निम्नलिखित वर्ण-संख्यात्मक श्रृंखला में लुप्त पद ज्ञात कीजिए : C – 24, H – 19, M – 14, ?, W – 4
- (a)S – 7
- (b)R – 9
- (c)S – 18
- (d)R – 17
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) R – 9 — लुप्त पद यही है।
ऐसी शृंखला में हर पद के दो हिस्से होते हैं, और उन्हें अलग-अलग परखना पड़ता है : एक ओर अक्षरों की शृंखला और दूसरी ओर अंकों की।
पहले अक्षरों को उनके वर्णमाला-क्रमांक में बदलिए। C तीसरा अक्षर है, H आठवाँ, M तेरहवाँ और W तेईसवाँ। इस तरह क्रमांक बनते हैं 3, 8, 13, ?, 23 — और यहाँ हर बार पाँच जुड़ रहे हैं। इसलिए लुप्त क्रमांक 13 + 5 = 18 है, यानी अठारहवाँ अक्षर R।
अब अंकों को देखिए : 24, 19, 14, ?, 4। यहाँ हर बार पाँच घट रहे हैं, इसलिए लुप्त अंक 14 – 5 = 9 है।
इसलिए लुप्त पद R – 9 हुआ।
अब इस शृंखला की छिपी हुई रचना देखिए, क्योंकि वह उत्तर को एक ही झटके में सिद्ध कर देती है। दोनों हिस्से पाँच की ही दर से चलते हैं, पर विपरीत दिशाओं में — अक्षर आगे बढ़ता है और अंक उतना ही पीछे हटता है। इसका अर्थ है कि हर पद में अक्षर का क्रमांक और उसके साथ लिखा अंक जोड़ने पर वही योग बार-बार आएगा। जाँचिए : C – 24 में 3 + 24 = 27; H – 19 में 8 + 19 = 27; M – 14 में 13 + 14 = 27; और W – 4 में 23 + 4 = 27। चारों दिए हुए पदों का योग सत्ताईस है, इसलिए लुप्त पद का भी सत्ताईस ही होना चाहिए।
यह कसौटी चारों विकल्पों पर सीधे लगाई जा सकती है, और उसमें शृंखला का क्रम जानने तक की आवश्यकता नहीं। (a) S – 7 में S का क्रमांक 19 है, इसलिए योग 26। (b) R – 9 में 18 + 9 = 27। (c) S – 18 में 19 + 18 = 37। (d) R – 17 में 18 + 17 = 35। केवल एक विकल्प सत्ताईस देता है, और वही उत्तर है। ऐसे प्रश्नों में यह आदत बहुत काम आती है : जब दो शृंखलाएँ बराबर दर से उलटी दिशाओं में चलें, तो उनका योग स्थिर रहता है, और वही स्थिरांक सबसे सस्ती जाँच बन जाता है।
पीछे की ओर से भी पुष्टि कर लीजिए। अंतिम पद W – 4 है, और लुप्त पद ठीक उससे एक क़दम पहले है। अक्षर की ओर से — W का क्रमांक 23 है, इसलिए एक क़दम पीछे 23 – 5 = 18, यानी R। अंक की ओर से — 4 में पाँच जोड़ने पर 9। दोनों ओर से वही पद निकलता है।
एक व्यावहारिक सहारा भी याद रखिए। वर्णमाला के क्रमांक याद रखने के लिए पाँच लंगर पर्याप्त हैं — E पाँचवाँ, J दसवाँ, O पंद्रहवाँ, T बीसवाँ और Y पचीसवाँ। इन्हीं से R को O से तीन आगे, यानी अठारहवाँ, तुरंत निकाला जा सकता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)S – 7 — यहाँ दोनों हिस्से चूकते हैं। अक्षर S उन्नीसवाँ है, जबकि क्रमांकों की शृंखला 3, 8, 13 के बाद 18 माँगती है — S एक अक्षर आगे है। इसे अंतिम पद से भी जाँचा जा सकता है : S से W तक केवल चार क़दम हैं, जबकि इस शृंखला में हर क़दम पाँच का है। अंक 7 भी नहीं टिकता, क्योंकि अंकों की शृंखला में हर बार पाँच घटते हैं और 14 के बाद 9 आना चाहिए; और 7 में से पाँच घटाने पर 2 आता, 4 नहीं, इसलिए अंतिम पद से भी मेल नहीं बैठता। दोनों ओर एक-एक की चूक होने के कारण यह विकल्प पहली ही जाँच में हट जाता है।
- (c)S – 18 — यह सबसे चतुर जाल है, क्योंकि इसमें छपा हुआ अंक 18 सही उत्तर से जुड़ा हुआ है — पर ग़लत जगह पर। अठारह वास्तव में सही अक्षर R का वर्णमाला-क्रमांक है, न कि अंकों वाली शृंखला का अगला पद। यानी इस विकल्प में दोनों प्रणालियाँ आपस में मिला दी गई हैं : अक्षर के क्रमांक को अंक के स्थान पर रख दिया गया है। अंकों की शृंखला अपनी अलग चाल से चल रही है — 24, 19, 14 — और उसका अगला पद 9 है, वर्णमाला-क्रमांक से उसका कोई संबंध नहीं। ऊपर से अक्षर भी S रखा गया है, जो उन्नीसवाँ है, अठारहवाँ नहीं — इसलिए विकल्प के भीतर ही असंगति है।
