कथन (I) : दो देशों के बीच व्यापार, लागतों में अंतर के कारण होता है । कथन (II) : अलग-अलग देशों के अलग-अलग कारक एन्डाउमेंट होते हैं ।
- (a)दोनों ही कथन (I) और (II) अलग-अलग सत्य हैं और कथन (II), कथन (I) का सही स्पष्टीकरण है
- (b)दोनों ही कथन (I) और (II) अलग-अलग सत्य हैं किन्तु कथन (II), कथन (I) का सही स्पष्टीकरण नहीं है
- (c)कथन (I) सत्य है किन्तु कथन (II) असत्य है
- (d)कथन (I) असत्य है किन्तु कथन (II) सत्य है
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) दोनों ही कथन (I) और (II) अलग-अलग सत्य हैं और कथन (II), कथन (I) का सही स्पष्टीकरण है — इस प्रश्नांश के अपने विकल्प नहीं छपे; इसे शासित करने वाला निर्देश-खंड और चारों कूट Q117 के ऊपर एक ही बार छपे हैं और Q117 से Q120 तक चारों पर लागू होते हैं। कथन (I) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के शास्त्रीय सिद्धांत का सार है: व्यापार इसलिए होता है कि एक ही वस्तु को बनाने की लागत दो देशों में अलग-अलग पड़ती है, और हर देश उस वस्तु में विशेषज्ञता लेता है जिसमें उसकी तुलनात्मक लागत कम है — यही रिकार्डो का तुलनात्मक लागत सिद्धांत है। कथन (II) भी सत्य है, क्योंकि अलग-अलग देशों में उत्पादन के साधनों की उपलब्धता वस्तुतः अलग-अलग होती है — कहीं श्रम प्रचुर है, कहीं पूँजी, कहीं भूमि या खनिज। और यहीं दोनों कथन आपस में जुड़ जाते हैं: हेक्शर-ओलिन सिद्धांत के अनुसार जिस देश में जो कारक प्रचुर होता है वह वहाँ सस्ता होता है, इसलिए उसी कारक की अधिकता से बनने वाली वस्तुएँ वहाँ सस्ती पड़ती हैं — अर्थात् कारक एन्डाउमेंट का अन्तर ही लागतों के अन्तर का कारण है। इस प्रकार कथन (II) कथन (I) का 'क्यों' बताता है, और उत्तर (a) बनता है। इस कड़ी को क्रम से लिख लेने पर स्पष्टीकरण वाला सम्बन्ध और भी साफ़ दिखता है: कारकों की उपलब्धता भिन्न, इसलिए उनकी सापेक्ष क़ीमतें भिन्न; क़ीमतें भिन्न, इसलिए वस्तुओं की उत्पादन-लागतें भिन्न; और लागतें भिन्न, इसलिए व्यापार लाभदायक। इसी क्रम में कथन (II) कड़ी का पहला छोर है और कथन (I) उसका अन्तिम परिणाम — यही 'सही स्पष्टीकरण' की परिभाषा है। तुलना के लिए इसी खंड का पहला प्रश्नांश देखिए, जहाँ दोनों कथन एक ही विषय के हैं पर एक कड़ी नहीं बनाते; वहाँ उत्तर दूसरा कूट बनता है और यहाँ पहला।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)दोनों ही कथन (I) और (II) अलग-अलग सत्य हैं किन्तु कथन (II), कथन (I) का सही स्पष्टीकरण नहीं है — यह कूट तब लिया जाता जब दोनों कथन सच्चे तो हों पर उनके बीच कारण-कार्य का सम्बन्ध न बनता हो। यहाँ सम्बन्ध बनता है, और वही अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के सिद्धांत का केन्द्रीय तर्क है: कारकों की उपलब्धता में अन्तर उनकी सापेक्ष क़ीमतों में अन्तर पैदा करता है, और वही आगे चलकर वस्तुओं की लागतों में अन्तर बनकर व्यापार को जन्म देता है। ऐसे प्रश्नों में यह जाँचने का सरल तरीक़ा है कि दूसरा कथन हटा देने पर पहला कथन अस्पष्ट रह जाता है या नहीं। यहाँ हटा दीजिए तो यह प्रश्न खुला रह जाता है कि लागतें भिन्न क्यों हैं — और वही खाली जगह कथन (II) भरता है, इसलिए वह स्पष्टीकरण है।
