निम्नलिखित अभिकथन और कारण पर विचार कीजिए : अभिकथन : एक वस्तु की अंकित कीमत पर 15% छूट, उसी वस्तु की अंकित कीमत पर 10% छूट और उसके पश्चात 5% क्रमिक (निरंतर) छूट, से अधिक है । कारण : क्रमिक (निरंतर) छूट, छूट मिली हुई राशि पर लगती है । उपर्युक्त अभिकथन और कारण के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है ?
- (a)अभिकथन और कारण दोनों अलग-अलग सही हैं तथा कारण, अभिकथन की एक सही व्याख्या है ।
- (b)अभिकथन और कारण दोनों अलग-अलग सही हैं, परंतु कारण, अभिकथन की एक सही व्याख्या नहीं है ।
- (c)अभिकथन सही है, परंतु कारण ग़लत है ।
- (d)अभिकथन ग़लत है, परंतु कारण सही है ।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) अभिकथन और कारण दोनों अलग-अलग सही हैं तथा कारण, अभिकथन की एक सही व्याख्या है ।
अभिकथन-कारण के प्रश्न में तीन बातें अलग-अलग और इसी क्रम में जाँचनी चाहिए : पहले अभिकथन सही है या नहीं, फिर कारण सही है या नहीं, और तभी अंत में यह कि कारण अभिकथन को समझाता है या नहीं। क्रम बदलने से भूल होती है, क्योंकि एक सच्चा कारण पढ़कर मन अभिकथन को भी सच मान बैठता है।
पहले अभिकथन को जाँचिए। अंकित कीमत 100 मान लीजिए। एक ही बार में 15 प्रतिशत छूट देने पर देय राशि 85 रह जाती है। अब दूसरा रास्ता देखिए : पहले 10 प्रतिशत छूट लगने पर राशि 90 हुई, और उसके बाद 5 प्रतिशत छूट उसी 90 पर लगती है, जो 4·5 होती है, इसलिए देय राशि 85·5 रह जाती है। गुणा के रूप में यही 0·90 × 0·95 = 0·855 है, जबकि एकमुश्त छूट 0·85 देती है।
85 और 85·5 की तुलना कीजिए। एकमुश्त 15 प्रतिशत की छूट में ग्राहक 15 बचाता है और क्रमिक छूट में केवल 14·5। इसलिए अभिकथन सही है : 15 प्रतिशत की छूट सचमुच अधिक है।
अब कारण को जाँचिए। कारण कहता है कि क्रमिक छूट, छूट मिली हुई राशि पर लगती है। यह क्रमिक छूट की परिभाषा ही है और अपने-आप में सही कथन है।
अंत में वह चरण, जो उत्तर तय करता है, और यहीं इस प्रश्न की पूरी सुंदरता है। अंतर ठीक 0·5 का है — और वह 0·5 कहाँ से आया, यह देखिए। दूसरी छूट 5 प्रतिशत की थी, पर वह पूरे 100 पर नहीं लगी; वह उन 90 पर लगी जो पहली छूट के बाद बचे थे। यानी जिन 10 रुपयों की छूट पहले ही दी जा चुकी थी, उन पर दूसरी छूट लगी ही नहीं। उन्हीं 10 का 5 प्रतिशत, यानी ठीक 0·5, वह राशि है जो ग्राहक को नहीं मिली। इसलिए अंतर कोई संयोग नहीं — वह ठीक उतना है जितना कारण के वाक्य से निकलना चाहिए। कारण केवल एक सच्चा वाक्य नहीं है; वह अंतर का परिमाण तक बता देता है, और इसीलिए वह अभिकथन की सही व्याख्या है।
सामान्य सूत्र भी यही कहता है : a प्रतिशत और फिर b प्रतिशत की क्रमिक छूट के बराबर एकमुश्त छूट a + b − ab⁄100 होती है, यानी सीधे जोड़ से हमेशा ab⁄100 कम — और वही ab⁄100 ऊपर वाली 'छूट पर छूट न लगने' की बात का बीजगणितीय रूप है। यहाँ वह घटाव 10 × 5 ⁄ 100 = 0·5 है।
