निम्नलिखित में से किस परिस्थिति में, प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 में दिए गए छब्बीस सप्ताह का प्रसूति लाभ, सुश्री ‘X’, जो कि सरकारी कर्मचारी है, दावा नहीं कर सकती है ?
- (a)उसका एक जीवित शिशु है तथा वह कमीशनिंग माँ है
- (b)उसका एक जीवित शिशु है तथा वह प्रतिनियुक्त माँ के रूप में काम करती है
- (c)उसका कोई जीवित शिशु नहीं है तथा वह कमीशनिंग माँ है
- (d)उसका कोई जीवित शिशु नहीं है व उसका गर्भपात हुआ है
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) उसका कोई जीवित शिशु नहीं है व उसका गर्भपात हुआ है — गर्भपात की दशा में छब्बीस सप्ताह का प्रसूति लाभ किसी भी पठन पर नहीं बनता, और यही इस विकल्प को शेष तीन से अलग करता है।
पहले प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 का पाठ देखिए। उसकी धारा 5(3) प्रसूति प्रसुविधा की अधिकतम अवधि छब्बीस सप्ताह रखती है, इस शर्त के साथ कि जिस स्त्री के दो या अधिक जीवित शिशु हैं उसे बारह सप्ताह ही मिलेंगे। गर्भपात के लिए अधिनियम में अलग उपबंध है — धारा 9 कहती है कि गर्भपात या गर्भ के चिकित्सकीय समापन की दशा में स्त्री को, निर्धारित प्रमाण देने पर, उस दिन के तुरंत बाद की छह सप्ताह की अवधि के लिए प्रसूति प्रसुविधा की दर से मज़दूरी सहित अवकाश मिलेगा। छह सप्ताह, छब्बीस नहीं।
अब प्रश्न की उस पंक्ति पर आइए जो सजावट नहीं है : सुश्री X 'सरकारी कर्मचारी' हैं। सरकारी कर्मचारी के लिए अवकाश का क़ानून केंद्रीय सिविल सेवा (छुट्टी) नियम है, और वहाँ भी गर्भपात की दशा में अवकाश की अपनी अलग सीमा है — पूरी सेवा में अधिकतम पैंतालीस दिन, जीवित शिशुओं की संख्या से निरपेक्ष। पैंतालीस दिन भी छब्बीस सप्ताह नहीं हैं।
इसलिए विकल्प (d) दोनों पठनों पर एक साथ विफल होता है, और यही उसे एकमात्र बचाव-योग्य उत्तर बनाता है।
अब वह भाग, जो इस प्रश्न को कठिन बनाता है और जिसे छिपाना नहीं चाहिए। यदि केवल 1961 का अधिनियम पढ़ा जाए तो विकल्प (a) और (c) भी छब्बीस सप्ताह तक नहीं पहुँचते, क्योंकि उसकी धारा 5(4) कमीशनिंग माँ को — और तीन मास से कम आयु के शिशु को विधित: गोद लेने वाली माँ को भी — बारह सप्ताह की प्रसुविधा देती है, छब्बीस की नहीं। पर उन दोनों विकल्पों को एक साथ देखिए : वे केवल इस बात में भिन्न हैं कि एक जीवित शिशु है या कोई नहीं, और दोनों ही दो से कम हैं, इसलिए धारा 5(3) का परंतुक किसी पर लागू नहीं होता। जो कारण एक को गिराएगा वही दूसरे को भी गिराएगा, और प्रश्न एक ही परिस्थिति माँगता है। इसलिए उन दोनों में से कोई भी अभीष्ट उत्तर नहीं हो सकता।
