दो निष्पक्ष पासे, जिनमें प्रत्येक के अपने फलकों पर 1 से 6 तक अंकित हैं, को एकसाथ फेंका जाता है । उन दोनों पासों के ऊपरी फलकों पर आने वाली परिणामी संख्याओं का योगफल 7 अथवा 10 होने की प्रायिकता क्या है ?
- (a)0·15
- (b)0·20
- (c)0·25
- (d)0·30
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) 0·25 — प्रायिकता एक-चौथाई है।
पहले प्रतिदर्श समष्टि तय कीजिए। दो पासे एकसाथ फेंके जाते हैं और दोनों निष्पक्ष हैं, इसलिए हर पासे पर छह परिणाम संभव हैं और दोनों मिलकर 6 × 6 = 36 समसंभाव्य परिणाम बनाते हैं। यहाँ पासों को अलग-अलग गिनना आवश्यक है, यानी क्रमित युग्म लेने हैं — तभी सब परिणाम समान संभावना वाले रहते हैं। यह इस पूरे अध्याय की सबसे आम भूल है : यदि केवल योगफल गिने जाएँ तो 2 से 12 तक ग्यारह परिणाम दिखते हैं, पर वे समसंभाव्य नहीं हैं, और उन पर प्रायिकता का सूत्र लगाया ही नहीं जा सकता।
अब अनुकूल परिणाम गिनिए।
योगफल 7 देने वाले युग्म हैं (1, 6), (2, 5), (3, 4), (4, 3), (5, 2) और (6, 1) — कुल छह।
योगफल 10 देने वाले युग्म हैं (4, 6), (5, 5) और (6, 4) — कुल तीन। ध्यान दीजिए कि (5, 5) एक ही युग्म है, क्योंकि दोनों पासों पर वही अंक है, जबकि (4, 6) और (6, 4) दो अलग युग्म हैं।
यहीं वह चरण है जो उत्तर तय करता है : योगफल एक ही समय में 7 और 10 दोनों नहीं हो सकता, इसलिए दोनों घटनाएँ परस्पर अपवर्जी हैं और उनकी गिनतियाँ सीधे जोड़ी जा सकती हैं। कुल अनुकूल परिणाम 6 + 3 = 9।
इसलिए प्रायिकता = 9 ⁄ 36 = 1 ⁄ 4 = 0·25।
गिनती का एक सूत्र भी याद रखने योग्य है, जो दो पासों के हर योगफल पर काम करता है और इस प्रश्न को कुछ सेकंड में निपटा देता है। योगफल s के लिए अनुकूल युग्मों की संख्या 6 – |s – 7| होती है। यानी 7 से जितनी दूर जाइए, उतनी ही संख्या घटती जाती है। जाँचिए : s = 7 पर 6 – 0 = 6; s = 10 पर 6 – 3 = 3; और सिरे पर s = 2 या s = 12 पर 6 – 5 = 1, जो ठीक है, क्योंकि दो इकाइयाँ या दो छक्के एक ही तरह से आते हैं। इसी से यह भी स्पष्ट हो जाता है कि दो पासों में 7 ही सबसे संभावित योगफल क्यों है — वह परास के ठीक बीच में पड़ता है, इसलिए उसे बनाने के सबसे अधिक रास्ते हैं।
एक जाँच भी साथ रखिए, जो इस प्रश्न में बहुत तेज़ है। यहाँ हर प्रायिकता किसी पूर्णांक को 36 से भाग देकर ही बन सकती है, इसलिए उत्तर को 36 से गुणा करने पर पूर्णांक आना चाहिए। 0·25 × 36 = 9 आता है, जो पूर्णांक है; शेष तीनों विकल्पों पर यह गुणनफल पूर्णांक नहीं बनता — 0·15 पर 5·4, 0·20 पर 7·2 और 0·30 पर 10·8।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)0·15 — इस मान को 36 से गुणा कीजिए : 0·15 × 36 = 5·4 आता है, जो पूर्णांक नहीं है। पर अनुकूल परिणामों की संख्या पूर्णांक ही हो सकती है — पाँच दशमलव चार परिणाम जैसी कोई चीज़ होती नहीं — इसलिए यह मान दो पासों के इस प्रयोग में किसी भी घटना की प्रायिकता हो ही नहीं सकता। यह जाँच पूरी गणना से पहले ही की जा सकती है और वह अकेले तीन विकल्प काट देती है। इसके अतिरिक्त सीधी गिनती भी यही कहती है : योगफल 7 के छह युग्म और योगफल 10 के तीन, कुल नौ, और नौ बटा छत्तीस एक-चौथाई है।
