पाँच अभाज्य संख्याओं को आरोही क्रम में व्यवस्थित किया जाता है । उनमें से प्रथम तीन संख्याओं के गुणनफल और अंतिम तीन संख्याओं के गुणनफल का अनुपात 35 : 323 है । सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्याओं में अंतर क्या है ?
- (a)8
- (b)10
- (c)12
- (d)14
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) 14 — सबसे बड़ी और सबसे छोटी अभाज्य संख्या का अंतर 19 − 5 = 14 है।
पाँचों संख्याओं को आरोही क्रम में p1, p2, p3, p4, p5 लिखिए। प्रश्न कहता है कि प्रथम तीन का गुणनफल और अंतिम तीन का गुणनफल 35 : 323 के अनुपात में है, यानी p1·p2·p3 : p3·p4·p5 = 35 : 323।
अब वह चरण, जो पूरा प्रश्न खोल देता है : बीच वाली संख्या p3 दोनों गुणनफलों में है, इसलिए वह कट जाती है। बचता है p1·p2 : p4·p5 = 35 : 323।
आगे केवल गुणनखंड करने हैं। 35 = 5 × 7 है। 323 पहली नज़र में कठिन लगता है, और उसे तोड़ने के दो रास्ते हैं, दोनों जानने योग्य।
पहला रास्ता क्रमवार जाँच का है, पर उसमें एक सीमा जान लेने से आधा श्रम बच जाता है : किसी संख्या के गुणनखंड खोजते समय केवल उसके वर्गमूल तक के अभाज्यों की जाँच करनी पड़ती है, क्योंकि यदि दोनों गुणनखंड वर्गमूल से बड़े होते तो उनका गुणनफल संख्या से बड़ा हो जाता। 18 का वर्ग 324 है, यानी 323 का वर्गमूल 18 से ज़रा कम, इसलिए 17 तक की जाँच पर्याप्त है। 2, 3, 5, 7, 11 और 13 से यह विभाज्य नहीं; 17 से भाग देने पर 19 मिल जाता है।
दूसरा रास्ता अधिक सुंदर है और इसी अंक पर ठीक बैठता है। 323 = 324 − 1 = 18² − 1², और वर्गों का अंतर हमेशा (18 − 1)(18 + 1) के रूप में खुलता है, यानी 17 × 19। जो संख्या किसी पूर्ण वर्ग से ठीक एक कम हो, वह इसी तरह एक झटके में टूट जाती है — 99, 143, 195, 255 सब इसी परिवार के हैं।
चूँकि पाँचों संख्याएँ अभाज्य हैं और आरोही क्रम में हैं, इसलिए दोनों ओर के गुणनखंड सीधे मिल जाते हैं : p1 = 5, p2 = 7, p4 = 17 और p5 = 19। इसलिए सबसे छोटी संख्या 5 है और सबसे बड़ी 19, और उनका अंतर 14।
एक बात और ध्यान देने योग्य है। बीच वाली संख्या p3 कटने के कारण अनिर्धारित रह जाती है — वह 11 भी हो सकती है और 13 भी, क्योंकि उसे केवल 7 से बड़ा और 17 से छोटा अभाज्य होना है। पर प्रश्न उसे पूछ ही नहीं रहा; वह सबसे छोटी और सबसे बड़ी का अंतर माँग रहा है, और वे दोनों निश्चित हैं। इसलिए उत्तर एक ही निकलता है — और यह ध्यान रखने योग्य है कि किसी प्रश्न के आँकड़े अधूरे होते हुए भी पूछी गई राशि पूरी तरह निर्धारित हो सकती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)8 — आठ का अंतर तब बनता है जब सिरों की पहचान में चूक हो जाए। उदाहरण के लिए, यदि कोई 13 और 5 को सिरे मान ले, या 19 और 11 को, तो अंतर 8 आ जाएगा — पर 11 और 13 तो बीच वाली संख्या के संभावित मान हैं, सिरे नहीं। यही इस प्रश्न का सबसे बारीक जाल है : बीच वाली संख्या कटकर अनिर्धारित रह जाती है, और उसे किसी सिरे के स्थान पर रख देने से यही उत्तर निकल आता है। सही रास्ता यह है कि कटने के बाद बची हुई समानता p1·p2 : p4·p5 = 35 : 323 को ही सिरों का स्रोत माना जाए, और उसमें सबसे छोटा गुणनखंड 5 तथा सबसे बड़ा 19 है।
