श्रीमान X ₹ 20,000 प्रति माह मज़दूरी पाते हैं । कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के अधीन ईएसआई (ESI) योजना में क्या योगदान होंगे ?
- (a)नियोक्ता का योगदान ₹ 350; कर्मचारी का योगदान ₹ 950
- (b)नियोक्ता का योगदान ₹ 650; कर्मचारी का योगदान ₹ 150
- (c)नियोक्ता का योगदान ₹ 950; कर्मचारी का योगदान ₹ 350
- (d)नियोक्ता का योगदान ₹ 150; कर्मचारी का योगदान ₹ 650
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) नियोक्ता का योगदान ₹ 650; कर्मचारी का योगदान ₹ 150 — गणना सीधी है, बशर्ते दो बातें पहले तय कर ली जाएँ : क्या यह कर्मचारी योजना के दायरे में है, और आज की दरें क्या हैं।
पहली बात। कर्मचारी राज्य बीमा (केंद्रीय) नियम, 1950 के नियम 50 के अधीन योजना की वेतन-सीमा ₹ 21,000 प्रति माह है। श्रीमान X ₹ 20,000 पाते हैं, जो इस सीमा के भीतर है, इसलिए वे बीमाकृत व्यक्ति हैं और दोनों अंशदान देय हैं। यदि उनकी मज़दूरी सीमा से ऊपर होती तो कोई अंशदान न बनता, और प्रश्न का उत्तर शून्य होता — इसीलिए ₹ 20,000 का आँकड़ा प्रश्न में जान-बूझकर रखा गया है।
दूसरी बात। 1 जुलाई 2019 से लागू संशोधित दरें ये हैं : नियोक्ता का अंशदान मज़दूरी का 3·25 प्रतिशत, और कर्मचारी का अंशदान 0·75 प्रतिशत। इससे पहले ये क्रमशः 4·75 और 1·75 प्रतिशत थीं, यानी कुल 6·50 प्रतिशत, और अब कुल 4 प्रतिशत है।
अब गणना : नियोक्ता — ₹ 20,000 का 3·25 प्रतिशत = ₹ 650 कर्मचारी — ₹ 20,000 का 0·75 प्रतिशत = ₹ 150 कुल = ₹ 800, जो ₹ 20,000 का 4 प्रतिशत है, और यह जोड़ अपने आप उत्तर की जाँच भी कर देता है।
दोनों संख्याएँ किसके नाम लिखी हैं, यह इस प्रश्न का आधा भाग है। नियोक्ता का अंशदान कर्मचारी के अंशदान से लगभग साढ़े चार गुना है — यह इस योजना की मूल बनावट है, क्योंकि उपचार, नक़द हितलाभ और अस्पताल का सारा तंत्र मुख्यतः नियोजक के धन से खड़ा होता है। जिस विकल्प में कर्मचारी का अंक बड़ा और नियोक्ता का छोटा है, वह अंकगणित से पहले ही सिद्धांत से बाहर हो जाता है।
एक उपबंध और याद रखने योग्य है : जिस कर्मचारी की औसत दैनिक मज़दूरी निर्धारित निम्न सीमा से अधिक नहीं है, वह अपने हिस्से के अंशदान से छूट पाता है, पर नियोक्ता तब भी अपना पूरा हिस्सा देता है। यहाँ ₹ 20,000 मासिक उस सीमा से बहुत ऊपर है, इसलिए वह छूट लागू नहीं होती।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)नियोक्ता का योगदान ₹ 350; कर्मचारी का योगदान ₹ 950 — इस विकल्प में दो अलग-अलग ग़लतियाँ एक साथ हैं, और यही उसे सबसे भ्रामक बनाता है। पहली, दोनों अंक पुरानी दरों से निकले हैं : ₹ 350 मज़दूरी का 1·75 प्रतिशत है और ₹ 950 उसका 4·75 प्रतिशत — ये 30 जून 2019 तक चलने वाली दरें थीं, और 1 जुलाई 2019 से इनकी जगह क्रमशः 0·75 और 3·25 प्रतिशत ने ले ली। दूसरी, इस विकल्प ने उन पुरानी दरों को भी उलटे पक्ष के नाम लिख दिया है — 1·75 प्रतिशत कभी कर्मचारी की दर थी, नियोक्ता की नहीं, और 4·75 प्रतिशत नियोक्ता की, कर्मचारी की नहीं। इस तरह यह विकल्प न आज की स्थिति बताता है, न किसी पुरानी स्थिति को — वह दोनों कसौटियों पर एक साथ चूकता है।
