निम्नलिखित में से कौन-सी कंप्यूटर की स्थायी स्मृति (मेमोरी) हो सकती है ?
- (a)हार्ड डिस्क
- (b)सीपीयू (CPU)
- (c)रैम (RAM)
- (d)मदरबोर्ड
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) हार्ड डिस्क — चार विकल्पों में यही अकेला ऐसा अंग है जो आँकड़े स्थायी रूप से सहेजता है, और स्थायित्व का अर्थ यहाँ ठीक-ठीक यही है कि बिजली बंद हो जाने पर भी सामग्री बनी रहे।
इसी गुण को अवाष्पशीलता कहते हैं, और यही इस प्रश्न का असली शब्द है। 'स्थायी' का अर्थ यहाँ 'कभी न मिटने वाला' नहीं है — हार्ड डिस्क की सामग्री मिटाई भी जा सकती है और बदली भी जा सकती है। अर्थ केवल इतना है कि उसे बने रहने के लिए बिजली की आवश्यकता नहीं। हार्ड डिस्क में आँकड़े चुंबकीय परत पर लिखे जाते हैं, और चुंबकीय अभिविन्यास बिजली से नहीं टिकता, इसलिए मशीन बंद कर देने पर भी वह ज्यों का त्यों बना रहता है। यही कारण है कि प्रचालन तंत्र, स्थापित प्रोग्राम और आपकी अपनी संचिकाएँ यहीं रहती हैं और अगली बार मशीन चालू करते ही उपलब्ध हो जाती हैं।
इस पूरे विषय को स्मृति की सीढ़ी के रूप में देखिए तो चारों विकल्प अपने-अपने पायदान पर बैठ जाते हैं। सबसे ऊपर प्रक्रमक के भीतर के रजिस्टर हैं — अत्यंत तेज़, अत्यंत छोटे। उनके नीचे कैश, फिर रैम, और सबसे नीचे द्वितीयक भंडारण, यानी हार्ड डिस्क या एसएसडी। ऊपर से नीचे जाते हुए गति घटती जाती है और क्षमता बढ़ती जाती है; और सबसे नीचे वाले पायदान पर पहुँचकर एक और गुण बदल जाता है — ऊपर के सारे पायदान वाष्पशील हैं और सबसे नीचे वाला अवाष्पशील। प्रश्न ठीक इसी अंतिम पायदान की ओर संकेत कर रहा है।
रैम से तुलना करने पर बात और साफ़ हो जाती है। रैम की कोशिकाएँ अपनी अवस्था तभी तक बनाए रखती हैं जब तक उन्हें बिजली मिलती रहे; बिजली जाते ही सब कुछ मिट जाता है। इसीलिए रैम को अस्थायी या वाष्पशील स्मृति कहा जाता है और उसे काम करने की मेज़ के रूप में देखा जाता है, जबकि हार्ड डिस्क अलमारी है। मेज़ पर काम तेज़ होता है, पर शाम को उठते समय जो मेज़ पर छूट गया वह चला जाता है; अलमारी में रखा हुआ अगले दिन मिलता है। संचिका को बीच-बीच में 'सहेजना' इसी का नाम है — मेज़ से उठाकर अलमारी में रख देना।
प्रश्न में 'हो सकती है' कहकर एक ढील भी दी गई है, पर उसकी ज़रूरत नहीं पड़ती : शेष तीन विकल्पों में से एक प्रक्रमक है, एक अस्थायी स्मृति है और एक परिपथ-पट्ट, यानी उनमें से कोई स्थायी स्मृति है ही नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)सीपीयू (CPU) — सीपीयू कंप्यूटर का प्रक्रमक है, भंडारण नहीं। उसका काम निर्देश लाना, उन्हें समझना, अंकगणितीय और तार्किक क्रियाएँ करना और परिणाम लौटाना है। उसके भीतर रजिस्टर और कैश जैसी अत्यंत छोटी और अत्यंत तेज़ स्मृतियाँ अवश्य होती हैं, पर वे काम के बीच के कुछ मानों को क्षण भर के लिए रखने की जगह हैं, और वे भी बिजली जाते ही खाली हो जाती हैं। यानी वहाँ जो थोड़ी-बहुत स्मृति है, वह न स्थायी है और न इतनी बड़ी कि उसमें संचिकाएँ रखी जा सकें। प्रक्रमक और भंडारण को अलग रखना इस पूरे खंड की सबसे बुनियादी शर्त है।
