अयोध्या किस नदी के तट पर अवस्थित है ?
- (a)फल्गु
- (b)गंगा
- (c)सरयू
- (d)यमुना
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) सरयू — अयोध्या उत्तर प्रदेश में सरयू नदी के तट पर बसी है। आधुनिक भूगोल में यह वही धारा है जिसे घाघरा कहा जाता है : यह नदी तिब्बत के मापचाचुंगो हिमनदों से निकलती है, नेपाल में करनाली कहलाती है — जहाँ यह उस देश की सबसे लंबी नदी है — और भारत में अवध क्षेत्र से बहते समय स्थानीय रूप से सरयू कहलाती है। इसकी कुल लंबाई लगभग 1080 किलोमीटर है, यह जल-आयतन की दृष्टि से गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी है और लंबाई में यमुना के बाद दूसरी; बिहार के सारण ज़िले में रेवेलगंज के पास यह गंगा में मिल जाती है। अयोध्या का महत्त्व इसी नदी से जुड़ा है : यह प्राचीन कोसल जनपद की राजधानी थी और रामायण की परंपरा में राम की जन्मभूमि मानी जाती है, तथा जैन परंपरा में भी इसे अनेक तीर्थंकरों से जोड़ा जाता है। इसलिए (c) सही है। इस प्रकार के 'नगर किस नदी पर' वाले प्रश्न का सबसे कारगर उत्तर एक छोटी सूची है, जिसमें नगर और नदी दोनों साथ याद हों, क्योंकि विकल्प प्रायः उन्हीं नदियों के होते हैं जो उसी प्रदेश या उसी नदी-तंत्र की हों। यहाँ चारों विकल्प उत्तर भारत की ही नदियाँ हैं, और उनमें से दो — गंगा तथा यमुना — इतनी बड़ी हैं कि अनुमान लगाने वाले को सुरक्षित लगती हैं। ध्यान रखिए कि सरयू स्वयं गंगा-तंत्र की ही नदी है, इसलिए 'गंगा' चुनना पूरी तरह अनर्गल नहीं लगता; पर प्रश्न यह पूछ रहा है कि नगर किस धारा के तट पर बसा है, न कि वह किस नदी-तंत्र में आता है, और उस पूछ का उत्तर सरयू ही है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)फल्गु — फल्गु बिहार की नदी है और उसका सुपरिचित नगर गया है, अयोध्या नहीं। यह नदी लीलाजन तथा मोहाना धाराओं के मिलने से बनती है और गया नगर के पास से बहती है, जहाँ पितरों के निमित्त पिंडदान की परंपरा इसी नदी के तट से जुड़ी है; बोधगया भी इसी क्षेत्र में है। इसकी एक भौगोलिक विशेषता यह है कि वर्ष के बड़े भाग में इसका जल रेत के नीचे बहता है और धरातल पर विस्तृत रेतीला पाट दिखाई देता है — इसी विशेषता से जुड़ी अनेक अनुश्रुतियाँ भी हैं। इस विकल्प का काम यहाँ यह है कि जो अभ्यर्थी नदी को तीर्थ-स्थल की धुँधली स्मृति से जोड़ता है, वह दो तीर्थ-नगरों को आपस में बदल दे। नगर और नदी की जोड़ी अलग-अलग याद रखने पर यह चारा प्रभावहीन हो जाता है।
- (b)गंगा — गंगा के तट पर बसे नगरों की सूची लंबी है — हरिद्वार, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, पटना — पर अयोध्या उसमें नहीं है। यह विकल्प इसलिए आकर्षक है कि सरयू अंततः गंगा में ही मिलती है, इसलिए अयोध्या गंगा-तंत्र में तो आती है; किन्तु प्रश्न नदी-तंत्र नहीं, तट पूछ रहा है। यही भेद इस प्रकार के प्रश्नों में बार-बार निर्णायक होता है : कोई नगर किसी बड़ी नदी की सहायक नदी के तट पर बसा हो सकता है, और सही उत्तर वही सहायक नदी होगी। अवध क्षेत्र में यह भेद और भी स्पष्ट है, क्योंकि सरयू अपने आप में एक बड़ी नदी है — जल-आयतन में गंगा की सबसे बड़ी सहायक — और उसका अपना नाम तथा अपनी सांस्कृतिक पहचान है। इसलिए 'बड़ी नदी चुन लो' वाली रणनीति यहाँ काम नहीं करती।