दो बातें और, जो इस सूत्र से मुफ़्त में मिल जाती हैं। पहली, ab⁄100 सदा धनात्मक है, इसलिए क्रमिक छूट उनके योग से सदा कम पड़ती है — यह किसी विशेष अंक की बात नहीं, हर जोड़ी पर लागू नियम है। दूसरी, सूत्र में a और b सममित हैं, इसलिए छूटों का क्रम बदलने से कुछ नहीं बदलता : पहले 5 और फिर 10 प्रतिशत लगाने पर भी 0·95 × 0·90 = 0·855 ही आता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)अभिकथन और कारण दोनों अलग-अलग सही हैं, परंतु कारण, अभिकथन की एक सही व्याख्या नहीं है । — यह विकल्प दोनों कथनों को सही तो मानता है, पर उनके बीच का संबंध तोड़ देता है — और यहीं यह चूकता है। कारण केवल एक सच्चा वाक्य नहीं है, वह ठीक उसी क्रिया का वर्णन है जिससे अभिकथन का अंतर पैदा होता है। यदि दूसरी छूट भी मूल अंकित कीमत पर लगती, तो दोनों रास्तों की कुल छूट पंद्रह-पंद्रह प्रतिशत बैठती और अभिकथन झूठा हो जाता। छूट घटी हुई राशि पर लगने के कारण ही दूसरी छूट 5 के बजाय 4·5 घटाती है, और वही आधा प्रतिशत पूरा अंतर बनाता है। इसलिए कारण अभिकथन की सही व्याख्या है, और (a) तथा (b) के बीच का एकमात्र अंतर — 'नहीं' — यहाँ लागू नहीं होता।
- (c)अभिकथन सही है, परंतु कारण ग़लत है । — यह विकल्प अभिकथन को तो सही मानता है, पर कारण को ग़लत ठहरा देता है। कारण ग़लत है ही नहीं। क्रमिक छूट की परिभाषा यही है कि पहली छूट लगने के बाद जो राशि बचती है, दूसरी छूट उसी पर लगती है — इसीलिए उसे क्रमिक कहा जाता है। दुकानों की 'पहले चालीस प्रतिशत, उस पर और दस प्रतिशत' जैसी घोषणाएँ इसी रीति पर चलती हैं, और उनका कुल प्रभाव पचास प्रतिशत नहीं, छियालीस प्रतिशत होता है। इसलिए कारण एक सही और मानक कथन है, और उसे ग़लत ठहराने वाला यह विकल्प नहीं चुना जा सकता।
- (d)अभिकथन ग़लत है, परंतु कारण सही है । — यह विकल्प अभिकथन को ग़लत ठहराता है, जबकि गणना उसे सही सिद्ध करती है। अंकित कीमत 100 पर एकमुश्त 15 प्रतिशत छूट से देय राशि 85 बनती है और क्रमिक 10 तथा 5 प्रतिशत से 85·5 — इसलिए ग्राहक के लिए एकमुश्त छूट सचमुच अधिक लाभदायक है और अभिकथन सही है। भूल की जड़ प्रायः यह होती है कि क्रमिक छूटों को सीधे जोड़ लिया जाता है, जिससे 10 और 5 मिलकर 15 लगने लगते हैं और दोनों रास्ते बराबर दिखने लगते हैं। पर क्रमिक छूटें कभी सीधे नहीं जुड़तीं; उनका संयुक्त प्रभाव सदा उनके योग से कम रहता है।
अवधारणा
क्रमिक छूट का पूरा गणित एक ही बात पर टिका है : हर अगली छूट उस राशि पर लगती है जो पिछली छूट के बाद बची है, मूल अंकित कीमत पर नहीं।
इसीलिए छूटों को गुणा करके देखना सबसे सुरक्षित है। a प्रतिशत छूट का अर्थ है कि (100 − a) प्रतिशत राशि बची, और उसके बाद b प्रतिशत छूट का अर्थ है कि उसका (100 − b) प्रतिशत बचा। दोनों को गुणा करने पर बची हुई राशि निकल आती है, और उसे सौ में से घटाकर तुल्य एकमुश्त छूट मिल जाती है।
इसी से सामान्य सूत्र बनता है : तुल्य छूट = a + b − ab⁄100। इसमें अंतिम पद हमेशा धनात्मक होता है, इसलिए क्रमिक छूटों का संयुक्त प्रभाव उनके साधारण योग से सदा कम रहता है। यह परिणाम याद रखने योग्य है, क्योंकि इसी पर इस श्रेणी के अधिकांश प्रश्न बनते हैं।
