निम्नलिखित में से कौन-से, 1931 के गाँधी-इरविन समझौते के प्रमुख पहलू थे ? 1. सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित करना 2. तत्पश्चात् होने वाले शिमला सम्मेलन में भाग लेना 3. सविनय अवज्ञा आंदोलन की अवधि के करों का भुगतान करना 4. राजनीतिक बंदियों की मुक्ति नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1 और 3
- (b)केवल 2 और 3
- (c)केवल 1 और 4
- (d)केवल 2 और 4
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) केवल 1 और 4 — गाँधी-इरविन समझौता 5 मार्च 1931 को महात्मा गाँधी और तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच हुआ था, और उसे दिल्ली समझौता भी कहा जाता है। कांग्रेस की ओर से दो वचन थे — सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित करना और लंदन में होने वाले द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन में भाग लेना। सरकार की ओर से जो रियायतें दी गईं उनमें प्रमुख थी हिंसा के अपराध में दंडित न हुए राजनीतिक बंदियों की रिहाई, अध्यादेशों और अभियोजनों की वापसी, अब तक वसूल न किए गए जुर्मानों की छूट, वे ज़ब्त सम्पत्तियाँ लौटाना जो अभी किसी तीसरे पक्ष को बेची नहीं गई थीं, शान्तिपूर्ण धरने की अनुमति, और समुद्र-तट के निवासियों को अपने उपयोग के लिए नमक बनाने की छूट। इस सूची में कथन 1 और कथन 4 दोनों सीधे बैठते हैं, इसलिए उत्तर (c) है। इस समझौते को याद रखने का सबसे उपयोगी ढाँचा दो स्तंभों वाला है — कांग्रेस ने क्या दिया और सरकार ने क्या दिया। कांग्रेस की ओर से केवल दो बातें थीं: आंदोलन का स्थगन और गोलमेज़ सम्मेलन में भागीदारी। सरकार की ओर से रियायतों की सूची लंबी है, पर वे सब एक ही दिशा की हैं — दमन के उपाय वापस लेना और आंदोलन के दौरान की गई कार्रवाइयों का असर घटाना। इस ढाँचे में रखते ही कथन 3 अपने आप बाहर हो जाता है, क्योंकि करों का भुगतान न कांग्रेस के वचनों में आता है और न सरकार की रियायतों में; और कथन 2 केवल नाम की चूक से गिरता है, क्योंकि भागीदारी वाली बात तो समझौते में थी ही, पर सम्मेलन दूसरा था।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है, पर कथन 3 समझौते की शर्त नहीं है। समझौते में करों के भुगतान का ऐसा कोई उपबंध प्रमुख पहलू के रूप में नहीं था; उलटी दिशा में अवश्य रियायत दी गई — अब तक वसूल न हुए जुर्माने माफ़ किए जाने थे और वे ज़ब्त ज़मीनें लौटाई जानी थीं जो अभी बेची नहीं गई थीं। इसी बिंदु पर आगे चलकर किसानों की माँगों को लेकर असंतोष भी बना रहा। करों और मालगुज़ारी का प्रश्न इस समझौते के बाद भी बना रहा और आगे चलकर असंतोष का कारण भी बना, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ आंदोलन के दौरान कर न देने की मुहिम चली थी। पर वह समझौते की शर्त नहीं, उसकी अधूरी छूट का परिणाम था।
- (b)केवल 2 और 3 — इसमें दोनों कथन असत्य हैं। कथन 2 का दोष केवल सम्मेलन के नाम का है, और वही उसे ग़लत बनाता है: समझौते के बाद जिस सम्मेलन में भाग लेना तय हुआ वह लंदन का द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन था, जो उसी वर्ष के उत्तरार्ध में हुआ। शिमला सम्मेलन बहुत बाद की घटना है और उसका गाँधी-इरविन समझौते से कोई सम्बन्ध नहीं। तिथियाँ भी इसी निष्कर्ष की पुष्टि करती हैं: समझौता मार्च 1931 का है और द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन उसी वर्ष के उत्तरार्ध में लंदन में हुआ, इसलिए 'तत्पश्चात् होने वाला सम्मेलन' वही था। शिमला सम्मेलन इस घटनाक्रम से बहुत बाद का और बिलकुल दूसरे प्रसंग का है।
- (d)केवल 2 और 4 — कथन 4 सही है, पर कथन 2 उसी नाम की चूक पर टिका है। इस प्रश्न की असली परीक्षा यही है — अभ्यर्थी को यह याद होना चाहिए कि 1931 के समझौते के बाद कांग्रेस गोलमेज़ सम्मेलन में गई, और उसमें महात्मा गाँधी कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि थे। राजनीतिक बंदियों की रिहाई से जुड़ी एक शर्त भी याद रखने योग्य है — छोड़े जाने वाले वे बंदी थे जो हिंसा के अपराध में दंडित नहीं हुए थे, इसलिए यह रिहाई सर्वव्यापी नहीं थी। इसी सीमा को लेकर उस समय आलोचना भी हुई थी।
अवधारणा