- (d)यमुना — यमुना यमुनोत्री से निकलकर दिल्ली, मथुरा और आगरा से होती हुई प्रयागराज में गंगा से मिलती है, और उसके तट के प्रसिद्ध नगर यही हैं — अयोध्या उनमें नहीं है। यह विकल्प उस अभ्यर्थी के लिए है जो उत्तर भारत की दो सबसे परिचित नदियों में से किसी एक पर दाँव लगाता है। भूगोल की दृष्टि से भी यह असंगत है : यमुना गंगा के दक्षिण-पश्चिम की ओर बहती है और प्रयागराज पर उससे मिल जाती है, जबकि अयोध्या गंगा के उत्तर के मैदान में है, जहाँ की नदियाँ हिमालय तथा नेपाल से आती हैं — घाघरा या सरयू, राप्ती, गंडक और कोसी। इसलिए अवध के किसी नगर के लिए यमुना का उत्तर दिशा की दृष्टि से ही नहीं बैठता, और यही जाँच ऐसे प्रश्नों में बिना रटे भी काम कर जाती है।
अवधारणा
उत्तर भारत के मैदान की नदियाँ तीन वर्गों में बाँटी जा सकती हैं और नगरों की जोड़ियाँ इसी वर्गीकरण से सधती हैं। पहला वर्ग गंगा और यमुना का है, जिनके तट पर सबसे अधिक प्रसिद्ध नगर बसे हैं। दूसरा वर्ग गंगा की उन बड़ी उत्तरी सहायक नदियों का है जो हिमालय या नेपाल से आती हैं — घाघरा, जिसे अवध में सरयू कहते हैं, गंडक, कोसी और राप्ती; इनके तट पर अयोध्या, गोरखपुर जैसे नगर हैं। तीसरा वर्ग दक्षिण से आने वाली प्रायद्वीपीय सहायक नदियों का है, जिनमें सोन प्रमुख है। सरयू या घाघरा की पहचान इस प्रकार बनती है : उद्गम तिब्बत के मापचाचुंगो हिमनद, नेपाल में नाम करनाली और वहाँ की सबसे लंबी नदी, कुल लंबाई लगभग 1080 किलोमीटर, जल-आयतन में गंगा की सबसे बड़ी सहायक तथा लंबाई में यमुना के बाद दूसरी, और संगम बिहार के सारण ज़िले में रेवेलगंज के पास। अयोध्या का ऐतिहासिक महत्त्व भी इसी नदी से जुड़ा है — यह प्राचीन कोसल जनपद की राजधानी थी, और कोसल छठी शताब्दी ईसा पूर्व के उन महाजनपदों में गिना जाता है जिनका उल्लेख इसी प्रश्नपत्र के एक अन्य प्रश्न में भी आता है।
यह प्रश्नपत्र का सबसे सीधा प्रश्न-प्रकार है : एक पंक्ति का स्टेम और एक-एक शब्द के चार विकल्प, जिनमें कोई कथन-सूची, कूट या गणना नहीं। ऐसे प्रश्न पर समय बहुत कम देना चाहिए — या तो जोड़ी याद है, या नहीं — और बचा हुआ समय उन प्रश्नों को देना चाहिए जिनमें विचार से उत्तर निकाला जा सकता है। फिर भी यहाँ अनुमान की एक विधि काम आती है : विकल्पों की भौगोलिक दिशा जाँचिए। अयोध्या उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में है, जो गंगा के उत्तर का मैदान है; उस मैदान की नदियाँ हिमालय और नेपाल से आती हैं। इससे यमुना तुरंत कट जाती है, क्योंकि वह गंगा के दक्षिण-पश्चिम की ओर बहती है, और फल्गु भी, क्योंकि वह बिहार की नदी है। शेष गंगा और सरयू में से गंगा का तट अयोध्या नहीं है। इस प्रकार तीन में से दो विकल्प भूगोल की सामान्य समझ से ही हट जाते हैं। हिन्दी स्तंभ में चारों विकल्प केवल नदी-नाम हैं और देवनागरी में हैं, इसलिए यहाँ दोनों स्तंभों में कोई अंतर नहीं है।
मुख्य तथ्य
- अयोध्या उत्तर प्रदेश में सरयू नदी के तट पर बसी है और प्राचीन कोसल जनपद की राजधानी थी; रामायण की परंपरा में यह राम की जन्मभूमि मानी जाती है।
- आधुनिक भूगोल में सरयू वही धारा है जिसे घाघरा कहा जाता है — तिब्बत के मापचाचुंगो हिमनदों से निकलकर नेपाल में करनाली नाम से बहने वाली नदी, जो अवध में सरयू कहलाती है।
- घाघरा की कुल लंबाई लगभग 1080 किलोमीटर है; यह जल-आयतन की दृष्टि से गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी है और लंबाई में यमुना के बाद दूसरी।
