कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 में निम्नलिखित कारक सम्मिलित हैं : 1. 10 या अधिक कर्मचारियों वाले कारखाने या प्रतिष्ठान । 2. कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को व्यापक चिकित्सा देखभाल का उपबंध । 3. बीमारी तथा प्रसूति के दौरान नक़द लाभ का उपबंध । 4. मृत्यु अथवा निःशक्तता की स्थिति में मासिक भुगतान । उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं ?
- (a)केवल 1, 2 और 3
- (b)केवल 1, 2 और 4
- (c)केवल 3 और 4
- (d)1, 2, 3 और 4
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) 1, 2, 3 और 4 — चारों कथन अधिनियम के अपने उपबंधों से मेल खाते हैं। कथन 1 — अधिनियम की धारा 2(12) में 'कारखाना' वह परिसर है जहाँ दस या अधिक व्यक्ति नियोजित हों, और धारा 1(5) के अंतर्गत समुचित सरकार अधिसूचना से दुकानों, होटलों, सिनेमाघरों, सड़क परिवहन और शैक्षिक तथा चिकित्सा संस्थानों जैसे अन्य प्रतिष्ठानों तक इसका विस्तार कर सकती है। कथन 2 — धारा 46(1)(ङ) का चिकित्सा हितलाभ बीमित व्यक्ति और उसके परिवार, दोनों को मिलता है, और वही इस अधिनियम की सबसे बड़ी विशेषता है, क्योंकि यह नक़द नहीं बल्कि सेवा के रूप में दी जाने वाली सुविधा है। कथन 3 — बीमारी हितलाभ और प्रसूति हितलाभ दोनों नक़द भुगतान हैं, धारा 46(1)(क) और 46(1)(ख)। कथन 4 — नियोजन-जन्य क्षति से हुई मृत्यु पर आश्रितजन हितलाभ और स्थायी निःशक्तता पर निःशक्तता हितलाभ, दोनों नियत कालिक मासिक भुगतान के रूप में दिए जाते हैं। इसलिए कोई कथन छाँटा नहीं जा सकता और उत्तर (d) है। इस अधिनियम को याद रखने का सबसे उपयोगी ढाँचा तीन प्रश्नों का है — किस पर लागू, किसे क्या मिलता है, और पैसा कहाँ से आता है। लागू होने की सीमा दस या अधिक व्यक्तियों वाले कारखानों तथा अधिसूचित प्रतिष्ठानों तक है और निर्धारित वेतन-सीमा तक के कर्मचारी इसके दायरे में आते हैं। हितलाभ धारा 46 की छह मदों में गिनाए गए हैं, जिनमें पाँच नक़द हैं और एक — चिकित्सा हितलाभ — सेवा के रूप में। और पैसा नियोजक तथा कर्मचारी दोनों के अंशदान से आता है, जो इसे सामाजिक बीमा बनाता है, न कि सरकारी सहायता। इन तीन प्रश्नों के उत्तर याद रहें तो इस अधिनियम का कोई भी कथन-प्रश्न सीधे बैठ जाता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1, 2 और 3 — इसमें कथन 4 छूट गया है, जबकि वही इस अधिनियम को केवल बीमारी तक सीमित न रहने देने वाला उपबंध है। नियोजन के दौरान लगी चोट से यदि कर्मचारी की मृत्यु हो जाए तो उसके आश्रितों को, और यदि वह स्थायी रूप से निःशक्त हो जाए तो उसे स्वयं को, नियत कालिक भुगतान मिलता रहता है। यह एकमुश्त राशि नहीं, चलती रहने वाली आय है। आश्रितजन हितलाभ की एक और बात ध्यान देने योग्य है: वह मृतक की विधवा, बच्चों और कुछ दशाओं में आश्रित माता-पिता को नियत हिस्सों में बँटकर मिलता है, और विधवा के लिए वह प्रायः जीवन भर या पुनर्विवाह तक चलता है। इसी कारण उसे एकमुश्त मुआवज़े से अलग कोटि में रखा जाता है।
