एक रेलगाड़ी स्टेशन A से पूर्वाह्न 9 बजे आरंभ होकर स्टेशन B पर अपराह्न 2 बजे पहुँचती है । एक अन्य रेलगाड़ी स्टेशन B से पूर्वाह्न 11 बजे आरंभ होकर स्टेशन A पर अपराह्न 3 बजे पहुँचती है । रास्ते में दोनों रेलगाड़ियाँ एक बिंदु P पर मिलती हैं । स्टेशन A से P और स्टेशन B से P की दूरी का अनुपात क्या है ?
- (a)1 : 2
- (b)2 : 1
- (c)2 : 3
- (d)3 : 2
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) 2 : 1 — स्टेशन A से मिलन-बिंदु P की दूरी, स्टेशन B से P की दूरी की दोगुनी है।
पहले दोनों की गति निकालिए। पहली रेलगाड़ी पूर्वाह्न 9 बजे चलकर अपराह्न 2 बजे पहुँचती है, यानी पूरी दूरी पाँच घंटे में। दूसरी पूर्वाह्न 11 बजे चलकर अपराह्न 3 बजे पहुँचती है, यानी वही दूरी चार घंटे में। कुल दूरी D मानिए, तो पहली की गति D⁄5 और दूसरी की D⁄4 हुई।
यहाँ प्रश्न की असली रस्साकशी देख लीजिए, क्योंकि वही उत्तर की दिशा तय करती है। दूसरी रेलगाड़ी तेज़ है — वही दूरी वह चार घंटे में तय करती है, पहली पाँच में — इसलिए पहली प्रवृत्ति यह सोचने की होती है कि उसने अधिक दूरी तय की होगी और B से P की दूरी बड़ी निकलेगी। पर पहली रेलगाड़ी को दो घंटे की बढ़त मिली है, और दो घंटे में वह D⁄5 की चाल से 2D⁄5 चल चुकी है, यानी पूरे रास्ते का चालीस प्रतिशत, तब कहीं दूसरी चलना आरंभ करती है। बढ़त इस प्रश्न में गति पर भारी पड़ती है, और उत्तर उलटी दिशा में जाता है।
अब वह चरण, जो उत्तर तय करता है : यदि मिलन पहली के चलने के t घंटे बाद हो, तो उस क्षण तक पहली t घंटे चली है, पर दूसरी केवल (t − 2) घंटे। दोनों की तय की हुई दूरियाँ मिलकर पूरी दूरी बनाती हैं : t ⁄ 5 + (t − 2) ⁄ 4 = 1।
बीस से गुणा कीजिए : 4t + 5t − 10 = 20, यानी 9t = 30 और t = 10⁄3 घंटे, यानी तीन घंटे बीस मिनट। मिलन का समय अपराह्न 12 बजकर 20 मिनट हुआ।
अब दूरियाँ : A से P = (10⁄3) × (D⁄5) = 2D⁄3, इसलिए B से P = D − 2D⁄3 = D⁄3। अनुपात 2 : 1।
दूसरा रास्ता भी देख लीजिए, जो कई बार तेज़ पड़ता है। पूर्वाह्न 11 बजे तक पहली रेलगाड़ी 2D⁄5 चल चुकी होती है, इसलिए बीच में 3D⁄5 बचता है। उस क्षण से दोनों एक-दूसरे की ओर आ रही हैं, इसलिए घटती दूरी की दर D⁄5 + D⁄4 = 9D⁄20 है। शेष दूरी इसी दर से 4⁄3 घंटे में सिमटती है, और उतने समय में पहली 4D⁄15 और चल लेती है — कुल 2D⁄3, वही उत्तर।
अंत में एक जाँच, जो दो पंक्तियों में हो जाती है और ऐसे हर प्रश्न में लगाई जानी चाहिए : दूसरी रेलगाड़ी मिलन तक 4⁄3 घंटे चली, और D⁄4 की चाल से उसने D⁄3 तय किया। यही B से P की दूरी है, और दोनों दूरियाँ जोड़ने पर 2D⁄3 + D⁄3 = D — पूरी दूरी, जैसा होना चाहिए।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)1 : 2 — यह वही अनुपात है, पर उलटा — इसमें B से P की दूरी पहले और A से P की दूरी बाद में रख दी गई है। स्तंभ स्पष्ट रूप से पहले 'स्टेशन A से P' और फिर 'स्टेशन B से P' कहता है, इसलिए क्रम बदला नहीं जा सकता। इसे सीधे जाँचा भी जा सकता है। यदि A से P की दूरी कुल दूरी की एक तिहाई होती, तो पहली रेलगाड़ी उसे पाँच घंटे के एक तिहाई में, यानी एक घंटे चालीस मिनट में तय कर लेती और मिलन पूर्वाह्न 10 बजकर 40 मिनट पर हो जाता — पर उस समय तक दूसरी रेलगाड़ी स्टेशन B से चली ही नहीं थी। इसलिए यह अनुपात दी हुई समय-सारणी से मेल ही नहीं खाता।
