निम्नलिखित में से कौन-सी, कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 के अंतर्गत, एक वर्तमान विद्यमान योजना नहीं है ?
- (a)कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952
- (b)कर्मचारी निक्षेप-सहबद्ध बीमा योजना, 1976
- (c)कर्मचारी पेंशन योजना, 1995
- (d)कर्मचारी परिवार पेंशन योजना, 1971
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) कर्मचारी परिवार पेंशन योजना, 1971 — यह योजना अब चल नहीं रही। वह 1995 में समाप्त हो गई और उसकी जगह कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 ने ले ली।
पहले यह समझ लीजिए कि यह अधिनियम स्वयं किसी कर्मचारी को कोई प्रसुविधा नहीं देता। वह एक सक्षमकारी क़ानून है : वह केंद्र सरकार को योजनाएँ बनाने की शक्ति देता है, और असली नियम उन योजनाओं में लिखे होते हैं। आज इस अधिनियम के अधीन ठीक तीन योजनाएँ चल रही हैं — 1. धारा 5 के अधीन कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952; 2. धारा 6क के अधीन कर्मचारी पेंशन योजना, 1995; 3. धारा 6ग के अधीन कर्मचारी निक्षेप-सहबद्ध बीमा योजना, 1976।
चौथी कोई योजना नहीं है, और यही इस प्रश्न की पूरी बनावट है : तीन विकल्प इन्हीं तीन योजनाओं के नाम हैं और चौथा एक ऐसी योजना का नाम है जो कभी थी, पर अब नहीं है।
अब 1971 की योजना का इतिहास। 1971 के संशोधन ने अधिनियम में धारा 6क जोड़ी और उसके अधीन कर्मचारी परिवार पेंशन योजना, 1971 बनी। उसमें भविष्य निधि के अंशदान का एक हिस्सा एक अलग परिवार पेंशन निधि में चला जाता था, और सदस्य की मृत्यु होने पर उसके परिवार को पेंशन मिलती थी। ध्यान दीजिए कि वह केवल मृत्यु पर मिलने वाला लाभ था — जीवित रहते हुए सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी को उस योजना से कोई पेंशन नहीं मिलती थी। यही उसकी सबसे बड़ी कमी थी।
16 नवम्बर 1995 से कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 प्रवृत्त हुई और उसी तिथि से परिवार पेंशन योजना, 1971 का प्रवर्तन समाप्त हो गया। परिवार पेंशन निधि की सारी परिसंपत्तियाँ और दायित्व नई पेंशन निधि में अंतरित कर दिए गए, और 1971 की योजना के सदस्य स्वतः 1995 की योजना के सदस्य मान लिए गए। नई योजना ने पुरानी की कमी भी दूर कर दी : उसमें सेवानिवृत्ति पेंशन, नि:शक्तता पेंशन, विधवा या विधुर पेंशन, बाल पेंशन और अनाथ पेंशन — सब एक ही छत के नीचे हैं।
इसलिए 1971 की योजना का नाम पुरानी पुस्तकों में और पुराने कर्मचारियों की बातचीत में आज भी मिल जाता है, पर वह वर्तमान में विद्यमान योजना नहीं है। प्रश्न में 'नहीं' मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है, इसलिए यहाँ ग़लती से सही योजना चुन लेने की गुंजाइश कम है — शर्त यही है कि पढ़ते समय उस एक शब्द पर नज़र ठहर जाए।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952 — यह इस अधिनियम की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी योजना है, और आज भी पूरी तरह चालू है। कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952 धारा 5 के अधीन बनाई गई थी और यही वह योजना है जिसमें हर सदस्य का अपना भविष्य निधि खाता होता है। कर्मचारी अपनी मज़दूरी का 12 प्रतिशत उसमें देता है और नियोजक भी उतना ही देता है, यद्यपि नियोजक के हिस्से का एक भाग पेंशन निधि में मोड़ दिया जाता है। सेवानिवृत्ति, सेवा छोड़ने या मृत्यु पर पूरा संचित धन ब्याज सहित मिलता है, और बीच में मकान, विवाह, शिक्षा, बीमारी जैसी निर्धारित परिस्थितियों में अग्रिम भी निकाला जा सकता है। इस योजना को समाप्त मान लेना अधिनियम की मूल संरचना को ही न पहचानना है।
