निम्नलिखित में से कौन-सा, व्यवसाय संघ (ट्रेड यूनियन) अधिनियम, 1926 के अध्याय III के अंतर्गत पंजीकृत ट्रेड यूनियन को मिलने वाला अधिकार नहीं है ?
- (a)राजनैतिक उद्देश्यों के लिए एक पृथक कोष का गठन
- (b)17 वर्षीय एक व्यक्ति को सदस्यता प्रदान करना
- (c)ट्रेड यूनियन के एजेंट द्वारा, ट्रेड यूनियन के कार्यकारी की जानकारी के बिना, ट्रेड विवाद के अभिप्राय से एक अन्यायपूर्ण कृत्य करना
- (d)नियोजन संविदा में ट्रेड विवाद के अभिप्राय से किए गए कृत्य द्वारा परिवर्तन करना
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) नियोजन संविदा में ट्रेड विवाद के अभिप्राय से किए गए कृत्य द्वारा परिवर्तन करना — अधिनियम का अध्याय III पंजीकृत ट्रेड यूनियन को ऐसा कोई अधिकार नहीं देता, और यही उसे शेष तीन से अलग करता है।
पहले यह देखिए कि अध्याय III देता क्या है। उसका शीर्षक 'पंजीकृत ट्रेड यूनियनों के अधिकार और दायित्व' है, और उसमें मुख्यतः चार प्रकार की बातें हैं : निधियों का उपयोग, आपराधिक षड्यंत्र से उन्मुक्ति, सिविल वाद से उन्मुक्ति, और सदस्यता तथा पदाधिकारियों से जुड़े उपबंध।
सिविल उन्मुक्ति वाली धारा इस प्रश्न की धुरी है। उसकी पहली उपधारा कहती है कि पंजीकृत ट्रेड यूनियन, उसके पदाधिकारी या सदस्य के विरुद्ध, ट्रेड विवाद के अनुध्यान या अग्रसरण में किए गए किसी कृत्य के संबंध में, किसी सिविल न्यायालय में कोई वाद केवल इस आधार पर नहीं चलेगा कि उस कृत्य से कोई अन्य व्यक्ति नियोजन की संविदा भंग करने को प्रेरित होता है, या कि वह किसी अन्य व्यक्ति के व्यापार, कारबार या नियोजन में, अथवा अपनी पूँजी या अपने श्रम को अपनी इच्छा से लगाने के उसके अधिकार में, हस्तक्षेप है।
अब उस पाठ को ध्यान से पढ़िए। वह संविदा-भंग के लिए प्रेरित करने पर वाद से बचाव देता है — यानी उन्मुक्ति देता है। वह कहीं यह नहीं कहता कि ट्रेड यूनियन नियोजन की संविदा को बदल सकती है। ये दो बिलकुल अलग बातें हैं : एक ओर मुक़दमे से बचाव, दूसरी ओर संविदा की शर्तें बदल देने की शक्ति। नियोजन की संविदा दोनों पक्षों के करार से बदलती है, या औद्योगिक विवाद अधिनियम के अधीन हुए समझौते या पंचाट से; ट्रेड विवाद के अभिप्राय से किया गया कोई कृत्य अपने आप उसे नहीं बदल देता। इसीलिए यह विकल्प अध्याय III का दिया हुआ अधिकार नहीं है।
शेष तीन विकल्प अध्याय III के भीतर मिल जाते हैं। राजनैतिक प्रयोजनों के लिए पृथक निधि का गठन उसी अध्याय की एक धारा का विषय है। सत्रह वर्ष के व्यक्ति को सदस्यता देना भी वहीं से आता है, क्योंकि पंद्रह वर्ष की आयु प्राप्त कर चुका कोई भी व्यक्ति पंजीकृत ट्रेड यूनियन का सदस्य हो सकता है। और अभिकर्ता द्वारा, कार्यकारी की जानकारी के बिना, किया गया अपकृत्य वही दशा है जिसके लिए उसी उन्मुक्ति-धारा की दूसरी उपधारा बनी है।
इसलिए प्रश्न का उत्तर विकल्प (d) है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)राजनैतिक उद्देश्यों के लिए एक पृथक कोष का गठन — यह अध्याय III का स्पष्ट अधिकार है, इसलिए इसे 'नहीं है' कहना पाठ के विरुद्ध होगा। अधिनियम पंजीकृत ट्रेड यूनियन को यह अनुज्ञा देता है कि वह अपने सदस्यों के नागरिक और राजनैतिक हितों की अभिवृद्धि के लिए एक पृथक निधि बनाए, और उसके लिए अलग से अभिदाय लिया जाए। यह पृथकता आकस्मिक नहीं है : साधारण निधि केवल गिनाए गए प्रयोजनों पर ख़र्च की जा सकती है, इसलिए राजनैतिक व्यय के लिए अलग कोष बनाना अनिवार्य कर दिया गया। इसी के साथ एक रक्षा भी जुड़ी है — किसी सदस्य को इस निधि में अभिदाय देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, और अभिदाय न देने पर उसे यूनियन के लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता, न किसी निर्योग्यता के अधीन किया जा सकता है। यानी अधिकार यूनियन का है और उसकी सीमा सदस्य की स्वतंत्रता है।