स्टेम की 'सरकारी कर्मचारी' वाली शर्त इसी उलझन को सुलझाती है। केंद्रीय सिविल सेवा (छुट्टी) नियमों में 18 जून 2024 को अधिसूचित संशोधन से एक नया नियम जोड़ा गया, जिसके अनुसार सरोगेसी की दशा में कमीशनिंग माँ को तथा गर्भ धारण करने वाली माँ को, दो से कम जीवित शिशु होने पर, एक सौ अस्सी दिन का प्रसूति अवकाश दिया जा सकता है। इस पठन पर विकल्प (a), (b) और (c) तीनों को पूरी अवधि मिल जाती है, और केवल (d) बाहर रह जाता है। दोनों पठनों में जो एक विकल्प समान रूप से विफल रहता है, वही उत्तर है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)उसका एक जीवित शिशु है तथा वह कमीशनिंग माँ है — यह विकल्प विचारणीय है और उसे सीधे ग़लत कह देना पाठक को अधूरी बात बताना होगा। यदि केवल 1961 का अधिनियम पढ़ा जाए तो कमीशनिंग माँ को धारा 5(4) के अधीन बारह सप्ताह मिलते हैं, जो छब्बीस से कम हैं — यानी उस पठन पर वह भी छब्बीस सप्ताह का दावा नहीं कर सकती। दो कारणों से फिर भी यह अभीष्ट उत्तर नहीं बनता। पहला, यह विकल्प (c) से केवल एक बात में भिन्न है — वहाँ कोई जीवित शिशु नहीं, यहाँ एक — और दोनों ही दो से कम हैं, इसलिए धारा 5(3) का परंतुक दोनों पर समान रूप से निष्क्रिय है; जो तर्क इसे गिराएगा वही उसे भी गिराएगा, और तब प्रश्न के दो उत्तर बन जाएँगे। दूसरा, स्टेम कहता है कि सुश्री X सरकारी कर्मचारी हैं, और केंद्रीय सिविल सेवा (छुट्टी) नियमों में 2024 में जोड़े गए उपबंध के अनुसार दो से कम जीवित शिशु वाली कमीशनिंग माँ को एक सौ अस्सी दिन का प्रसूति अवकाश मिल सकता है। इसलिए इस विकल्प में वह अवधि पा सकती है।
- (b)उसका एक जीवित शिशु है तथा वह प्रतिनियुक्त माँ के रूप में काम करती है — यहाँ 'प्रतिनियुक्त माँ' शब्द से भ्रम हो सकता है, इसलिए पहले उसे स्पष्ट कर लीजिए : इसी पुस्तिका का अंग्रेज़ी स्तंभ इस विकल्प में 'surrogate' छापता है, अर्थात् वह स्त्री जो किसी अन्य के लिए गर्भ धारण करती है और शिशु को जन्म देती है। यह वही स्त्री है जिसका शरीर पूरी गर्भावस्था और प्रसव से गुज़रता है, इसलिए प्रसूति से जुड़ी शारीरिक आवश्यकता उसकी सबसे स्पष्ट है। सरकारी कर्मचारी के लिए यह दशा अब सीधे उपबंधित है : केंद्रीय सिविल सेवा (छुट्टी) नियमों में 2024 में जोड़ा गया उपबंध कमीशनिंग माँ के साथ-साथ गर्भ धारण करने वाली माँ को भी, दो से कम जीवित शिशु होने पर, एक सौ अस्सी दिन का प्रसूति अवकाश देता है। यहाँ उसका एक जीवित शिशु है, यानी दो से कम, इसलिए वह पूरी अवधि की पात्र है और यह विकल्प उत्तर नहीं बनता।
- (c)उसका कोई जीवित शिशु नहीं है तथा वह कमीशनिंग माँ है — यह विकल्प (a) का जुड़वाँ है — दोनों 'तथा वह कमीशनिंग माँ है' पर समाप्त होते हैं और केवल जीवित शिशु की संख्या में भिन्न हैं। इसलिए इसके बारे में वही बात सही है जो (a) के बारे में। 1961 के अधिनियम को अकेले पढ़ें तो कमीशनिंग माँ की प्रसुविधा बारह सप्ताह की है, और उस पठन पर यह विकल्प भी छब्बीस सप्ताह तक नहीं पहुँचता; पर तब (a) और (c) दोनों उत्तर हो जाते हैं, जो एक विकल्प माँगने वाले प्रश्न में संभव नहीं। स्टेम की 'सरकारी कर्मचारी' वाली शर्त इसी को सुलझाती है, क्योंकि केंद्रीय सिविल सेवा (छुट्टी) नियमों में 2024 में जोड़े गए उपबंध के अनुसार दो से कम जीवित शिशु वाली कमीशनिंग माँ एक सौ अस्सी दिन के प्रसूति अवकाश की पात्र है। यहाँ जीवित शिशु एक भी नहीं है, इसलिए वह शर्त निश्चित रूप से पूरी है।