- (b)0·20 — यह मान भी उसी कसौटी पर गिर जाता है : 0·20 × 36 = 7·2, जो पूर्णांक नहीं है। यदि कोई इसे गिनती से निकालने का प्रयास करे तो उसे सात या आठ अनुकूल युग्म चाहिए होंगे, जबकि दोनों योगफलों के युग्म ठीक नौ हैं। यह विकल्प संभवतः इसलिए रखा गया है कि जल्दबाज़ी में योगफल 10 के युग्म कम गिन लिए जाएँ — जैसे (4, 6) और (6, 4) को एक ही मान लेने पर कुल आठ रह जाते हैं, और आठ बटा छत्तीस लगभग 0·22 होता है, जो इस विकल्प के पास पड़ता है। पर दोनों पासे अलग-अलग हैं, इसलिए वे दो भिन्न परिणाम हैं।
- (d)0·30 — इसे भी 36 से गुणा कीजिए : 0·30 × 36 = 10·8, फिर पूर्णांक नहीं। इस विकल्प तक पहुँचने का एक स्वाभाविक रास्ता यह है कि (5, 5) को भी दो बार गिन लिया जाए, जिससे योगफल 10 के युग्म चार हो जाएँ और कुल दस बन जाएँ; दस बटा छत्तीस लगभग 0·28 होता है, जो इस विकल्प के निकट है। पर दोनों पासों पर पाँच आने की स्थिति एक ही है, उसे उलटने पर वही स्थिति बनी रहती है, इसलिए वह एक ही परिणाम गिनी जाएगी। यही उन युग्मों की विशेषता है जिनमें दोनों अंक समान हों — वे केवल एक बार आते हैं, जबकि असमान अंकों वाले युग्म दो बार।
अवधारणा
दो पासों वाली प्रायिकता का पूरा ढाँचा एक ही बात पर टिका है : परिणामों को क्रमित युग्म के रूप में गिना जाए। पहले पासे का परिणाम और दूसरे पासे का परिणाम मिलकर एक युग्म बनाते हैं, और ऐसे युग्म छत्तीस हैं, जिनमें से हर एक की संभावना समान है।
यदि पासों को अलग-अलग न गिना जाए, यानी केवल यह देखा जाए कि कौन-से दो अंक आए, तो कुल स्थितियाँ इक्कीस रह जाती हैं — पर वे समसंभाव्य नहीं होतीं, क्योंकि दो असमान अंकों वाली स्थिति दो तरीक़ों से बन सकती है और समान अंकों वाली केवल एक तरीक़े से। इसीलिए क्रमित गिनती ही मानक है।
योगफल की गिनती का एक सुविधाजनक नियम भी है। सात तक के किसी योगफल s के लिए युग्मों की संख्या s – 1 होती है, और सात से आगे के योगफल के लिए 13 – s। इसी से योगफल 7 पर छह युग्म और योगफल 10 पर तीन युग्म तुरंत निकल आते हैं। सात सबसे अधिक बार आने वाला योगफल है, यही इस नियम का शिखर है।
अंत में जोड़ का नियम : जब दो घटनाएँ एक साथ घट ही न सकती हों, तब उनकी प्रायिकताएँ सीधे जोड़ी जाती हैं। भिन्न-भिन्न योगफल ऐसी ही घटनाएँ हैं।
प्रायिकता के प्रश्न इस पेपर के संख्यात्मक खंड में नियमित रूप से आते हैं, और पासों वाला रूप उनमें सबसे आम है, क्योंकि उसमें प्रतिदर्श समष्टि छोटी और स्पष्ट होती है।
इस प्रश्न में एक अतिरिक्त परत जोड़ी गई है — योगफल एक नहीं, दो माँगे गए हैं और उन्हें 'अथवा' से जोड़ा गया है। इसलिए दोनों की गिनती अलग-अलग करके जोड़नी पड़ती है, और यह भी देखना पड़ता है कि कहीं कोई परिणाम दोनों में तो नहीं आ रहा। यहाँ नहीं आ रहा, क्योंकि कोई युग्म एक ही समय में सात और दस दोनों का योग नहीं दे सकता।
विकल्पों की बनावट इस प्रश्न में असामान्य रूप से उपयोगी है। चारों दशमलव में हैं और उनमें से केवल एक ही ऐसा है जिसे 36 से गुणा करने पर पूर्णांक मिलता है। इसका अर्थ यह है कि गिनती में भूल हो जाने पर भी यह जाँच सही विकल्प तक पहुँचा देती है। ऐसी संरचनात्मक जाँच परीक्षा में समय बचाती है और आत्मविश्वास भी देती है।
चारों विकल्प उठे हुए मध्य बिंदु वाले दशमलव में छपे हैं और तीन में अंत का शून्य भी छपा है।
मुख्य तथ्य
- दो निष्पक्ष पासों को एकसाथ फेंकने पर 6 × 6 = 36 समसंभाव्य क्रमित युग्म बनते हैं; पासों को अलग-अलग गिनना आवश्यक है।
