देता है, पर पूछ वही है — किस स्थान की बैठक।
मुख्य तथ्य
- खिलाफत नेतृत्व ने महात्मा गाँधी के अहिंसात्मक असहयोग के सुझाव को जून 1920 में इलाहाबाद में हुई बैठक में स्वीकार किया, और वहीं असहयोग का कार्यक्रम तय हुआ।
- असहयोग आंदोलन अगस्त 1920 में आरंभ हुआ; सितंबर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन में कांग्रेस ने उसे अपनाया और दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में उसकी पुष्टि की।
- खिलाफत का प्रश्न प्रथम विश्व युद्ध के बाद उस्मानी ख़लीफ़ा की स्थिति को लेकर उठा; केंद्रीय खिलाफत समिति का केंद्र बंबई था और 1919 में खिलाफत दिवस मनाया गया।
- असहयोग के कार्यक्रम में उपाधियों का त्याग, सरकारी विद्यालयों-महाविद्यालयों तथा न्यायालयों का बहिष्कार, विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार और स्वदेशी सम्मिलित थे।
- फरवरी 1922 की चौरी-चौरा की घटना के बाद गाँधी ने असहयोग आंदोलन स्थगित कर दिया; कानपुर का 1925 का कांग्रेस अधिवेशन, जिसकी अध्यक्षता सरोजिनी नायडू ने की, इससे बाद का प्रकरण है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- संगठन के केंद्र को निर्णय की बैठक मान लेना; केंद्रीय खिलाफत समिति का केंद्र बंबई था, पर असहयोग का सुझाव इलाहाबाद की बैठक में स्वीकार हुआ।
- खिलाफत समिति और कांग्रेस की स्वीकृतियों को एक कर देना — नागपुर में कांग्रेस ने पुष्टि की, और वह दिसंबर 1920 की घटना है।
- 1920 की घटनाओं का क्रम भूल जाना; जून, अगस्त, सितंबर और दिसंबर की चार कड़ियाँ अलग-अलग हैं और परीक्षक उन्हीं को आपस में बदलता है।
- 'उत्तर प्रदेश का कोई नगर' सोचकर इलाहाबाद और कानपुर के बीच अनुमान लगाना, जबकि कानपुर का संबंध 1925 के अधिवेशन से है।
राष्ट्रीय आंदोलन का यह खंड इस परिवार की परीक्षाओं में तीन ढंगों से पूछा जाता है। पहला, स्थान और तिथि का सीधा तथ्य — कौन-सा निर्णय कहाँ हुआ, कौन-सा अधिवेशन किस वर्ष और किसकी अध्यक्षता में हुआ। दूसरा, कालानुक्रम — चार घटनाओं को क्रम में लगाना, जिसमें 1919 से 1922 तक की कड़ियाँ मिलाकर पूछी जाती हैं। तीसरा, कार्यक्रम की अंतर्वस्तु — असहयोग में क्या-क्या सम्मिलित था और सविनय अवज्ञा से वह किस बात में भिन्न था। तीनों के लिए एक ही तैयारी काम करती है : प्रत्येक वर्ष की एक पंक्ति, जिसमें घटना, स्थान और निर्णय लेने वाली संस्था लिखी हो। इस प्रश्न जैसे स्थान-प्रश्न में विकल्प प्रायः उन्हीं नगरों के होते हैं जो उसी दशक की किसी दूसरी घटना से जुड़े हैं, इसलिए हर नगर के साथ उसकी अपनी घटना याद रखना ही सबसे कारगर बचाव है।
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EPFO_APFC_2016_Q22खोलें व हल करें →What is the chronological sequence of the following developments ? 1. Decline in the export of Indian cotton 2. Cotton boom in India 3. Civil War in America Select the correct answer using the codes given below :
- (a) 1, 3 and 2
- (b) 2, 3 and 1
- (c) 1, 2 and 3
- (d) 2, 1 and 3
उत्तर(b) 2, 3 and 1
इसी प्रश्नपत्र का वह प्रश्न, जिसमें उन्नीसवीं शताब्दी के अमेरिकी गृह युद्ध और भारतीय कपास के व्यापार को क्रम में लगाना है — आधुनिक भारत के खंड का दूसरा रूप, जहाँ स्थान नहीं, कालक्रम परखा जाता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने असहयोग आंदोलन के कार्यक्रम की पुष्टि किस अधिवेशन में की थी ?
- (a)लखनऊ अधिवेशन, 1916
- (b)अमृतसर अधिवेशन, 1919
- (c)नागपुर अधिवेशन, 1920
- (d)गया अधिवेशन, 1922
उत्तर(c) नागपुर अधिवेशन, 1920 — दिसंबर 1920 के इस अधिवेशन में कांग्रेस ने असहयोग के कार्यक्रम की पुष्टि की और अपने संगठनात्मक ढाँचे में भी परिवर्तन किए। लखनऊ 1916 कांग्रेस-लीग समझौते के लिए स्मरण किया जाता है और गया 1922 विधान-मंडल प्रवेश के प्रश्न पर हुए मतभेद के लिए।
- practice — not a real PYQ
असहयोग आंदोलन को महात्मा गाँधी ने किस घटना के बाद स्थगित कर दिया था ?
- (a)जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड
- (b)चौरी-चौरा की घटना
- (c)साइमन कमीशन का आगमन
- (d)बंगाल का विभाजन
उत्तर(b) चौरी-चौरा की घटना — फरवरी 1922 की इस घटना में भीड़ द्वारा हुई हिंसा के बाद गाँधी ने आंदोलन स्थगित कर दिया, क्योंकि उनका आग्रह अहिंसा पर था। जलियाँवाला बाग़ 1919 की घटना है, साइमन कमीशन 1928 में आया और बंगाल का विभाजन 1905 का प्रकरण है।