चैट जीपीटी के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है ?
- (a)यह लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) पर आधारित है
- (b)यह एक पूर्वानुमानित (प्रेडिक्टिव) कृत्रिम बुद्धिमत्ता है
- (c)यह एक उच्च स्तरीय वैज्ञानिक कंप्यूटर भाषा है
- (d)यह एक चैटिंग सॉफ्टवेयर है
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) यह लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) पर आधारित है — चैट जीपीटी एक बड़े भाषा-मॉडल के ऊपर खड़ी संवाद-प्रणाली है, और यही उसकी सबसे सटीक पहचान है।
नाम स्वयं यह बता देता है। जीपीटी का विस्तार Generative Pre-trained Transformer है : 'जनरेटिव' यानी वह नया पाठ रचता है, 'प्री-ट्रेन्ड' यानी उसे पहले ही विशाल पाठ-सामग्री पर प्रशिक्षित किया जा चुका है, और 'ट्रांसफ़ॉर्मर' उस तंत्रिका-जाल की वास्तुकला का नाम है जिस पर यह सब टिका है। ट्रांसफ़ॉर्मर की मूल युक्ति 'ध्यान' कहलाती है — मॉडल हर शब्द को गढ़ते समय पिछले पूरे प्रसंग के किस-किस अंश पर कितना भार दे, यह स्वयं सीख लेता है। यही युक्ति भाषा-मॉडलों को उस लंबे प्रसंग को सँभालने योग्य बनाती है जो पहले की वास्तुकलाओं के बस में नहीं था।
'बड़ा भाषा-मॉडल' में 'बड़ा' शब्द दो चीज़ों की ओर संकेत करता है — प्रशिक्षण में लगी पाठ-सामग्री की विशाल मात्रा, और मॉडल के भीतर सीखे गए प्राचलों की संख्या, जो अरबों में होती है। मॉडल का काम मूलतः यह सीखना है कि किसी शब्द-क्रम के बाद कौन-सा अंश आने की कितनी संभावना है; इसी क्षमता को बार-बार लगाकर वह पूरा उत्तर रच देता है। ध्यान रहे कि वह इकाई पूरा शब्द नहीं, प्रायः शब्द का एक टुकड़ा होती है, जिसे टोकन कहते हैं — इसीलिए ऐसे मॉडल उन शब्दों को भी सँभाल लेते हैं जो उन्होंने कभी पूरे रूप में नहीं देखे।
चैट का रूप इसके ऊपर की परत है। पहले चरण में मॉडल केवल अगला अंश अनुमानित करना सीखता है, और उस अवस्था में वह संवाद नहीं कर सकता, केवल पाठ आगे बढ़ा सकता है। इसके बाद उसे दूसरे चरण में और प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि वह निर्देश माने, संवाद के ढंग में उत्तर दे और पिछली बातें याद रखे; इसमें मनुष्यों की पसंद-नापसंद से मिली प्रतिपुष्टि का उपयोग होता है। इसलिए 'चैट' उसका मुखपृष्ठ है और भाषा-मॉडल उसका आधार।
प्रश्न आधार ही पूछ रहा है, और यही (a) को चुनने का निर्णायक कारण है। शेष तीनों विकल्प या तो प्रणाली की श्रेणी बदल देते हैं या उसके अग्रभाग को उसकी पहचान मान बैठते हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)यह एक पूर्वानुमानित (प्रेडिक्टिव) कृत्रिम बुद्धिमत्ता है — यह इस प्रश्न का सबसे विवाद-योग्य विकल्प है, और इसे टालना नहीं चाहिए। तंत्र के स्तर पर यह कथन सच है : भाषा-मॉडल का पूरा प्रशिक्षण-लक्ष्य ही अगला अंश अनुमानित करना है, और उत्तर देते समय भी वह एक-एक टोकन का अनुमान लगाकर ही वाक्य बढ़ाता है। जो अभ्यर्थी यह कहता है