पश्चिमी घाट के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा सही नहीं है ?
- (a)UNESCO ने 2012 में पश्चिमी घाट के 39 स्थलों को ‘विश्व विरासत स्थल’ घोषित किया
- (b)यह विश्व के जैव-विविधता वाले आठ तप्ततम तप्तस्थलों (हॉटेस्ट हॉटस्पॉट) में से एक है
- (c)इसमें दो संरक्षित वन क्षेत्र एवम् तेरह राष्ट्रीय उद्यान हैं
- (d)हाल ही में ONGC सर्वेक्षणों में विशाल तेल निचय पाए गए हैं
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) हाल ही में ONGC सर्वेक्षणों में विशाल तेल निचय पाए गए हैं — यही वह कथन है जो पश्चिमी घाट के बारे में सही नहीं है, और प्रश्न ठीक यही पूछ रहा है। पश्चिमी घाट में तेल के विशाल भंडार मिलने का कोई प्रामाणिक विवरण नहीं है, और इसका कारण भूवैज्ञानिक है : खनिज तेल तलछटी द्रोणियों में बनता और संचित होता है, जहाँ जैव-पदार्थ से भरपूर अवसाद परतों में दबकर परिपक्व होते हैं और ऊपर कोई अभेद्य आवरण-शैल उन्हें रोके रखता है। पश्चिमी घाट का बड़ा भाग दक्कन के बेसाल्ट अर्थात् ज्वालामुखीय आग्नेय शैल का है और दक्षिणी भाग प्रीकैम्ब्रियन कालीन कायांतरित तथा आग्नेय शैलों का — दोनों ही तेल-धारक शैल नहीं हैं। भारत में तेल और गैस का उत्पादन तलछटी द्रोणियों से होता है : मुंबई अपतट, खंभात, असम-अराकान, कृष्णा-गोदावरी, कावेरी और राजस्थान की बाड़मेर द्रोणी। इसलिए इस विकल्प का दावा भूगोल के विरुद्ध जाता है और यही असत्य कथन है। शेष तीन कथन सही हैं, और यही इस प्रश्न को हल करने का सबसे तेज़ रास्ता भी है : (a) का 2012 का यूनेस्को अंकन, (b) का जैव-विविधता तप्तस्थल वाला विवरण और (c) की संरक्षित क्षेत्रों तथा राष्ट्रीय उद्यानों की गिनती — तीनों पश्चिमी घाट के मानक विवरण के अंग हैं, जबकि तेल का दावा उस विवरण में कहीं नहीं आता। एक बनावटी बात भी ध्यान देने योग्य है : स्टेम में निषेध 'नहीं' मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है, अर्थात् पुस्तिका स्वयं चेतावनी दे रही है कि यहाँ असत्य कथन ढूँढ़ना है। इस पूरी पुस्तिका में केवल दो ही प्रश्न इस निषेधात्मक बनावट के हैं — यह और परिक्षेपण की मापों वाला Q107 — इसलिए यह बनावट यहाँ अपवाद है, नियम नहीं, और उसी कारण जल्दबाज़ी में छूट जाती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)UNESCO ने 2012 में पश्चिमी घाट के 39 स्थलों को ‘विश्व विरासत स्थल’ घोषित किया — यह कथन सही है, इसलिए निषेधात्मक प्रश्न का उत्तर नहीं हो सकता। यूनेस्को ने 2012 में पश्चिमी घाट को विश्व धरोहर सूची में अंकित किया, और यह अंकन एक शृंखला-स्थल के रूप में हुआ जिसमें उनतालीस अलग-अलग स्थल सात समूहों में सम्मिलित हैं। ये स्थल केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में फैले हुए हैं और इनमें राष्ट्रीय उद्यान तथा वन्यजीव अभयारण्य दोनों आते हैं। अंकन का आधार प्राकृतिक कसौटी थी — असाधारण जैव-विविधता और स्थानिक प्रजातियों की सघनता। संख्या और वर्ष दोनों सही होने के कारण यह विकल्प यहाँ उस अभ्यर्थी को उलझाता है जिसे उनतालीस का आँकड़ा असामान्य लगता है; असामान्य दिखने वाला आँकड़ा स्वयं में असत्य होने का प्रमाण नहीं है।
