निम्नलिखित में से कौन-सा हितलाभ, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के अंतर्गत कर्मचारी को नहीं दिया जाता है ?
- (a)अस्वस्थता हितलाभ
- (b)प्रसूति हितलाभ
- (c)नि:शक्तता हितलाभ
- (d)स्वास्थ्य हितलाभ
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) स्वास्थ्य हितलाभ — इस नाम का कोई हितलाभ अधिनियम में है ही नहीं, और यही इस प्रश्न की पूरी चाल है।
अधिनियम की धारा 46 का शीर्षक 'हितलाभ' है और वह गिनती करके बताती है कि बीमाकृत व्यक्ति और उसके आश्रितजन किन-किन हितलाभों के हक़दार होंगे। सूची छह की है : 1. अस्वस्थता हितलाभ — बीमारी के दिनों में नियत कालिक भुगतान; 2. प्रसूति हितलाभ — बीमाकृत स्त्री को प्रसव, गर्भपात या गर्भावस्था से उत्पन्न बीमारी की दशा में; 3. नि:शक्तता हितलाभ — नियोजन-क्षति से हुई अस्थायी या स्थायी अशक्तता पर; 4. आश्रितजन हितलाभ — नियोजन-क्षति से बीमाकृत व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके आश्रितों को; 5. चिकित्सा हितलाभ — बीमाकृत व्यक्ति और उसके कुटुंब को उपचार और परिचर्या; 6. अंत्येष्टि व्यय — मृत्यु पर अंत्येष्टि के लिए निर्धारित राशि।
इस सूची में स्वास्थ्य से जुड़ा हितलाभ है, पर उसका नाम 'चिकित्सा हितलाभ' है, 'स्वास्थ्य हितलाभ' नहीं। प्रश्न ने ठीक यही अंतर पकड़ा है : उसने वह शब्द चुना है जो कान को सबसे स्वाभाविक लगता है और क़ानून की भाषा में कहीं नहीं मिलता। विकल्प (a), (b) और (c) धारा 46 की सूची के तीन नाम हैं, ज्यों के त्यों; विकल्प (d) एक ऐसा नाम है जो सूची से मिलता-जुलता है और सूची में नहीं है।
यहाँ यह भी ध्यान रखिए कि सूची में चौथा नाम — आश्रितजन हितलाभ — विकल्पों में रखा ही नहीं गया, और अंत्येष्टि व्यय भी नहीं। इसका अर्थ यह नहीं कि वे हितलाभ नहीं हैं; प्रश्न को चार विकल्प चाहिए थे, छह नहीं। सूची की पूरी गिनती याद रखिए, विकल्पों की गिनती से नहीं।
एक अंतिम सावधानी : कर्मचारी राज्य बीमा निगम धारा 46 के बाहर भी कुछ योजनाएँ चलाता है, जैसे कुछ दशाओं में बेरोज़गारी भत्ता देने वाली योजनाएँ। वे निगम की योजनाएँ हैं, अधिनियम की धारा 46 में गिनाए हितलाभ नहीं, और जब प्रश्न 'अधिनियम के अंतर्गत' पूछे तो निर्णय धारा 46 की सूची से ही होता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)अस्वस्थता हितलाभ — अस्वस्थता हितलाभ धारा 46 की सूची का पहला नाम है, इसलिए इसे 'नहीं दिया जाता' कहना उत्तर को उलट देना है। यह बीमाकृत व्यक्ति को उन दिनों के लिए मिलता है जब वह प्रमाणित बीमारी के कारण काम पर नहीं जा पाता, और वह नक़द नियत कालिक भुगतान के रूप में दिया जाता है — सामान्य दशा में औसत दैनिक मज़दूरी के लगभग सत्तर प्रतिशत की दर से, अधिकतम इक्यानबे दिन तक, जो दो लगातार हितलाभ-अवधियों में गिने जाते हैं। इसके साथ दो विशेष रूप और हैं : कुछ निर्दिष्ट दीर्घकालिक रोगों के लिए बढ़ी हुई अवधि और ऊँची दर वाला विस्तारित अस्वस्थता हितलाभ, और परिवार नियोजन की शल्यक्रिया कराने वालों के लिए ऊँची दर वाला संवर्धित अस्वस्थता हितलाभ। पात्रता के लिए अंशदान-अवधि में न्यूनतम दिनों का अंशदान होना आवश्यक है।