कि 'यह तो पूर्वानुमान ही कर रही है', वह मशीन के भीतर की बात ठीक-ठीक कह रहा है। भेद शब्दावली का है। प्रौद्योगिकी में 'पूर्वानुमानित कृत्रिम बुद्धिमत्ता' एक निश्चित श्रेणी का नाम है, और वह श्रेणी 'जनन-आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता' के सामने रखकर बनाई गई है। पूर्वानुमानित प्रणालियाँ आँकड़ों से कोई मान या वर्ग निकालती हैं — माँग का पूर्वानुमान, ऋण-जोखिम का अंक, रोग की संभावना का वर्गीकरण; उनका उत्पाद एक संख्या या एक लेबल होता है। जनन-आधारित प्रणालियों का उत्पाद नई रची हुई सामग्री होती है। चैट जीपीटी दूसरी श्रेणी में आती है, और उसके अपने नाम का पहला अक्षर, जनरेटिव, यही घोषित करता है। निर्णायक तर्क इससे भी सरल है, और वह विकल्प-पत्र की बनावट से निकलता है। प्रश्न एक ही सही कथन माँगता है। अब यदि (b) को उसके तांत्रिक अर्थ में सही मान लिया जाए, तो (a) भी सही ही रहेगा — दोनों एक-दूसरे को काटते नहीं, क्योंकि एक भाषा-मॉडल पर आधारित होना और अगला टोकन अनुमानित करना एक ही वस्तु के दो वर्णन हैं। तब प्रश्न के दो उत्तर बन जाते, जो एकल-उत्तर वाले प्रश्न में हो नहीं सकता। इसलिए वही पाठ लेना पड़ता है जिस पर ठीक एक विकल्प बचता है — और उस पाठ में 'पूर्वानुमानित' श्रेणी का नाम है, तंत्र का वर्णन नहीं। जहाँ दो विकल्प एक साथ सही ठहरते हों, वहाँ वह पाठ ही ग़लत है, विकल्प नहीं।
- (c)यह एक उच्च स्तरीय वैज्ञानिक कंप्यूटर भाषा है — यह विकल्प चैट जीपीटी को प्रोग्रामिंग भाषा बता देता है, जो श्रेणी की भूल है। उच्च स्तरीय वैज्ञानिक कंप्यूटर भाषा से आशय फ़ोरट्रान या ऐसी ही किसी भाषा से होता है, जिसमें मनुष्य निर्देश लिखता है और संकलक उन्हें मशीन के लिए अनूदित करता है। भाषा स्वयं कुछ नहीं करती; वह लिखने का माध्यम है। चैट जीपीटी इसके ठीक उलट एक तैयार प्रणाली है, जो पहले से प्रशिक्षित मॉडल चलाकर उत्तर देती है। भ्रम इसलिए बनता है कि वह प्रोग्राम लिख भी देती है — पर प्रोग्राम लिख देना और स्वयं प्रोग्रामिंग भाषा होना दो अलग बातें हैं।
- (d)यह एक चैटिंग सॉफ्टवेयर है — 'चैटिंग सॉफ़्टवेयर' कहना उस औज़ार का नाम उसकी खिड़की के आधार पर रख देना है। सामान्य चैट सॉफ़्टवेयर का काम दो मनुष्यों के बीच संदेश पहुँचाना है; वह स्वयं कोई सामग्री नहीं रचता, केवल भेजता और दिखाता है। यहाँ दूसरी ओर कोई दूसरा मनुष्य है ही नहीं — उत्तर मॉडल स्वयं रचता है। संवाद का रूप केवल उपयोगकर्ता की सुविधा के लिए चुना गया अग्रभाग है, और वही रूप हटाकर उसी मॉडल को किसी अनुप्रयोग के भीतर से भी चलाया जा सकता है। इसलिए यह विकल्प सतह का वर्णन करता है, आधार का नहीं, और प्रश्न आधार पूछ रहा है।
अवधारणा
बड़े भाषा-मॉडल की जड़ में ट्रांसफ़ॉर्मर नाम की तंत्रिका-जाल वास्तुकला है, जो सन् 2017 में प्रस्तुत हुई थी। उसकी मुख्य युक्ति 'अवधान' कहलाती है : मॉडल किसी शब्द का अर्थ तय करते समय वाक्य के दूसरे शब्दों को अलग-अलग भार देकर देखता है, जिससे दूर बैठे शब्दों का संबंध भी पकड़ में आ जाता है।