- (c)2 : 3 — यह अनुपात मानने पर A से P की दूरी कुल दूरी का दो-पाँचवाँ भाग होगी। पहली रेलगाड़ी की गति से वह दूरी ठीक दो घंटे में तय होती है, इसलिए मिलन पूर्वाह्न 11 बजे होना चाहिए। पर पूर्वाह्न 11 बजे दूसरी रेलगाड़ी अभी स्टेशन B पर ही है और उसने कोई दूरी तय नहीं की — जबकि इस विकल्प के अनुसार उसे कुल दूरी का तीन-पाँचवाँ भाग तय कर चुका होना चाहिए। यह विरोधाभास इस विकल्प को काट देता है। ऐसी जाँच इस प्रकार के प्रश्नों में बहुत उपयोगी है : किसी भी प्रस्तावित अनुपात से मिलन का समय निकालिए और देखिए कि दोनों गाड़ियों की चाल उस समय पर मेल खाती है या नहीं।
- (d)3 : 2 — यह अनुपात मानने पर A से P की दूरी कुल दूरी का तीन-पाँचवाँ भाग होगी, जिसे पहली रेलगाड़ी ठीक तीन घंटे में तय करती है — यानी मिलन दोपहर 12 बजे। उस क्षण तक दूसरी रेलगाड़ी केवल एक घंटा चली होगी और उसने कुल दूरी का एक-चौथाई भाग तय किया होगा। पर इस विकल्प के अनुसार उसे दो-पाँचवाँ भाग तय कर चुका होना चाहिए, और एक-चौथाई तथा दो-पाँचवाँ बराबर नहीं हैं। इसलिए यह भी असंगत है। ध्यान दीजिए कि यह विकल्प और (c) एक ही जोड़ी के दो रूप हैं, ठीक वैसे ही जैसे (a) और (b); इसलिए क्रम पढ़ना यहाँ गणना जितना ही महत्वपूर्ण है।
अवधारणा
विपरीत दिशाओं से आती दो वस्तुओं के मिलने वाले प्रश्नों में दो बातें तय करनी पड़ती हैं : उनकी सापेक्ष गति, और उनके चलने के समय का अंतर।
सापेक्ष गति सरल है। जब दोनों एक-दूसरे की ओर आ रही हों तो उनके बीच की दूरी दोनों की गतियों के योग की दर से घटती है। इसी कारण मिलने में लगने वाला समय शेष दूरी को गतियों के योग से भाग देकर निकल आता है।
समय का अंतर अधिक ध्यान माँगता है। यदि दोनों एक ही क्षण चलें तो दोनों का चलने का समय बराबर होता है और तय की गई दूरियाँ सीधे गतियों के अनुपात में बँट जाती हैं। पर जहाँ एक पहले चल पड़े, वहाँ यह सरल अनुपात टूट जाता है, क्योंकि पहले चलने वाली मिलन के क्षण तक अधिक समय चल चुकी होती है।
ऐसे प्रश्नों में दो में से कोई भी रास्ता चुना जा सकता है। पहला रास्ता एक चर लेकर समीकरण बनाने का है, जैसा ऊपर किया गया। दूसरा रास्ता यह है कि बाद वाली के चलने के क्षण तक की स्थिति पहले निकाल ली जाए और उसके बाद ही सापेक्ष गति लगाई जाए। दूसरा रास्ता प्रायः छोटा पड़ता है, क्योंकि उसमें ऋणात्मक समय की गुंजाइश ही नहीं रहती।
दूरी को D मान लेना भी एक उपयोगी युक्ति है — अंत में वह कट जाती है और अनुपात शुद्ध संख्याओं में आ जाता है।
गति, दूरी और समय के प्रश्न इस पेपर के संख्यात्मक खंड की सबसे बड़ी श्रेणी में आते हैं, और उनमें भी मिलन-बिंदु वाले प्रश्न सबसे नियमित हैं। उनका आकर्षण यह है कि उनमें कोई कठिन गणित नहीं होता, केवल समय-रेखा को ठीक-ठीक पढ़ना होता है।
इस प्रश्न में समय अंग्रेज़ी के पूर्वाह्न-अपराह्न संकेतों से नहीं, हिन्दी शब्दों से दिया गया है, इसलिए पढ़ते समय उन्हें घंटों में बदल लेना चाहिए — पहली गाड़ी पाँच घंटे लेती है और दूसरी चार।
विकल्पों की बनावट स्वयं एक चेतावनी है। पहले दो विकल्प एक ही जोड़ी को उलट-पलटकर देते हैं और अंतिम दो भी वैसे ही। इसका अर्थ यह है कि परीक्षक जानता है कि सबसे आम भूल गणना की नहीं, क्रम की होगी — उत्तर निकालकर भी उसे उलटा लिख देने की। इसलिए अंत में यह मिलाना आवश्यक है कि प्रश्न ने पहले किस दूरी का नाम लिया।