- (b)10 — दस का अंतर 17 और 7 को घटाने पर आता है, यानी तब जब दोनों जोड़ियों में से भीतरी संख्याएँ चुन ली जाएँ और बाहरी छोड़ दी जाएँ। भूल की जड़ यह है कि 35 के दो गुणनखंड 5 और 7 क्रमशः p1 और p2 हैं, तथा 323 के दो गुणनखंड 17 और 19 क्रमशः p4 और p5 — यानी हर जोड़ी में छोटा पहले और बड़ा बाद में आता है, क्योंकि पूरी शृंखला आरोही क्रम में है। सबसे छोटी संख्या पहली जोड़ी का छोटा सदस्य है और सबसे बड़ी दूसरी जोड़ी का बड़ा सदस्य। इन्हीं दो को लेने पर अंतर 14 बनता है, 10 नहीं।
- (c)12 — बारह का अंतर 19 और 7 को घटाने पर आता है, यानी तब जब सबसे बड़ी संख्या तो ठीक पहचानी जाए पर सबसे छोटी के स्थान पर उससे अगली संख्या ले ली जाए। यह भूल प्रायः इसलिए होती है कि 35 को गुणनखंडों में तोड़ते समय ध्यान 7 पर टिक जाता है, जो अधिक परिचित अंक है। पर आरोही क्रम की शर्त स्पष्ट है : 5 और 7 में छोटा 5 है, इसलिए वही पूरी शृंखला की सबसे छोटी संख्या है। यहाँ यह भी जाँच लीजिए कि पाँचों वास्तव में अभाज्य हैं — 5, 7, फिर 11 या 13, फिर 17 और 19 — और वे सचमुच बढ़ते क्रम में बैठ जाते हैं।
अवधारणा
इस प्रश्न की कुंजी एक सामान्य युक्ति है : जब कोई राशि अनुपात के दोनों पक्षों में एक जैसी आ जाए, तो वह कट जाती है और समस्या छोटी हो जाती है। यहाँ प्रथम तीन में तीसरी संख्या है और अंतिम तीन में भी तीसरी संख्या ही है, इसलिए वही कटती है और पाँच अज्ञातों की समस्या चार अज्ञातों की रह जाती है — और उन चार का उत्तर सीधे गुणनखंडों से मिल जाता है।
दूसरी बात अभाज्य गुणनखंडन की अद्वितीयता है। किसी भी पूर्णांक को अभाज्य गुणनखंडों में केवल एक ही ढंग से तोड़ा जा सकता है। इसीलिए 35 का 5 × 7 और 323 का 17 × 19 होना कोई विकल्प नहीं छोड़ता — जब यह भी दिया हो कि सभी संख्याएँ अभाज्य हैं।
तीसरी बात 323 को पहचानने की है। बड़ी संख्या के गुणनखंड ढूँढ़ते समय उसके वर्गमूल तक के अभाज्य ही परखने पड़ते हैं। 323 का वर्गमूल अठारह से कुछ कम है, इसलिए 2, 3, 5, 7, 11, 13 और 17 तक जाँच लेना पर्याप्त है — और 17 पर वह बँट जाती है, जिससे दूसरा गुणनखंड 19 निकल आता है।
अभाज्य संख्याओं पर आधारित प्रश्न इस परीक्षा के संख्यात्मक खंड में नियमित रूप से आते हैं, और उनका आकर्षण यही है कि उनमें लंबी गणना नहीं, एक सही अंतर्दृष्टि चाहिए होती है। यहाँ वह अंतर्दृष्टि 'बीच वाली संख्या कट जाती है' है।
प्रश्न की एक और विशेषता है, जो इसे पढ़ाने योग्य बनाती है : आँकड़े उत्तर के लिए पर्याप्त हैं, पर सब कुछ तय करने के लिए नहीं। बीच वाली संख्या दो मानों में से कोई भी हो सकती है और प्रश्न फिर भी एक ही उत्तर देता है। ऐसे प्रश्न यह सिखाते हैं कि यह देखना चाहिए कि पूछा क्या जा रहा है — कभी-कभी अधूरी जानकारी भी पूरा उत्तर देने के लिए काफ़ी होती है।
अनुपात यहाँ पुस्तिका की अपनी शैली में, कोलन के दोनों ओर रिक्त स्थान के साथ छपा है, और चारों विकल्प बिना किसी इकाई के सम अंक हैं। विकल्पों का दो-दो के अंतर पर बढ़ना यह भी बताता है कि परीक्षक निकट के मानों में भ्रम चाहता है, इसलिए सिरों की पहचान में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए।
मुख्य तथ्य
- अनुपात में प्रथम तीन का गुणनफल और अंतिम तीन का गुणनफल दोनों में बीच वाली संख्या आती है, इसलिए वह कट जाती है और अनुपात p1·p2 : p4·p5 रह जाता है।