- (c)नियोक्ता का योगदान ₹ 950; कर्मचारी का योगदान ₹ 350 — यह चारों में सबसे विचारणीय विकल्प है, और उसे सिरे से ग़लत कहकर छोड़ देना पढ़ाई की दृष्टि से नुक़सान होगा। इसका बँटवारा सही दिशा में है — नियोक्ता का अंक बड़ा, कर्मचारी का छोटा — और ₹ 950 तथा ₹ 350 ठीक वही राशियाँ हैं जो ₹ 20,000 पर 4·75 और 1·75 प्रतिशत से बनती हैं। कठिनाई केवल यह है कि वे दरें अब प्रवृत्त नहीं हैं। सरकार ने 1 जुलाई 2019 से कुल अंशदान 6·50 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत किया, जिसमें नियोक्ता का हिस्सा 3·25 और कर्मचारी का 0·75 प्रतिशत है। इसलिए यह विकल्प एक समाप्त हो चुकी व्यवस्था का सही उत्तर है, और आज पूछे गए प्रश्न का ग़लत — पुरानी पुस्तकों और पुराने प्रश्न-संग्रहों से पढ़ने वाले अभ्यर्थी प्रायः यहीं फँसते हैं।
- (d)नियोक्ता का योगदान ₹ 150; कर्मचारी का योगदान ₹ 650 — यहाँ दरें तो आज की ही हैं — ₹ 150 मज़दूरी का 0·75 प्रतिशत है और ₹ 650 उसका 3·25 प्रतिशत — पर दोनों नाम आपस में बदल दिए गए हैं। इस विकल्प के अनुसार कर्मचारी नियोक्ता से चार गुने से अधिक धन देगा, जो योजना की पूरी बनावट के विरुद्ध है। कर्मचारी राज्य बीमा योजना में बड़ा हिस्सा सदा नियोजक का रहा है, क्योंकि उसी से औषधालय, अस्पताल, अस्वस्थता के दिनों की नक़द राशि और प्रसूति तथा नि:शक्तता के हितलाभ चलते हैं; कर्मचारी का हिस्सा प्रतीकात्मक रूप से छोटा रखा गया है, और सबसे कम कमाने वालों के लिए तो वह पूरी तरह माफ़ ही है। संख्याएँ पहचानकर भी नाम न मिलाना इस प्रश्न में आधे अंक का नहीं, पूरे उत्तर का अंतर है।
अवधारणा
कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 भारत का पहला बड़ा अंशदायी सामाजिक बीमा क़ानून है, और उसे समझने का सबसे सरल ढंग यह है कि उसे एक साझा कोष मानिए जिसमें तीन पक्ष डालते हैं और जिससे एक पक्ष निकालता है।
धन कैसे आता है : अधिनियम की धारा 38 हर पात्र कर्मचारी का बीमा अनिवार्य करती है, और धारा 39 कहती है कि अंशदान दो होंगे — नियोजक का और कर्मचारी का — जिनकी दरें केंद्र सरकार नियमों से तय करेगी। दरें इसीलिए अधिनियम में नहीं, कर्मचारी राज्य बीमा (केंद्रीय) नियम, 1950 में हैं, और सरकार उन्हें अधिसूचना से बदल सकती है — 2019 में उसने ठीक यही किया।
कौन भीतर है : नियम 50 वेतन-सीमा तय करता है, जो इस समय ₹ 21,000 प्रति माह है; नि:शक्तजन कर्मचारियों के लिए यह सीमा अधिक है। अधिनियम स्वयं कारख़ानों पर लागू होता है, और राज्य सरकारें अधिसूचना से दुकानों, होटलों, सिनेमाघरों, सड़क परिवहन और शैक्षणिक तथा चिकित्सा संस्थानों जैसे प्रतिष्ठानों को भी इसमें ला चुकी हैं।
धन कब जमा होता है : वर्ष दो अंशदान-अवधियों में बँटा है — 1 अप्रैल से 30 सितंबर, और 1 अक्तूबर से 31 मार्च। हर अंशदान-अवधि से जुड़ी एक हितलाभ-अवधि होती है, जो लगभग नौ महीने बाद आरंभ होती है; इसी कारण नक़द हितलाभ का अधिकार तुरंत नहीं, कुछ विलंब से बनता है।
धन कहाँ जाता है : धारा 46 में गिनाए हितलाभों में — अस्वस्थता, प्रसूति, नि:शक्तता, आश्रितजन, चिकित्सा और अंत्येष्टि व्यय। तंत्र कर्मचारी राज्य बीमा निगम चलाता है, जो श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय के अधीन एक निगमित निकाय है।