- (b)कर्मचारी निक्षेप-सहबद्ध बीमा योजना, 1976 — यह भी चालू योजना है, और वह इस अधिनियम की तीन योजनाओं में सबसे कम चर्चित होने के कारण अक्सर संदेह में आ जाती है। कर्मचारी निक्षेप-सहबद्ध बीमा योजना, 1976 धारा 6ग के अधीन बनी है और 1976 से चल रही है। उसकी सबसे पहचानने योग्य बात यह है कि उसमें कर्मचारी एक पैसा नहीं देता — पूरा अंशदान नियोजक देता है, मज़दूरी के 0·50 प्रतिशत की दर से, और वह एक अलग बीमा निधि में जमा होता है। सेवा में रहते हुए सदस्य की मृत्यु हो जाने पर उसके नामनिर्देशिती को एकमुश्त बीमा राशि मिलती है, जिसका परिमाण सदस्य के भविष्य निधि खाते के औसत शेष से जुड़ा होता है। नाम में आया 'निक्षेप-सहबद्ध' शब्द इसी जुड़ाव की ओर संकेत करता है।
- (c)कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 — यही वह योजना है जिसने 1971 की योजना की जगह ली, इसलिए इसे 'समाप्त' मान लेना उत्तर को ठीक उलटा कर देना है। कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 धारा 6क के अधीन बनी और 16 नवम्बर 1995 से प्रवृत्त है। इसमें कर्मचारी अलग से कुछ नहीं देता; नियोजक के 12 प्रतिशत में से 8·33 प्रतिशत पेंशन निधि में मोड़ दिया जाता है और केंद्र सरकार निर्धारित वेतन-सीमा तक 1·16 प्रतिशत अपनी ओर से मिलाती है। इसी योजना से सेवानिवृत्ति पेंशन, नि:शक्तता पेंशन, विधवा या विधुर पेंशन, बाल पेंशन और अनाथ पेंशन मिलती है। परीक्षा में 1971 और 1995 के वर्ष आपस में बदलकर पूछे जाते हैं, इसलिए दोनों तिथियाँ अलग-अलग याद रखिए।
अवधारणा
कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 को समझने का सबसे साफ़ रास्ता यह है कि उसे एक ढाँचा-क़ानून मानिए, न कि लाभों की सूची।
अधिनियम तीन काम करता है। पहला, वह अपना क्षेत्र तय करता है — किन प्रतिष्ठानों पर लागू होगा और कौन उससे बाहर रहेंगे। दूसरा, वह केंद्र सरकार को योजनाएँ बनाने की शक्ति देता है; धारा 5 भविष्य निधि योजना के लिए, धारा 6क पेंशन योजना के लिए और धारा 6ग निक्षेप-सहबद्ध बीमा योजना के लिए। तीसरा, वह इन योजनाओं को चलाने का तंत्र खड़ा करता है — केंद्रीय न्यासी बोर्ड, क्षेत्रीय समितियाँ, केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त, और वसूली तथा अपील की प्रक्रिया।
इस बनावट का सीधा परिणाम यह है कि परीक्षा में जो नियम पूछे जाते हैं — अंशदान की दर, पात्रता की आयु, पेंशन की गणना, अग्रिम की शर्तें — वे अधिनियम में नहीं, योजनाओं में हैं, और सरकार उन्हें अधिसूचना से बदल सकती है। अधिनियम की धाराएँ अपेक्षाकृत स्थिर रहती हैं; योजनाओं के पैरा बदलते रहते हैं।
इसी कारण योजनाओं की संख्या और उनके वर्ष एक अलग तथ्य हैं जिन्हें अलग से याद रखना पड़ता है। तीन योजनाएँ, तीन वर्ष — 1952, 1976 और 1995 — और एक चौथा वर्ष, 1971, जो अब केवल इतिहास है। जिस उम्मीदवार के मन में यह सूची स्पष्ट है, उसके लिए इस प्रकार का प्रश्न कुछ सेकंड का है।
यह अधिनियम स्वतंत्रता के बाद के पहले बड़े सामाजिक सुरक्षा क़ानूनों में है। उसका उद्देश्य संगठित क्षेत्र के कर्मचारी के लिए बुढ़ापे और मृत्यु के विरुद्ध एक अनिवार्य बचत खड़ी करना था, जिसमें कर्मचारी और नियोजक दोनों अंशदान दें।
आरंभ में केवल भविष्य निधि थी — एकमुश्त राशि, जो सेवानिवृत्ति पर मिलती थी। एकमुश्त राशि की कमज़ोरी यह होती है कि वह जल्दी ख़र्च हो जाती है और महँगाई उसका मूल्य घटा देती है, इसलिए धीरे-धीरे उसके ऊपर दो और परतें जोड़ी गईं : 1971 में परिवार पेंशन, जिसने मृत्यु के बाद परिवार को नियमित आय दी, और 1976 में निक्षेप-सहबद्ध बीमा, जिसने मृत्यु पर एकमुश्त बीमा राशि जोड़ी।