- (b)17 वर्षीय एक व्यक्ति को सदस्यता प्रदान करना — यह भी अध्याय III का अधिकार है। अधिनियम कहता है कि जिस व्यक्ति ने पंद्रह वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है वह पंजीकृत ट्रेड यूनियन का सदस्य हो सकता है, और सदस्य के सारे अधिकार भोग सकता है तथा नियमों के अधीन आवश्यक सब लिखतें निष्पादित कर सकता है — यह यूनियन के अपने नियमों के अधीन है, यानी यूनियन चाहे तो अपने नियमों से इससे ऊँची आयु रख सकती है। सत्रह वर्ष का व्यक्ति पंद्रह की सीमा से ऊपर है, इसलिए उसे सदस्यता देना अधिनियम के भीतर है। यहाँ एक भेद याद रखिए, क्योंकि परीक्षा उसी पर प्रश्न बनाती है : सदस्य होने की आयु पंद्रह वर्ष है, पर पदाधिकारी या कार्यकारी का सदस्य चुने जाने के लिए अठारह वर्ष की आयु आवश्यक है। यानी सत्रह वर्ष का व्यक्ति सदस्य तो हो सकता है, पदाधिकारी नहीं।
- (c)ट्रेड यूनियन के एजेंट द्वारा, ट्रेड यूनियन के कार्यकारी की जानकारी के बिना, ट्रेड विवाद के अभिप्राय से एक अन्यायपूर्ण कृत्य करना — यह विकल्प लंबा है और पहली दृष्टि में ऐसा लगता है मानो यूनियन को अपकृत्य करने का अधिकार दिया जा रहा हो, इसलिए उसे गिरा देने का प्रलोभन होता है। ध्यान से पढ़ने पर वह ठीक उस उपबंध का पाठ निकलता है जो उन्मुक्ति देता है। उन्मुक्ति-धारा की दूसरी उपधारा कहती है कि पंजीकृत ट्रेड यूनियन ट्रेड विवाद के अनुध्यान या अग्रसरण में उसके अभिकर्ता द्वारा किए गए किसी अपकृत्य के संबंध में किसी सिविल न्यायालय में दायी नहीं होगी, यदि यह साबित हो जाए कि उस व्यक्ति ने यूनियन के कार्यकारी की जानकारी के बिना, अथवा उसके अभिव्यक्त अनुदेशों के विरुद्ध, कार्य किया था। विकल्प में लिखी हुई दशा ठीक वही है। यह ध्यान रखिए कि उन्मुक्ति सशर्त है और उसका भार यूनियन पर है — जानकारी न होना या अनुदेशों का उल्लंघन होना साबित करना पड़ता है।
अवधारणा
ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 तीन खंडों में बँटा है, और उन्हें अलग-अलग पहचान लेना इस अध्याय की तैयारी का आधार है।
पहला खंड पंजीकरण का है। सात या अधिक सदस्य आवेदन कर सकते हैं, और अधिनियम एक न्यूनतम सदस्यता भी बाँधता है ताकि नाममात्र की यूनियनें न बनें। पंजीकरण अनिवार्य नहीं है — अपंजीकृत यूनियन अवैध नहीं होती, पर उसे इस अधिनियम के अधिकार और उन्मुक्तियाँ नहीं मिलतीं। इसी खंड में रजिस्ट्रार की शक्तियाँ, नियमों की अपेक्षाएँ और पंजीकरण के प्रमाणपत्र का प्रभाव आते हैं।
दूसरा खंड, यानी अध्याय III, अधिकारों और दायित्वों का है। उसमें पंजीकृत यूनियन को निगमित निकाय का दर्जा मिलता है; साधारण निधि को केवल गिनाए गए प्रयोजनों पर ख़र्च करने की बाध्यता है; राजनैतिक प्रयोजनों के लिए पृथक निधि की अनुज्ञा है; आपराधिक षड्यंत्र से सीमित उन्मुक्ति है; सिविल वाद से उन्मुक्ति है, जिसमें अभिकर्ता के अपकृत्य वाली अलग उपधारा भी है; व्यापार-निरोधक करारों की प्रवर्तनीयता का उपबंध है; बहियों के निरीक्षण का अधिकार है; अवयस्क की सदस्यता का उपबंध है; पदाधिकारियों की निर्योग्यताएँ हैं; और उद्योग से जुड़े पदाधिकारियों के अनुपात की अपेक्षा है।
तीसरा खंड प्रक्रिया और प्रकीर्ण उपबंधों का है — नाम-परिवर्तन, समामेलन, विघटन, वार्षिक विवरणियाँ और शास्तियाँ।