ठीक यही गणित उलटी दिशा में क्रमिक वृद्धि पर भी लगता है, बस चिह्न बदल जाता है : a प्रतिशत और फिर b प्रतिशत की वृद्धि मिलकर a + b + ab⁄100 बनती है, यानी योग से अधिक। छूट में हानि होती है और वृद्धि में लाभ — दोनों का स्रोत वही है कि दूसरी बार आधार बदल चुका होता है।
अभिकथन और कारण वाले प्रश्न परीक्षा की एक अलग ही श्रेणी हैं, क्योंकि उनमें दो नहीं, तीन निर्णय करने पड़ते हैं : अभिकथन सही है या नहीं, कारण सही है या नहीं, और यदि दोनों सही हों तो क्या कारण ही अभिकथन का स्पष्टीकरण है।
तीसरा निर्णय सबसे अधिक चूकता है, क्योंकि दो सच्चे वाक्य एक साथ खड़े होकर भी असंबद्ध हो सकते हैं। इसलिए उस चरण पर यह पूछना चाहिए : यदि कारण न होता, तो क्या अभिकथन भी टूट जाता ? यहाँ उत्तर हाँ है, और इसीलिए संबंध सिद्ध हो जाता है।
इस पेपर में यह अकेला अभिकथन-कारण प्रश्न है और वह अकेला ही खड़ा है — किसी चार की शृंखला का हिस्सा नहीं। इसके दो भाग बोल्ड में 'अभिकथन :' और 'कारण :' लिखकर अलग किए गए हैं, और चारों विकल्प वही चार मानक कूट हैं जो इस श्रेणी में हमेशा आते हैं। विकल्प (a) और (b) लगभग एक जैसे हैं और उनमें केवल 'नहीं' का अंतर है, इसलिए पढ़ते समय वहीं सबसे अधिक सावधानी चाहिए।
व्यावहारिक जीवन में भी यह विषय काम आता है, क्योंकि दुकानों की दोहरी छूट वाली घोषणाएँ इसी गणित पर चलती हैं।
मुख्य तथ्य
- अंकित कीमत 100 मानने पर एकमुश्त 15 प्रतिशत छूट से देय राशि 85 और क्रमिक 10 तथा 5 प्रतिशत छूट से 85·5 बनती है, यानी 0·90 × 0·95 = 0·855।
- क्रमिक छूट में दूसरी छूट घटकर बची राशि पर लगती है, इसलिए 5 प्रतिशत का अर्थ 90 का 5 प्रतिशत, यानी 4·5 होता है, न कि 5।
- अंतर का स्रोत ठीक-ठीक यह है : जिन 10 रुपयों की छूट पहले ही दी जा चुकी थी, उन पर दूसरी छूट लगी ही नहीं, और उन्हीं 10 का 5 प्रतिशत — यानी 0·5 — वह राशि है जो ग्राहक को नहीं मिली।
- a और b प्रतिशत की क्रमिक छूटों के तुल्य एकमुश्त छूट a + b − ab⁄100 होती है; यहाँ घटाव का पद 10 × 5 ⁄ 100 = 0·5 है, और ab⁄100 सदा धनात्मक होने से संयुक्त प्रभाव साधारण योग से सदा कम रहता है।
- सूत्र में a और b सममित हैं, इसलिए छूटों का क्रम बदलने से कुछ नहीं बदलता : 0·95 × 0·90 भी 0·855 ही देता है।
- अभिकथन-कारण प्रश्न में तीन निर्णय अलग-अलग और इसी क्रम में करने होते हैं — अभिकथन की सत्यता, कारण की सत्यता, और तभी दोनों के बीच व्याख्या का संबंध।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- क्रमिक छूटों को सीधे जोड़ लेना, जिससे 10 और 5 मिलकर 15 लगने लगते हैं और अभिकथन ग़लत दिखने लगता है।
- दोनों कथनों को सही ठहराकर तीसरा चरण छोड़ देना और यह न पूछना कि कारण ही अभिकथन की व्याख्या है या नहीं।
- विकल्प (a) और (b) को जल्दी में एक जैसा पढ़ लेना; उनमें केवल 'नहीं' का अंतर है और वही पूरा उत्तर बदल देता है।