इस अधिनियम की जड़ 1943 की प्रो० बी० पी० अदारकर की रिपोर्ट में है, जिन्हें सरकार ने औद्योगिक श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा की योजना बनाने के काम पर नियुक्त किया था। उसकी सिफ़ारिशों पर 1948 में यह अधिनियम बना और 1952 में कानपुर तथा दिल्ली से योजना का वास्तविक प्रवर्तन आरंभ हुआ।
भारत में सामाजिक सुरक्षा के दो अलग रास्ते इसी दौर में तय हुए, और दोनों का अंतर याद रखने योग्य है। भविष्य निधि का रास्ता संचय का है — पैसा कर्मचारी के अपने खाते में जमा होता है और अंत में उसे ही मिलता है। बीमा का रास्ता जोखिम-वितरण का है — पैसा साझा कोष में जाता है और उसे वही निकालता है जिस पर बीमारी, दुर्घटना, प्रसूति या मृत्यु की घटना घटती है। कर्मचारी राज्य बीमा दूसरे प्रकार का है, इसलिए यहाँ अंशदान का 'लौटना' नहीं होता।
दरों का इतिहास भी परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक कुल अंशदान 6·50 प्रतिशत रहा — नियोजक 4·75 और कर्मचारी 1·75। 1 जुलाई 2019 से इसे घटाकर 4 प्रतिशत किया गया, यह कहते हुए कि इससे प्रतिष्ठान अपने कर्मचारियों को औपचारिक रूप से पंजीकृत कराने के लिए प्रेरित होंगे और योजना का विस्तार होगा। यही वह बदलाव है जिस पर इस प्रकार के संख्यात्मक प्रश्न आज टिके हुए हैं।
मुख्य तथ्य
- वर्तमान दरें : नियोजक का अंशदान मज़दूरी का 3·25 प्रतिशत और कर्मचारी का 0·75 प्रतिशत, कुल 4 प्रतिशत — 1 जुलाई 2019 से प्रवृत्त।
- पुरानी दरें : नियोजक 4·75 प्रतिशत और कर्मचारी 1·75 प्रतिशत, कुल 6·50 प्रतिशत — 30 जून 2019 तक; पुराने प्रश्न-संग्रहों में यही मिलती हैं।
- योजना की वेतन-सीमा कर्मचारी राज्य बीमा (केंद्रीय) नियम, 1950 के नियम 50 में है और इस समय ₹ 21,000 प्रति माह है; नि:शक्तजन कर्मचारियों के लिए यह सीमा अधिक रखी गई है।
- जिस कर्मचारी की औसत दैनिक मज़दूरी निर्धारित निम्न सीमा से अधिक नहीं है, उसे अपने हिस्से के अंशदान से छूट है, किन्तु नियोजक तब भी अपना पूरा अंशदान देता है।
- अंशदान की दरें अधिनियम में नहीं, नियमों में हैं — धारा 39 केंद्र सरकार को दर तय करने की शक्ति देती है, इसलिए दर अधिसूचना से बदल सकती है और बदली भी है।
- वर्ष की दो अंशदान-अवधियाँ हैं, 1 अप्रैल से 30 सितंबर और 1 अक्तूबर से 31 मार्च, और हर एक से जुड़ी एक हितलाभ-अवधि होती है जो लगभग नौ महीने बाद आरंभ होती है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- पुरानी दरों से गणना करना इस प्रश्न का सबसे बड़ा जाल है। 4·75 और 1·75 प्रतिशत 2019 में बदल चुके हैं; आज 3·25 और 0·75 प्रतिशत चलते हैं।
- दोनों अंक निकाल लेने के बाद उन्हें सही पक्ष के नाम लिखना बाक़ी रहता है। बड़ा अंक सदा नियोजक का है, छोटा कर्मचारी का।
- मज़दूरी पहले वेतन-सीमा से मिलाइए। सीमा से ऊपर की मज़दूरी पर कोई अंशदान नहीं बनता, और तब पूरा प्रश्न ही बदल जाता है।
- जोड़ से जाँच कीजिए : दोनों अंशदान मिलकर मज़दूरी के 4 प्रतिशत होने चाहिए। यहाँ ₹ 650 और ₹ 150 का जोड़ ₹ 800 है, जो ₹ 20,000 का ठीक 4 प्रतिशत है।
