प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961, प्रसव के बाद काम पर लौटने वाली स्त्री के लिए कितने ‘पोषणार्थ विराम’ निर्धारित करता है ?
- (a)उसको अनुमत आराम के लिए अंतराल के अतिरिक्त दो विराम
- (b)उसको अनुमत आराम के लिए अंतराल के अंतर्गत दो विराम
- (c)उसको अनुमत आराम के लिए अंतराल के अतिरिक्त तीन विराम
- (d)उसको अनुमत आराम के लिए अंतराल के अंतर्गत ही एक विराम
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) उसको अनुमत आराम के लिए अंतराल के अतिरिक्त दो विराम — अधिनियम की धारा 11 यही कहती है, और उसका पूरा बल 'अतिरिक्त' शब्द पर है।
धारा 11 का पाठ इस प्रकार है : हर वह स्त्री, जो शिशु को जन्म देने के बाद काम पर लौटती है, उसे अनुमत आराम के अंतराल के अतिरिक्त, अपने दैनिक काम के दौरान, शिशु के पोषण के लिए निर्धारित अवधि के दो विराम दिए जाएँगे, जब तक शिशु पंद्रह मास की आयु प्राप्त न कर ले।
इस एक वाक्य में तीन बातें हैं और तीनों परीक्षा-योग्य हैं। पहली, विरामों की संख्या दो है। दूसरी, वे आराम के अंतराल के अतिरिक्त हैं, उसके भीतर नहीं। तीसरी, यह अधिकार शिशु के पंद्रह मास का हो जाने तक चलता है।
दूसरी बात ही इस प्रश्न की धुरी है, और उसका कारण समझना कठिन नहीं। कारख़ाने या प्रतिष्ठान में भोजन और आराम के लिए अंतराल पहले से ही मिलता है; वह हर कर्मचारी को मिलता है और उसका प्रयोजन अलग है। यदि पोषणार्थ विराम उसी अंतराल के भीतर से काटा जाता तो धारा 11 स्त्री को कुछ नया देती ही नहीं — वह केवल यह बताती कि पहले से मिले हुए समय का उपयोग किस काम में करना है। उपबंध का उद्देश्य यही है कि प्रसव के बाद लौटी स्त्री को शिशु के पोषण के लिए अतिरिक्त समय मिले, और इसीलिए विधायिका ने 'अतिरिक्त' शब्द रखा।
यहाँ एक और उपबंध साथ रखकर देखिए, क्योंकि परीक्षा में ये दोनों आपस में बदलकर पूछे जाते हैं। धारा 11क के अनुसार पचास या अधिक कर्मचारियों वाले हर प्रतिष्ठान में शिशु-गृह की सुविधा होगी, और नियोजक स्त्री को दिन में चार बार शिशु-गृह जाने देगा — और वहाँ अधिनियम स्पष्ट रूप से कहता है कि उन चार बार में आराम के लिए अनुमत अंतराल भी सम्मिलित होगा। यानी एक उपबंध में समय अंतराल के अतिरिक्त है और दूसरे में उसे सम्मिलित करके गिना जाता है। दोनों वाक्य पास-पास हैं और उनके अर्थ उलटे हैं, इसलिए दोनों को साथ याद कीजिए।
विरामों की अवधि अधिनियम में नहीं, नियमों में निर्धारित होती है, और उसमें विराम तक आने-जाने का समय भी जोड़ा जाता है। यही कारण है कि अधिनियम केवल 'निर्धारित अवधि' कहकर छोड़ देता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)उसको अनुमत आराम के लिए अंतराल के अंतर्गत दो विराम — यहाँ संख्या ठीक है और संबंध उलटा। दो विराम तो अधिनियम भी कहता है, पर वह उन्हें आराम के अंतराल के 'अतिरिक्त' देता है, 'अंतर्गत' नहीं। यह भेद केवल शब्दों का नहीं, अधिकार का है। आराम का अंतराल प्रतिष्ठान में सबको मिलता है और उसका उद्देश्य भोजन तथा विश्राम है; यदि पोषणार्थ विराम उसी में से लिए जाते तो प्रसव के बाद लौटी स्त्री को इस धारा से एक मिनट भी अधिक न मिलता, और धारा 11 एक निरर्थक उपबंध बन जाती। विधि की व्याख्या का साधारण नियम यह है कि किसी उपबंध को ऐसा अर्थ नहीं दिया जाता जिससे वह निष्फल हो जाए। इस विकल्प का प्रलोभन इसलिए बनता है कि शिशु-गृह वाले उपबंध में समय की गिनती अंतराल को सम्मिलित करके होती है, और दोनों उपबंध पास-पास पढ़े जाने पर आपस में मिल जाते हैं।