सविनय अवज्ञा आंदोलन मार्च 1930 की दांडी यात्रा से आरम्भ हुआ और उसका पहला चरण गाँधी-इरविन समझौते पर आकर रुका। समझौते का स्वरूप संधि जैसा था: दोनों पक्षों ने कुछ छोड़ा और कुछ पाया। कांग्रेस ने आंदोलन स्थगित करने और गोलमेज़ सम्मेलन में जाने का वचन दिया, और सरकार ने दमनकारी अध्यादेश तथा अभियोजन वापस लेने, हिंसा के लिए दंडित न हुए राजनीतिक बंदियों को छोड़ने, अब तक वसूल न हुए जुर्माने माफ़ करने, वे ज़ब्त सम्पत्तियाँ लौटाने जो अभी बेची नहीं गई थीं, शान्तिपूर्ण धरने की अनुमति देने और समुद्र-तट के निवासियों को अपने उपयोग के लिए नमक बनाने देने की बात मानी। समझौते को मार्च 1931 के कराची अधिवेशन में कांग्रेस की स्वीकृति मिली, और वही अधिवेशन मौलिक अधिकारों तथा आर्थिक नीति के अपने प्रस्ताव के लिए भी याद किया जाता है।
इस पेपर में आधुनिक भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन के लगभग आठ प्रश्न हैं, और उनमें कई कथन-सूची या कालक्रम के रूप में हैं। ऐसे प्रश्नों में प्रायः एक कथन नाम, तिथि या दिशा बदलकर असत्य बना दिया जाता है, इसलिए हर कथन का एक-एक शब्द पढ़ना पड़ता है — यहाँ पूरा निर्णय 'शिमला' और 'गोलमेज़' के अन्तर पर टिका है। हिन्दी स्तंभ में शहर का नाम 'शिमला' छपा है और अंग्रेज़ी में 'Simla', यानी दोनों स्तंभ एक ही बात कहते हैं और केवल वर्तनी अलग है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि हिन्दी के चारों कथन व्याकरण की दृष्टि से एकसमान हैं, जबकि अंग्रेज़ी स्तंभ में वे अलग-अलग रूपों में छपे हैं।
मुख्य तथ्य
- गाँधी-इरविन समझौता 5 मार्च 1931 को हुआ और उसे दिल्ली समझौता भी कहा जाता है; उस समय लॉर्ड इरविन वायसराय थे।
- कांग्रेस की ओर से दो वचन — सविनय अवज्ञा आंदोलन का स्थगन और लंदन के द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन में भागीदारी।
- सरकार की ओर से — अध्यादेशों और अभियोजनों की वापसी, हिंसा के लिए दंडित न हुए राजनीतिक बंदियों की रिहाई, बिना वसूले जुर्मानों की छूट और बिना बिकी ज़ब्त सम्पत्तियों की वापसी।
- तटवर्ती निवासियों को अपने उपयोग के लिए नमक बनाने और शान्तिपूर्ण धरना देने की अनुमति भी समझौते का अंग थी।
- समझौते को मार्च 1931 के कराची अधिवेशन में कांग्रेस की स्वीकृति मिली, और द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन में महात्मा गाँधी कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि थे।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- गोलमेज़ सम्मेलन और शिमला सम्मेलन को आपस में बदल देना — दोनों अलग-अलग दशकों की और अलग-अलग उद्देश्यों की घटनाएँ हैं।
- समझौते की रियायतों की दिशा उलट देना — जुर्माने माफ़ किए जाने थे, वसूले नहीं जाने थे।
- आंदोलन के 'स्थगन' और 'वापसी' को एक मान लेना; समझौते में आंदोलन स्थगित हुआ था और अगले वर्ष उसे फिर चलाया गया।
राष्ट्रीय आंदोलन के समझौतों पर प्रश्न चार रूपों में आते हैं — शर्तें पहचानना, तिथि या हस्ताक्षरकर्ता पूछना, घटनाओं का कालक्रम बनाना, और किसी समझौते के बाद हुई घटना पूछना। चारों के लिए एक ही तैयारी काम आती है: हर समझौते के साथ 'किसने क्या दिया' की दो पंक्तियाँ और उसके ठीक बाद की एक घटना जोड़कर याद रखिए। गोलमेज़ सम्मेलनों के लिए यह भी याद रखिए कि पहले का कांग्रेस ने बहिष्कार किया, दूसरे में गाँधीजी अकेले गए और तीसरे में कांग्रेस थी ही नहीं।
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- (a) 1, 3 and 2
- (b) 2, 3 and 1
- (c) 1, 2 and 3
- (d) 2, 1 and 3
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गाँधी-इरविन समझौते के बाद महात्मा गाँधी ने कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में किसमें भाग लिया ?
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- (b)द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन
- (c)तृतीय गोलमेज़ सम्मेलन
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उत्तर(b) द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन — यह 1931 में लंदन में हुआ; प्रथम सम्मेलन का कांग्रेस ने बहिष्कार किया था।