- (c)कथन (I) सत्य है किन्तु कथन (II) असत्य है — कथन (II) असत्य नहीं है। देशों के कारक एन्डाउमेंट, यानी श्रम, पूँजी, भूमि और प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता, स्पष्ट रूप से भिन्न होते हैं — यह सिद्धांत का दावा भर नहीं, प्रत्यक्ष तथ्य है। इसी भिन्नता पर हेक्शर-ओलिन का पूरा प्रतिपादन खड़ा है। कारक एन्डाउमेंट का भेद केवल सिद्धांत की मान्यता नहीं, दिखने वाला तथ्य है — कहीं श्रम प्रचुर और सस्ता है, कहीं पूँजी, कहीं भूमि या खनिज। भारत जैसे श्रम-प्रचुर देश का श्रम-गहन वस्तुओं में और पूँजी-प्रचुर देशों का पूँजी-गहन वस्तुओं में लाभ इसी से बनता है।
- (d)कथन (I) असत्य है किन्तु कथन (II) सत्य है — कथन (I) भी असत्य नहीं है। लागतों में अन्तर ही व्यापार का आधार है — यही बात ऐडम स्मिथ ने निरपेक्ष लाभ के रूप में और रिकार्डो ने तुलनात्मक लागत के रूप में रखी। यदि दोनों देशों में हर वस्तु की सापेक्ष लागत एक-सी होती तो आपस में व्यापार करने का कोई आर्थिक कारण ही न बचता। लागतों के अन्तर पर व्यापार टिकने की बात दोनों शास्त्रीय सिद्धांतों में है — स्मिथ के निरपेक्ष लाभ में भी और रिकार्डो के तुलनात्मक लागत में भी। अन्तर केवल इतना है कि रिकार्डो सापेक्ष लागत की बात करते हैं, इसलिए उनका सिद्धांत उस दशा में भी चलता है जहाँ एक देश हर वस्तु सस्ती बनाता हो।
अवधारणा
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के सिद्धांत तीन सीढ़ियों में बढ़े हैं। ऐडम स्मिथ का निरपेक्ष लाभ का सिद्धांत कहता है कि जो देश जिस वस्तु को कम लागत पर बना सके वही बनाए और शेष का व्यापार करे। रिकार्डो का तुलनात्मक लागत सिद्धांत इससे आगे जाता है: व्यापार तब भी दोनों के लिए लाभदायक है जब एक देश हर वस्तु सस्ती बनाता हो, बशर्ते उसकी सापेक्ष लागतें भिन्न हों — प्रत्येक देश उस वस्तु में विशेषज्ञता ले जिसमें उसका अवसर-लागत कम है। और हेक्शर-ओलिन का कारक-अनुपात सिद्धांत यह बताता है कि सापेक्ष लागतें भिन्न क्यों होती हैं: क्योंकि देशों के कारक एन्डाउमेंट भिन्न हैं, और जो कारक जहाँ प्रचुर है वहाँ सस्ता है, इसलिए उस कारक की अधिकता से बनने वाली वस्तुएँ वहाँ सस्ती पड़ती हैं। इस प्रकार पहले दो सिद्धांत 'क्या होता है' बताते हैं और तीसरा 'ऐसा क्यों होता है'।
यह प्रश्नांश उस कथन-युग्म वाले समूह का दूसरा है जो इस पुस्तिका के अन्त में आता है, और उसके अपने विकल्प नहीं छपे — निर्देश-खंड तथा चारों कूट Q117 के ऊपर एक ही बार छपे हैं और चारों प्रश्नांशों पर लागू होते हैं। इस समूह की सबसे उपयोगी बात यह है कि उसमें कूट (a) और (b) के उदाहरण आमने-सामने रखे हैं: पहले प्रश्नांश में दोनों कथन सत्य होकर भी कारण-सम्बन्ध नहीं बनाते और इसमें बनाते हैं, इसलिए दोनों को साथ पढ़ने से यह भेद पक्का बैठ जाता है। हिन्दी स्तंभ में 'endowments' का अनुवाद नहीं किया गया, उसे देवनागरी में लिप्यन्तरित कर 'कारक एन्डाउमेंट' लिखा गया है, इसलिए पद को अंग्रेज़ी रूप से जोड़कर पहचानना पड़ता है।
मुख्य तथ्य
- ऐडम स्मिथ — निरपेक्ष लाभ का सिद्धांत; डेविड रिकार्डो — तुलनात्मक लागत का सिद्धांत, जो अवसर-लागत पर टिका है।
- हेक्शर-ओलिन सिद्धांत — देश उस वस्तु का निर्यात करता है जिसके उत्पादन में उसके प्रचुर कारक का अधिक उपयोग होता है।
- जो कारक जिस देश में प्रचुर होता है, वहाँ उसकी सापेक्ष क़ीमत कम होती है, और यही लागतों के अन्तर का मूल कारण बनता है।
- कारक एन्डाउमेंट का अर्थ है श्रम, पूँजी, भूमि और प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता — यही किसी देश की उत्पादन-संरचना तय करती है।
- यदि दोनों देशों में हर वस्तु की सापेक्ष लागत एक-सी हो तो आपस में व्यापार करने का कोई आर्थिक कारण नहीं बचता।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- दोनों कथन सत्य देखकर बिना जाँचे यह मान लेना कि कारण-सम्बन्ध नहीं बनता — यहाँ बनता है।