- योगफल 7 देने वाले युग्म छह हैं और योगफल 10 देने वाले तीन, इसलिए कुल अनुकूल परिणाम नौ हैं।
- दोनों घटनाएँ परस्पर अपवर्जी हैं, क्योंकि कोई युग्म एक ही समय में दोनों योगफल नहीं दे सकता, इसलिए गिनतियाँ सीधे जोड़ी जा सकती हैं।
- सात तक के योगफल s के लिए युग्मों की संख्या s – 1 होती है और सात से आगे के लिए 13 – s; सात सबसे अधिक बार आने वाला योगफल है।
- यहाँ हर प्रायिकता किसी पूर्णांक को 36 से भाग देकर बनती है, इसलिए उत्तर को 36 से गुणा करने पर पूर्णांक आना चाहिए — यह जाँच अकेले तीन विकल्प काट देती है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- असमान अंकों वाले युग्म को एक ही परिणाम मान लेना; दोनों पासे अलग हैं, इसलिए (4, 6) और (6, 4) दो परिणाम गिने जाते हैं।
- समान अंकों वाले युग्म को दो बार गिन लेना; (5, 5) को उलटने पर वही स्थिति बनी रहती है, इसलिए वह एक ही बार आता है।
- योगफलों को ही प्रतिदर्श समष्टि मान लेना — 2 से 12 तक ग्यारह परिणाम दिखते तो हैं, पर वे समसंभाव्य नहीं हैं, इसलिए उन पर प्रायिकता का सूत्र लगाया ही नहीं जा सकता।
- 'अथवा' से जुड़ी दो घटनाओं में यह न जाँचना कि कोई परिणाम दोनों में तो नहीं आ रहा; यहाँ नहीं आ रहा — एक ही फेंक का योग 7 और 10 दोनों नहीं हो सकता — पर हर बार ऐसा नहीं होता।
प्रायिकता के प्रश्न इस परीक्षा में तीन शक्लों में आते हैं। पहली शक्ल पासों या सिक्कों पर है, जहाँ प्रतिदर्श समष्टि सीधे गिनी जा सकती है। दूसरी शक्ल चयन पर है, जिसमें थैले से गेंदें या समूह से व्यक्ति चुने जाते हैं। तीसरी शक्ल किसी बीजीय शर्त पर है, जैसे किसी व्यंजक का सम या विषम होना।
तीनों में विधि एक ही है : पहले कुल परिणाम गिनिए, फिर अनुकूल परिणाम, और फिर भाग दीजिए। सबसे अधिक भूल पहले चरण में होती है, इसलिए यह तय कर लेना चाहिए कि परिणामों को क्रमित मानना है या नहीं — और समसंभाव्यता क्रमित गिनती से ही मिलती है।
पासों वाले प्रश्नों में योगफल की तालिका एक बार बनाकर याद कर लेना बहुत लाभदायक है, क्योंकि वही तालिका बार-बार काम आती है।
अंत में उत्तर की संरचना जाँचिए। जहाँ कुल परिणाम छत्तीस हों, वहाँ हर संभव प्रायिकता छत्तीसवें भाग का गुणज होगी। इस एक कसौटी से अनेक विकल्प बिना गणना के हट जाते हैं।
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- (a) 15
- (b) 20
- (c) 21
- (d) 36
उत्तर(c) 21
दो बार पासा फेंकने पर एक शर्त पूरी करने वाले तरीक़ों की गिनती वाला प्रश्न, जो उसी छत्तीस परिणामों की समष्टि पर चलता है।
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- (a) 1/2
- (b) 1/3
- (c) 1/4
- (d) 1/5
उत्तर(d) 1/5
किसी समुच्चय से चुने गए मानों पर बनी शर्त की प्रायिकता वाला प्रश्न, जिसमें अनुकूल और कुल परिणाम अलग-अलग गिनने पड़ते हैं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
दो निष्पक्ष पासे एकसाथ फेंके जाते हैं । दोनों के ऊपरी फलकों पर आने वाली संख्याओं का योगफल 5 अथवा 9 होने की प्रायिकता क्या है ?
- (a)1/9
- (b)1/6
- (c)2/9
- (d)1/4
उत्तर(c) 2/9 — योगफल 5 के चार युग्म हैं और योगफल 9 के भी चार, इसलिए अनुकूल परिणाम आठ हैं; दोनों घटनाएँ परस्पर अपवर्जी हैं, इसलिए प्रायिकता 8 ⁄ 36 = 2 ⁄ 9 होती है।