- (b)केवल 1, 2 और 4 — इसमें कथन 3 छोड़ दिया गया है, जो अधिनियम के सबसे पुराने हितलाभों में से दो का वर्णन करता है। बीमारी की दशा में बीमित व्यक्ति को नक़द हितलाभ मिलता है और बीमित महिला को प्रसूति की दशा में प्रसूति हितलाभ — दोनों धारा 46 की सूची में स्पष्ट रूप से गिनाए गए हैं। बीमारी हितलाभ की पात्रता अंशदान की अवधि से जुड़ी होती है और वह मज़दूरी के एक निश्चित अनुपात में, सीमित दिनों तक मिलता है; प्रसूति हितलाभ भी नक़द भुगतान है और उसकी अपनी अवधि निर्धारित है। दोनों धारा 46 की सूची की आरम्भिक मदें हैं।
- (c)केवल 3 और 4 — इसमें दोनों प्रारम्भिक कथन बाहर हो गए हैं, जबकि वे ही अधिनियम का दायरा और उसकी विशेषता बताते हैं। दस या अधिक व्यक्तियों वाले कारखानों-प्रतिष्ठानों पर लागू होना उसका विस्तार है, और कर्मचारी तथा उसके परिवार को चिकित्सा देखभाल देना उसकी सबसे बड़ी पहचान — यह वह हितलाभ है जो नक़द के बजाय सेवा के रूप में मिलता है। लागू होने की सीमा और चिकित्सा हितलाभ, दोनों ही इस अधिनियम की पहचान हैं। चिकित्सा हितलाभ इसलिए विशेष है कि वह अकेला ऐसा हितलाभ है जो नक़द नहीं, सेवा के रूप में मिलता है और बीमित व्यक्ति के परिवार तक जाता है — भारत के किसी भी श्रम-अधिनियम में यह व्यवस्था सबसे पहले यहीं आई।
अवधारणा
कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 भारत का पहला बड़ा सामाजिक सुरक्षा अधिनियम है और वह सामाजिक बीमा के सिद्धांत पर चलता है — नियोजक और कर्मचारी दोनों अंशदान देते हैं, वह धन एक साझा निधि में जमा होता है, और जिस बीमित व्यक्ति पर आपदा आती है उसे उसमें से हितलाभ मिलता है। इस प्रकार जोखिम बहुतों में बँट जाता है और किसी एक कर्मचारी या नियोजक पर पूरा भार नहीं पड़ता। धारा 46 में छह हितलाभ गिनाए गए हैं — बीमारी, प्रसूति, निःशक्तता, आश्रितजन, चिकित्सा और अंत्येष्टि व्यय — और इनमें चिकित्सा हितलाभ ही वह है जो नक़द नहीं, सेवा के रूप में मिलता है और बीमित व्यक्ति के परिवार तक जाता है। शेष पाँच नियत कालिक नक़द भुगतान हैं। योजना का प्रबंध कर्मचारी राज्य बीमा निगम करता है, जो एक निगमित निकाय है और जिसमें केन्द्र, राज्य, नियोजकों तथा कर्मचारियों के प्रतिनिधि होते हैं।
इस अधिनियम का सूत्रपात बी. पी. अदारकर की उस रिपोर्ट से हुआ जो औद्योगिक श्रमिकों के स्वास्थ्य बीमा पर तैयार की गई थी, और योजना का उद्घाटन 24 फ़रवरी 1952 को कानपुर में हुआ। इस पेपर में श्रम विधि और सामाजिक सुरक्षा के लगभग दस प्रश्न हैं, और यह अधिनियम प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम के साथ पढ़ने योग्य है, क्योंकि दोनों का दायरा एक-दूसरे को छूता है — जहाँ यह योजना लागू है वहाँ प्रसूति हितलाभ इसी के अंतर्गत मिलता है, और जहाँ नहीं है वहाँ 1961 का अधिनियम चलता है। कथन-सूची वाले इस प्रश्न की एक विशेषता यह भी है कि इसमें कोई कूट-पंक्ति नहीं छपी; चारों कथनों के बाद सीधे प्रश्न-वाक्य आता है, और विकल्प स्वयं कथनों के समुच्चय हैं।
