निम्नलिखित में से कौन-सा ताज़े (अलवण) जल के कठोरता सूचकांक का निर्धारण करता है ?
- (a)ताज़े जल में Ca2+ और Mg2+ आयनों का कुल संकेन्द्रण
- (b)सल्फ्यूरिक अम्ल के संदर्भ में ताज़े जल के pH मान का अंतर
- (c)ताज़े जल के pH मान का कमरे के तापमान और एक वायुमंडलीय दाब पर मापन
- (d)ताज़े जल में D2O का H2O से मोलर अनुपात
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) ताज़े जल में Ca2+ और Mg2+ आयनों का कुल संकेन्द्रण — जल की कठोरता की परिभाषा ही यह है, और वह किसी और राशि से नापी ही नहीं जाती।
कठोरता का अर्थ है जल में घुले हुए द्विसंयोजी धनायनों की मात्रा, और व्यवहार में उनमें कैल्सियम तथा मैग्नीशियम ही प्रमुख हैं। लोहा, मैंगनीज़ और स्ट्रॉन्शियम जैसे कुछ अन्य द्विसंयोजी आयन भी कठोरता में योग देते हैं, पर उनकी मात्रा प्रायः इतनी कम रहती है कि व्यावहारिक गणना में उन्हें छोड़ दिया जाता है। ये आयन वर्षा के जल में नहीं होते; वे तब आते हैं जब जल चूना-पत्थर, खड़िया या डोलोमाइट जैसी चट्टानों से होकर बहता है और उनका थोड़ा अंश घोल लेता है। यहाँ एक सुंदर बात यह है कि घुलने की यही क्रिया घुली हुई कार्बन डाइऑक्साइड से बने दुर्बल कार्बोनिक अम्ल के कारण होती है — वही क्रिया जो चूना-पत्थर में गुफाएँ बनाती है, भूजल को कठोर भी बनाती है। इसीलिए एक ही क्षेत्र के भूजल की कठोरता वहाँ की चट्टानों पर निर्भर करती है, और यह भूगोल का प्रश्न भी है, रसायन का भी।
नापने की रीति भी इसी परिभाषा से निकली है। दोनों आयनों की मात्रा अलग-अलग नहीं गिनाई जाती, बल्कि दोनों को मिलाकर उतने ही कैल्सियम कार्बोनेट के तुल्य में व्यक्त किया जाता है, और मान मिलीग्राम प्रति लीटर में दिया जाता है। इसी कारण विकल्प में 'कुल संकेन्द्रण' शब्द आया है — गिनती संयुक्त होती है, और वही 'कुल' शब्द इस विकल्प को तकनीकी रूप से सही बनाता है।
कठोरता के दो प्रकार भी इसी परिभाषा से निकलते हैं, और परीक्षा में यही विस्तार सबसे अधिक लौटता है। जब ये आयन बाइकार्बोनेट के साथ आते हैं तो कठोरता अस्थायी कहलाती है, क्योंकि उबालने पर बाइकार्बोनेट टूटकर अघुलनशील कार्बोनेट के रूप में बैठ जाता है और जल मृदु हो जाता है — केतली और बॉयलर में जमने वाला सफ़ेद पपड़ीदार खुरंड यही है। जब वही आयन सल्फेट या क्लोराइड के साथ आते हैं तो कठोरता स्थायी कहलाती है, और उसे उबालकर नहीं हटाया जा सकता; उसके लिए रासायनिक उपचार या आयन-विनिमय चाहिए।
इसी परिभाषा से वह लक्षण भी निकलता है जिससे कठोरता पहचानी जाती है : कठोर जल में साबुन झाग नहीं देता। साबुन के अणु इन्हीं आयनों से जुड़कर अघुलनशील मैल बना देते हैं, और झाग तभी बनता है जब सारे कैल्सियम और मैग्नीशियम आयन बँध चुके हों। यही व्यावहारिक लक्षण परिभाषा को सीधे प्रमाणित कर देता है — और ध्यान दीजिए कि यह परीक्षण आयनों पर प्रतिक्रिया करता है, pH पर नहीं, जो शेष तीन विकल्पों में से दो को उसी क्षण काट देता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)सल्फ्यूरिक अम्ल के संदर्भ में ताज़े जल के pH मान का अंतर — यह विकल्प दो असंबद्ध बातों को जोड़ देता है। pH हाइड्रोजन आयनों के संकेन्द्रण का माप है, यानी वह बताता है कि विलयन कितना अम्लीय या क्षारीय है; कठोरता कैल्सियम और मैग्नीशियम आयनों की मात्रा है। दोनों अलग-अलग राशियाँ हैं और एक से दूसरी निकाली नहीं जा सकती — कठोर जल उदासीन भी हो सकता है और मृदु जल अम्लीय भी। इसके अलावा 'सल्फ्यूरिक अम्ल के संदर्भ में pH का अंतर' किसी मानक प्रयोगशाला-रीति का नाम नहीं है; pH स्वयं एक निरपेक्ष पैमाना है और उसे किसी अम्ल के सापेक्ष नापने की कोई प्रचलित विधि नहीं। यह विकल्प तकनीकी शब्द जोड़कर विश्वसनीय बनाया गया है।
- (c)ताज़े जल के pH मान का कमरे के तापमान और एक वायुमंडलीय दाब पर मापन — यह विकल्प (b) की तुलना में अधिक भरोसेमंद लगता है, क्योंकि इसमें मापन की शर्तें भी दी गई हैं — कमरे का तापमान और एक वायुमंडलीय दाब — और शर्तें देखकर लगता है कि यही कोई मानक विधि होगी। पर वह जिस राशि को नाप रहा है वह फिर pH ही है, और pH से कठोरता का पता नहीं चलता। ध्यान रहे कि (b) और (c) दोनों pH पर टिके हैं, यानी परीक्षक ने एक ही ग़लत विचार को दो रूपों में रखा है; जहाँ दो विकल्प एक ही राशि की बात कर रहे हों और वह राशि प्रश्न से मेल न खाती हो, वहाँ दोनों साथ-साथ गिर जाते हैं।
- (d)ताज़े जल में D2O का H2O से मोलर अनुपात — यह विकल्प बिलकुल दूसरे विषय से लाया गया है। D2O भारी जल है, जिसमें साधारण हाइड्रोजन के स्थान पर उसका भारी समस्थानिक ड्यूटीरियम होता है। साधारण जल में उसका अंश अत्यंत सूक्ष्म रहता है और उसका कठोरता से कोई संबंध नहीं — भारी जल का प्रसंग नाभिकीय रिएक्टर में मंदक के रूप में उसके उपयोग से जुड़ा है। यह विकल्प इसलिए रखा गया लगता है कि उसमें रासायनिक सूत्र छपा है और सूत्र देखकर विकल्प तकनीकी लगने लगता है। कठोरता का संबंध जल के अणु से नहीं, उसमें घुले धातु-आयनों से है, और यही भेद इस विकल्प को काट देता है।
अवधारणा
जल की कठोरता को दो भागों में बाँटा जाता है, और यह विभाजन दूर करने की विधि से जुड़ा है।
अस्थायी कठोरता कैल्सियम और मैग्नीशियम के बाइकार्बोनेटों से आती है। जल उबालने पर ये विघटित होकर अघुलनशील कार्बोनेट बना देते हैं, जो नीचे बैठ जाते हैं; इसीलिए केतली और बॉयलर की भीतरी सतह पर पपड़ी जमती है। इसे चूना मिलाकर भी दूर किया जाता है।
स्थायी कठोरता कैल्सियम और मैग्नीशियम के क्लोराइडों तथा सल्फेटों से आती है और उबालने से नहीं जाती। उसके लिए धोने का सोडा मिलाया जाता है, जो इन आयनों को कार्बोनेट के रूप में अवक्षेपित कर देता है, या आयन-विनिमय विधि अपनाई जाती है, जिसमें रेज़िन कैल्सियम और मैग्नीशियम को पकड़कर बदले में सोडियम छोड़ देता है।
कठोरता का व्यावहारिक महत्व तीन जगह दिखता है : साबुन का अपव्यय और कपड़ों पर जमने वाला मैल, बॉयलर तथा पाइप में पपड़ी जमने से ऊष्मा-हस्तांतरण का घटना, और पेय जल के स्वाद पर प्रभाव। एक प्रचलित वर्गीकरण में साठ मिलीग्राम प्रति लीटर तक के जल को मृदु और एक सौ अस्सी से अधिक वाले को अत्यंत कठोर कहा जाता है।
जल की गुणवत्ता के प्रश्न इस परीक्षा में रसायन और पर्यावरण दोनों ओर से आते हैं, और कठोरता उनमें सबसे लौटने वाला विषय है, क्योंकि उसमें परिभाषा, कारण, प्रकार और उपचार — चारों पर प्रश्न बन सकते हैं।
भारत के संदर्भ में यह विषय भूजल से जुड़ा है। जहाँ जल चूना-पत्थर वाली चट्टानों से होकर आता है वहाँ कठोरता स्वाभाविक रूप से अधिक मिलती है, और घरेलू उपयोग में उसका प्रभाव सबसे पहले साबुन तथा बर्तनों पर दिखता है। पेय जल के मानकों में कठोरता की एक वांछनीय सीमा और एक अनुमेय ऊपरी सीमा दोनों दी जाती हैं।