परीक्षा की दृष्टि से अध्याय III सबसे उपजाऊ है, क्योंकि उसकी हर धारा एक अलग अधिकार या एक अलग सीमा बोलती है, और प्रश्न प्रायः किसी एक धारा का पाठ लेकर उसमें एक शब्द बदल देता है।
1926 के इस अधिनियम की पृष्ठभूमि में एक प्रसिद्ध मुक़दमा है। बीसवीं सदी के आरंभ में भारत में श्रमिक संगठन बनने लगे थे, पर उनकी विधिक स्थिति अनिश्चित थी : सामूहिक कार्रवाई को आपराधिक षड्यंत्र माना जा सकता था और हड़ताल के आह्वान पर संविदा-भंग के लिए प्रेरित करने का वाद चल सकता था। मद्रास में एक ऐसे ही मामले में यूनियन के पदाधिकारियों के विरुद्ध निषेधाज्ञा जारी हुई, और उससे यह स्पष्ट हो गया कि जब तक विधायिका सुरक्षा न दे, संगठन बनाने का अधिकार व्यवहार में निष्फल है।
इसी आवश्यकता से यह अधिनियम बना, और इसीलिए उसका केंद्रीय भाग उन्मुक्तियों का है। दोनों उन्मुक्तियाँ — आपराधिक षड्यंत्र से और सिविल वाद से — एक ही उद्देश्य पूरा करती हैं : सामूहिक सौदेबाज़ी को विधि की दृष्टि में सामान्य क्रियाकलाप बनाना।
पर उन्मुक्ति की अपनी सीमाएँ हैं, और वे ही परीक्षा में पूछी जाती हैं। वह केवल ट्रेड विवाद के अनुध्यान या अग्रसरण में किए गए कृत्यों पर मिलती है; वह हिंसा, संपत्ति की क्षति या आपराधिक कृत्यों तक नहीं जाती; और अभिकर्ता के अपकृत्य वाली उन्मुक्ति तभी काम करती है जब यह साबित हो कि उसने कार्यकारी की जानकारी के बिना या उसके अनुदेशों के विरुद्ध काम किया।
राजनैतिक निधि वाला उपबंध भी उसी संतुलन का उदाहरण है : यूनियन को राजनैतिक कार्य करने की छूट है, पर सदस्य को उसमें धन देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पूरा अधिनियम इसी शैली में लिखा गया है — अधिकार, और उसके साथ चलती हुई एक सीमा।
मुख्य तथ्य
- अध्याय III का शीर्षक 'पंजीकृत ट्रेड यूनियनों के अधिकार और दायित्व' है, और उसी में निधियों का उपयोग, दोनों उन्मुक्तियाँ, सदस्यता तथा पदाधिकारियों से जुड़े उपबंध आते हैं।
- सिविल उन्मुक्ति केवल इस आधार पर वाद रोकती है कि कृत्य से कोई अन्य व्यक्ति नियोजन की संविदा भंग करने को प्रेरित होता है, या कि वह किसी के व्यापार या श्रम-स्वातंत्र्य में हस्तक्षेप है।
- उन्मुक्ति का अर्थ संविदा बदलने की शक्ति नहीं है। नियोजन की संविदा दोनों पक्षों के करार से, या औद्योगिक विवाद अधिनियम के अधीन हुए समझौते या पंचाट से बदलती है।
- अभिकर्ता द्वारा किए गए अपकृत्य के लिए यूनियन तब दायी नहीं होती जब यह साबित हो जाए कि उसने कार्यकारी की जानकारी के बिना, या उसके अभिव्यक्त अनुदेशों के विरुद्ध, कार्य किया था।
- पंद्रह वर्ष की आयु प्राप्त कर चुका व्यक्ति पंजीकृत ट्रेड यूनियन का सदस्य हो सकता है, यूनियन के अपने नियमों के अधीन रहते हुए; पर पदाधिकारी बनने के लिए अठारह वर्ष की आयु आवश्यक है।
- राजनैतिक प्रयोजनों के लिए पृथक निधि बनाई जा सकती है, पर किसी सदस्य को उसमें अभिदाय देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और न देने पर उसे लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- उन्मुक्ति और शक्ति को एक मान लेना यहाँ की मुख्य भूल है। वाद से बचाव मिलना और संविदा बदल सकना दो अलग बातें हैं।
- सदस्यता की आयु पंद्रह वर्ष है और पदाधिकारी बनने की अठारह। दोनों संख्याएँ आपस में बदलकर पूछी जाती हैं।
- लंबा और उलझा हुआ विकल्प ग़लत ही होगा, यह मान लेना जोखिम भरा है। यहाँ सबसे लंबा विकल्प एक उपधारा का सीधा पाठ है।