- (b)प्रसूति हितलाभ — प्रसूति हितलाभ भी धारा 46 की सूची में है, और उसे इस अधिनियम से बाहर मान लेना दो क़ानूनों को आपस में गड्डमड्ड करना है। बीमाकृत स्त्री को यह हितलाभ प्रसव, गर्भपात, तथा गर्भावस्था या प्रसव से उत्पन्न बीमारी की दशा में मिलता है, और वह पूरी औसत दैनिक मज़दूरी की दर से नक़द दिया जाता है। यहाँ एक अंतर याद रखने योग्य है : जिस स्त्री पर यह अधिनियम लागू है, उसे प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 के बदले इसी योजना से हितलाभ मिलता है, क्योंकि दोनों एक साथ नहीं चलते। इसलिए 'प्रसूति' शब्द देखकर उसे केवल 1961 के अधिनियम की चीज़ मान लेना और यहाँ से बाहर कर देना, इस प्रश्न में सबसे स्वाभाविक भूल है।
- (c)नि:शक्तता हितलाभ — नि:शक्तता हितलाभ धारा 46 की सूची का तीसरा नाम है और इस अधिनियम की सबसे विशिष्ट देनों में से एक है। वह नियोजन-क्षति के कारण हुई अशक्तता पर मिलता है और दो रूपों में आता है : अस्थायी नि:शक्तता हितलाभ, जो जब तक अशक्तता बनी रहे तब तक नक़द दिया जाता है, और स्थायी नि:शक्तता हितलाभ, जो अर्जन-क्षमता की हानि के अनुपात में आजीवन मासिक भुगतान के रूप में दिया जाता है। हानि का प्रतिशत चिकित्सा बोर्ड प्रमाणित करता है, और उसी के विरुद्ध अपील की व्यवस्था भी अधिनियम में है। यही वह हितलाभ है जो इस अधिनियम को कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923 से जोड़ता भी है और अलग भी करता है, क्योंकि जिस कर्मचारी पर यह अधिनियम लागू है उसे 1923 वाले प्रतिकर के बदले यही मिलता है।
अवधारणा
कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 का हितलाभ-पक्ष एक ही धारा में सिमटा हुआ है, और उसी कारण वह परीक्षा की दृष्टि से बहुत साफ़ है। धारा 46 छह हितलाभ गिनाती है, और अगली धाराएँ उन्हीं का विस्तार करती हैं — कौन पात्र है, कितने दिन का अंशदान चाहिए, दर क्या होगी, और विवाद कौन तय करेगा।
छह हितलाभों को दो वर्गों में बाँटकर देखिए। पहला वर्ग नक़द हितलाभों का है — अस्वस्थता, प्रसूति, नि:शक्तता, आश्रितजन और अंत्येष्टि व्यय। इनमें बीमाकृत व्यक्ति या उसके आश्रितों को धन मिलता है, और उसकी दर औसत दैनिक मज़दूरी के प्रतिशत में तय होती है। दूसरा वर्ग वस्तु-रूप हितलाभ का है — चिकित्सा हितलाभ, जिसमें धन नहीं, बल्कि उपचार, दवा, जाँच, अस्पताल में भर्ती और परिचर्या मिलती है, और वह बीमाकृत व्यक्ति के कुटुंब को भी मिलती है।
यह वर्गीकरण इसलिए काम का है कि प्रश्न प्रायः इन्हीं दो वर्गों की सीमा पर बनते हैं। 'नक़द नहीं मिलता, सेवा मिलती है' — यह चिकित्सा हितलाभ की पहचान है। 'नियोजन-क्षति से ही जुड़ा है' — यह नि:शक्तता और आश्रितजन हितलाभ की पहचान है, क्योंकि साधारण बीमारी उनके लिए पर्याप्त नहीं। 'केवल स्त्री को' — यह प्रसूति हितलाभ की पहचान है।
धारा 46 की सूची बंद सूची है। जो नाम उसमें नहीं है वह इस अधिनियम का हितलाभ नहीं है, चाहे वह सुनने में कितना ही उपयुक्त क्यों न लगे — और इसी बात पर यह प्रश्न बना है।
इस अधिनियम से पहले औद्योगिक श्रमिक के लिए बीमारी का अर्थ था मज़दूरी का सीधा नुक़सान और इलाज का पूरा ख़र्च अपनी जेब से। 1948 का यह अधिनियम भारत में पहली बार उस जोखिम को व्यक्ति के कंधे से हटाकर एक साझा कोष पर डालता है, जिसमें नियोजक, कर्मचारी और राज्य सरकारें, तीनों का हिस्सा होता है।