- (d)R – 17 — इस विकल्प में अक्षर ठीक है — R अठारहवाँ अक्षर है और वही अपेक्षित भी है — पर अंक चूक जाता है, और वही पूरा विकल्प काट देता है। अंकों की शृंखला में हर क़दम पर पाँच घटते हैं, इसलिए 14 के बाद 9 आना चाहिए, 17 नहीं। सबसे साफ़ जाँच फिर अंतिम पद से है : यदि लुप्त पद का अंक 17 होता, तो उससे अगला अंक 17 – 5 = 12 होता, जबकि छपा हुआ अंतिम पद 4 है। यह विकल्प इसलिए ख़तरनाक है कि आधा सही होने पर मन जल्दी संतुष्ट हो जाता है; ऐसी शृंखलाओं में दोनों हिस्सों की अलग-अलग पुष्टि किए बिना उत्तर नहीं चुनना चाहिए।
अवधारणा
वर्ण-संख्यात्मक शृंखलाएँ दो स्वतंत्र शृंखलाओं को एक साथ जोड़कर बनाई जाती हैं, और उनका हल भी इसी विभाजन से निकलता है : पहले अक्षरों की चाल पकड़िए, फिर अंकों की, और दोनों को अलग-अलग सिद्ध कीजिए।
अक्षरों की चाल पकड़ने के लिए उन्हें क्रमांक में बदलना पड़ता है, क्योंकि अक्षरों पर जोड़-घटाव सीधे नहीं होता। इसी के लिए वर्णमाला के क्रमांक याद रखने की युक्तियाँ बनी हैं, जिनमें सबसे प्रचलित पाँच लंगरों वाली है — E पाँचवाँ, J दसवाँ, O पंद्रहवाँ, T बीसवाँ, Y पचीसवाँ। किसी भी अक्षर का क्रमांक निकटतम लंगर से जोड़कर या घटाकर तुरंत निकल आता है।
अंकों की चाल में आम रूप ये हैं : स्थिर अंतर, स्थिर अनुपात, वर्ग या घन, और अंतरों की अपनी शृंखला। इस प्रश्न में सबसे सरल रूप है — स्थिर अंतर, वह भी घटता हुआ।
एक बात इन शृंखलाओं में विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है : दोनों हिस्सों की चाल एक ही दिशा में हो, यह आवश्यक नहीं। यहाँ अक्षर आगे बढ़ रहे हैं और अंक पीछे हट रहे हैं, दोनों पाँच-पाँच के क़दम से। यह विपरीत दिशा ही प्रश्न की मुख्य कठिनाई है।
तार्किक विवेचन के खंड में शृंखला वाले प्रश्न सबसे नियमित हैं, और वर्ण-संख्यात्मक शृंखला उनकी एक स्थिर उपश्रेणी है। उसकी विशेषता यह है कि वह दो कौशल एक साथ माँगती है — वर्णमाला का क्रम और अंकगणितीय चाल।
इस प्रश्न में लुप्त पद बीच में रखा गया है, अंत में नहीं, और यह अपने-आप में एक सुविधा है : उसके दोनों ओर ज्ञात पद हैं, इसलिए उत्तर की दो स्वतंत्र जाँचें संभव हो जाती हैं — एक आगे से और एक पीछे से। जहाँ लुप्त पद अंत में हो, वहाँ केवल एक दिशा से जाँच मिलती है।
विकल्पों की बनावट भी सोची हुई है। दो विकल्प S अक्षर वाले हैं और दो R अक्षर वाले, इसलिए अकेले अक्षर से निर्णय नहीं होता; और दो में अंक छोटे हैं तथा दो में बड़े। इसका अर्थ यह है कि दोनों हिस्सों की जाँच अनिवार्य है — किसी एक हिस्से पर ठहरकर उत्तर चुनने से पचास प्रतिशत संभावना ही बनती है।
शृंखला स्तंभ के नीचे अपनी अलग पंक्ति में, रोमन अक्षरों और पश्चिमी अंकों में छपी है, और हर पद के भीतर अक्षर तथा अंक को एक डैश जोड़ता है — वह घटाव का चिह्न नहीं, जोड़ने वाला चिह्न है।
मुख्य तथ्य
- अक्षरों को उनके वर्णमाला-क्रमांक में बदलने पर शृंखला 3, 8, 13, ?, 23 बनती है, जिसमें हर बार पाँच जुड़ते हैं, इसलिए लुप्त क्रमांक 18 यानी अक्षर R है।
- अंकों की शृंखला 24, 19, 14, ?, 4 है, जिसमें हर बार पाँच घटते हैं, इसलिए लुप्त अंक 9 है।
- इस शृंखला की छिपी रचना यह है कि हर पद में अक्षर का क्रमांक और उसका अंक जोड़ने पर सत्ताईस आता है — 3+24, 8+19, 13+14, 23+4 — इसलिए लुप्त पद का योग भी सत्ताईस होना चाहिए।