- अभिकर्ता वाली उन्मुक्ति सशर्त है — जानकारी न होना या अनुदेशों का उल्लंघन साबित करना पड़ता है, और वह भार यूनियन पर है।
इस अधिनियम पर प्रश्न तीन साँचों में आते हैं। पहला निषेधात्मक सूची है, जैसा यहाँ है — चार बातें देकर पूछना कि कौन-सी अध्याय III का अधिकार नहीं है; इसमें तीन विकल्प धाराओं का लगभग सीधा पाठ होते हैं और चौथे में एक शब्द बदलकर अर्थ पलट दिया जाता है, इसलिए हर विकल्प को धारा से मिलाकर पढ़ना पड़ता है। दूसरा साँचा संख्याओं का है — आवेदन के लिए न्यूनतम सदस्य, सदस्यता की आयु, पदाधिकारी की आयु, पदाधिकारियों का अनुपात — और इसी परीक्षा-परिवार में इनमें से एक संख्या सीधे पूछी जा चुकी है। तीसरा साँचा परिभाषा और स्थिति का है : 'ट्रेड विवाद' में क्या-क्या आता है, पंजीकरण अनिवार्य है या ऐच्छिक, और अपंजीकृत यूनियन की स्थिति क्या है; ये दोनों प्रश्न भी इस परिवार में आ चुके हैं। तीनों के लिए एक तालिका बना लीजिए जिसमें बाएँ अध्याय III की धाराओं के विषय हों और दाएँ हर धारा की एक सीमा, क्योंकि इस अधिनियम में लगभग हर अधिकार अपनी सीमा के साथ ही लिखा गया है।
संबंधित PYQ
EPFO_APFC_2023_Q34Registration of trade unions of workers under the Trade Unions Act, 1926 is
- (a) optional
- (b) compulsory
- (c) optional for workers working in non-public utility services
- (d) compulsory for workers working in public utility services
उत्तर(a) optional
इसी अधिनियम के अधीन कर्मकारों की ट्रेड यूनियनों का पंजीकरण अनिवार्य है या ऐच्छिक, यह पूछता है — वही पंजीकरण, जिससे अध्याय III के सारे अधिकार जुड़े हुए हैं।
EPFO_EOAO_2020_Q64What is the minimum number of members required for registration of a Trade Union ?
- (a) 2 members
- (b) 3 members
- (c) 7 members
- (d) 10 members
उत्तर(c) 7 members
ट्रेड यूनियन के पंजीकरण के लिए न्यूनतम कितने सदस्य आवश्यक हैं, यह पूछता है — अध्याय III से पहले वाला चरण, जिसके बिना ये अधिकार मिलते ही नहीं।
EPFO_EOAO_2020_Q65Which of the following disputes is/are considered as trade dispute(s) under the provision of the Trade Union Act, 1926 ? Any dispute of any person connected with 1. Employment 2. Non-Employment 3. Conditions of Labour Select the correct answer using the code given below :
- (a) 1 only
- (b) 2 and 3 only
- (c) 1, 2 and 3
- (d) 1 and 3 only
उत्तर(c) 1, 2 and 3
इसी अधिनियम के अधीन कौन-से विवाद 'ट्रेड विवाद' माने जाते हैं, यह पूछता है — वही परिभाषा, जिसके अनुध्यान या अग्रसरण में किए गए कृत्यों पर यहाँ की उन्मुक्तियाँ मिलती हैं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 के अधीन किसी पंजीकृत ट्रेड यूनियन का पदाधिकारी या कार्यकारी का सदस्य चुने जाने के लिए न्यूनतम कितनी आयु आवश्यक है ?
- (a)पंद्रह वर्ष
- (b)सोलह वर्ष
- (c)अठारह वर्ष
- (d)इक्कीस वर्ष
उत्तर(c) अठारह वर्ष
- practice — not a real PYQ
ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 के अधीन राजनैतिक प्रयोजनों के लिए बनाई गई पृथक निधि के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है ?
- (a)हर सदस्य को उसमें अभिदाय देना अनिवार्य है
- (b)किसी सदस्य को अभिदाय देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता
- (c)वह साधारण निधि का ही एक भाग होती है
- (d)उसे बनाने के लिए श्रम न्यायालय की अनुज्ञा आवश्यक है
उत्तर(b) किसी सदस्य को अभिदाय देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता