6^25 में कितने अंक हैं ? (यह दिया गया है कि log10 2 = 0·3010 और log10 3 = 0·4771)
- (a)20
- (b)21
- (c)22
- (d)23
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) 20 — छह की पचीसवीं घात में बीस अंक होते हैं।
अंक गिनने के लिए संख्या निकालने की आवश्यकता नहीं; लघुगणक का पूर्णांश ही बता देता है। नियम यह है : यदि किसी संख्या N के लिए, जहाँ N एक से बड़ा है, log10 N का पूर्णांश n हो, तो N में n + 1 अंक होते हैं। कारण सीधा है — पूर्णांश n का अर्थ है कि N दस की n घात और दस की n+1 घात के बीच पड़ता है, और उस परास की हर संख्या में ठीक n + 1 अंक होते हैं। एक अंक वाली संख्याओं का पूर्णांश 0 होता है, दो अंक वालों का 1, और यही क्रम आगे चलता जाता है।
दिए हुए आँकड़ों पर भी ध्यान दीजिए, क्योंकि उनका चयन संयोग नहीं है। प्रश्न ने 6 का लघुगणक नहीं दिया, 2 और 3 का दिया है। लघुगणक की सारणियाँ अभाज्य संख्याओं के मान देती हैं और शेष उन्हीं से बनाए जाते हैं, इसलिए पहला काम आधार को गुणनखंडों में तोड़ना है।
अब गणना कीजिए। 6 = 2 × 3 है, इसलिए गुणनफल के नियम से log10 6 = log10 2 + log10 3 = 0·3010 + 0·4771 = 0·7781।
घात के नियम से log10 (6^25) = 25 × log10 6 = 25 × 0·7781 = 19·4525।
यही वह चरण है जो उत्तर तय करता है : पूर्णांश 19 है, और उसे निकटतम पूर्णांक से न मिलाइए — 19·4525 का पूर्णांश 19 है, और यदि मान 19·6 होता तब भी पूर्णांश 19 ही रहता। इसलिए अंकों की संख्या 19 + 1 = 20 हुई।
दशमलव भाग को फेंक देना नहीं चाहिए — वह अपना काम अलग करता है। उसे भिन्नांश कहते हैं और वह संख्या के आरंभिक अंक बताता है। 0·4525 का प्रतिलघुगणक लगभग 2·84 है, इसलिए संख्या लगभग 2·84 × 10^19 है, यानी 2 से आरंभ होकर कुल बीस अंक।
चाहें तो लघुगणक के बिना भी मोटी जाँच कर लीजिए, और वह भरोसा बढ़ा देती है। 6^5 = 7776, इसलिए 6^10 उसका वर्ग है, लगभग 6·05 करोड़, यानी लगभग 6·05 × 10^7। इसका वर्ग करने पर 6^20 लगभग 3·66 × 10^15 आता है, और उसे 7776 से गुणा करने पर 6^25 लगभग 2·84 × 10^19 — वही मान जो लघुगणक ने दिया, और वही बीस अंक।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)21 — इक्कीस अंक तब निकलते हैं जब पूर्णांश निकालने के स्थान पर पूरे मान को पूर्णांकित कर दिया जाए। 19·4525 को निकटतम पूर्णांक बनाकर 19 ही रहता, पर यदि कोई उसे बढ़ाकर 20 कर ले और फिर नियम के अनुसार एक और जोड़ दे तो 21 आ जाएगा। नियम में जो लिया जाता है वह पूर्णांश है, यानी दशमलव के बाईं ओर का भाग जैसा का तैसा — उसे न ऊपर करना है और न नीचे। इसे यों भी देखा जा सकता है : दस की उन्नीसवीं घात में बीस अंक होते हैं और दस की बीसवीं घात में इक्कीस; हमारी संख्या इन्हीं दोनों के बीच है, इसलिए उसमें बीस अंक होंगे, इक्कीस नहीं।
