सॉलिड स्टेट ड्राइव (एसएसडी) के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ? 1. एसएसडी की घूर्णन गति शून्य होती है । 2. हार्ड डिस्क ड्राइव (एचडीडी) की तुलना में एसएसडी अधिक ऊर्जा की खपत करती है । 3. जब रैम अपर्याप्त हो तो एसएसडी को आभासी स्मृति (वर्चुअल मेमोरी) के रूप में उपयोग किया जा सकता है । 4. एसएसडी, प्रोसेसर का स्थान ले सकती है । नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1
- (b)1 और 3
- (c)3 और 4
- (d)2 और 4
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) 1 और 3 — चारों कथनों को अलग-अलग परखने पर कथन 1 और कथन 3 सही निकलते हैं और कथन 2 तथा कथन 4 ग़लत।
कथन 1 सही है। एसएसडी में कोई घूमने वाला भाग होता ही नहीं। वह आँकड़े फ़्लैश स्मृति की कोशिकाओं में विद्युत रूप से रखता है, इसलिए न कोई चक्रिका घूमती है, न कोई भुजा इधर-उधर जाती है। एचडीडी में इसके विपरीत चुंबकीय चक्रिकाएँ एक निश्चित चाल से घूमती रहती हैं और पढ़ने-लिखने वाला शीर्ष उन पर आ-जा कर सही स्थान खोजता है। इसी अंतर से एसएसडी का पहुँच-समय बहुत घट जाता है — चुंबकीय चक्रिका में समय का बड़ा भाग शीर्ष के सही पथ पर पहुँचने और चक्रिका के घूमकर सही स्थान तक आने में जाता है, और एसएसडी में ये दोनों प्रतीक्षाएँ हैं ही नहीं।
कथन 2 ग़लत है, और वह ठीक उल्टी बात कहता है। जहाँ मोटर नहीं है, वहाँ चक्रिका घुमाने और शीर्ष हिलाने में लगने वाली ऊर्जा भी नहीं है। इसीलिए एसएसडी सामान्यतः एचडीडी से कम ऊर्जा खपत करती है, और यही कारण है कि पोर्टेबल मशीनों में उसे प्राथमिकता मिली।
कथन 3 सही है। जब रैम भर जाती है तो प्रचालन तंत्र द्वितीयक भंडारण के एक भाग को आभासी स्मृति की तरह काम में लाता है — कम उपयोग में आ रहे पृष्ठ वहाँ भेज देता है और ज़रूरत पड़ने पर वापस बुला लेता है। एसएसडी इस काम के लिए उपयुक्त है और एचडीडी की तुलना में कहीं तेज़, क्योंकि पृष्ठों की यह अदला-बदली बहुत-से छोटे-छोटे बिखरे हुए पाठनों की होती है, और ठीक यही वह स्थिति है जिसमें चुंबकीय चक्रिका सबसे अधिक पिछड़ती है।
कथन 4 ग़लत है। एसएसडी भंडारण की युक्ति है, प्रक्रमक नहीं; वह आँकड़े रखता है, उन पर गणना नहीं करता।
इस प्रश्न को हल करने का सबसे तेज़ रास्ता कूट-विकल्पों से चलना है, और यहाँ वह विशेष रूप से सुंदर बैठता है। कथन 4 स्पष्ट रूप से असंभव है — भंडारण प्रक्रमक का स्थान नहीं ले सकता — इसलिए हर वह विकल्प गिर जाता है जिसमें 4 है, यानी (c) और (d) एक साथ। शेष (a) और (b) में कथन 1 दोनों में है, इसलिए वह भी निर्णायक नहीं रहा। दोनों के बीच अंतर केवल कथन 3 का है। यानी पूरा प्रश्न सिमटकर एक ही प्रश्न रह जाता है — क्या एसएसडी को आभासी स्मृति की तरह उपयोग किया जा सकता है? उत्तर हाँ है, इसलिए (b)। जहाँ चार कथनों में से एक स्पष्ट रूप से असंगत हो, वहाँ यह रास्ता प्रायः दो विकल्प एक झटके में काट देता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1 — यह विकल्प केवल कथन 1 को स्वीकार करता है और कथन 3 को छोड़ देता है, जबकि कथन 3 भी सही है। आभासी स्मृति कोई विशेष प्रकार का उपकरण नहीं, प्रचालन तंत्र की एक व्यवस्था है : जब चल रहे प्रोग्रामों की माँग रैम की क्षमता से अधिक हो जाती है तो तंत्र द्वितीयक भंडारण के एक निश्चित भाग को स्मृति के विस्तार की तरह बरतने लगता है, और आँकड़े पृष्ठों के रूप में दोनों के बीच आते-जाते रहते हैं। यह काम पहले चुंबकीय चक्रिका पर होता था और अब एसएसडी पर होता है; बल्कि तेज़ पहुँच-समय के कारण एसएसडी इस काम में कहीं बेहतर सिद्ध होती है। इसीलिए 'केवल 1' अधूरा उत्तर है।