प्रश्न की बनावट पर भी ध्यान दीजिए। यह एक परिभाषा-प्रश्न है, इसलिए उत्तर वही होगा जो राशि को ठीक-ठीक नामित करे। तीन विकल्प दूसरी-दूसरी राशियों की बात करते हैं — दो pH की और एक भारी जल के अनुपात की — इसलिए निर्णय राशि पहचानने पर आ टिकता है, किसी गणना पर नहीं।
हिन्दी स्तंभ में यहाँ रासायनिक संकेत रोमन लिपि में देवनागरी पंक्ति के भीतर छपे हैं, और स्तंभ का कोष्ठक (अलवण) 'ताज़े' का हिन्दी पर्याय है।
मुख्य तथ्य
- जल की कठोरता उसमें घुले द्विसंयोजी धनायनों की मात्रा है, जिनमें कैल्सियम और मैग्नीशियम प्रमुख हैं; दोनों को मिलाकर कुल संकेन्द्रण गिना जाता है।
- कठोरता प्रायः उतने ही कैल्सियम कार्बोनेट के तुल्य में, मिलीग्राम प्रति लीटर के रूप में व्यक्त की जाती है।
- ये आयन जल में तब आते हैं जब वह चूना-पत्थर, खड़िया या डोलोमाइट जैसी चट्टानों से होकर बहता है।
- अस्थायी कठोरता बाइकार्बोनेटों से आती है और उबालने से दूर हो जाती है; स्थायी कठोरता क्लोराइडों और सल्फेटों से आती है और उसके लिए धोने का सोडा या आयन-विनिमय चाहिए।
- कठोर जल में साबुन झाग नहीं देता, क्योंकि साबुन के अणु कैल्सियम और मैग्नीशियम आयनों से जुड़कर अघुलनशील मैल बना देते हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- कठोरता को pH से जोड़ लेना; ये दो स्वतंत्र राशियाँ हैं और एक से दूसरी निकाली नहीं जा सकती — कठोर जल उदासीन भी हो सकता है और मृदु जल अम्लीय भी।
- किसी एक आयन का संकेन्द्रण देख लेना; परिभाषा कैल्सियम और मैग्नीशियम के कुल संकेन्द्रण की है, और वही 'कुल' शब्द विकल्प (a) को सही बनाता है।
- अस्थायी और स्थायी कठोरता को एक मान लेना; बाइकार्बोनेट वाली कठोरता उबालने से चली जाती है, पर सल्फेट और क्लोराइड वाली नहीं, और उसके लिए आयन-विनिमय जैसा उपचार चाहिए।
- रासायनिक सूत्र छपा देखकर विकल्प को तकनीकी मान लेना; D2O भारी जल है, उसका प्रसंग नाभिकीय रिएक्टर के मंदक से है, और कठोरता का संबंध जल के अणु से नहीं, उसमें घुले धातु-आयनों से है।
इस विषय पर प्रश्न चार दिशाओं से आते हैं। पहली दिशा परिभाषा की है, जैसा यह प्रश्न है : कठोरता किससे निर्धारित होती है। दूसरी दिशा कारण की है — कौन-से लवण किस प्रकार की कठोरता देते हैं। तीसरी उपचार की है — उबालना, धोने का सोडा, आयन-विनिमय। चौथी लक्षण की है, जैसे साबुन का झाग न देना या बॉयलर में पपड़ी जमना।
चारों के लिए एक ही ढाँचा याद रखिए : आयन, उनके लवण, उनसे बनी दो प्रकार की कठोरता, और हर प्रकार का उपचार। इतना जोड़ लेने पर इस विषय के अधिकांश प्रश्न बिना अलग तैयारी के निकल आते हैं।
विकल्पों की बनावट भी संकेत देती है। यहाँ दो विकल्प pH पर टिके हैं और एक भारी जल पर; केवल एक विकल्प घुले आयनों की बात करता है। जब तीन विकल्प उस राशि से हटकर हों जो प्रश्न में पूछी गई है, तो चौथा विकल्प ही परिभाषा दे रहा होता है।
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- (a)क्योंकि कठोर जल का pH बहुत कम होता है
- (b)क्योंकि साबुन के अणु कैल्सियम और मैग्नीशियम आयनों से जुड़कर अघुलनशील मैल बना देते हैं
- (c)क्योंकि कठोर जल का घनत्व अधिक होता है
- (d)क्योंकि कठोर जल में ऑक्सीजन घुली नहीं रहती
उत्तर(b) क्योंकि साबुन के अणु कैल्सियम और मैग्नीशियम आयनों से जुड़कर अघुलनशील मैल बना देते हैं — झाग तभी बनता है जब ये आयन बँध चुके हों, इसलिए उतना साबुन पहले व्यर्थ चला जाता है।