सामाजिक सुरक्षा, किन स्थितियों का सामना करने वाले व्यक्तियों को नकद सहायता प्रदान कर सकती है ? 1. बीमारी और निःशक्तता 2. बेरोज़गारी 3. फसल विफलता 4. पति या पत्नी की हानि नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1, 2 और 3
- (b)केवल 1, 2 और 4
- (c)केवल 3 और 4
- (d)1, 2, 3 और 4
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) 1, 2, 3 और 4 — प्रश्न का शब्द-चयन ही उत्तर की चौड़ाई तय करता है: वह यह नहीं पूछता कि किन आकस्मिकताओं के लिए सामाजिक सुरक्षा देना अनिवार्य है, बल्कि यह कि वह किन स्थितियों में नक़द सहायता 'प्रदान कर सकती है'। चारों मदें ऐसी ही स्थितियाँ हैं, और भारत में चारों के लिए नक़द भुगतान की व्यवस्थाएँ मौजूद हैं। बीमारी और निःशक्तता — कर्मचारी राज्य बीमा योजना का बीमारी हितलाभ तथा निःशक्तता हितलाभ। बेरोज़गारी — उसी योजना के अंतर्गत बीमित व्यक्ति को कारखाना बंद होने, छँटनी या स्थायी अपंगता की दशा में मिलने वाला बेरोज़गारी भत्ता। फ़सल विफलता — फ़सल बीमा और आपदा राहत के अंतर्गत किसान को दी जाने वाली नक़द सहायता, जो कृषि पर निर्भर आबादी के लिए आय-प्रतिस्थापन का वही काम करती है। पति या पत्नी की हानि — कर्मचारी पेंशन योजना की परिवार पेंशन तथा विधवा पेंशन जैसी उत्तरजीवी योजनाएँ। इसलिए चारों मदें उत्तर में आती हैं। ऐसे प्रश्नों में एक कसौटी बहुत काम आती है — प्रश्न का क्रिया-रूप देखिए। 'प्रदान करती है' और 'प्रदान कर सकती है' दो अलग दावे हैं: पहला अनिवार्य सूची माँगता है और दूसरा संभावनाओं की। यहाँ दूसरा रूप है, इसलिए हर वह स्थिति उत्तर में आ जाती है जिसमें आय रुकने या ख़र्च बढ़ने पर नक़द सहायता दी जा सकती हो। इसी कारण भारत के संदर्भ में कृषि-जोखिम भी उसमें आ जाता है, क्योंकि यहाँ बड़ी आबादी की आय सीधे फ़सल पर टिकी है और फ़सल की विफलता उसके लिए वही आघात है जो नौकरीपेशा के लिए बेरोज़गारी।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1, 2 और 3 — इसमें मद 4 छूट गई है, जबकि उत्तरजीवी को दी जाने वाली सहायता सामाजिक सुरक्षा की सबसे पुरानी शाखाओं में से एक है। कमाने वाले की मृत्यु पर परिवार की आय अचानक समाप्त हो जाती है, और उसी के लिए परिवार पेंशन तथा विधवा पेंशन जैसी व्यवस्थाएँ बनी हैं। इसलिए इस मद को बाहर रखना सामाजिक सुरक्षा की परिभाषा को ही सँकरा कर देता है। उत्तरजीवी हितलाभ भारत में कई रूपों में मिलता है — कर्मचारी पेंशन योजना की परिवार पेंशन, कर्मचारी राज्य बीमा का आश्रितजन हितलाभ, और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की विधवा पेंशन। यह मद इसलिए छोड़ी नहीं जा सकती।
