एक परीक्षा में 16 विद्यार्थियों के अंक इस प्रकार हैं : 19, 4, 17, 7, 15, 2, 18, 11, 15, 17, 19, 4, 3, 2, 6, 9. इनके समांतर माध्य और माध्यिका में क्या अंतर है ?
- (a)1·0
- (b)0·8
- (c)0·5
- (d)0·2
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) 0·5 — समांतर माध्य और माध्यिका का अंतर आधा है।
पहले माध्य निकालिए। सोलह अंकों को जोड़ना आसान हो जाए, इसके लिए दोहराए गए मानों को जोड़ी बनाकर लीजिए : 19 दो बार, 17 दो बार, 15 दो बार, 4 दो बार और 2 दो बार — इनका योग 38 + 34 + 30 + 8 + 4 = 114। बचे हुए छह अलग-अलग मान हैं 7, 18, 11, 3, 6 और 9, जिनका योग 54। कुल योग 114 + 54 = 168।
इसलिए माध्य = 168 ⁄ 16 = 10·5।
कल्पित माध्य की रीति से यह और तेज़ हो जाता है, और बड़े आँकड़ों में वही रीति काम आती है। 10 को कल्पित माध्य मानकर हर मान में से 10 घटाइए और केवल विचलन जोड़िए : +9, –6, +7, –3, +5, –8, +8, +1, +5, +7, +9, –6, –7, –8, –4, –1। इनका योग 8 है, इसलिए माध्य = 10 + 8 ⁄ 16 = 10·5। यहाँ सोलह दो-अंकीय संख्याओं के बजाय सोलह छोटे विचलन जोड़ने पड़े, और यही इस रीति का लाभ है।
अब माध्यिका, और यहीं वह चरण है जो उत्तर तय करता है : विद्यार्थियों की संख्या सोलह है, यानी सम। सम संख्या में बीच का कोई एक पद होता ही नहीं, इसलिए माध्यिका आठवें और नवें पद का औसत होती है — और वह सूची में छपे किसी मान के बराबर होना आवश्यक नहीं।
अंकों को आरोही क्रम में रखिए : 2, 2, 3, 4, 4, 6, 7, 9, 11, 15, 15, 17, 17, 18, 19, 19।
आठवाँ पद 9 है और नवाँ 11, इसलिए माध्यिका = (9 + 11) ⁄ 2 = 10।
अंतर = 10·5 – 10 = 0·5।
दोनों मापों का अंतर स्वयं में एक सूचना है, और उसे पढ़ना सीख लेना चाहिए। माध्य हर मान के परिमाण से खिंचता है, इसलिए सिरों पर पड़े बड़े मान उसे अपनी ओर सरका देते हैं; माध्यिका केवल क्रम देखती है और परिमाण की अनदेखी करती है, इसलिए वह सिरों से नहीं हिलती। यहाँ माध्य माध्यिका से ऊपर है, जिसका अर्थ है कि ऊपर के सिरे पर मान अधिक दूर तक फैले हैं — सूची में 15 से 19 तक छह मान हैं, जो बीच से काफ़ी ऊपर हैं। यही कारण है कि आय जैसे आँकड़ों में माध्य प्रायः माध्यिका से बहुत ऊपर रहता है, और वहाँ माध्यिका अधिक भरोसेमंद मानी जाती है।
एक अतिरिक्त जाँच भी इस प्रश्न में सुलभ है, और वह दो विकल्प बिना गणना के काट देती है। सोलह पूर्णांकों का योग पूर्णांक होगा, इसलिए माध्य सोलहवें भाग का गुणज होगा; और माध्यिका दो पूर्णांकों का औसत होने के कारण आधे का गुणज होगी। इसलिए दोनों का अंतर सदा 0·0625 का गुणज होगा। 0·8 और 0·2 इस कसौटी पर खरे नहीं उतरते, इसलिए वे किसी भी पूर्णांक आँकड़ा-सूची से बन ही नहीं सकते।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)1·0 — एक पूरी इकाई का अंतर तब आता है जब जोड़ने में कोई चूक हो जाए। उदाहरण के लिए यदि कुल योग 168 के स्थान पर 176 लिख लिया जाए तो माध्य 11 आएगा और माध्यिका 10 के साथ अंतर ठीक 1·0 बनेगा। इसीलिए ऐसे प्रश्नों में योग को दो बार, दो अलग-अलग ढंग से निकालना चाहिए — एक बार सीधे और एक बार दोहराए गए मानों की जोड़ियाँ बनाकर। यहाँ जोड़ियों वाला रास्ता 114 देता है और शेष छह मान 54, जिनका योग 168 है। यह विकल्प उस कसौटी पर तो खरा उतरता है कि अंतर सोलहवें भाग का गुणज हो, इसलिए इसे केवल संरचना देखकर नहीं हटाया जा सकता; उसे गणना से ही काटना पड़ता है।