- घाघरा बिहार के सारण ज़िले में रेवेलगंज के पास गंगा में मिलती है; करनाली नेपाल की सबसे लंबी नदी है और वहाँ उसकी लंबाई लगभग 507 किलोमीटर है।
- फल्गु बिहार की नदी है और गया नगर उसी के तट पर है, जहाँ पिंडदान की परंपरा जुड़ी है; यमुना के तट के प्रसिद्ध नगर दिल्ली, मथुरा और आगरा हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- नदी-तंत्र और तट को एक मान लेना; अयोध्या गंगा-तंत्र में है, पर बसी सरयू के तट पर है और प्रश्न तट पूछ रहा है।
- दो तीर्थ-नगरों को आपस में बदल देना — फल्गु का नगर गया है, अयोध्या नहीं, और यही चारा विकल्प (a) में रखा गया है।
- अपरिचित प्रश्न में सबसे बड़ी नदी चुन लेना; यह रणनीति ऐसे प्रश्नों में प्रायः ग़लत उत्तर देती है, क्योंकि नगर सहायक नदियों पर भी बसते हैं।
- एक ही नदी के अलग-अलग नामों से भ्रमित होना — करनाली, घाघरा और सरयू एक ही धारा के नाम हैं, और परीक्षा दोनों नाम अलग-अलग विकल्पों में रख सकती है।
नगर और नदी की जोड़ी इस परिवार की परीक्षाओं में तीन रूपों में आती है। पहला यही सीधा रूप है — कोई नगर किस नदी के तट पर है — जिसका उत्तर याद पर टिकता है, पर दिशा और प्रदेश की जाँच से आधे विकल्प काटे जा सकते हैं। दूसरा रूप सुमेलन का है, जिसमें चार नगर और चार नदियाँ दी जाती हैं और कूट चुनना होता है; वहाँ एक निश्चित जोड़ी पहचानकर शेष विकल्प काटे जाते हैं। तीसरा रूप अनुक्रम का है — जैसे इसी प्रश्नपत्र में गंगा की सहायक नदियों को पश्चिम से पूर्व की ओर क्रम में लगाने वाला प्रश्न — जिसमें केवल नाम नहीं, संगम-स्थलों की सापेक्ष स्थिति भी जाननी पड़ती है। तीनों रूपों के लिए तैयारी की एक ही इकाई पर्याप्त है : एक सूची जिसमें नदी का उद्गम, उसके प्रमुख नाम, तट के दो-तीन नगर और संगम-स्थल एक साथ लिखे हों। ऐसी सूची बना लेने पर यह पूरा खंड कुछ पृष्ठों में सिमट जाता है।
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- (a) Yamuna, Ghaghara, Son, Gandak and Kosi
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- (c) Yamuna, Ghaghara, Gandak, Son, and Kosi
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उत्तर(a) Yamuna, Ghaghara, Son, Gandak and Kosi
इसी प्रश्नपत्र का वह प्रश्न, जिसमें गंगा की सहायक नदियों को पश्चिम से पूर्व की ओर क्रम में लगाना है और जहाँ घाघरा — अर्थात् यही सरयू — क्रम का एक पद है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
घाघरा नदी, जिसे अवध क्षेत्र में सरयू कहा जाता है, नेपाल में किस नाम से जानी जाती है ?
- (a)करनाली
- (b)त्रिशूली
- (c)अरुण
- (d)बागमती
उत्तर(a) करनाली — यह नदी तिब्बत से निकलकर नेपाल में करनाली नाम से बहती है, जहाँ यह उस देश की सबसे लंबी नदी है, और भारत में घाघरा तथा अवध में सरयू कहलाती है। त्रिशूली और अरुण नेपाल की अन्य नदियाँ हैं तथा बागमती काठमांडू घाटी से निकलकर बिहार में आती है।
- practice — not a real PYQ
गया नगर निम्नलिखित में से किस नदी के तट पर स्थित है ?
- (a)सोन
- (b)पुनपुन
- (c)फल्गु
- (d)कोसी
उत्तर(c) फल्गु — गया इसी नदी के तट पर है और वहाँ पिंडदान की परंपरा इसी से जुड़ी है। सोन और पुनपुन गंगा की दक्षिणी सहायक नदियाँ हैं तथा कोसी उत्तर बिहार की वह नदी है जो अपनी धारा बदलने और बाढ़ के लिए जानी जाती है।