इसी कारण अधिनियम का ढाँचा बीमा का है, बचत का नहीं। कर्मचारी भविष्य निधि में जो जमा होता है वह उसी कर्मचारी का रहता है और अंत में उसी को मिलता है; यहाँ जो जमा होता है वह साझा हो जाता है और उसे वही निकालता है जिस पर घटना घटती है। जो कर्मचारी वर्ष भर स्वस्थ रहा उसे कुछ वापस नहीं मिलता, और यह कमी नहीं, बीमे की परिभाषा है।
हितलाभों की सूची समय के साथ उदार होती गई है। प्रसूति हितलाभ की अवधि बढ़ाई गई, विस्तारित अस्वस्थता हितलाभ में रोगों की सूची लंबी हुई, और निगम ने अपने अस्पतालों तथा औषधालयों का जाल बढ़ाया। साथ ही निगम ने धारा 46 के बाहर कुछ योजनाएँ भी चलाईं, जैसे कुछ दशाओं में बेरोज़गारी भत्ता देने वाली योजनाएँ — पर वे निगम के निर्णय से चलती हैं, धारा 46 की सूची से नहीं, और परीक्षा में यही अंतर पूछा जाता है।
मुख्य तथ्य
- धारा 46 के छह हितलाभ हैं : अस्वस्थता, प्रसूति, नि:शक्तता, आश्रितजन, चिकित्सा, और अंत्येष्टि व्यय। यह सूची बंद है।
- 'स्वास्थ्य हितलाभ' नाम का कोई हितलाभ अधिनियम में नहीं है; स्वास्थ्य से जुड़ा हितलाभ 'चिकित्सा हितलाभ' कहलाता है और वही उपचार तथा परिचर्या देता है।
- चिकित्सा हितलाभ अकेला वस्तु-रूप हितलाभ है — उसमें धन नहीं, सेवा मिलती है, और वह बीमाकृत व्यक्ति के कुटुंब को भी मिलती है। शेष पाँच नक़द हितलाभ हैं।
- नि:शक्तता हितलाभ और आश्रितजन हितलाभ नियोजन-क्षति से जुड़े हैं; साधारण बीमारी या साधारण मृत्यु उनके लिए पर्याप्त नहीं होती।
- जिस स्त्री पर यह अधिनियम लागू है, उसे प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 के बदले इसी योजना से प्रसूति हितलाभ मिलता है — दोनों एक साथ नहीं चलते।
- स्थायी नि:शक्तता की दशा में अर्जन-क्षमता की हानि का प्रतिशत चिकित्सा बोर्ड प्रमाणित करता है, और उसी के आधार पर मासिक भुगतान तय होता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'स्वास्थ्य' और 'चिकित्सा' एक जैसे लगते हैं, पर अधिनियम में केवल चिकित्सा हितलाभ है। नाम की यही मामूली फेरबदल इस प्रश्न का पूरा आधार है।
- प्रसूति हितलाभ देखकर उसे केवल प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 का विषय मान लेना भूल है; वह इस अधिनियम की धारा 46 में भी है।
- धारा 46 की सूची छह की है, पर प्रश्न में चार ही विकल्प आते हैं। जो नाम विकल्पों में नहीं है, वह इसलिए बाहर नहीं हो जाता।
- निगम की अलग से चलाई गई योजनाओं को धारा 46 का हितलाभ मान लेना दूसरी दिशा की भूल है; 'अधिनियम के अंतर्गत' पूछे जाने पर निर्णय केवल धारा 46 से होता है।