- 35 = 5 × 7 और 323 = 17 × 19; अभाज्य गुणनखंडन अद्वितीय होता है, इसलिए इन संख्याओं की पहचान में कोई विकल्प नहीं बचता।
- 323 को तोड़ने का सबसे तेज़ रास्ता वर्गों का अंतर है : 323 = 324 − 1 = 18² − 1², इसलिए वह सीधे (18 − 1)(18 + 1) = 17 × 19 में खुल जाता है।
- गुणनखंड खोजते समय संख्या के वर्गमूल तक के अभाज्य ही परखने पड़ते हैं — यहाँ 18 तक, यानी 17 तक — क्योंकि दोनों गुणनखंड वर्गमूल से बड़े होते तो उनका गुणनफल संख्या से बड़ा हो जाता।
- आरोही क्रम की शर्त से सबसे छोटी संख्या 5 और सबसे बड़ी 19 निर्धारित हो जाती है, इसलिए अंतर 19 − 5 = 14 है।
- बीच वाली संख्या अनिर्धारित रहती है — वह 11 भी हो सकती है और 13 भी — पर प्रश्न उसे पूछता ही नहीं, इसलिए अधूरे आँकड़ों के बावजूद उत्तर एक ही रहता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- बीच वाली संख्या को किसी सिरे के स्थान पर रख देना; वह अनुपात के दोनों पक्षों में होने के कारण कट जाती है और 11 या 13 में से कुछ भी हो सकती है, इसलिए वह उत्तर में आ ही नहीं सकती।
- आरोही क्रम की शर्त भूलकर हर जोड़ी में से ग़लत सदस्य को सिरा मान लेना — 35 के गुणनखंडों में छोटा 5 है और 323 के गुणनखंडों में बड़ा 19, और वही दोनों सिरे हैं।
- 323 को अभाज्य मान लेना और गुणनखंड खोजना छोड़ देना; वह 18² – 1 है, इसलिए (18 – 1)(18 + 1) = 17 × 19 में एक ही चरण में टूट जाता है।
- गुणनखंड खोजते समय संख्या के आधे तक जाँचते रहना; वर्गमूल तक जाँच लेना पर्याप्त है, यहाँ 17 तक, और इससे श्रम आधे से भी कम रह जाता है।
संख्या-सिद्धांत के प्रश्न इस पेपर में प्रायः तीन रूपों में आते हैं : अभाज्य संख्याओं पर, विभाज्यता पर, और लघुत्तम समापवर्त्य तथा महत्तम समापवर्तक पर। तीनों में गणना कम और तर्क अधिक होता है।
अभाज्य वाले प्रश्नों में जो युक्ति सबसे अधिक काम आती है वह यही है : पहले उन संख्याओं को गुणनखंडों में तोड़िए जो प्रश्न में दी गई हैं, और फिर देखिए कि अभाज्य होने की शर्त कितने विकल्प काट देती है। प्रायः वह सारे विकल्प काट देती है और एक ही व्यवस्था बचती है।
दूसरी उपयोगी आदत यह पूछना है कि उत्तर के लिए कितनी सूचना सचमुच चाहिए। इस प्रश्न में पाँचों संख्याएँ जाने बिना ही उत्तर मिल जाता है। ऐसी परख समय बचाती है और उस घबराहट से भी बचाती है जो 'सारे मान नहीं निकल रहे' देखकर होती है।
तीसरा सुझाव विकल्पों की दूरी देखने का है। जहाँ विकल्प निकट-निकट हों, वहाँ भूल सिरों की पहचान में होती है, गणना में नहीं।
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उत्तर(a) 116
गुणनखंडों पर टिका प्रश्न, जिसमें लघुत्तम समापवर्त्य और महत्तम समापवर्तक निकालकर अंतर निकालना होता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
चार अभाज्य संख्याएँ आरोही क्रम में रखी गई हैं । प्रथम दो का गुणनफल 15 है और अंतिम दो का गुणनफल 143 है । सबसे बड़ी और सबसे छोटी संख्या का अंतर क्या है ?
- (a)8
- (b)10
- (c)11
- (d)12
उत्तर(b) 10 — 15 = 3 × 5 और 143 = 11 × 13, इसलिए चारों संख्याएँ आरोही क्रम में 3, 5, 11 और 13 हैं; सबसे बड़ी 13 और सबसे छोटी 3 का अंतर 10 है।