- (b)यह विश्व के जैव-विविधता वाले आठ तप्ततम तप्तस्थलों (हॉटेस्ट हॉटस्पॉट) में से एक है — यह भी सही कथन है। पश्चिमी घाट को जैव-विविधता के आठ तप्ततम तप्तस्थलों में गिना जाता है, और यही विवरण यूनेस्को के अपने अभिलेख में भी दोहराया गया है। तप्तस्थल की कसौटी दो हैं : वहाँ कम से कम पन्द्रह सौ स्थानिक संवहनी पादप प्रजातियाँ हों, और उसकी मूल वनस्पति का कम से कम सत्तर प्रतिशत नष्ट हो चुका हो — अर्थात् तप्तस्थल का अर्थ केवल समृद्धि नहीं, समृद्धि के साथ संकट भी है। पश्चिमी घाट-श्रीलंका इसी कसौटी पर खरा उतरने वाला क्षेत्र है और भारत के अन्य तप्तस्थल हिमालय, इंडो-बर्मा तथा सुंडालैंड के अंतर्गत आने वाला निकोबार क्षेत्र हैं। हिन्दी स्तंभ में अंग्रेज़ी पद का देवनागरी लिप्यन्तरण कोष्ठक में साथ छपा है, जिससे पहचान में कोई भ्रम नहीं रहता।
- (c)इसमें दो संरक्षित वन क्षेत्र एवम् तेरह राष्ट्रीय उद्यान हैं — यह कथन भी पश्चिमी घाट के मानक विवरण का ही अंश है, इसलिए असत्य कथन नहीं है। पश्चिमी घाट में दो जीवमंडल संरक्षित क्षेत्र — नीलगिरि तथा अगस्त्यमलै — और तेरह राष्ट्रीय उद्यान गिनाए जाते हैं, इनके अतिरिक्त अनेक वन्यजीव अभयारण्य तथा आरक्षित वन भी हैं। यहाँ सावधानी की बात यह है कि संरक्षित क्षेत्रों की कोटियाँ अलग-अलग हैं — राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, जीवमंडल संरक्षित क्षेत्र, बाघ आरक्षित क्षेत्र और आरक्षित वन — और इनकी संख्याएँ अधिसूचनाओं से बदलती रहती हैं, इसलिए किसी एक संख्या को कसकर पकड़ने के बजाय कोटियों का भेद समझना अधिक काम आता है। इस प्रश्न में तो निर्णय और भी सरल है, क्योंकि असत्य विकल्प संख्या का नहीं, तथ्य का है।
अवधारणा
पश्चिमी घाट भारत के पश्चिमी तट के समांतर लगभग सोलह सौ किलोमीटर तक फैली पर्वत-शृंखला है, जो गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु — छह राज्यों से होकर जाती है; इसका सर्वोच्च शिखर केरल का अनाईमुडी है, जिसकी ऊँचाई लगभग 2695 मीटर है। भूवैज्ञानिक दृष्टि से इसका उत्तरी भाग दक्कन के बेसाल्ट प्रवाहों का बना है और दक्षिणी भाग प्रीकैम्ब्रियन कालीन कायांतरित तथा आग्नेय शैलों का; यही कारण है कि यहाँ खनिज तेल जैसी तलछटी द्रोणी की संपदा नहीं मिलती। जलवायु की दृष्टि से यह शृंखला दक्षिण-पश्चिम मानसून के मार्ग में खड़ी दीवार का काम करती है : पश्चिमी ढाल पर भारी वर्षा होती है और पूर्वी ओर वृष्टि-छाया का शुष्क क्षेत्र बनता है, जिसमें दक्कन का पठार आता है। यही वर्षा-प्रवणता सदाबहार वर्षा-वनों से लेकर शोला घास-स्थलों तक की विविध पारिस्थितिकी बनाती है, और इसी विविधता के कारण यह क्षेत्र जैव-विविधता का तप्तस्थल तथा 2012 से यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में अंकित शृंखला-स्थल है। गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी प्रायद्वीपीय नदियाँ इन्हीं घाटों से निकलकर पूर्व की ओर बहती हैं।
