मज़दूरी संदाय अधिनियम, 1936 के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन-सी कटौतियाँ मज़दूरी से की जा सकती हैं ? 1. नियोजक द्वारा प्रदत्त सुविधाएँ और सेवाओं के लिए कटौतियाँ 2. अग्रिम की वसूली के लिए कटौतियाँ 3. सहकारी समितियों को किए गए भुगतान के लिए कटौतियाँ नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2 और 3
- (c)केवल 1 और 3
- (d)1, 2 और 3
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) 1, 2 और 3 — तीनों मदें अधिनियम की धारा 7(2) की अनुज्ञेय कटौतियों की सूची में हैं, इसलिए तीनों की कटौती की जा सकती है।
पहले नियम की बनावट देखिए। धारा 7(1) कहती है कि मज़दूरी बिना किसी कटौती के दी जाएगी, सिवाय उन कटौतियों के जो इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्राधिकृत हैं। यानी सामान्य नियम शून्य कटौती का है, और धारा 7(2) एक बंद सूची देकर बताती है कि किन-किन मदों में कटौती हो सकती है। कोई मद उस सूची में नहीं है तो कटौती अवैध है, चाहे नियोजक और कर्मचारी दोनों उस पर सहमत क्यों न हों।
अब तीनों मदें उस सूची से मिलाइए।
मद 1 — नियोजक द्वारा दी गई सुविधाओं और सेवाओं के लिए कटौती। यह सूची में है, इस शर्त के साथ कि राज्य सरकार या उसका निर्दिष्ट अधिकारी साधारण या विशेष आदेश से उसे प्राधिकृत करे। एक महत्वपूर्ण सीमा भी साथ चलती है : इस प्रयोजन के लिए 'सेवाओं' में वे औज़ार और कच्चा माल नहीं आते जो काम करने के लिए ही आवश्यक हैं। यानी नियोजक अपने काम के औज़ारों का दाम कर्मचारी की मज़दूरी से नहीं काट सकता। इस मद का पाठ हिन्दी स्तंभ में 'सुविधाएँ और सेवाओं के लिए' छपा है, जिसमें दोनों संज्ञाओं की विभक्ति आपस में नहीं मिलती; अर्थ पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
मद 2 — अग्रिम की वसूली के लिए कटौती। यह भी सूची में है, और उसमें हर प्रकार का अग्रिम आता है, यात्रा भत्ता या वाहन भत्ता के अग्रिम सहित, तथा उस पर देय ब्याज भी। अधिक भुगतान हो जाने पर उसका समायोजन भी इसी खंड से होता है।
मद 3 — सहकारी समितियों को किए गए भुगतान के लिए कटौती। यह भी सूची में है, इस शर्त के साथ कि समिति राज्य सरकार या उसके निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा अनुमोदित हो; इसी खंड में डाकघर की बीमा योजना को किया गया भुगतान भी आता है।
तीनों मदें सूची में हैं, इसलिए उत्तर विकल्प (d) है। साथ में धारा 7(3) की ऊपरी सीमा भी याद रखिए : किसी मज़दूरी-अवधि में कुल कटौतियाँ मज़दूरी के पचहत्तर प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकतीं जब कटौतियाँ पूर्णतः या अंशतः सहकारी समितियों को भुगतान के लिए हों, और अन्य सब दशाओं में पचास प्रतिशत से अधिक नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1 — यह विकल्प केवल पहली मद को स्वीकार करता है और शेष दोनों को बाहर कर देता है, जबकि दोनों धारा 7(2) की सूची में स्पष्ट रूप से हैं। अग्रिम की वसूली वाली मद तो इस सूची की सबसे पुरानी और सबसे व्यवहृत मदों में है — नियोजक अग्रिम देता ही इस समझ से है कि वह आगे की मज़दूरी से कटेगा, और अधिनियम ने इसी को नियंत्रित किया है, वर्जित नहीं। सहकारी समितियों वाली मद भी सूची में है और उसका उद्देश्य कर्मचारी के हित में है : समिति की किस्त सीधे मज़दूरी से कट जाने पर कर्मचारी को अलग से भुगतान का झंझट नहीं रहता, और यही कारण है कि धारा 7(3) इन्हीं कटौतियों के लिए ऊपरी सीमा भी ऊँची रखती है। तीन में से दो सही मदें छोड़ देना इस विकल्प की भूल है।