अवधारणा
प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 को समझने का सबसे साफ़ रास्ता यह है कि उसकी अवधियों को अलग-अलग खानों में रख लिया जाए, क्योंकि अधिनियम एक ही 'प्रसूति अवकाश' नहीं देता, बल्कि परिस्थिति के अनुसार अलग-अलग अवधियाँ देता है।
साधारण दशा — धारा 5(3) के अधीन अधिकतम छब्बीस सप्ताह, जिनमें से प्रत्याशित प्रसव की तारीख़ से पहले आठ सप्ताह से अधिक नहीं लिए जा सकते। यह अवधि 2017 के संशोधन से बढ़ाई गई थी; उससे पहले वह बारह सप्ताह थी।
दो या अधिक जीवित शिशु — उसी उपधारा का परंतुक अवधि घटाकर बारह सप्ताह कर देता है, जिनमें से प्रसव से पहले छह सप्ताह से अधिक नहीं।
गोद लेने वाली और कमीशनिंग माँ — धारा 5(4) के अधीन बारह सप्ताह, जो शिशु सौंपे जाने की तारीख़ से गिने जाते हैं। अधिनियम 'कमीशनिंग माँ' को उस जैविक माँ के रूप में परिभाषित करता है जो अपने अंडाणु से भ्रूण बनाकर उसे किसी अन्य स्त्री में प्रतिरोपित कराती है।
गर्भपात या गर्भ का चिकित्सकीय समापन — धारा 9 के अधीन छह सप्ताह, उस दिन के तुरंत बाद से।
नसबंदी की शल्यक्रिया — दो सप्ताह का अवकाश।
प्रसूति से उत्पन्न बीमारी — इन सबके अतिरिक्त एक मास तक का अवकाश।
इनके साथ अधिनियम कुछ और अधिकार भी देता है — प्रसव के बाद शिशु के पोषण के लिए विराम, पचास या अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान में शिशु-गृह की सुविधा, काम की प्रकृति अनुकूल होने पर घर से काम करने की अनुज्ञा, और गर्भावस्था के कारण सेवा से हटाए जाने पर रोक। परीक्षा में प्रश्न प्रायः इन्हीं अवधियों को आपस में बदलकर बनाया जाता है।
इस अधिनियम की अवधियाँ समय के साथ बदली हैं, और यही उसे सावधानी से पढ़ने योग्य बनाता है। 1961 में मूल अवधि बारह सप्ताह थी। 2017 के संशोधन ने उसे बढ़ाकर छब्बीस सप्ताह किया, दो या अधिक जीवित शिशुओं वाली स्त्री के लिए बारह सप्ताह रखा, गोद लेने वाली और कमीशनिंग माँ के लिए पहली बार उपबंध जोड़ा, शिशु-गृह की सुविधा अनिवार्य की, और घर से काम करने की अनुज्ञा का उपबंध रखा। इसलिए इस विषय पर पुराने प्रश्नों के उत्तर आज के उत्तर नहीं हैं, और यह अंतर स्वयं परीक्षा-योग्य है।
दूसरी परत सरकारी कर्मचारियों की है। सरकारी सेवा में अवकाश का स्रोत केंद्रीय सिविल सेवा (छुट्टी) नियम हैं, न कि यह अधिनियम, और वहाँ की अवधियाँ अधिनियम से भिन्न भी हो सकती हैं और अधिक उदार भी। दो से कम जीवित शिशु वाली महिला सरकारी कर्मचारी को एक सौ अस्सी दिन का प्रसूति अवकाश मिलता है; गर्भपात की दशा में पूरी सेवा में अधिकतम पैंतालीस दिन का अवकाश मिलता है।