- (c)3 और 4 — यह विकल्प कथन 3 को तो ठीक पहचानता है, पर उसके साथ कथन 4 जोड़ देता है, जो श्रेणी की भूल है। एसएसडी द्वितीयक भंडारण है — उसका काम आँकड़े और प्रोग्राम स्थायी रूप से रखना है। प्रक्रमक का काम इससे बिलकुल अलग है : निर्देश लाना, उन्हें समझना, अंकगणितीय और तार्किक क्रियाएँ करना और परिणाम लौटाना। कोई भी भंडारण युक्ति यह नहीं कर सकती, चाहे वह कितनी भी तेज़ क्यों न हो। भ्रम शायद इसलिए बनता है कि तेज़ एसएसडी लगाने पर मशीन समग्र रूप से तेज़ लगने लगती है — पर वह गणना की गति नहीं, आँकड़ों की आपूर्ति की गति है।
- (d)2 और 4 — यह विकल्प दोनों ग़लत कथनों को एक साथ चुन लेता है। कथन 2 ऊर्जा-खपत के बारे में उल्टी बात कहता है : एसएसडी में मोटर और चलने वाले भाग न होने के कारण उसकी खपत सामान्यतः एचडीडी से कम रहती है, और यही कारण है कि लैपटॉप में उसके आने से बैटरी अधिक चलने लगी। कथन 4 भंडारण को प्रक्रमक बता देता है, जो अंगों की श्रेणी ही बदल देता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि यहाँ जो दोनों कथन ग़लत हैं, वे एक ही प्रकार की भूल पर टिके हैं — एसएसडी की तेज़ी को उसकी सीमा से आगे बढ़ाकर मान लेना।
अवधारणा
भंडारण की दोनों प्रौद्योगिकियों का भेद उनकी भौतिक बनावट से शुरू होता है। एचडीडी में आँकड़े चुंबकीय परत वाली चक्रिकाओं पर लिखे जाते हैं, जो लगातार एक निश्चित चाल से घूमती हैं; पढ़ने-लिखने वाला शीर्ष एक भुजा पर लगा रहता है और सही पथ पर जाकर प्रतीक्षा करता है कि वांछित भाग घूमकर उसके नीचे आ जाए। इसी यांत्रिक प्रतीक्षा से मिलीसेकंड का पहुँच-समय बनता है।
एसएसडी में कोई गति नहीं है। आँकड़े फ़्लैश स्मृति की कोशिकाओं में आवेश के रूप में रखे जाते हैं और किसी भी स्थान तक पहुँच लगभग एक जैसे, बहुत कम समय में हो जाती है। इससे तीन लाभ एक साथ मिलते हैं — गति, कम ऊर्जा-खपत और झटकों के प्रति सहनशीलता।
इसकी अपनी सीमा भी है : फ़्लैश कोशिका को सीमित बार ही लिखा जा सकता है, इसलिए नियंत्रक लेखन को पूरे माध्यम पर फैलाता रहता है, जिसे क्षय-समकरण कहते हैं।
अंत में एक बात स्पष्ट रखिए : रैम और एसएसडी दोनों स्मृति कहलाते हैं, पर रैम प्राथमिक और अस्थायी है, जबकि एसएसडी द्वितीयक और स्थायी। आभासी स्मृति इन्हीं दोनों के बीच का पुल है।
यह इस पृष्ठ का एकमात्र कथन-सूची वाला प्रश्न है, और इसकी रचना पर ध्यान देना चाहिए : चार क्रमांकित कथन हैं, हर कथन दंड पर समाप्त होता है, और नीचे कूट-पंक्ति है। ऐसे प्रश्न में विकल्प-समुच्चय देखकर अनुमान लगाना ख़तरनाक है; हर कथन का अलग निर्णय करना ही सुरक्षित रास्ता है।
यहाँ वह रास्ता जल्दी भी है। कथन 4 पहली दृष्टि में ही गिर जाता है, क्योंकि वह भंडारण को प्रक्रमक बता देता है, और उसके गिरते ही विकल्प (c) तथा (d) दोनों निकल जाते हैं। इसके बाद केवल यह तय करना बचता है कि कथन 3 सही है या नहीं, और वही (a) तथा (b) के बीच निर्णय कर देता है।