प्रशिक्षण दो चरणों में होता है। पहले चरण में मॉडल को विशाल पाठ-सामग्री पर यह सिखाया जाता है कि किसी अधूरे वाक्य का अगला अंश क्या होना चाहिए; इसी से भाषा की संरचना, तथ्य और शैली उसके प्राचलों में उतर आते हैं। दूसरे चरण में उसे निर्देश मानने और संवाद के ढंग में उत्तर देने के लिए अलग से प्रशिक्षित किया जाता है, जिसमें मनुष्यों की प्रतिपुष्टि का उपयोग होता है।
यहीं से इस प्रौद्योगिकी की सीमाएँ भी निकलती हैं। मॉडल संभाव्यता पर चलता है, सत्यापन पर नहीं, इसलिए वह आत्मविश्वास से ग़लत तथ्य भी गढ़ सकता है — इसे प्रायः 'मतिभ्रम' कहा जाता है। इसी कारण उसके उत्तरों को स्रोत से मिलाना आवश्यक माना जाता है।
चैट जीपीटी नवंबर 2022 में सार्वजनिक हुई और उसके बाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता सामान्य चर्चा का विषय बन गई। परीक्षा की दृष्टि से इसका महत्व दो कारणों से है : एक, यह प्रौद्योगिकी के सामयिक प्रश्नों का स्वाभाविक विषय है; और दो, इसके साथ जुड़े शब्द — बड़ा भाषा-मॉडल, जनन-आधारित बुद्धिमत्ता, ट्रांसफ़ॉर्मर, प्राचल — अब सरकारी नीति-पत्रों तक में आने लगे हैं।
इससे जुड़े नीतिगत प्रश्न भी उठे हैं, जिन पर आगे प्रश्न बन सकते हैं : आँकड़ों की गोपनीयता, प्रशिक्षण-सामग्री पर प्रतिलिप्यधिकार, रोज़गार पर प्रभाव, और उत्तरों की विश्वसनीयता। भारत में इस क्षेत्र से जुड़ी चर्चा राष्ट्रीय स्तर की कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति और उससे जुड़ी पहलों के साथ चलती है।
प्रश्न के हिन्दी स्तंभ में उत्पाद का नाम पूरी तरह देवनागरी में, दो शब्दों में लिखा गया है, और विकल्प (a) में संक्षेप भी देवनागरी में ही कोष्ठक में दिया गया है — इस पृष्ठ पर कहीं रोमन लिपि नहीं है।
मुख्य तथ्य
- चैट जीपीटी बड़े भाषा-मॉडल पर आधारित संवाद-प्रणाली है; जीपीटी का विस्तार Generative Pre-trained Transformer है।
- 'बड़ा' शब्द दो बातों की ओर संकेत करता है — प्रशिक्षण में लगी विशाल पाठ-सामग्री, और मॉडल के भीतर अरबों की संख्या में सीखे गए प्राचल।
- इसकी वास्तुकला ट्रांसफ़ॉर्मर है, जो सन् 2017 में प्रस्तुत हुई; उसकी मुख्य युक्ति 'अवधान' है, जिससे वाक्य में दूर बैठे शब्दों का संबंध भी पकड़ में आता है।
- जनन-आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता नया पाठ, चित्र या ध्वनि रचती है, जबकि पूर्वानुमानित कृत्रिम बुद्धिमत्ता आँकड़ों से कोई मान या वर्ग निकालती है — दोनों अलग श्रेणियाँ हैं।
- मॉडल संभाव्यता पर चलता है, सत्यापन पर नहीं, इसलिए वह आत्मविश्वास से ग़लत तथ्य भी गढ़ सकता है; इसी दोष को मतिभ्रम कहा जाता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- चैट जीपीटी को इसलिए 'पूर्वानुमानित' मान लेना कि मॉडल अगला अंश अनुमानित करता है; तंत्र के स्तर पर यह सच है, पर श्रेणी के नाम के रूप में वह जनन-आधारित है।