- (b)केवल 1, 2 और 4 — आयोग की कुंजी इस विकल्प को नहीं लेती, यद्यपि इसकी तीनों मदें अपने आप में सही हैं। यह विकल्प इसलिए आकर्षक है कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के सामाजिक सुरक्षा (न्यूनतम मानक) अभिसमय, 1952 (संख्या 102) में जो नौ शाखाएँ गिनाई गई हैं — चिकित्सा देखभाल, बीमारी, बेरोज़गारी, वृद्धावस्था, नियोजन-जन्य क्षति, पारिवारिक हितलाभ, प्रसूति, अशक्तता और उत्तरजीवी हितलाभ — उनमें फ़सल विफलता का नाम नहीं है। पर वह सूची न्यूनतम मानकों की है, और यह प्रश्न न्यूनतम मानक नहीं पूछता; वह पूछता है कि नक़द सहायता किन स्थितियों में दी जा सकती है। भारत जैसी कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था में फ़सल की विफलता आय-हानि की उतनी ही वास्तविक स्थिति है, और उसके लिए नक़द सहायता की व्यवस्थाएँ चलती भी हैं। भारत में इस चौड़ाई का व्यावहारिक कारण भी है: कार्यबल का बहुत बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र और कृषि में है, जहाँ आय-हानि का सबसे बड़ा कारण नौकरी जाना नहीं, फ़सल का चौपट होना है। इसीलिए यहाँ की सामाजिक सुरक्षा-नीति में फ़सल-जोखिम को अलग रखना कठिन है।
- (c)केवल 3 और 4 — इसमें दोनों सबसे स्थापित मदें — बीमारी तथा निःशक्तता, और बेरोज़गारी — छोड़ दी गई हैं। ये दोनों हर परिभाषा में सामाजिक सुरक्षा की केन्द्रीय शाखाएँ हैं और भारत में भी इनके लिए वैधानिक नक़द हितलाभ मौजूद हैं। इसलिए यह विकल्प उत्तर की परिधि को उलटी दिशा से काटता है। बीमारी और बेरोज़गारी दोनों के लिए भारत में वैधानिक नक़द हितलाभ मौजूद हैं, इसलिए इन्हें छोड़ना किसी भी परिभाषा के अनुसार कठिन है। बीमारी हितलाभ कर्मचारी राज्य बीमा की सबसे पुरानी मदों में है और बेरोज़गारी भत्ता उसी योजना में बाद में जोड़ा गया।
अवधारणा
सामाजिक सुरक्षा का मूल विचार आय-प्रतिस्थापन है — जब किसी कारण से कमाई रुक जाए या ख़र्च अचानक बढ़ जाए, तब समाज सामूहिक व्यवस्था से उस व्यक्ति को सहारा दे। यह सहारा दो रूपों में आता है: वस्तु या सेवा के रूप में, जैसे चिकित्सा उपचार, और नक़द के रूप में, जैसे बीमारी हितलाभ, पेंशन या भत्ता। वित्त-पोषण की दृष्टि से भी दो रास्ते हैं — अंशदायी योजनाएँ, जिनमें कर्मचारी और नियोजक दोनों जमा करते हैं, और अंशदान-रहित योजनाएँ, जो सरकारी बजट से चलती हैं और प्रायः निर्धनता के आधार पर दी जाती हैं। किसी आकस्मिकता के लिए कौन-सा रास्ता चुना जाए, यह इस पर निर्भर करता है कि वह जोखिम कितनी बड़ी आबादी को छूता है और उसका अनुमान लगाना कितना संभव है।
संविधान की सातवीं अनुसूची में 'सामाजिक सुरक्षा और सामाजिक बीमा' समवर्ती सूची की प्रविष्टि 23 है, इसलिए केन्द्र और राज्य दोनों इस क्षेत्र में योजनाएँ चलाते हैं; इसी सूची की प्रविष्टि 24 में श्रम-कल्याण, भविष्य निधि और वृद्धावस्था पेंशन भी आते हैं। यही कारण है कि भारत में आकस्मिकताओं की सूची अंतर्राष्ट्रीय न्यूनतम मानकों से आगे तक चली जाती है और उसमें कृषि-जोखिम भी समा जाते हैं। इस पेपर में श्रम विधि और सामाजिक सुरक्षा के लगभग दस प्रश्न हैं, और यह प्रश्न उनमें सबसे अधिक सैद्धान्तिक है — यह किसी एक अधिनियम का अंक नहीं पूछता, बल्कि यह जाँचता है कि अभ्यर्थी 'सामाजिक सुरक्षा' की परिधि कितनी चौड़ी समझता है।
मुख्य तथ्य
- अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के सामाजिक सुरक्षा (न्यूनतम मानक) अभिसमय, 1952 में नौ शाखाएँ गिनाई गई हैं — चिकित्सा देखभाल, बीमारी, बेरोज़गारी, वृद्धावस्था, नियोजन-जन्य क्षति, पारिवारिक हितलाभ, प्रसूति, अशक्तता और उत्तरजीवी हितलाभ।
- कर्मचारी राज्य बीमा योजना में बीमारी, प्रसूति, निःशक्तता, आश्रितजन, चिकित्सा और अंत्येष्टि व्यय के हितलाभ मिलते हैं।
- उसी योजना के अंतर्गत बीमित व्यक्ति को कारखाना बंद होने, छँटनी या स्थायी अपंगता की दशा में बेरोज़गारी भत्ता देने की व्यवस्था है।
- कमाने वाले की मृत्यु पर परिवार पेंशन और विधवा पेंशन उत्तरजीवी हितलाभ के रूप में मिलती हैं, जो इस सूची की चौथी मद को पूरा करती हैं।
- फ़सल विफलता पर नक़द सहायता फ़सल बीमा और आपदा राहत के माध्यम से दी जाती है, जो कृषि पर निर्भर आबादी के लिए आय-प्रतिस्थापन का काम करती है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'प्रदान कर सकती है' जैसी अनुमति-सूचक भाषा को अनिवार्य सूची मान लेना और उत्तर को संकुचित कर देना।
- अंतर्राष्ट्रीय न्यूनतम मानकों की नौ शाखाओं की सूची को भारत की सम्पूर्ण सूची मान लेना।
- सामाजिक सुरक्षा को केवल संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों तक सीमित समझ लेना, जबकि असंगठित क्षेत्र और कृषि के लिए भी व्यवस्थाएँ हैं।
सामाजिक सुरक्षा पर सूची-आधारित प्रश्न तीन कोणों से आते हैं — कौन-सी आकस्मिकताएँ इसके दायरे में हैं, कौन-सी योजना किस आकस्मिकता के लिए है, और कौन-सा हितलाभ नक़द है तथा कौन-सा सेवा-रूप में। दूसरा कोण सबसे अधिक अंक तय करता है, इसलिए हर आकस्मिकता के साथ एक भारतीय योजना का नाम जोड़कर याद रखिए। प्रश्न का क्रिया-रूप भी हर बार देखिए: 'दी जाती है' और 'दी जा सकती है' में उत्तर की चौड़ाई का पूरा अन्तर छिपा होता है।
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- (a) 1, 2, 3 and 4
- (b) 2, 3, 4 and 5
- (c) 2, 4, 5 and 6
- (d) 3, 4, 5 and 6
उत्तर(c) 2, 4, 5 and 6
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- (a) 1, 2 and 3 only
- (b) 1, 2 and 4 only
- (c) 3 and 4 only
- (d) 1, 2, 3 and 4
उत्तर(d) 1, 2, 3 and 4
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- (a) 1, 2 and 3 only
- (b) 1, 2 and 4 only
- (c) 3 and 4 only
- (d) 1, 2, 3 and 4
उत्तर(d) 1, 2, 3 and 4
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अभ्यास
- practice — not a real PYQ
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- (a)कर्मचारी राज्य बीमा निगम की बेरोज़गारी भत्ता योजना
- (b)अटल पेंशन योजना
- (c)प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना
- (d)प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना
उत्तर(a) कर्मचारी राज्य बीमा निगम की बेरोज़गारी भत्ता योजना — शेष तीन क्रमशः पेंशन, दुर्घटना बीमा और जीवन बीमा की योजनाएँ हैं, बेरोज़गारी की नहीं।