विषय की दृष्टि से यह खंड परीक्षा में लगातार आता है, क्योंकि भंडारण और स्मृति के अंगों को गड्डमड्ड कर देना बहुत आम भूल है। हिन्दी स्तंभ में यहाँ सभी संक्षेप देवनागरी में लिखे गए हैं — एसएसडी, एचडीडी और रैम — जबकि इसी पेपर के अगले प्रश्न में वही संक्षेप कोष्ठक में रोमन लिपि के साथ आते हैं; पुस्तिका इस मामले में एकरूप नहीं है।
मुख्य तथ्य
- एसएसडी में कोई घूमने वाला भाग नहीं होता; वह आँकड़े फ़्लैश स्मृति की कोशिकाओं में विद्युत आवेश के रूप में रखता है।
- एचडीडी में चुंबकीय चक्रिकाएँ घूमती हैं और पढ़ने-लिखने वाला शीर्ष उन पर आ-जा कर स्थान खोजता है; इसी यांत्रिक प्रतीक्षा से उसका पहुँच-समय बढ़ता है।
- मोटर और चलने वाले भागों के अभाव में एसएसडी सामान्यतः एचडीडी से कम ऊर्जा खपत करती है और झटकों के प्रति अधिक सहनशील होती है।
- आभासी स्मृति प्रचालन तंत्र की व्यवस्था है, जिसमें रैम कम पड़ने पर द्वितीयक भंडारण का एक भाग स्मृति के विस्तार की तरह प्रयोग होता है।
- फ़्लैश कोशिका को सीमित बार ही लिखा जा सकता है, इसलिए नियंत्रक लेखन को पूरे माध्यम पर फैलाता रहता है, जिसे क्षय-समकरण कहते हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- एसएसडी की तेज़ी को उसकी सीमा से आगे बढ़ाकर मान लेना; कथन 2 और कथन 4 दोनों इसी एक भूल पर टिके हैं, एक ऊर्जा की ओर से और दूसरा प्रक्रमण की ओर से।
- आभासी स्मृति को कोई विशेष उपकरण समझ लेना; वह प्रचालन तंत्र की एक व्यवस्था है, जिसमें द्वितीयक भंडारण का एक भाग स्मृति के विस्तार की तरह बरता जाता है।
- ऊर्जा-खपत की दिशा उलट देना; घूमने वाले भाग न होने के कारण एसएसडी सामान्यतः एचडीडी से कम ऊर्जा खपत करती है, अधिक नहीं।
- कूट-विकल्पों का सहारा न लेना; कथन 4 स्पष्ट रूप से असंभव है, इसलिए उसे रखने वाले दोनों विकल्प एक झटके में गिर जाते हैं और प्रश्न सिमटकर केवल कथन 3 पर आ जाता है।
कथन-सूची वाले प्रश्न इस पेपर की सबसे आम रचना हैं, और उनका सामना करने का एक ही भरोसेमंद तरीक़ा है : विकल्पों को ढककर हर कथन पर अलग-अलग सही या ग़लत का निशान लगाइए, और उसके बाद ही कूट-पंक्ति देखिए।
इससे एक व्यावहारिक लाभ भी मिलता है। प्रायः कोई एक कथन ऐसा होता है जो स्पष्ट रूप से ग़लत है, और उसे पहचानते ही आधे विकल्प कट जाते हैं। यहाँ कथन 4 वही भूमिका निभाता है।
इसी विषय के दूसरे रूप भी लौटते हैं : अंगों को गति या क्षमता के क्रम में रखवाना, किसी अंग का काम पूछना, या दो प्रौद्योगिकियों की तुलना पर कथन देना। तीनों में वही मूल समझ काम आती है — कौन-सा अंग गणना करता है, कौन आँकड़े अस्थायी रखता है, और कौन स्थायी रूप से सहेजता है।
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आभासी स्मृति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है ?
- (a)यह रैम का एक विशेष प्रकार है, जो मदरबोर्ड पर अलग से लगाया जाता है
- (b)यह प्रचालन तंत्र की व्यवस्था है, जिसमें रैम कम पड़ने पर द्वितीयक भंडारण का एक भाग स्मृति के विस्तार की तरह प्रयोग होता है
- (c)यह प्रक्रमक के भीतर की सबसे तेज़ स्मृति है
- (d)यह केवल तभी बनती है जब कंप्यूटर इंटरनेट से जुड़ा हो
उत्तर(b) यह प्रचालन तंत्र की व्यवस्था है, जिसमें रैम कम पड़ने पर द्वितीयक भंडारण का एक भाग स्मृति के विस्तार की तरह प्रयोग होता है — कम उपयोग में आ रहे पृष्ठ वहाँ भेज दिए जाते हैं और आवश्यकता पड़ने पर वापस बुला लिए जाते हैं।