- (c)उसको अनुमत आराम के लिए अंतराल के अतिरिक्त तीन विराम — यहाँ संबंध ठीक है और संख्या ग़लत। 'अतिरिक्त' शब्द वही है जो अधिनियम में है, पर विरामों की संख्या तीन नहीं, दो है। यह विकल्प उन अभ्यर्थियों को परखने के लिए रखा गया है जो उपबंध का ढाँचा तो याद रखते हैं पर संख्या नहीं, और जो यह मान लेते हैं कि कल्याणकारी उपबंध में बड़ी संख्या ही सही होगी। अधिनियम में संख्या दो है, और वह इसलिए भी स्मरणीय है कि यही अकेली संख्या धारा 11 में दी गई है — विरामों की अवधि नियमों पर छोड़ी गई है और आयु-सीमा पंद्रह मास अलग से लिखी गई है। इस प्रकार धारा 11 में याद रखने योग्य तीन बातें हैं और उनमें से एक भी बदल जाए तो विकल्प ग़लत हो जाता है, चाहे शेष दो सही हों।
- (d)उसको अनुमत आराम के लिए अंतराल के अंतर्गत ही एक विराम — यह विकल्प दोनों अक्षों पर एक साथ चूकता है — संख्या भी और संबंध भी। वह एक विराम देता है, जबकि अधिनियम दो देता है; और उसे आराम के अंतराल के अंतर्गत ही रखता है, जबकि अधिनियम उसे अंतराल के अतिरिक्त रखता है। इस पर उसने 'ही' जोड़कर उस सीमा को और कड़ा कर दिया है, जिससे अर्थ यह बनता है कि पोषण के लिए अलग से कोई समय है ही नहीं। यह अधिनियम की दिशा के ठीक विपरीत है। धारा 11 उस स्त्री के लिए बनी है जो प्रसव के बाद काम पर लौट आई है और जिसका शिशु पंद्रह मास से छोटा है; ऐसी स्थिति में एक विराम, वह भी पहले से मिले हुए अंतराल के भीतर, उपबंध के प्रयोजन को पूरा नहीं करता। जब चारों विकल्प एक ही वाक्य पर बने हों तो हर अक्ष को अलग-अलग जाँचना ही सुरक्षित तरीक़ा है।
अवधारणा
प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 केवल अवकाश और भुगतान का क़ानून नहीं है। उसका दूसरा आधा भाग उन सुविधाओं और संरक्षणों का है जो स्त्री के काम पर लौट आने के बाद काम आते हैं, और परीक्षा में यही भाग प्रायः छूट जाता है।
पहला संरक्षण नियोजन से जुड़ा है। अधिनियम गर्भावस्था या प्रसूति प्रसुविधा के कारण स्त्री को सेवा से हटाने पर रोक लगाता है, और यह भी कहता है कि अनुपस्थिति की अवधि में उसकी सेवा-शर्तें अहितकर रूप से नहीं बदली जाएँगी।
दूसरा संरक्षण काम की प्रकृति से जुड़ा है। गर्भावस्था के कुछ मास में स्त्री से ऐसा काम नहीं लिया जा सकता जो कठिन प्रकृति का हो, जिसमें लंबे समय तक खड़ा रहना पड़े, या जो किसी भी प्रकार गर्भ में बाधा डाल सकता हो।
तीसरा संरक्षण लौटने के बाद का है, और धारा 11 उसी का उपबंध है — शिशु के पोषण के लिए दो विराम, आराम के अंतराल के अतिरिक्त, शिशु के पंद्रह मास का होने तक।
चौथा संरक्षण 2017 के संशोधन से आया — पचास या अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान में शिशु-गृह, दिन में चार बार वहाँ जाने की अनुज्ञा सहित, जिसमें आराम का अंतराल भी गिना जाता है; और जहाँ काम की प्रकृति अनुकूल हो वहाँ घर से काम करने की अनुज्ञा, जिसकी शर्तें नियोजक और स्त्री आपस में तय करेंगे।
पाँचवाँ भाग सूचना का है : नियोजक को प्रतिष्ठान में इस अधिनियम के अधीन उपलब्ध अधिकारों की जानकारी लिखित और इलेक्ट्रॉनिक रूप में देनी होती है। इन पाँचों को एक साथ याद रखिए, क्योंकि प्रश्न किसी भी परत से उठाया जा सकता है।
पोषणार्थ विराम का उपबंध सुनने में छोटा लगता है, पर उसका व्यावहारिक महत्व बड़ा है। प्रसव के बाद काम पर लौटी स्त्री के सामने सबसे कठिन प्रश्न यही होता है कि दिन के बीच शिशु के पोषण का समय कहाँ से आएगा। यदि उसके लिए अलग समय न मिले तो अवकाश की अवधि समाप्त होते ही उसे काम छोड़ देना पड़ सकता है, और तब पूरे अधिनियम का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
इसीलिए इस उपबंध की भाषा में 'अतिरिक्त' शब्द निर्णायक है। यह श्रम-विधि की एक सामान्य शैली भी है : जहाँ विधायिका कोई नया अधिकार देना चाहती है वहाँ वह स्पष्ट रूप से लिखती है कि यह पहले से उपलब्ध सुविधा के अतिरिक्त है, ताकि नियोजक उसे पहले से दी जा रही किसी सुविधा में समायोजित न कर ले।