इस अधिनियम के हितलाभों पर प्रश्न तीन साँचों में आते हैं। पहला और सबसे आम निषेधात्मक सूची है, जैसा यहाँ है — चार में से तीन नाम धारा 46 से उठाए जाते हैं और चौथा या तो गढ़ा हुआ पर्याय होता है, जैसे 'स्वास्थ्य हितलाभ', या किसी दूसरे क़ानून का हितलाभ, जैसे उपदान या बेरोज़गारी भत्ता। इसका उत्तर तभी निकलता है जब छहों नाम ठीक उसी शब्द में याद हों जिस शब्द में अधिनियम उन्हें लिखता है। दूसरा साँचा हितलाभ और उसकी शर्त का मेल है — 'कौन-सा हितलाभ केवल नियोजन-क्षति पर मिलता है', 'कौन-सा नक़द नहीं है', 'कौन-सा केवल स्त्री को मिलता है' — जहाँ सूची के भीतर का वर्गीकरण काम आता है। तीसरा साँचा प्राधिकारी का है — नि:शक्तता का प्रश्न कौन तय करेगा, अपील कहाँ होगी, विवाद किस न्यायालय में जाएगा — और वह इसी परिवार के दूसरे पेपरों में पूछा जा चुका है। तीनों के लिए एक तालिका पर्याप्त है : हितलाभ का नाम, वह नक़द है या सेवा, वह किस घटना पर मिलता है, और उसे कौन तय करता है।
संबंधित PYQ
EPFO_APFC_2023_Q28Any question relating to disablement shall be determined by which one of the following authorities under the Employees’ State Insurance Act, 1948?
- (a) The Insurance Medical Practitioner
- (b) The Social Security Officer
- (c) The Medical Board
- (d) The Medical Appeal Tribunal
उत्तर(c) The Medical Board
इसी अधिनियम के अधीन नि:शक्तता से संबंधित प्रश्न कौन तय करेगा, यह पूछता है — हितलाभ की सूची जान लेने के बाद अगली परत, कि उसे मंज़ूर कौन करता है।
EPFO_APFC_2016_Q114Employees State Insurance Act, 1948 covers factors like 1. Factories and establishments with 10 or more employees. 2. Provision of comprehensive medical care to employees and their families. 3. Provision of cash benefits during sickness and maternity. 4. Monthly payments in case of death or disablement. Which of the above statements are correct ?
- (a) 1, 2 and 3 only
- (b) 1, 2 and 4 only
- (c) 3 and 4 only
- (d) 1, 2, 3 and 4
उत्तर(d) 1, 2, 3 and 4
इसी अधिनियम के दायरे और हितलाभों पर चार कथन देकर सही कथन पूछता है, जिनमें चिकित्सा देखभाल तथा अस्वस्थता और प्रसूति के नक़द हितलाभ अलग-अलग गिनाए गए हैं।
EPFO_EOAO_2023_Q34As per the provisions of the Maternity Benefit Act, 1961, the maximum period for which a female employee shall be entitled to leave with wages as maternity benefit for giving birth to the third child is :
- (a) Eight weeks
- (b) Twelve weeks
- (c) Sixteen weeks
- (d) Twenty-six weeks
उत्तर(b) Twelve weeks
प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 के अधीन अवकाश की अधिकतम अवधि पूछता है — वह दूसरा क़ानून जिससे इस अधिनियम का प्रसूति हितलाभ प्रायः मिला दिया जाता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 की धारा 46 में गिनाए गए हितलाभों में से कौन-सा एकमात्र ऐसा है जिसमें नक़द भुगतान नहीं, बल्कि उपचार और परिचर्या दी जाती है ?
- (a)अस्वस्थता हितलाभ
- (b)चिकित्सा हितलाभ
- (c)आश्रितजन हितलाभ
- (d)अंत्येष्टि व्यय
उत्तर(b) चिकित्सा हितलाभ
- practice — not a real PYQ
नियोजन-क्षति के कारण बीमाकृत व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर उसके आश्रितों को कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के अधीन कौन-सा हितलाभ मिलता है ?
- (a)अस्वस्थता हितलाभ
- (b)प्रसूति हितलाभ
- (c)आश्रितजन हितलाभ
- (d)नि:शक्तता हितलाभ
उत्तर(c) आश्रितजन हितलाभ