- रिकार्डो के सिद्धांत और हेक्शर-ओलिन सिद्धांत के आधारों को आपस में बदल देना; पहला उत्पादकता के अन्तर पर और दूसरा कारकों की उपलब्धता पर टिका है।
- निरपेक्ष लाभ और तुलनात्मक लाभ को एक समझ लेना, जबकि व्यापार तुलनात्मक लाभ पर टिकता है।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के सिद्धांत तीन रूपों में आते हैं — सीधे नाम-आधारित प्रश्न कि कौन-सा सिद्धांत किसका है, कथन-युग्म के रूप में जहाँ एक कथन तथ्य और दूसरा उसका कारण होता है, और मिलान के रूप में जहाँ सिद्धांत को अर्थशास्त्री से जोड़ना पड़ता है। तीनों के लिए सिद्धांत का नाम उसके मूल तर्क के साथ जोड़कर याद रखिए — स्मिथ का निरपेक्ष लाभ, रिकार्डो का तुलनात्मक लागत, हेक्शर-ओलिन का कारक-अनुपात — और यह भी कि उनमें से कौन किस प्रश्न का उत्तर देता है।
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- (a) Both Statement (I) and Statement (II) are individually true and Statement (II) is the correct explanation of Statement (I)
- (b) Both Statement (I) and Statement (II) are individually true but Statement (II) is not the correct explanation of Statement (I)
- (c) Statement (I) is true but Statement (II) is false
- (d) Statement (I) is false but Statement (II) is true
उत्तर(b) Both Statement (I) and Statement (II) are individually true but Statement (II) is not the correct explanation of Statement (I)
इसी खंड का पहला कथन-युग्म, आय कर के व्यष्टि प्रभावों पर — वहाँ दोनों कथन सत्य होकर भी कारण-सम्बन्ध नहीं बनाते, इसलिए यह जोड़ी कूट (a) और (b) का भेद सिखाती है।
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- (a) They establish a common external tariff on imports from outside countries
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उत्तर(a) They establish a common external tariff on imports from outside countries
इसी पेपर का मुक्त व्यापार क्षेत्र वाला प्रश्न — व्यापार का सैद्धान्तिक आधार यहाँ है और संस्थागत रूप वहाँ।
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- (a) Both Statement (I) and Statement (II) are individually true and Statement (II) is the correct explanation of Statement (I)
- (b) Both Statement (I) and Statement (II) are individually true but Statement (II) is not the correct explanation of Statement (I)
- (c) Statement (I) is true but Statement (II) is false
- (d) Statement (I) is false but Statement (II) is true
उत्तर(a) Both Statement (I) and Statement (II) are individually true and Statement (II) is the correct explanation of Statement (I)
इसी खंड का अगला कथन-युग्म, विदेशी निवेश और निर्यात निष्पादन पर — व्यापार का वही विषय, पूँजी-प्रवाह की ओर से।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
हेक्शर-ओलिन सिद्धांत के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का मुख्य आधार क्या है ?
- (a)देशों की उत्पादन तकनीक में अन्तर
- (b)देशों के कारक एन्डाउमेंट में अन्तर
- (c)देशों की उपभोक्ता रुचियों में अन्तर
- (d)देशों की विनिमय दरों में अन्तर
उत्तर(b) देशों के कारक एन्डाउमेंट में अन्तर — उत्पादन तकनीक या श्रम-उत्पादकता के अन्तर पर रिकार्डो का तुलनात्मक लागत सिद्धांत टिका है, हेक्शर-ओलिन का नहीं।