- (b)केवल 2 और 3 — यह विकल्प दूसरी और तीसरी मद को स्वीकार करता है और पहली को गिरा देता है। संभवतः इसका आधार यह है कि सुविधाओं और सेवाओं वाली कटौती अपने आप नहीं होती, उसके लिए राज्य सरकार या उसके निर्दिष्ट अधिकारी का आदेश चाहिए, इसलिए उसे अनुज्ञेय न मानना। यह भेद वास्तविक है, पर उससे निष्कर्ष वह नहीं निकलता। धारा 7(2) की कई मदें शर्तों के साथ आती हैं — सहकारी समिति का अनुमोदित होना भी ऐसी ही एक शर्त है, और वही मद इस विकल्प ने स्वीकार कर ली है। शर्त लगी होने से मद सूची से बाहर नहीं होती, केवल उसके प्रयोग का ढंग बँध जाता है। इसलिए पहली मद उतनी ही अनुज्ञेय है जितनी शेष दो, और उसे गिराने का कोई आधार अधिनियम में नहीं है।
- (c)केवल 1 और 3 — यह विकल्प पहली और तीसरी मद को स्वीकार करता है और बीच वाली, यानी अग्रिम की वसूली वाली मद को गिरा देता है, जो तीनों में सबसे कम विवादास्पद है। धारा 7(2) की सूची में अग्रिम की वसूली स्पष्ट शब्दों में है, और उसमें हर प्रकार का अग्रिम आता है, यात्रा भत्ता तथा वाहन भत्ता के अग्रिम सहित, उस पर देय ब्याज सहित, और मज़दूरी के अधिक भुगतान का समायोजन भी। अधिनियम की धारा 12 इसी कटौती की शर्तें और विस्तार से बाँधती है — किस अवस्था में अग्रिम दिया जा सकता है और किस्तों में उसकी वसूली कैसे होगी। जिस मद के लिए अधिनियम ने अलग धारा रखी हो, उसे अनुज्ञेय कटौतियों की सूची से बाहर मान लेना पाठ के विरुद्ध है।
अवधारणा
मज़दूरी संदाय अधिनियम, 1936 का कटौती वाला अध्याय एक ही सिद्धांत पर खड़ा है : कटौती अपवाद है, नियम नहीं।
धारा 7(1) पहले पूरा निषेध लगाती है — मज़दूरी बिना किसी कटौती के दी जाएगी। फिर धारा 7(2) एक गिनी हुई सूची देती है, और केवल उसी सूची की मदें अनुज्ञेय हैं। सूची में जुर्माना, अनुपस्थिति के दिनों की कटौती, सुपुर्द किए गए माल की क्षति या हानि, नियोजक द्वारा दिया गया आवास, नियोजक द्वारा दी गई सुविधाएँ और सेवाएँ, अग्रिम की वसूली और अधिक भुगतान का समायोजन, कल्याण-निधि तथा गृह-निर्माण के ऋण की वसूली, आय-कर, न्यायालय या सक्षम प्राधिकारी के आदेश से की जाने वाली कटौतियाँ, भविष्य निधि का अभिदाय, सहकारी समितियों को भुगतान और डाकघर की बीमा योजना, तथा लिखित अनुज्ञा से किए गए जीवन बीमा के प्रीमियम जैसी मदें आती हैं।
सूची के साथ तीन प्रकार के बंधन भी चलते हैं। पहला, कुछ मदों के लिए बाहरी प्राधिकार चाहिए — जैसे सुविधाओं और सेवाओं वाली कटौती के लिए राज्य सरकार का आदेश, और सहकारी समिति का अनुमोदित होना। दूसरा, कुछ मदों की अपनी अलग धाराएँ हैं जो प्रक्रिया बाँधती हैं — जुर्माने के लिए धारा 8, अनुपस्थिति के लिए धारा 9, क्षति या हानि के लिए धारा 10, सेवाओं के लिए धारा 11, और अग्रिम के लिए धारा 12। तीसरा, धारा 7(3) कुल कटौती की ऊपरी सीमा बाँधती है।
यही तीन-परत वाला ढाँचा परीक्षा में पूछा जाता है : मद सूची में है या नहीं, उस पर कोई शर्त है या नहीं, और कुल कटौती सीमा के भीतर है या नहीं।
इस अधिनियम के बनने से पहले कटौती ही वह जगह थी जहाँ मज़दूरी सबसे अधिक घटती थी। मनमाने जुर्माने, नियोजक की दुकान से लिए गए सामान का समायोजन, औज़ारों और कच्चे माल का दाम, और कभी-कभी काम पर आने-जाने तक का ख़र्च मज़दूरी से काट लिया जाता था। रॉयल कमीशन ऑन लेबर ने इसी को सबसे गंभीर शिकायत बताया था, और 1936 का यह अधिनियम उसी का उत्तर है।