1995 में यह क्रम एक क़दम और आगे बढ़ा। परिवार पेंशन योजना, 1971 को हटाकर कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 लाई गई, जो केवल मृत्यु पर नहीं बल्कि सेवानिवृत्ति पर भी आजीवन पेंशन देती है। इस तरह आज का ढाँचा तीन परतों का है — एकमुश्त भविष्य निधि, आजीवन पेंशन, और मृत्यु पर बीमा।
यह पूरा तंत्र कर्मचारी भविष्य निधि संगठन चलाता है, जो श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय के अधीन है और जिसका शीर्ष निकाय त्रिपक्षीय केंद्रीय न्यासी बोर्ड है, जिसमें सरकार, नियोजक और कर्मचारी तीनों के प्रतिनिधि होते हैं।
मुख्य तथ्य
- अधिनियम के अधीन इस समय तीन ही योजनाएँ चल रही हैं : कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952; कर्मचारी पेंशन योजना, 1995; और कर्मचारी निक्षेप-सहबद्ध बीमा योजना, 1976।
- कर्मचारी परिवार पेंशन योजना, 1971 अब विद्यमान नहीं है — 16 नवम्बर 1995 से कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 के प्रवृत्त होते ही उसका प्रवर्तन समाप्त हो गया।
- योजना और धारा का मेल : भविष्य निधि योजना धारा 5 से, पेंशन योजना धारा 6क से, और निक्षेप-सहबद्ध बीमा योजना धारा 6ग से बनाई गई है।
- परिवार पेंशन योजना, 1971 केवल सदस्य की मृत्यु पर परिवार को पेंशन देती थी; जीवित सेवानिवृत्त कर्मचारी को उससे कोई पेंशन नहीं मिलती थी। यह कमी 1995 की योजना ने दूर की।
- निक्षेप-सहबद्ध बीमा योजना में कर्मचारी का कोई अंशदान नहीं होता — पूरा 0·50 प्रतिशत नियोजक देता है, और लाभ सदस्य के भविष्य निधि खाते के औसत शेष से जुड़ा होता है।
- पेंशन योजना में नियोजक के अंशदान का 8·33 प्रतिशत पेंशन निधि में मोड़ा जाता है और केंद्र सरकार निर्धारित वेतन-सीमा तक 1·16 प्रतिशत अपनी ओर से जोड़ती है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 1971 और 1995 के वर्ष आपस में बदलकर पूछे जाते हैं। परिवार पेंशन 1971 की है और पेंशन योजना 1995 की।
- योजना का नाम पहचान लेना काफ़ी नहीं — प्रश्न यह पूछ रहा है कि वह अब चल रही है या नहीं, जो एक अलग तथ्य है।
- निक्षेप-सहबद्ध बीमा योजना का वर्ष 1976 है, 1972 नहीं; 1972 उपदान संदाय अधिनियम का वर्ष है और दोनों पास-पास पूछे जाते हैं।
- 'नहीं' मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है; उसे न देखने पर उम्मीदवार सबसे परिचित योजना, यानी 1952 की, चुन बैठता है।
इस अधिनियम की योजनाओं पर प्रश्न तीन साँचों में आते हैं। पहला, सीधी सूची — 'निम्नलिखित में से कौन-सी योजना इस अधिनियम के अधीन नहीं है', जैसा यहाँ है; इसमें या तो कोई समाप्त हो चुकी योजना रखी जाती है, या किसी और क़ानून की योजना, जैसे राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली या अटल पेंशन योजना। दूसरा, धारा और योजना का मेल — 'कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 किस धारा के अधीन बनाई गई है'; यहाँ 5, 6क और 6ग तीनों विकल्प में होते हैं और अंतर याद रखना पड़ता है। तीसरा, अंशदान की दरें — 12 प्रतिशत, 8·33 प्रतिशत, 1·16 प्रतिशत और 0·50 प्रतिशत — जिनमें से किसी एक को उलटकर या किसी और योजना से जोड़कर पूछ लिया जाता है। तीनों साँचों की तैयारी एक ही तालिका से हो जाती है : योजना का नाम, उसका वर्ष, उसकी धारा, उसका अंशदान और उससे मिलने वाला लाभ। इस पेपर में श्रम विधि का खंड निषेधात्मक प्रश्नों से भरा है, इसलिए तालिका बनाते समय हर पंक्ति के साथ यह भी लिख लीजिए कि उसमें क्या शामिल नहीं है।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2023_Q35Which one of the following statements under the Employees' Provident Fund and Miscellaneous Provisions Act, 1952, is not correct ?