तीसरी परत सरोगेसी की है, और वह सबसे नई है। लंबे समय तक नियमों में इस बारे में कुछ नहीं था, और मामले न्यायालयों तक जाते रहे। 18 जून 2024 को अधिसूचित संशोधन ने यह रिक्ति भरी : सरोगेसी की दशा में कमीशनिंग माँ को और गर्भ धारण करने वाली माँ को, दो से कम जीवित शिशु होने पर, एक सौ अस्सी दिन का प्रसूति अवकाश; कमीशनिंग माँ को शिशु देखभाल अवकाश; और कमीशनिंग पिता को पंद्रह दिन का पितृत्व अवकाश। इसी कारण प्रश्न में 'जो कि सरकारी कर्मचारी है' लिखा गया है — वह एक शर्त है, विवरण नहीं।
मुख्य तथ्य
- धारा 5(3) : प्रसूति प्रसुविधा की अधिकतम अवधि छब्बीस सप्ताह है, जिनमें से प्रत्याशित प्रसव की तारीख़ से पहले आठ सप्ताह से अधिक नहीं लिए जा सकते।
- धारा 5(3) का परंतुक : जिस स्त्री के दो या अधिक जीवित शिशु हैं उसे बारह सप्ताह मिलते हैं, जिनमें से प्रसव से पहले छह सप्ताह से अधिक नहीं।
- धारा 5(4) : तीन मास से कम आयु के शिशु को विधित: गोद लेने वाली माँ को तथा कमीशनिंग माँ को शिशु सौंपे जाने की तारीख़ से बारह सप्ताह की प्रसुविधा मिलती है।
- धारा 9 : गर्भपात या गर्भ के चिकित्सकीय समापन की दशा में छह सप्ताह का, मज़दूरी सहित अवकाश मिलता है — यही वह उपबंध है जो इस प्रश्न का उत्तर तय करता है।
- केंद्रीय सिविल सेवा (छुट्टी) नियमों के अधीन गर्भपात की दशा में पूरी सेवा में अधिकतम पैंतालीस दिन का अवकाश मिलता है, जीवित शिशुओं की संख्या से निरपेक्ष।
- 18 जून 2024 को अधिसूचित संशोधन से केंद्रीय सिविल सेवा (छुट्टी) नियमों में यह जोड़ा गया कि सरोगेसी की दशा में कमीशनिंग माँ को तथा गर्भ धारण करने वाली माँ को, दो से कम जीवित शिशु होने पर, एक सौ अस्सी दिन का प्रसूति अवकाश दिया जा सकता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- गर्भपात की अवधि प्रसव की अवधि से अलग है। अधिनियम में वह छह सप्ताह है और सरकारी सेवा के नियमों में पैंतालीस दिन; दोनों में से कोई छब्बीस सप्ताह नहीं है।
- 'सरकारी कर्मचारी' शब्द को पढ़कर छोड़ देना यहाँ भारी पड़ता है। वही शब्द तय करता है कि निर्णय किस विधि से होगा।
- दो विकल्प यदि केवल एक शब्द में भिन्न हों और वह शब्द परिणाम न बदलता हो, तो उनमें से कोई भी अकेला उत्तर नहीं हो सकता — यह जाँच पूरे प्रश्न को छाँट देती है।
- जीवित शिशुओं की संख्या तभी अवधि घटाती है जब वह दो या अधिक हो। शून्य और एक, दोनों दशाओं में पूरी अवधि बनी रहती है।