- (b)0·8 — यह मान इस प्रश्न में संभव ही नहीं है, और इसे बिना पूरी गणना के दिखाया जा सकता है। सोलह पूर्णांक अंकों का योग पूर्णांक होगा, इसलिए माध्य किसी पूर्णांक को सोलह से भाग देने पर मिलेगा, यानी वह 0·0625 का गुणज होगा। माध्यिका दो पूर्णांकों का औसत है, इसलिए वह 0·5 का गुणज होगी, और 0·5 स्वयं 0·0625 का गुणज है। इसलिए दोनों का अंतर भी 0·0625 का गुणज ही हो सकता है। 0·8 को 0·0625 से भाग देने पर 12·8 आता है, जो पूर्णांक नहीं — इसलिए यह अंतर किसी भी पूर्णांक अंक-सूची से बन ही नहीं सकता।
- (d)0·2 — यह भी उसी कारण से असंभव है जिस कारण 0·8 असंभव है। अंतर को 0·0625 से भाग देकर देखिए : 0·2 को उससे भाग देने पर 3·2 आता है, जो पूर्णांक नहीं है। चूँकि सोलह पूर्णांकों का माध्य सोलहवें भाग का गुणज होता है और दो पूर्णांकों का औसत आधे का गुणज, इसलिए उनका अंतर भी सोलहवें भाग का गुणज ही रहेगा — और 0·2 उस परिवार में आता ही नहीं। इसके अतिरिक्त सीधी गणना भी यही कहती है : माध्य 10·5 है और माध्यिका 10, इसलिए अंतर 0·5 है। यह विकल्प संभवतः इसलिए रखा गया है कि सबसे छोटा मान सुरक्षित लगता है।
अवधारणा
केंद्रीय प्रवृत्ति के दो सबसे प्रचलित माप यहाँ आमने-सामने हैं, और उनका अंतर समझ लेना पूरे अध्याय की कुंजी है।
समांतर माध्य सभी मानों का योग उनकी संख्या से भाग देकर मिलता है। वह हर मान को गिनता है, इसलिए कोई एक बहुत बड़ा या बहुत छोटा मान उसे अपनी ओर खींच लेता है।
माध्यिका क्रम में बीच का मान है। उसे निकालने से पहले आँकड़ों को क्रम में रखना अनिवार्य है — यही सबसे अधिक छूटने वाला चरण है। इसके बाद यदि पदों की संख्या विषम हो तो ठीक बीच का पद माध्यिका है; और यदि सम हो तो बीच के दो पदों का औसत। दूसरी स्थिति में माध्यिका सूची में छपे किसी मान के बराबर हो, यह आवश्यक नहीं — यहाँ माध्यिका 10 है, जबकि सूची में 10 कहीं नहीं है।
दोनों के बीच का अंतर आँकड़ों की बनावट बताता है। जहाँ बड़े मानों की ओर पूँछ लंबी हो वहाँ माध्य माध्यिका से बड़ा होता है, और जहाँ छोटे मानों की ओर पूँछ लंबी हो वहाँ छोटा। यहाँ माध्य माध्यिका से थोड़ा-सा बड़ा है, इसलिए वितरण हल्का-सा ऊपर की ओर झुका हुआ है।
सांख्यिकी के प्रश्न इस पेपर के संख्यात्मक खंड में नियमित रूप से आते हैं, और उनका सबसे आम रूप यही है : एक छोटी आँकड़ा-सूची देकर माध्य, माध्यिका या बहुलक पूछना, या दो मापों का अंतर पूछना।
इस प्रश्न को कठिन बनाने वाली चीज़ गणित नहीं, ध्यान है। सोलह मान एक ही पंक्ति में, अल्पविराम से अलग करके छपे हैं और दो पंक्तियों में फैले हैं, इसलिए कोई मान छूट जाने या दो बार गिन लिए जाने की पूरी संभावना रहती है। सूची में पाँच मान दो-दो बार आते हैं, जो इस जोखिम को और बढ़ा देता है।
इसीलिए सबसे पहले गिनकर पक्का कर लेना चाहिए कि सचमुच सोलह मान हैं, और फिर उन्हें क्रम में लिख लेना चाहिए। क्रम में लिखने से माध्यिका तो मिलती ही है, दोहराए गए मान भी एक साथ आ जाते हैं, जिससे योग निकालना आसान हो जाता है।
चारों विकल्प उठे हुए मध्य बिंदु वाले दशमलव में छपे हैं, जो इस पुस्तिका की शैली है, और पहले विकल्प में अंत का शून्य भी छपा है — 1·0, न कि केवल 1।
मुख्य तथ्य