- यही स्थिरांक सबसे सस्ती जाँच है और चारों विकल्पों पर सीधे लगता है : S–7 का योग 26, R–9 का 27, S–18 का 37 और R–17 का 35; केवल एक विकल्प खरा उतरता है।
- जब दो शृंखलाएँ बराबर दर से उलटी दिशाओं में चलें तो उनका योग सदा स्थिर रहता है — यही सामान्य नियम इस प्रश्न को एक चरण में हल कर देता है।
- वर्णमाला के क्रमांक निकालने के लिए पाँच लंगर पर्याप्त हैं — E पाँचवाँ, J दसवाँ, O पंद्रहवाँ, T बीसवाँ और Y पचीसवाँ; R इनमें O से तीन आगे है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- केवल एक हिस्सा जाँचकर उत्तर चुन लेना; यहाँ दो विकल्पों में अक्षर R सही है और दो में अंक निकट है, इसलिए दोनों हिस्से मिलाकर ही निर्णय होता है।
- अक्षर के वर्णमाला-क्रमांक को अंक वाली शृंखला का पद समझ लेना; दोनों प्रणालियाँ स्वतंत्र हैं और विपरीत दिशाओं में चलती हैं।
- पद के भीतर लगे डैश को घटाव का चिह्न पढ़ लेना; वह अक्षर और अंक को एक पद में जोड़ने वाला चिह्न है, ऋण का नहीं।
- योग की छिपी हुई कसौटी न देखना; हर पद में अक्षर का क्रमांक और उसका अंक जोड़ने पर सत्ताईस आता है, और यह अकेली जाँच चारों विकल्पों को बिना शृंखला हल किए परख लेती है।
शृंखला वाले प्रश्न तीन शक्लों में आते हैं। पहली में लुप्त पद अंत में होता है, दूसरी में बीच में — जैसा यहाँ है — और तीसरी में यह पूछा जाता है कि कौन-सा पद शृंखला में फ़िट नहीं बैठता।
तीनों के लिए एक ही विधि काम करती है : पहले पदों को उनके सबसे सरल संख्यात्मक रूप में लिखिए, फिर लगातार पदों के अंतर या अनुपात निकालिए, और जो चाल दिखे उसे कम से कम दो जगह सिद्ध कीजिए। एक ही जगह मिलान होने पर चाल पक्की नहीं मानी जाती।
वर्ण-संख्यात्मक शृंखलाओं में एक अतिरिक्त सावधानी है : दोनों हिस्सों को अलग-अलग हल कीजिए और अंत में विकल्प से मिलाते समय दोनों की पुष्टि कीजिए। परीक्षक प्रायः एक हिस्सा सही रखकर दूसरा बदल देता है, ठीक जैसा यहाँ हुआ है।
जहाँ लुप्त पद बीच में हो, वहाँ पीछे से जाँचना सबसे तेज़ पड़ता है, क्योंकि अंतिम ज्ञात पद से एक ही क़दम में उत्तर मिल जाता है और बीच के किसी अनुमान की आवश्यकता नहीं रहती।
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EPFO_EOAO_2020_Q84The English alphabet is reordered in the following manner : The first 6 letters are written in opposite order, the next 6 letters are written in opposite order and so on. At the end, ‘Y’ is interchanged with ‘Z’. Which one of the following is the fourth letter to the right of the 13^th letter ?
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उत्तर(a) N
वर्णमाला को एक निश्चित नियम से पुनः क्रमबद्ध करके किसी स्थान का अक्षर पूछने वाला प्रश्न — अक्षर और क्रमांक के मेल का वही अभ्यास।
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- (a) 6 and 30
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उत्तर(c) 8 and 34
एक निश्चित नियम से बनने वाली संख्या-शृंखला पर आधारित प्रश्न, जिसमें चाल पहचानकर आगे के पद निकालने होते हैं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित वर्ण-संख्यात्मक शृंखला में लुप्त पद ज्ञात कीजिए : B – 20, F – 17, J – 14, ?, R – 8
- (a)N – 11
- (b)N – 12
- (c)M – 11
- (d)P – 11
उत्तर(a) N – 11 — अक्षरों के क्रमांक 2, 6, 10, ?, 18 हैं, जिनमें हर बार चार जुड़ते हैं, इसलिए लुप्त क्रमांक 14 यानी N है; अंकों में हर बार तीन घटते हैं, इसलिए 14 के बाद 11 आता है, और अंतिम पद 8 से भी यही पुष्टि होती है।