- संवाद की खिड़की देखकर उसे साधारण चैट सॉफ़्टवेयर समझ लेना; वहाँ दूसरी ओर कोई मनुष्य नहीं होता और उत्तर मॉडल स्वयं रचता है।
- प्रोग्राम लिख देने की क्षमता से यह निष्कर्ष निकालना कि वह स्वयं कोई प्रोग्रामिंग भाषा है; प्रोग्राम लिखना और लिखने का माध्यम होना दो अलग बातें हैं।
- एकल-उत्तर वाले प्रश्न में दो विकल्पों को एक साथ सही मान बैठना; जहाँ ऐसा हो वहाँ पाठ ही ग़लत है, और वही पाठ लेना पड़ता है जिस पर ठीक एक विकल्प बचता है।
प्रौद्योगिकी के सामयिक प्रश्नों में यह रचना बहुत आम है : कोई परिचित उत्पाद या सेवा नामकर पूछना कि वह किस श्रेणी की है। विकल्पों में एक सही श्रेणी होती है और बाक़ी तीन ऐसी श्रेणियाँ, जो सतही समानता के कारण ठीक लगती हैं।
उत्तर तक पहुँचने का भरोसेमंद रास्ता यह पूछना है कि वस्तु 'है' क्या, न कि वह 'दिखती' कैसी है। यहाँ वह संवाद-खिड़की जैसी दिखती है, पर है एक बड़ा भाषा-मॉडल।
इसी विषय के दूसरे रूप भी आते हैं : किसी संक्षेप का विस्तार पूछना, जैसे एलएलएम या जीपीटी; किसी प्रौद्योगिकी को उसके उपयोग से जोड़ना; या कथन-सूची देकर हर कथन अलग-अलग परखवाना, जैसे 'यह प्रशिक्षण-सामग्री से सीखता है' और 'यह हर उत्तर किसी स्रोत से मिलाकर देता है' — जिनमें पहला सही है और दूसरा नहीं।
संबंधित PYQ
EPFO_APFC_2016_Q87A collection of programs that controls how the computer system runs and processes information is called
- (a) Compiler
- (b) Operating System
- (c) Linker
- (d) Assembler
उत्तर(b) Operating System
किसी परिचित तकनीकी वर्णन को उसकी सही श्रेणी से जोड़ने वाला प्रश्न — वही कौशल, जो यहाँ चैट जीपीटी की श्रेणी तय करने में लगता है।
EPFO_APFC_2016_Q78Which one of the following software applications would be the most appropriate for performing numerical and statistical calculations ?
- (a) Database
- (b) Spreadsheet
- (c) Graphics package
- (d) Document processor
उत्तर(b) Spreadsheet
किसी काम के लिए उपयुक्त सॉफ़्टवेयर वर्ग पहचानने वाला प्रश्न, जो औज़ार और उसके उद्देश्य का मेल परखता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
जनन-आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पूर्वानुमानित कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बीच सबसे मूल अंतर निम्नलिखित में से कौन-सा है ?
- (a)एक केवल अंग्रेज़ी में काम करती है और दूसरी सभी भाषाओं में
- (b)एक नया पाठ, चित्र या ध्वनि रचती है, जबकि दूसरी आँकड़ों से कोई मान या वर्ग निकालती है
- (c)एक इंटरनेट के बिना चलती है और दूसरी नहीं
- (d)एक में प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है और दूसरी में नहीं
उत्तर(b) एक नया पाठ, चित्र या ध्वनि रचती है, जबकि दूसरी आँकड़ों से कोई मान या वर्ग निकालती है — भेद उत्पाद का है : जनन-आधारित प्रणाली सामग्री रचती है, पूर्वानुमानित प्रणाली किसी परिणाम का आकलन या वर्गीकरण करती है।