यह प्रश्नपत्र में उन दो प्रश्नों में से एक है जिनकी पूछ निषेधात्मक है — दूसरा सांख्यिकी वाला वह प्रश्न है जो पूछता है कि परिक्षेपण की निरपेक्ष माप कौन-सी नहीं है। इसलिए यहाँ पढ़ने की आदत बदलनी पड़ती है : शेष प्रश्नपत्र में सही विकल्प ढूँढ़ना है और इन दो में असत्य विकल्प। पुस्तिका इस बदलाव को छिपाती नहीं — हिन्दी स्तंभ में भी 'नहीं' मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है, ठीक वैसे ही जैसे अंग्रेज़ी में — पर जब पूरे प्रश्नपत्र में यह बनावट केवल दो बार आती है, तब जल्दबाज़ी में उसे अनदेखा कर देना सहज हो जाता है। इस प्रश्न की एक और सीख विकल्पों की प्रकृति में है : तीन विकल्प संस्थागत या सांख्यिक तथ्य हैं — यूनेस्को का अंकन, तप्तस्थल की गणना, संरक्षित क्षेत्रों की संख्या — और चौथा एक ऐसा दावा है जो सुनने में समाचार जैसा लगता है। जहाँ तीन विकल्प एक ही कोटि के हों और एक विकल्प दूसरी कोटि का, वहाँ असत्य कथन प्रायः वही अलग कोटि वाला होता है।
मुख्य तथ्य
- पश्चिमी घाट पश्चिमी तट के समांतर लगभग सोलह सौ किलोमीटर लंबी शृंखला है और गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल तथा तमिलनाडु — छह राज्यों में फैली है; सर्वोच्च शिखर अनाईमुडी लगभग 2695 मीटर ऊँचा है।
- यूनेस्को ने 2012 में पश्चिमी घाट को विश्व धरोहर सूची में अंकित किया; यह एक शृंखला-स्थल है जिसमें उनतालीस स्थल सात समूहों में सम्मिलित हैं।
- जैव-विविधता तप्तस्थल की कसौटी दो हैं — कम से कम पन्द्रह सौ स्थानिक संवहनी पादप प्रजातियाँ, और मूल वनस्पति का कम से कम सत्तर प्रतिशत नष्ट हो जाना; भारत में हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट-श्रीलंका तथा सुंडालैंड के अंतर्गत निकोबार क्षेत्र आते हैं।
- खनिज तेल तलछटी द्रोणियों में बनता है; भारत का उत्पादन मुंबई अपतट, खंभात, असम-अराकान, कृष्णा-गोदावरी, कावेरी तथा बाड़मेर जैसी द्रोणियों से होता है, जबकि पश्चिमी घाट बेसाल्ट तथा प्रीकैम्ब्रियन कालीन शैलों का बना है।
- पश्चिमी घाट दक्षिण-पश्चिम मानसून को रोककर पश्चिमी ढाल पर भारी वर्षा कराता है और पूर्व की ओर वृष्टि-छाया बनाता है; गोदावरी, कृष्णा और कावेरी इन्हीं घाटों से निकलती हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- निषेध को अनदेखा कर देना और पहला सही दिखने वाला कथन चुन लेना; इस प्रश्नपत्र में यह बनावट केवल दो बार आती है, इसलिए आदत उसके विरुद्ध काम करती है।
- असामान्य दिखने वाले आँकड़े को ही असत्य मान लेना — उनतालीस स्थलों वाला कथन विचित्र लगता है, पर वही यूनेस्को का अंकन है।
- तप्तस्थल का अर्थ केवल जैव-समृद्धि मान लेना, जबकि कसौटी में मूल वनस्पति का बड़े पैमाने पर नष्ट हो जाना भी सम्मिलित है।
- समाचार जैसे लगने वाले दावे को स्वीकार कर लेना; तेल के भंडार का दावा यहाँ भूवैज्ञानिक रूप से ही असंगत है, क्योंकि तेल तलछटी द्रोणियों में मिलता है।