- (c)22 — बाईस अंक तब निकल आते हैं जब दोनों लघुगणकों का योग एक दशमलव स्थान पर ग़लत लिख लिया जाए। उदाहरण के लिए योग को 0·8781 मान लेने पर 25 से गुणा करने पर 21·9525 आता है, जिसका पूर्णांश 21 है और अंक 22 निकल आते हैं। इसीलिए इस प्रकार के प्रश्न में सबसे पहले योग की जाँच कर लेनी चाहिए : 0·3010 और 0·4771 का योग 0·7781 है, और वह एक से कम रहता है, जैसा कि 6 के लिए रहना भी चाहिए, क्योंकि 6 दस से छोटा है। यदि किसी एक अंक की संख्या का लघुगणक एक से बड़ा निकल आए तो कहीं भूल हुई है।
- (d)23 — तेईस अंक तब आते हैं जब लघुगणक को मोटे तौर पर बड़ा मान लिया जाए। जैसे log10 6 को लगभग 0·9 मानकर चलने पर 25 × 0·9 = 22·5 आता है, जिसका पूर्णांश 22 है और अंक 23 बनते हैं। प्रश्न ने दोनों लघुगणक इसीलिए दिए हैं कि अनुमान लगाने की आवश्यकता न पड़े, और उन्हें ज्यों का त्यों प्रयोग करना चाहिए। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि चारों विकल्प एक-एक के अंतर पर बढ़ते हैं, इसलिए दशमलव के एक स्थान की भी चूक सीधे विकल्प बदल देती है; गुणा 25 से है, इसलिए 0·04 की भूल भी पूरे एक अंक का फ़र्क़ बना देती है।
अवधारणा
यह प्रश्न लघुगणक के तीन काम एक साथ दिखाता है, और तीनों याद रखने योग्य हैं।
पहला काम अंक गिनना है। किसी संख्या के अंकों की संख्या उसके लघुगणक के पूर्णांश से एक अधिक होती है। यह इसलिए है कि दस की n घात से लेकर दस की n+1 घात से ठीक पहले तक की हर संख्या में n + 1 अंक होते हैं, और उन सबका लघुगणक n और n+1 के बीच पड़ता है।
दूसरा काम गुणनफल को योग में बदलना है : log (a × b) = log a + log b। इसी कारण प्रश्न ने 6 का लघुगणक सीधे नहीं दिया, बल्कि 2 और 3 का दिया — क्योंकि 6 उन्हीं का गुणनफल है।
तीसरा काम घात को गुणा में बदलना है : log (a^n) = n × log a। इसी से पचीसवीं घात का लघुगणक निकालना केवल एक गुणा रह जाता है।
अंत में शब्दावली : लघुगणक के पूर्णांश को अभिलक्षण और दशमलव भाग को अंश कहते हैं। अभिलक्षण संख्या का आकार बताता है, यानी उसमें कितने अंक हैं; और अंश उसके आरंभिक अंक बताता है। दोनों मिलकर संख्या का पूरा चित्र खींच देते हैं।
लघुगणक पर आधारित प्रश्न इस परीक्षा के संख्यात्मक खंड में कभी-कभार आते हैं, पर जब आते हैं तो लगभग हमेशा इसी रूप में — किसी बड़ी घात में अंकों की संख्या पूछना और आवश्यक लघुगणक स्तंभ में ही दे देना। इसका अर्थ यह है कि तैयारी में मान याद रखने की नहीं, नियम पहचानने की आवश्यकता है।
आँकड़े देने का ढंग भी संकेत देता है। यहाँ 2 और 3 के लघुगणक दिए गए हैं, 6 का नहीं — यह स्वयं बता रहा है कि आधार को गुणनखंडों में तोड़ना है। जहाँ 2 और 5 के लघुगणक दिए हों वहाँ प्रायः 10 या उसकी घातें बनानी होती हैं, और जहाँ 2 और 7 दिए हों वहाँ 14 या 28 जैसी संख्याएँ।
स्तंभ में दोनों दशमलव उठे हुए मध्य बिंदु से छपे हैं, जो इस पुस्तिका की अपनी शैली है, और लघुगणक का आधार दस अधोलिखित अंक के रूप में छपा है — यानी वह गुणक नहीं, आधार है। इसे तर्क में शामिल कर लेना ज़रूरी है, क्योंकि अंक गिनने का पूरा नियम दस आधार पर ही टिका है।