इसलिए क़ानून ने दो काम एक साथ किए। एक ओर उसने कटौतियों की एक बंद सूची बनाकर मनमानी बंद कर दी; दूसरी ओर उसने उन कटौतियों को बना रहने दिया जो कर्मचारी के अपने हित में हैं। आवास, सुविधाएँ, अग्रिम, भविष्य निधि, बीमा और सहकारी समितियाँ इसी दूसरी श्रेणी में हैं — इनमें कटौती इसलिए होती है कि कर्मचारी को कुछ मिला है या मिल रहा है।
सहकारी समितियों वाली मद इस दृष्टि से विशेष है। बीसवीं सदी के मध्य में औद्योगिक श्रमिक के लिए साख का सबसे भरोसेमंद स्रोत साहूकार नहीं, प्रतिष्ठान से जुड़ी सहकारी साख समिति थी। मज़दूरी से सीधे कटौती की अनुमति देकर क़ानून ने उन समितियों की वसूली सुरक्षित की और श्रमिक को साहूकार से दूर रखने में सहायता की। इसी कारण धारा 7(3) इन्हीं कटौतियों की उपस्थिति में कुल कटौती की सीमा पचास से बढ़ाकर पचहत्तर प्रतिशत कर देती है — यह छूट सोच-समझकर दी गई है, चूक नहीं है।
मुख्य तथ्य
- धारा 7(1) : मज़दूरी बिना किसी कटौती के दी जाएगी, केवल उन कटौतियों को छोड़कर जो इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्राधिकृत हैं — सूची से बाहर की कोई भी कटौती अवैध है।
- धारा 7(2) की सूची में नियोजक द्वारा दी गई सुविधाएँ और सेवाएँ, अग्रिम की वसूली, तथा अनुमोदित सहकारी समितियों को भुगतान, तीनों अनुज्ञेय कटौतियों के रूप में आते हैं।
- सुविधाओं और सेवाओं वाली कटौती के लिए राज्य सरकार या उसके निर्दिष्ट अधिकारी का साधारण या विशेष आदेश आवश्यक है; शर्त होने से मद सूची से बाहर नहीं होती।
- इस प्रयोजन के लिए 'सेवाओं' में वे औज़ार और कच्चा माल नहीं आते जो काम करने के लिए ही आवश्यक हैं — यानी उनका दाम मज़दूरी से नहीं काटा जा सकता।
- धारा 7(3) : किसी मज़दूरी-अवधि में कुल कटौतियाँ मज़दूरी के पचहत्तर प्रतिशत से अधिक नहीं, जब उनमें सहकारी समितियों को भुगतान सम्मिलित हो; अन्य सब दशाओं में पचास प्रतिशत से अधिक नहीं।
- कई मदों की अपनी अलग धाराएँ हैं जो प्रक्रिया बाँधती हैं — जुर्माने के लिए धारा 8, अनुपस्थिति के लिए धारा 9, क्षति या हानि के लिए धारा 10, सेवाओं के लिए धारा 11, और अग्रिम के लिए धारा 12।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'शर्त लगी है' और 'अनुज्ञेय नहीं है' दो अलग बातें हैं। सुविधाओं वाली कटौती के लिए सरकारी आदेश चाहिए, पर वह मद सूची में है और इसलिए अनुज्ञेय है।
- सूची बंद है, इसलिए दोनों दिशाओं में सावधानी चाहिए — जो मद सूची में नहीं है वह कर्मचारी की सहमति से भी नहीं कट सकती।
- औज़ार और कच्चा माल 'सेवाओं' में नहीं आते। यही वह अपवाद है जिससे सुविधाओं वाली मद का दुरुपयोग रोका गया है, और वह अलग से पूछा जा सकता है।
- धारा 7(3) की दो सीमाएँ आपस में बदलकर पूछी जाती हैं। पचहत्तर प्रतिशत वाली ऊँची सीमा सहकारी समितियों वाली दशा की है, सामान्य दशा की सीमा पचास प्रतिशत है।
कटौतियों पर प्रश्न तीन साँचों में आते हैं। पहला वही है जो यहाँ है — कुछ मदें देकर पूछना कि कौन-सी कटौतियाँ की जा सकती हैं। इसमें प्रायः दो मदें निर्विवाद होती हैं और एक पर कोई शर्त लगी होती है, और अभ्यर्थी शर्त देखकर उसे बाहर कर देता है; सही तरीक़ा यह है कि पहले पूछिए कि मद धारा 7(2) की सूची में है या नहीं, और शर्त को उसके बाद का प्रश्न मानिए। दूसरा साँचा उलटा होता है — कोई एक ऐसी मद रख दी जाती है जो सूची में है ही नहीं, जैसे नियोजक की दुकान से लिए गए सामान का दाम या काम के औज़ारों का मूल्य, और वही उत्तर होती है। तीसरा साँचा संख्याओं का है : कुल कटौती की पचास और पचहत्तर प्रतिशत वाली सीमाएँ, जुर्माने की अधिकतम सीमा, और अग्रिम की वसूली की किस्तें। तीनों के लिए एक तालिका बना लीजिए जिसमें हर मद के आगे तीन बातें लिखी हों — वह सूची में है या नहीं, उस पर कोई शर्त है या नहीं, और उसकी अपनी कोई अलग धारा है या नहीं।