- (a) It makes provision for pension scheme including family pension.
- (b) It makes provision for Employees' Deposit Linked Insurance Scheme.
- (c) The provisions of the Act shall not be applicable to Cooperative Societies employing fifty or more persons working without the aid of power.
- (d) The contribution by the employer to the Fund shall be on the basis of the basic wage, dearness allowance and retaining allowance (if any) of the employee.
उत्तर(c) The provisions of the Act shall not be applicable to Cooperative Societies employing fifty or more persons working without the aid of power.
इसी अधिनियम पर चार कथन देकर ग़लत कथन पूछा गया है; उसके विकल्पों में परिवार पेंशन सहित पेंशन योजना और निक्षेप-सहबद्ध बीमा योजना दोनों का उल्लेख है, इसलिए वह प्रश्न यहाँ की तीन-योजना वाली सूची को दूसरी दिशा से जाँचता है।
EPFO_EOAO_2023_Q33Which one of the following authorities constituted by the Central Government shall be the Appellate Authority under the Employees’ Provident Fund and Miscellaneous Provisions Act, 1952 ?
- (a) Employees Provident Funds Appellate Tribunal
- (b) National Tribunal
- (c) Labour Appellate Tribunal
- (d) Industrial Tribunal
उत्तर(d) Industrial Tribunal
इसी अधिनियम के अधीन अपील प्राधिकारी कौन है, यह पूछता है — योजनाओं के बाद अधिनियम के तंत्र वाला भाग, जो इसी अध्याय की अगली परत है।
EPFO_APFC_2016_Q92Which of the following are the instruments of providing social security in India ? 1. Income Tax 2. Employees' Provident Fund 3. General Sales Tax 4. LIC 5. National Pension Scheme 6. Postal Provident Fund Select the correct answer using the codes given below :
- (a) 1, 2, 3 and 4
- (b) 2, 3, 4 and 5
- (c) 2, 4, 5 and 6
- (d) 3, 4, 5 and 6
उत्तर(c) 2, 4, 5 and 6
भारत में सामाजिक सुरक्षा देने के साधनों की सूची में कर्मचारी भविष्य निधि को रखकर पूछा गया प्रश्न, जो इस अधिनियम को बड़े ढाँचे में जगह देता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 की किस धारा के अधीन कर्मचारी निक्षेप-सहबद्ध बीमा योजना, 1976 बनाई गई है ?
- (a)धारा 5
- (b)धारा 6क
- (c)धारा 6ग
- (d)धारा 7क
उत्तर(c) धारा 6ग
- practice — not a real PYQ
कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 के प्रवृत्त होते ही निम्नलिखित में से किस योजना का प्रवर्तन समाप्त हो गया ?
- (a)कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952
- (b)कर्मचारी परिवार पेंशन योजना, 1971
- (c)कर्मचारी निक्षेप-सहबद्ध बीमा योजना, 1976
- (d)राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली
उत्तर(b) कर्मचारी परिवार पेंशन योजना, 1971