मुख्य तथ्य
- किसी एक से बड़ी संख्या के अंकों की गिनती उसके दस आधार वाले लघुगणक के पूर्णांश से एक अधिक होती है; एक अंक वाली संख्याओं का पूर्णांश शून्य होता है।
- log (a × b) = log a + log b होने के कारण 6 का लघुगणक 2 और 3 के लघुगणकों का योग है : 0·3010 + 0·4771 = 0·7781। सारणियाँ अभाज्यों के मान देती हैं, इसलिए आधार को पहले तोड़ना पड़ता है।
- log (a की n घात) = n × log a होने से छह की पचीसवीं घात का लघुगणक 25 × 0·7781 = 19·4525 निकलता है।
- पूर्णांश 19 है — और उसे निकटतम पूर्णांक से न मिलाइए — इसलिए संख्या दस की उन्नीसवीं और बीसवीं घात के बीच है और उसमें बीस अंक हैं।
- दशमलव भाग को भिन्नांश कहते हैं और वह संख्या के आरंभिक अंक बताता है : 0·4525 का प्रतिलघुगणक लगभग 2·84 है, इसलिए संख्या लगभग 2·84 × 10^19 है।
- लघुगणक के बिना भी जाँच हो जाती है : 6^5 = 7776, इसलिए 6^10 लगभग 6·05 × 10^7, 6^20 लगभग 3·66 × 10^15, और उसे 7776 से गुणा करने पर 6^25 लगभग 2·84 × 10^19 — वही बीस अंक।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- लघुगणक के मान को निकटतम पूर्णांक तक पूर्णांकित कर देना; नियम में पूर्णांश लिया जाता है, इसलिए 19·4525 और 19·6 दोनों का पूर्णांश 19 ही है।
- पूर्णांश में एक जोड़ना भूल जाना, जिससे उत्तर एक कम आ जाता है; याद रखिए कि एक अंक वाली संख्याओं का पूर्णांश शून्य होता है।
- 6 का लघुगणक सारणी में ढूँढ़ते रह जाना; सारणियाँ अभाज्यों के मान देती हैं, इसलिए पहले आधार को 2 × 3 में तोड़ना पड़ता है।
- दिए हुए लघुगणकों के स्थान पर अपने अनुमान से मोटा मान ले लेना; 25 से गुणा होने के कारण चौथे दशमलव स्थान की चूक भी पूरा एक अंक बदल सकती है।
इस प्रकार के प्रश्न लगभग एक ही साँचे में आते हैं : कोई बड़ी घात दी जाती है, दो-तीन लघुगणक स्तंभ में ही दे दिए जाते हैं, और अंकों की संख्या पूछी जाती है। इसलिए हल की विधि भी एक ही रहती है — आधार को गुणनखंडों में तोड़िए, लघुगणक जोड़िए, घात से गुणा कीजिए, पूर्णांश लीजिए और एक जोड़ दीजिए।
दो और रूप इसी परिवार से निकलते हैं। पहला यह पूछता है कि संख्या का पहला अंक क्या होगा, जिसका उत्तर दशमलव भाग के प्रतिलघुगणक से मिलता है। दूसरा यह पूछता है कि किसी भिन्न में दशमलव के बाद कितने शून्य आएँगे, जहाँ लघुगणक ऋणात्मक हो जाता है और अभिलक्षण की गिनती का ढंग बदल जाता है।
अंतिम सुझाव जाँच का है। गुणा करने के बाद देखिए कि उत्तर उचित परास में है या नहीं — छह दस से छोटा है, इसलिए उसका लघुगणक एक से कम होना ही चाहिए, और पचीस से गुणा करने पर परिणाम पचीस से कम रहना चाहिए। इतनी-सी जाँच अधिकांश भूलें पकड़ लेती है।
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उत्तर(b) 10 — log10 (2 की तीसवीं घात) = 30 × 0·3010 = 9·030, जिसका पूर्णांश 9 है; अंकों की संख्या पूर्णांश से एक अधिक, यानी 10 होती है।