प्रसूति प्रसुविधा पर प्रश्न तीन साँचों में आते हैं। पहला सीधी अवधि का है — 'अधिनियम के अधीन अधिकतम कितने सप्ताह', 'तीसरे शिशु के लिए कितने सप्ताह', 'गर्भपात पर कितने सप्ताह' — और इसी परीक्षा-परिवार में यह रूप एक से अधिक बार आ चुका है, जिनमें एक पुराना प्रश्न 2017 से पहले की बारह सप्ताह वाली स्थिति दिखाता है। दूसरा साँचा परिस्थिति का है, जैसा यहाँ है : एक स्त्री की चार अलग-अलग दशाएँ देकर पूछना कि किसमें वह अवधि नहीं मिलेगी; इसमें हर विकल्प के दो अंश अलग-अलग जाँचिए — जीवित शिशुओं की संख्या, और मातृत्व का प्रकार — और विकल्पों को आपस में भी मिलाकर देखिए, क्योंकि जुड़वाँ विकल्प अपने आप बाहर हो जाते हैं। तीसरा साँचा सुविधाओं का है : पोषणार्थ विराम, शिशु-गृह, घर से काम, और सेवा से हटाए जाने पर रोक। तीनों की तैयारी एक तालिका से हो जाती है जिसमें बाएँ परिस्थिति हो, बीच में अधिनियम की अवधि, और दाएँ सरकारी सेवा के नियमों की अवधि — क्योंकि प्रश्न प्रायः यह बताकर पूछता है कि स्त्री सरकारी कर्मचारी है।
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EPFO_EOAO_2023_Q34As per the provisions of the Maternity Benefit Act, 1961, the maximum period for which a female employee shall be entitled to leave with wages as maternity benefit for giving birth to the third child is :
- (a) Eight weeks
- (b) Twelve weeks
- (c) Sixteen weeks
- (d) Twenty-six weeks
उत्तर(b) Twelve weeks
इसी अधिनियम के अधीन तीसरे शिशु के जन्म पर मज़दूरी सहित अवकाश की अधिकतम अवधि पूछता है — वही परंतुक, जो दो या अधिक जीवित शिशु होने पर अवधि घटा देता है।
EPFO_APFC_2016_Q91The Maternity Benefit Act, 1961 (M.B. Act) provides for how many weeks' wages during the maternity period ?
- (a) 11 weeks
- (b) 12 weeks
- (c) 13 weeks
- (d) 14 weeks
उत्तर(b) 12 weeks
इसी अधिनियम के अधीन प्रसूति-अवधि में कितने सप्ताह की मज़दूरी मिलती है, यह पूछता है; वह 2016 का पेपर है और उसकी कुंजी 2017 के संशोधन से पहले की बारह सप्ताह वाली स्थिति दिखाती है, इसलिए वह इस विषय में अवधि बदलने का प्रत्यक्ष प्रमाण भी है।
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- (a) 1, 2 and 3 only
- (b) 1, 2 and 4 only
- (c) 3 and 4 only
- (d) 1, 2, 3 and 4
उत्तर(d) 1, 2, 3 and 4
कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के दायरे और हितलाभों पर कथन देता है, जिनमें प्रसूति के नक़द हितलाभ भी गिनाए गए हैं — वह दूसरा रास्ता, जिससे बीमाकृत स्त्री को प्रसूति लाभ मिलता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 की धारा 9 के अनुसार गर्भपात अथवा गर्भ के चिकित्सकीय समापन की दशा में स्त्री कितने सप्ताह के, मज़दूरी सहित अवकाश की हक़दार है ?
- (a)दो सप्ताह
- (b)छह सप्ताह
- (c)बारह सप्ताह
- (d)छब्बीस सप्ताह
उत्तर(b) छह सप्ताह
- practice — not a real PYQ
प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 के अधीन जिस स्त्री के दो या अधिक जीवित शिशु हैं, उसे प्रसूति प्रसुविधा की अधिकतम अवधि कितनी मिलती है ?
- (a)छह सप्ताह
- (b)आठ सप्ताह
- (c)बारह सप्ताह
- (d)छब्बीस सप्ताह
उत्तर(c) बारह सप्ताह