पश्चिमी घाट इस परिवार की परीक्षाओं का बार-बार लौटने वाला विषय है और वह चार ढंगों से पूछा जाता है। पहला, स्थिति और विस्तार — कौन-से राज्य, कौन-सा सर्वोच्च शिखर, कौन-से दर्रे और कौन-सी नदियाँ। दूसरा, पारिस्थितिकी — तप्तस्थल की कसौटी, स्थानिक प्रजातियाँ, शोला वन और उनका संरक्षण। तीसरा, संस्थागत तथ्य — यूनेस्को का अंकन, जीवमंडल संरक्षित क्षेत्र, राष्ट्रीय उद्यान और उनकी संख्याएँ। चौथा, जलवायु में इसकी भूमिका — मानसून की अवरोधक दीवार और वृष्टि-छाया, जिससे दक्कन के पठार की शुष्कता समझ में आती है। निषेधात्मक रूप में पूछे जाने पर परीक्षक प्रायः तीन मानक विवरण और एक गढ़ा हुआ दावा रखता है, और गढ़ा हुआ दावा किसी दूसरे विषय से उठाया जाता है — जैसे यहाँ खनिज संसाधन से। इसलिए ऐसे प्रश्न में यह पूछना सबसे कारगर होता है कि कौन-सा विकल्प इस क्षेत्र के मानक विवरण में आता ही नहीं।
संबंधित PYQ
EPFO_APFC_2016_Q27खोलें व हल करें →The term 'Carbon footprint' means
- (a) A region which is rich in coal mines
- (b) The amount of reduction in the emission of CO2 by a country
- (c) The use of Carbon in manufacturing industries
- (d) The amount of greenhouse gases produced by our day-to-day activities
उत्तर(d) The amount of greenhouse gases produced by our day-to-day activities
इसी प्रश्नपत्र का पर्यावरण-संबंधी प्रश्न, जो कार्बन फुटप्रिंट की परिभाषा पर है — वही खंड, जहाँ से पश्चिमी घाट, तप्तस्थल और ग्रीनहाउस गैसों के प्रश्न आते हैं।
EPFO_EOAO_2020_Q43Which one of the following is not a consequence of deforestation ?
- (a) Increased groundwater table
- (b) Decreased biodiversity
- (c) Increased soil erosion
- (d) Decreased rainfall
उत्तर(a) Increased groundwater table
इसी परिवार का निषेधात्मक पर्यावरण-प्रश्न, जिसमें वनोन्मूलन के परिणामों में से असत्य कथन छाँटना है — वही पढ़ने की सावधानी, जो यहाँ 'नहीं' पर आवश्यक है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
पश्चिमी घाट को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में किस वर्ष अंकित किया गया था ?
- (a)2004
- (b)2008
- (c)2012
- (d)2016
उत्तर(c) 2012 — इसी वर्ष पश्चिमी घाट को एक शृंखला-स्थल के रूप में अंकित किया गया, जिसमें उनतालीस स्थल सात समूहों में सम्मिलित हैं और जो चार राज्यों में फैले हैं। अंकन प्राकृतिक कसौटी पर हुआ, अर्थात् असाधारण जैव-विविधता और स्थानिक प्रजातियों की सघनता के आधार पर।
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सा क्षेत्र भारत की एक प्रमुख तेल-उत्पादक तलछटी द्रोणी है ?
- (a)पश्चिमी घाट
- (b)कृष्णा-गोदावरी द्रोणी
- (c)अरावली शृंखला
- (d)छोटानागपुर पठार
उत्तर(b) कृष्णा-गोदावरी द्रोणी — यह भारत की उन तलछटी द्रोणियों में है जहाँ से तेल तथा गैस का उत्पादन होता है। पश्चिमी घाट बेसाल्ट और प्रीकैम्ब्रियन कालीन शैलों का क्षेत्र है, अरावली प्राचीन वलित पर्वत हैं, और छोटानागपुर पठार कोयला तथा धात्विक खनिजों के लिए जाना जाता है — तीनों ही तेल-धारक तलछटी द्रोणियाँ नहीं हैं।