पंद्रह मास की आयु-सीमा भी सोच-समझकर रखी गई है। अधिनियम की प्रसुविधा-अवधि छब्बीस सप्ताह तक जाती है, यानी लगभग छह मास; उसके बाद के लगभग नौ मास वह अवधि है जिसमें शिशु को दिन में भी पोषण की आवश्यकता बनी रहती है। दोनों अवधियाँ मिलकर शिशु के पहले पंद्रह मास को ढक लेती हैं।
2017 के संशोधन ने इस ढाँचे में शिशु-गृह जोड़कर एक और रास्ता खोल दिया। जहाँ शिशु-गृह हो वहाँ स्त्री को दिन में चार बार वहाँ जाने की अनुज्ञा है, और वहाँ की गिनती में आराम का अंतराल सम्मिलित है। दोनों उपबंधों का उद्देश्य एक है, पर उनकी गिनती का ढंग अलग है — और परीक्षा ठीक इसी अंतर पर प्रश्न बनाती है।
मुख्य तथ्य
- धारा 11 : प्रसव के बाद काम पर लौटने वाली स्त्री को, अनुमत आराम के अंतराल के अतिरिक्त, शिशु के पोषण के लिए निर्धारित अवधि के दो विराम प्रतिदिन मिलते हैं।
- यह अधिकार तब तक चलता है जब तक शिशु पंद्रह मास की आयु प्राप्त न कर ले; उसके बाद यह उपबंध लागू नहीं रहता।
- विरामों की अवधि अधिनियम में नहीं, नियमों में निर्धारित होती है, और उसमें विराम तक आने-जाने का समय भी जोड़ा जाता है।
- धारा 11क : पचास या अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान में शिशु-गृह की सुविधा अनिवार्य है, और स्त्री को दिन में चार बार वहाँ जाने की अनुज्ञा मिलती है।
- शिशु-गृह वाली चार बार की गिनती में आराम के लिए अनुमत अंतराल भी सम्मिलित है — यह धारा 11 के 'अतिरिक्त' वाले नियम से ठीक उलटा है और दोनों को साथ याद रखना चाहिए।
- यह पूरा भाग 2017 के संशोधन के बाद और महत्वपूर्ण हो गया है, जिसमें शिशु-गृह, घर से काम की अनुज्ञा, तथा अधिकारों की लिखित सूचना देने का दायित्व जोड़े गए।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'अतिरिक्त' और 'अंतर्गत' का अंतर यहाँ पूरा उत्तर है। विकल्प पढ़ते समय पहले यही शब्द खोजिए, संख्या बाद में।
- पोषणार्थ विराम और शिशु-गृह की चार बार वाली अनुज्ञा को आपस में मिला देना आसान है, क्योंकि एक में अंतराल जोड़ा नहीं जाता और दूसरे में गिना जाता है।
- कल्याणकारी उपबंध में बड़ी संख्या ही सही होगी, यह अनुमान यहाँ काम नहीं आता। विरामों की संख्या दो है, तीन नहीं।
- जब चारों विकल्प एक ही वाक्य पर बने हों तो हर अक्ष अलग-अलग जाँचिए। यहाँ दो अक्ष हैं — संख्या और संबंध — और दोनों का सही होना आवश्यक है।
इस अधिनियम के सुविधा वाले भाग पर प्रश्न तीन साँचों में आते हैं। पहला वही है जो यहाँ है — एक उपबंध का वाक्य लेकर उसके दो अक्षों पर चार विकल्प बना देना, जिनमें एक अक्ष संख्या का होता है और दूसरा संबंध या शर्त का; ऐसे प्रश्न में विकल्पों की समानता ही संकेत है कि दोनों अक्ष अलग-अलग जाँचने हैं। दूसरा साँचा संख्याओं का है — दो विराम, पंद्रह मास, पचास कर्मचारी, चार बार — और इनमें से कोई एक उठाकर दूसरे उपबंध के नाम रख दी जाती है, इसलिए हर संख्या के आगे उसका उपबंध लिख लीजिए। तीसरा साँचा संरक्षण का है : गर्भावस्था में कठिन काम पर रोक, सेवा से हटाए जाने पर रोक, और अनुपस्थिति की अवधि में सेवा-शर्तों की सुरक्षा। इसी परीक्षा-परिवार में इस अधिनियम की अवधियों पर प्रश्न पहले आ चुके हैं और अन्य क़ानूनों की कल्याणकारी सुविधाओं पर भी, इसलिए इन सबको एक ही तालिका में रखिए — उपबंध, संख्या, और वह शर्त जो उसके साथ चलती है।
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- (a) 2, 3 and 5 only
- (b) 2, 4 and 5 only
- (c) 1, 2, 3 and 5
- (d) 1, 3 and 4 only
उत्तर(c) 1, 2, 3 and 5
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