- (c)रैम (RAM) — रैम कंप्यूटर की मुख्य कार्यशील स्मृति है और वह तेज़ भी है, इसलिए यह विकल्प आकर्षक लगता है — पर वह ठीक उस गुण से वंचित है जो प्रश्न माँग रहा है। रैम वाष्पशील है : उसकी कोशिकाओं को अपनी अवस्था बनाए रखने के लिए लगातार बिजली चाहिए, और बिजली हटते ही सामग्री मिट जाती है। इसीलिए किसी संचिका पर काम करते समय बीच-बीच में उसे सहेजना पड़ता है — सहेजने का अर्थ ही यह है कि सामग्री रैम से उठाकर स्थायी भंडारण में लिख दी जाए। नाम में 'स्मृति' होना और स्थायी होना दो अलग बातें हैं, और यही भेद इस प्रश्न की धुरी है।
- (d)मदरबोर्ड — मदरबोर्ड कोई स्मृति नहीं, बल्कि वह मुख्य परिपथ-पट्ट है जिस पर बाक़ी सब अंग बैठते हैं और जिसके माध्यम से वे आपस में जुड़ते हैं। उस पर प्रक्रमक का स्थान होता है, रैम की पट्टियों के खाँचे होते हैं, भंडारण जोड़ने के द्वार होते हैं और आँकड़ों की आवाजाही के लिए बसें होती हैं। उस पर एक छोटी अवाष्पशील चिप भी लगी रहती है, जिसमें मशीन चालू होते समय चलने वाला आरंभिक प्रोग्राम रखा जाता है — पर वह चिप अलग अंग है, और उसकी क्षमता इतनी नहीं कि उसे कंप्यूटर की स्थायी स्मृति कहा जा सके। पट्ट स्वयं जोड़ने का ढाँचा है, सहेजने का साधन नहीं।
अवधारणा
कंप्यूटर की स्मृति को दो कसौटियों पर बाँटा जाता है, और दोनों को साथ रखने पर यह पूरा विषय सरल हो जाता है।
पहली कसौटी स्थान की है। प्राथमिक स्मृति वह है जिससे प्रक्रमक सीधे आँकड़े ले सकता है — रजिस्टर, कैश और रैम। द्वितीयक स्मृति वह है जो प्रक्रमक की सीधी पहुँच में नहीं होती और जिससे आँकड़े पहले प्राथमिक स्मृति में लाए जाते हैं — हार्ड डिस्क, एसएसडी, बाहरी ड्राइव।
दूसरी कसौटी स्थायित्व की है। वाष्पशील स्मृति बिजली रहने तक ही सामग्री रखती है, जैसे रैम। अवाष्पशील स्मृति बिजली के बिना भी रखती है, जैसे हार्ड डिस्क, एसएसडी और रोम।
इन दोनों कसौटियों का मेल एक व्यावहारिक क्रम बनाता है : जो स्मृति प्रक्रमक के जितनी पास है, वह उतनी तेज़, उतनी छोटी, उतनी महँगी और प्रायः उतनी ही अस्थायी है; और जो जितनी दूर है, वह उतनी धीमी, उतनी बड़ी, उतनी सस्ती और स्थायी। इसी क्रम को स्मृति का पदानुक्रम कहा जाता है।
यह प्रश्न सरल दिखता है, पर वह ठीक उसी भूल को पकड़ता है जो इस विषय में सबसे अधिक होती है — 'स्मृति' शब्द को केवल रैम से जोड़ लेना। बोलचाल में भी यही होता है : लोग मशीन की 'मेमोरी' पूछते हैं और उत्तर में कभी रैम बताते हैं तो कभी भंडारण की क्षमता, जबकि दोनों अलग चीज़ें हैं।
चारों विकल्प जानबूझकर चार भिन्न श्रेणियों से लिए गए हैं : एक भंडारण, एक प्रक्रमक, एक अस्थायी स्मृति और एक परिपथ-पट्ट। इस तरह प्रश्न यह जाँच लेता है कि अभ्यर्थी कंप्यूटर के अंगों को श्रेणियों में बाँटकर देखता है या नहीं।
यही विषय आगे बड़े प्रश्नों की जड़ भी है। बैकअप क्यों लिया जाता है, बिजली अचानक जाने पर बिना सहेजा काम क्यों चला जाता है, और एसएसडी लगाने से मशीन क्यों जल्दी चालू होती है — इन सबका उत्तर इसी वाष्पशील और अवाष्पशील के भेद से निकलता है।