- सोलह अंकों का कुल योग 168 है, इसलिए समांतर माध्य 168 ⁄ 16 = 10·5 होता है।
- माध्यिका निकालने से पहले आँकड़ों को क्रम में रखना अनिवार्य है; क्रम में रखने पर आठवाँ पद 9 और नवाँ पद 11 है।
- पदों की संख्या सम होने पर माध्यिका बीच के दो पदों का औसत होती है, इसलिए यहाँ वह (9 + 11) ⁄ 2 = 10 है।
- माध्यिका का सूची में छपे किसी मान के बराबर होना आवश्यक नहीं — यहाँ माध्यिका 10 है, जबकि सूची में 10 कहीं नहीं आता।
- सोलह पूर्णांकों का माध्य सोलहवें भाग का गुणज होता है और दो पूर्णांकों का औसत आधे का, इसलिए दोनों का अंतर सदा 0·0625 का गुणज ही हो सकता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- आँकड़ों को क्रम में रखे बिना ही बीच के पद उठा लेना; बिना क्रम के माध्यिका निकाली ही नहीं जा सकती, और छपी हुई सूची क्रम में नहीं है।
- सम संख्या में पदों के लिए किसी एक मान को माध्यिका मान लेना, जबकि वहाँ दो बीच के पदों का औसत लेना पड़ता है — और वह औसत सूची में छपे किसी मान के बराबर होना आवश्यक नहीं।
- दोहराए गए मानों को एक बार ही गिन लेना; सूची में 19, 17, 15, 4 और 2 दो-दो बार आते हैं और सबको गिनना है, वरना पद-संख्या ही सोलह नहीं रहती।
- यह मान लेना कि माध्य और माध्यिका बराबर होने चाहिए; वे तभी बराबर होते हैं जब वितरण सममित हो, और यहाँ ऊपरी सिरे पर मान अधिक फैले हैं, इसलिए माध्य माध्यिका से ऊपर है।
सांख्यिकी के प्रश्न इस परीक्षा में तीन शक्लों में आते हैं। पहली में कच्ची आँकड़ा-सूची देकर कोई एक माप पूछा जाता है। दूसरी में दो मापों का अंतर या अनुपात पूछा जाता है, जैसा यहाँ है। तीसरी में कोई मान बदलकर पूछा जाता है कि माध्य या माध्यिका पर क्या असर पड़ेगा।
तीनों में एक ही क्रम अपनाइए : पहले मानों की गिनती जाँचिए, फिर उन्हें आरोही क्रम में लिखिए, फिर योग निकालिए। क्रम में लिखने का काम पहले कर लेने से आगे सब आसान हो जाता है।
योग निकालते समय दोहराए गए मानों की जोड़ियाँ बना लेना और अलग-अलग मानों को अलग जोड़ लेना दो लाभ देता है : गणना छोटी हो जाती है, और एक ही योग को दो ढंग से जाँचा जा सकता है।
अंत में उत्तर की संरचना पर एक दृष्टि डालना भी उपयोगी है। पूर्णांक आँकड़ों के साथ माध्य और माध्यिका के अंतर कुछ ही विशेष रूपों में आ सकते हैं, इसलिए कुछ विकल्प केवल इसी आधार पर हटाए जा सकते हैं, बिना पूरी गणना किए।
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- (b) 26·2 and 3·32
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उत्तर(a) 27·8 and 3·21
दो समूहों के माध्य और मानक विचलन को मिलाकर संयुक्त मान निकालने वाला प्रश्न — केंद्रीय प्रवृत्ति की उसी गणना का बड़ा रूप।
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- (a) 56·5
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अभ्यास
- practice — not a real PYQ
किसी परीक्षा में 6 विद्यार्थियों के अंक इस प्रकार हैं : 3, 6, 8, 9, 15, 19. इनके समांतर माध्य और माध्यिका में क्या अंतर है ?
- (a)0·5
- (b)1·0
- (c)1·5
- (d)2·0
उत्तर(c) 1·5 — छहों अंकों का योग 60 है, इसलिए माध्य 60 ⁄ 6 = 10 हुआ; अंक पहले से ही आरोही क्रम में हैं और पदों की संख्या सम है, इसलिए माध्यिका तीसरे और चौथे पद का औसत, यानी (8 + 9) ⁄ 2 = 8·5 है; अंतर 10 – 8·5 = 1·5।