एक व्यावहारिक जाँच भी इस प्रश्न में सुलभ है : मिलन का समय निकालकर देखिए कि वह दोनों गाड़ियों के चलने के बाद और दोनों के पहुँचने से पहले पड़ता है या नहीं। यहाँ वह अपराह्न 12 बजकर 20 मिनट है, जो दोनों शर्तें पूरी करता है।
मुख्य तथ्य
- पहली रेलगाड़ी पूरी दूरी पाँच घंटे में तय करती है और दूसरी चार घंटे में, इसलिए कुल दूरी D मानने पर उनकी गतियाँ D⁄5 और D⁄4 हैं।
- दूसरी रेलगाड़ी दो घंटे बाद चलती है, इसलिए मिलन के क्षण तक वह पहली से दो घंटे कम चली होती है — यही इस प्रश्न की निर्णायक शर्त है।
- समीकरण t⁄5 + (t − 2)⁄4 = 1 से t = 10⁄3 घंटे निकलता है, यानी मिलन अपराह्न 12 बजकर 20 मिनट पर होता है।
- A से P की दूरी 2D⁄3 और B से P की दूरी D⁄3 निकलती है, इसलिए अनुपात 2 : 1 है।
- जाँच का सरल तरीक़ा यह है कि किसी भी प्रस्तावित अनुपात से मिलन का समय निकालकर देखा जाए कि वह दोनों गाड़ियों के चलने के बाद पड़ता है या नहीं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- दूसरी रेलगाड़ी की अधिक गति देखकर यह मान लेना कि उसने अधिक दूरी तय की होगी; पहली को दो घंटे की बढ़त मिली है और वह रास्ते का चालीस प्रतिशत पहले ही तय कर चुकी होती है।
- दोनों को एक ही क्षण से चला मान लेना; मिलन तक पहली t घंटे चलती है पर दूसरी केवल (t – 2) घंटे, और यही घटाव पूरा समीकरण बनाता है।
- अनुपात का क्रम उलट देना; स्तंभ पहले 'A से P' और फिर 'B से P' कहता है, और विकल्प (a) ठीक यही जोड़ी उलटकर रखा गया है।
- उत्तर की जाँच छोड़ देना; दोनों दूरियाँ जोड़कर पूरी दूरी बननी चाहिए, और किसी भी प्रस्तावित अनुपात से मिलन का समय निकालकर देखा जा सकता है कि वह दोनों की समय-सारणी से मेल खाता है या नहीं।
मिलन वाले प्रश्न मुख्यतः तीन रूपों में आते हैं। पहले रूप में दोनों एक साथ चलते हैं और मिलने का समय या स्थान पूछा जाता है — वहाँ दूरियाँ सीधे गतियों के अनुपात में बँट जाती हैं। दूसरे रूप में एक पहले चल पड़ती है, जैसा यहाँ हुआ है। तीसरे रूप में दोनों एक ही दिशा में चलती हैं और एक को दूसरी पकड़ती है, जहाँ गतियों का अंतर काम आता है।
दूसरे रूप में सबसे सुरक्षित विधि यह है कि समय-रेखा खींच ली जाए और उस पर तीनों क्षण अंकित कर लिए जाएँ — पहली का चलना, दूसरी का चलना, और मिलन। इससे यह भूल नहीं होती कि दोनों के चलने के समय बराबर मान लिए जाएँ।
एक और युक्ति परीक्षा में बहुत काम आती है : विकल्पों को स्वयं परखना। यहाँ हर विकल्प से मिलन का समय निकाला जा सकता है और उसे समय-सारणी से मिलाया जा सकता है, और उनमें से केवल एक ही टिकता है। जहाँ समीकरण बनाने में समय लगे, वहाँ यह उलटी विधि तेज़ भी है और सुरक्षित भी।
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- (a)पूर्वाह्न 11 बजे
- (b)अपराह्न 12 बजे
- (c)पूर्वाह्न 11 बजकर 30 मिनट
- (d)अपराह्न 12 बजकर 30 मिनट
उत्तर(a) पूर्वाह्न 11 बजे — दोनों की गति D⁄4 है; पहली गाड़ी 10 बजे तक D⁄2 चल चुकी है, इसलिए शेष D⁄2 दोनों मिलकर D⁄4 + D⁄4 = D⁄2 प्रति घंटा की दर से एक घंटे में तय करेंगी, यानी मिलन पूर्वाह्न 11 बजे होगा।