संबंधित PYQ
EPFO_APFC_2023_Q71Under the provisions of the Payment of Wages Act, 1936, every employer of an establishment has to maintain the registers and records regarding the wages paid and deductions made, if any, from the wages, and preserve the same from the date of last entry for a period of
- (a) five years
- (b) seven years
- (c) two years
- (d) three years
उत्तर(d) three years
इसी अधिनियम के अधीन मज़दूरी और की गई कटौतियों के रजिस्टर तथा अभिलेख कितने वर्ष तक सुरक्षित रखने होंगे, यह पूछता है — कटौती करने के बाद उसका अभिलेख रखने वाला दायित्व।
EPFO_EOAO_2023_Q26An employee shall be covered under the provisions of the Payment of Wages Act, 1936, should the employee be drawing a maximum monthly wage of :
- (a) Rupees fifteen thousand
- (b) Rupees eighteen thousand
- (c) Rupees twenty-one thousand
- (d) Rupees twenty-four thousand
उत्तर(d) Rupees twenty-four thousand
इसी अधिनियम के दायरे में आने के लिए अधिकतम मासिक मज़दूरी कितनी हो सकती है, यह पूछता है — वही सीमा तय करती है कि कटौतियों का यह पूरा अध्याय किस कर्मचारी की रक्षा करता है।
EPFO_EOAO_2023_Q57The board of a cooperative society can be superseded or kept under suspension if : 1. There is negligence in the performance of duties. 2. There is any act prejudicial to the interest of the co-operative society or its members. 3. The body has failed to conduct elections in accordance with the provisions of the State Act. 4. There is no Government shareholdings or loan or financial assistance or any guarantee by the Government. Select the correct answer using the code given below :
- (a) 1 and 2 only
- (b) 1 and 3 only
- (c) 3 and 4 only
- (d) 1, 2 and 3
उत्तर(d) 1, 2 and 3
सहकारी समिति के बोर्ड को अधिक्रांत या निलंबित करने के आधार पूछता है — वही सहकारी संस्था-तंत्र, जिसे यहाँ की तीसरी मद मज़दूरी से सीधी कटौती का अधिकार देती है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
मज़दूरी संदाय अधिनियम, 1936 की धारा 7(3) के अनुसार किसी मज़दूरी-अवधि में कुल कटौतियाँ मज़दूरी के कितने प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकतीं, जब उनमें सहकारी समितियों को किया गया भुगतान सम्मिलित न हो ?
- (a)पचास प्रतिशत
- (b)साठ प्रतिशत
- (c)पचहत्तर प्रतिशत
- (d)नब्बे प्रतिशत
उत्तर(a) पचास प्रतिशत
- practice — not a real PYQ
मज़दूरी संदाय अधिनियम, 1936 के अधीन नियोजक द्वारा दी गई सुविधाओं और सेवाओं के लिए कटौती करने के लिए निम्नलिखित में से क्या आवश्यक है ?
- (a)कर्मचारी संघ की लिखित सहमति
- (b)राज्य सरकार या उसके निर्दिष्ट अधिकारी का साधारण या विशेष आदेश
- (c)श्रम न्यायालय की पूर्व अनुज्ञा
- (d)केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त की अनुमति
उत्तर(b) राज्य सरकार या उसके निर्दिष्ट अधिकारी का साधारण या विशेष आदेश