मुख्य तथ्य
- धारा 2(12) — दस या अधिक व्यक्तियों वाले परिसर 'कारखाना' की परिभाषा में आते हैं, और धारा 1(5) के अंतर्गत समुचित सरकार अधिसूचना से दुकानों, होटलों, सिनेमाघरों तथा शैक्षिक और चिकित्सा संस्थानों तक इसका विस्तार कर सकती है।
- धारा 46 के छह हितलाभ — बीमारी, प्रसूति, निःशक्तता, आश्रितजन, चिकित्सा और अंत्येष्टि व्यय; इनमें पाँच नक़द हैं।
- चिकित्सा हितलाभ सेवा के रूप में मिलता है और बीमित व्यक्ति के साथ उसके परिवार तक जाता है — यही इस अधिनियम की सबसे बड़ी पहचान है।
- नियोजन-जन्य क्षति से मृत्यु पर आश्रितजन हितलाभ और स्थायी निःशक्तता पर निःशक्तता हितलाभ नियत कालिक मासिक भुगतान के रूप में दिए जाते हैं।
- योजना का प्रबंध कर्मचारी राज्य बीमा निगम करता है; अंशदान नियोजक और कर्मचारी दोनों देते हैं, और योजना का उद्घाटन 24 फ़रवरी 1952 को कानपुर में हुआ।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- अधिनियम को केवल चिकित्सा सुविधा तक सीमित मान लेना, जबकि उसके छह में से पाँच हितलाभ नक़द भुगतान हैं।
- 'सभी कथन सही' वाले विकल्प से बचने की आदत में कोई एक सही कथन भी छाँट देना।
- आश्रितजन हितलाभ को किसी भी मृत्यु पर देय मान लेना, जबकि वह नियोजन-जन्य क्षति से हुई मृत्यु पर मिलता है।
इस अधिनियम पर प्रश्न चार बिंदुओं पर बनते हैं — लागू होने की सीमा, हितलाभों की सूची, कौन-सा हितलाभ नक़द है और कौन-सा सेवा-रूप में, और प्रबंध करने वाली संस्था। कभी-कभी प्रश्न ऐतिहासिक होता है, जैसे योजना का उद्घाटन कहाँ हुआ, और कभी तुलनात्मक, जिसमें इसे प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम या भविष्य निधि अधिनियम के साथ रखा जाता है। धारा-संख्या के साथ याद रखने पर सभी रूप सध जाते हैं, और कथन-सूची वाले प्रश्नों में हर कथन को इन्हीं चार बिंदुओं में से किसी एक पर तौलिए।
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- (a) 11 weeks
- (b) 12 weeks
- (c) 13 weeks
- (d) 14 weeks
उत्तर(b) 12 weeks
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- (a) 1, 2 and 3 only
- (b) 1, 2 and 4 only
- (c) 3 and 4 only
- (d) 1, 2, 3 and 4
उत्तर(d) 1, 2, 3 and 4
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- (a) 1, 2, 3 and 4
- (b) 2, 3, 4 and 5
- (c) 2, 4, 5 and 6
- (d) 3, 4, 5 and 6
उत्तर(c) 2, 4, 5 and 6
इसी पेपर का सामाजिक सुरक्षा के साधनों वाला प्रश्न — बीमा और भविष्य निधि, दोनों रास्तों को एक साथ रखकर देखने के लिए।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 की धारा 46 में कितने प्रकार के हितलाभ गिनाए गए हैं ?
- (a)चार
- (b)पाँच
- (c)छह
- (d)सात
उत्तर(c) छह — बीमारी, प्रसूति, निःशक्तता, आश्रितजन, चिकित्सा और अंत्येष्टि व्यय; इनमें चिकित्सा हितलाभ ही सेवा के रूप में मिलता है।