कर्मचारी राज्य बीमा पर संख्यात्मक प्रश्न प्रायः इसी साँचे में आता है : एक मासिक मज़दूरी दी जाती है, और दोनों अंशदान पूछ लिए जाते हैं। उसे हल करने का क्रम हमेशा एक ही रहता है — पहले वेतन-सीमा से मिलाकर देखिए कि कर्मचारी दायरे में है या नहीं, फिर दोनों प्रतिशत लगाइए, फिर दोनों अंक सही पक्ष के नाम लिखिए, और अंत में जोड़ से जाँच कीजिए। दूसरा साँचा गुणात्मक है — 'निम्नलिखित में से कौन-सा हितलाभ इस अधिनियम के अधीन नहीं दिया जाता', या 'नि:शक्तता का प्रश्न कौन तय करता है' — जहाँ धारा 46 की सूची और निर्णायक प्राधिकारी याद होने चाहिए। तीसरा साँचा तुलनात्मक है, जिसमें अलग-अलग श्रम क़ानूनों की वेतन-सीमाएँ आपस में मिला दी जाती हैं : कर्मचारी राज्य बीमा की ₹ 21,000, मज़दूरी संदाय अधिनियम की ₹ 24,000, और भविष्य निधि की योजना-स्तरीय ₹ 15,000। इन तीनों संख्याओं को एक ही पंक्ति में लिखकर याद कर लीजिए, क्योंकि प्रश्न प्रायः एक क़ानून की सीमा उठाकर दूसरे के नाम रख देता है।
संबंधित PYQ
EPFO_APFC_2016_Q114Employees State Insurance Act, 1948 covers factors like 1. Factories and establishments with 10 or more employees. 2. Provision of comprehensive medical care to employees and their families. 3. Provision of cash benefits during sickness and maternity. 4. Monthly payments in case of death or disablement. Which of the above statements are correct ?
- (a) 1, 2 and 3 only
- (b) 1, 2 and 4 only
- (c) 3 and 4 only
- (d) 1, 2, 3 and 4
उत्तर(d) 1, 2, 3 and 4
इसी अधिनियम के दायरे और हितलाभों पर चार कथन देकर सही कथन पूछता है — दस या अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान, चिकित्सा देखभाल, अस्वस्थता तथा प्रसूति के नक़द हितलाभ, और मृत्यु या नि:शक्तता पर मासिक भुगतान।
EPFO_APFC_2023_Q28Any question relating to disablement shall be determined by which one of the following authorities under the Employees’ State Insurance Act, 1948?
- (a) The Insurance Medical Practitioner
- (b) The Social Security Officer
- (c) The Medical Board
- (d) The Medical Appeal Tribunal
उत्तर(c) The Medical Board
इसी अधिनियम के अधीन नि:शक्तता से संबंधित प्रश्न किस प्राधिकारी द्वारा तय किया जाएगा, यह पूछता है — अंशदान के बाद हितलाभ-पक्ष की वह परत जो इसी अध्याय में आगे आती है।
EPFO_EOAO_2023_Q26An employee shall be covered under the provisions of the Payment of Wages Act, 1936, should the employee be drawing a maximum monthly wage of :
- (a) Rupees fifteen thousand
- (b) Rupees eighteen thousand
- (c) Rupees twenty-one thousand
- (d) Rupees twenty-four thousand
उत्तर(d) Rupees twenty-four thousand
मज़दूरी संदाय अधिनियम, 1936 के अधीन आने के लिए अधिकतम मासिक मज़दूरी पूछता है — दूसरे क़ानून की वेतन-सीमा, जिसे इस अधिनियम की सीमा के साथ मिलाकर याद रखना ही इस प्रकार के प्रश्नों की तैयारी है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के अधीन 1 जुलाई 2019 से प्रवृत्त दरों के अनुसार नियोजक और कर्मचारी के अंशदान की कुल दर मज़दूरी की कितनी है ?
- (a)4 प्रतिशत
- (b)6·50 प्रतिशत
- (c)12 प्रतिशत
- (d)0·75 प्रतिशत
उत्तर(a) 4 प्रतिशत
- practice — not a real PYQ
कर्मचारी राज्य बीमा योजना के दायरे में आने के लिए किसी कर्मचारी की मासिक मज़दूरी अधिकतम कितनी हो सकती है, जैसा कर्मचारी राज्य बीमा (केंद्रीय) नियम, 1950 में निर्धारित है ?
- (a)₹ 15,000
- (b)₹ 18,000
- (c)₹ 21,000
- (d)₹ 24,000
उत्तर(c) ₹ 21,000