हिन्दी स्तंभ में यहाँ दो विकल्पों के बाद कोष्ठक में रोमन संक्षेप भी छपा है, जबकि इसी पेपर के पिछले प्रश्न में वही संक्षेप केवल देवनागरी में थे।
मुख्य तथ्य
- हार्ड डिस्क अवाष्पशील द्वितीयक भंडारण है : आँकड़े चुंबकीय परत पर लिखे जाते हैं और बिजली बंद होने पर भी बने रहते हैं।
- रैम वाष्पशील है — उसकी कोशिकाओं को अवस्था बनाए रखने के लिए लगातार बिजली चाहिए, इसलिए बिजली जाते ही सामग्री मिट जाती है।
- सीपीयू प्रक्रमक है; उसके भीतर के रजिस्टर और कैश बहुत छोटे और अस्थायी हैं और वे संचिकाएँ रखने के लिए नहीं होते।
- मदरबोर्ड मुख्य परिपथ-पट्ट है, जिस पर अंग बैठते और आपस में जुड़ते हैं; वह स्वयं कोई स्मृति नहीं है।
- स्मृति का पदानुक्रम यह क्रम बनाता है कि प्रक्रमक के जितने पास, उतनी तेज़, छोटी, महँगी और प्रायः अस्थायी; जितनी दूर, उतनी धीमी, बड़ी, सस्ती और स्थायी।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- नाम में 'स्मृति' होना और स्थायी होना एक मान लेना; रैम मुख्य कार्यशील स्मृति है, पर वाष्पशील है और बिजली जाते ही ख़ाली हो जाती है।
- 'स्थायी' का अर्थ 'कभी न मिटने वाला' लगा लेना; यहाँ अर्थ केवल अवाष्पशीलता है, यानी बने रहने के लिए बिजली की आवश्यकता न होना — हार्ड डिस्क मिटाई भी जा सकती है।
- प्रक्रमक के भीतर की रजिस्टर और कैश स्मृतियों को भंडारण मान लेना; वे अत्यंत छोटी हैं, बीच के मान क्षण भर रखती हैं, और वे भी वाष्पशील हैं।
- मदरबोर्ड पर लगी छोटी अवाष्पशील चिप को कंप्यूटर की स्थायी स्मृति समझ लेना; वह आरंभिक प्रोग्राम रखने भर की है, और पट्ट स्वयं जोड़ने का ढाँचा है, सहेजने का साधन नहीं।
कंप्यूटर के अंगों पर प्रश्न सामान्यतः तीन ढंग से आते हैं। पहला ढंग यही है — कोई गुण बताकर पूछना कि वह किस अंग में है। दूसरा ढंग उलटा है : अंग का नाम देकर उसका कार्य पूछना। तीसरा ढंग निषेधात्मक है, जिसमें पूछा जाता है कि कौन-सा अंग किसी सूची में नहीं आता।
तीनों में एक ही तैयारी काम आती है : हर अंग को दो लेबल के साथ याद रखिए — वह किस श्रेणी का है, और वह स्थायी है या अस्थायी। इतना कर लेने पर अधिकांश विकल्प पहली दृष्टि में ही छँट जाते हैं।
इस प्रश्न में वह छँटाई तुरंत हो जाती है। चार विकल्पों में से एक प्रक्रमक है, एक परिपथ-पट्ट, और बचे दो में से एक स्मृति तो है पर अस्थायी। इसलिए निर्णय अंततः एक ही विकल्प पर आ टिकता है।
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किसी संचिका पर काम करते समय बीच-बीच में उसे सहेजने की सलाह क्यों दी जाती है ? निम्नलिखित में से सबसे सही कारण चुनिए ।
- (a)क्योंकि सहेजने से संचिका का आकार घट जाता है
- (b)क्योंकि काम रैम में चलता है, जो वाष्पशील है, और सहेजने पर ही सामग्री अवाष्पशील भंडारण में लिखी जाती है
- (c)क्योंकि सहेजने से प्रक्रमक की गति बढ़ जाती है
- (d)क्योंकि बिना सहेजे संचिका को दूसरा उपयोगकर्ता पढ़ सकता है
उत्तर(b) क्योंकि काम रैम में चलता है, जो वाष्पशील है, और सहेजने पर ही सामग्री अवाष्पशील भंडारण में लिखी जाती है — बिजली जाते ही रैम की सामग्री मिट जाती है, इसलिए जो अंश अभी भंडारण तक नहीं पहुँचा वह चला जाता है।