अभिकथन-कारण प्रश्नों का साँचा हर परीक्षा में लगभग एक ही रहता है, और उनके चार विकल्प भी वही रहते हैं। इसलिए तैयारी में विकल्प याद करने की आवश्यकता नहीं, केवल क्रम याद रखना है : दोनों सही और व्याख्या सही, दोनों सही पर व्याख्या नहीं, पहला सही दूसरा ग़लत, पहला ग़लत दूसरा सही।
हल की विधि भी निश्चित है। पहले अभिकथन को अकेले पढ़िए और कारण को ढककर उसकी सत्यता तय कीजिए। फिर कारण को अकेले पढ़िए। दोनों सही निकलें तभी तीसरे चरण पर जाइए, और वहाँ यह प्रश्न पूछिए कि क्या कारण के हटते ही अभिकथन भी गिर जाएगा।
अंकगणित पर आधारित ऐसे प्रश्नों में एक अतिरिक्त सुविधा है : अभिकथन को संख्याएँ रखकर जाँचा जा सकता है। सौ मान लेना सबसे सरल है, क्योंकि प्रतिशत सीधे राशि बन जाते हैं।
इस विषय के दूसरे रूप भी आते हैं — दो क्रमिक छूटों की तुल्य छूट पूछना, या यह पूछना कि दूसरी छूट कितनी होनी चाहिए ताकि कुल प्रभाव कोई निश्चित प्रतिशत बने। दोनों में वही एक सूत्र काम आता है।
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EPFO_EOAO_2017_Q92Statement I : It is a common observation that if we place a glass of ice-water on a table at room temperature, the ice-water will get warmer. Statement II : Heat is energy that flows between a system and its environment because of temperature difference between them.
- (a) Both the statements are individually true and Statement II is the correct explanation of Statement I
- (b) Both the statements are individually true but Statement II is not the correct explanation of Statement I
- (c) Statement I is true but Statement II is false
- (d) Statement I is false but Statement II is true
उत्तर(a) Both the statements are individually true and Statement II is the correct explanation of Statement I
दो लेबल किए हुए कथनों और उन्हीं चार मानक व्याख्या-कूटों वाला प्रश्न, जो इसी रचना का दूसरा उदाहरण है।
EPFO_EOAO_2017_Q108A cricket bat is purchased at 20% discount. If the selling price of the bat is ₹ 1,000, what was the original price of the bat?
- (a) ₹ 1,100
- (b) ₹ 1,200
- (c) ₹ 1,225
- (d) ₹ 1,250
उत्तर(d) ₹ 1,250
छूट देकर विक्रय मूल्य से मूल कीमत निकालने वाला प्रश्न, जो छूट को सही आधार पर लगाने का वही अभ्यास कराता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
किसी वस्तु पर पहले 20 प्रतिशत और उसके पश्चात 10 प्रतिशत की क्रमिक छूट दी जाती है । इसके तुल्य एकमुश्त छूट कितने प्रतिशत होगी ?
- (a)28
- (b)29
- (c)30
- (d)32
उत्तर(a) 28 — अंकित कीमत 100 मानने पर पहली छूट के बाद 80 बचता है और उस पर 10 प्रतिशत छूट 8 होती है, इसलिए देय राशि 72 रह जाती है और कुल छूट 28 प्रतिशत; सूत्र से भी 20 + 10 − (20 × 10)⁄100 = 28।