कृत्रिम बुद्धिमत्ता में जटिल मॉडलों के प्रशिक्षण और परिनियोजन के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा वरीय है ?
- (a)केंद्रीय प्रक्रम एकक (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट)
- (b)ग्राफ़िक्स प्रोसेसिंग यूनिट
- (c)केवल पठनीय स्मृति (रीड ओनली मेमोरी)
- (d)सॉलिड स्टेट ड्राइव
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) ग्राफ़िक्स प्रोसेसिंग यूनिट — कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बड़े मॉडलों का प्रशिक्षण और परिनियोजन आज मुख्यतः इसी पर होता है, और कारण उसकी बनावट में है।
पहले विकल्पों को छाँट लेना उपयोगी है, क्योंकि चारों एक ही श्रेणी के नहीं हैं। प्रश्न ऐसी वस्तु माँग रहा है जो गणना करे। इनमें से केवल दो — केंद्रीय प्रक्रम एकक और ग्राफ़िक्स इकाई — प्रक्रमक हैं; शेष दो संचयन की युक्तियाँ हैं और गणना करती ही नहीं। इसलिए असली चुनाव पहले दो के बीच है, और वहीं यह प्रश्न तय होता है।
तंत्रिका-जाल का प्रशिक्षण भीतर से देखने पर लगभग पूरा का पूरा आव्यूह-गुणन है। हर परत में हज़ारों-लाखों संख्याओं को भारों से गुणा करके जोड़ना पड़ता है, और महत्वपूर्ण बात यह है कि ये सब गुणा-जोड़ एक-दूसरे पर निर्भर नहीं हैं — इन्हें एक साथ किया जा सकता है।
ठीक यही काम ग्राफ़िक्स इकाई के लिए बनी थी। परदे पर चित्र बनाने में भी लाखों बिंदुओं पर एक ही प्रकार की गणना एक साथ करनी पड़ती है, इसलिए इस इकाई में कुछ शक्तिशाली कोर नहीं, बल्कि हज़ारों छोटे और सरल कोर रखे जाते हैं, जो एक ही निर्देश को अलग-अलग आँकड़ों पर एक साथ चलाते हैं। कंप्यूटर वास्तुकला में इस ढंग को 'एक निर्देश, अनेक आँकड़े' कहा जाता है। जब शोधकर्ताओं ने देखा कि तंत्रिका-जाल की गणना भी ठीक इसी आकार की है, तो यही इकाई इस काम का स्वाभाविक औज़ार बन गई।
अंतर को इस तरह देखिए तो वह और स्पष्ट हो जाता है। केंद्रीय प्रक्रम एकक कुछ बहुत तेज़ धावकों जैसा है, जिनमें से हर एक जटिल रास्ता स्वयं तय कर सकता है; ग्राफ़िक्स इकाई हज़ारों साधारण मज़दूरों जैसी है, जो सब मिलकर एक ही काम एक साथ करते हैं। यदि काम क्रमिक हो — जहाँ अगला चरण पिछले के परिणाम पर टिका हो — तो पहला डिज़ाइन जीतता है। यदि काम एक ही प्रकार के लाखों स्वतंत्र टुकड़ों में बँट जाता हो, तो दूसरा। तंत्रिका-जाल दूसरे प्रकार का काम है।
इसके साथ एक और कारण जुड़ता है : इन इकाइयों की स्मृति-चौड़ाई बहुत अधिक होती है, इसलिए वे बड़े आँकड़ा-खंडों को तेज़ी से भीतर-बाहर ले जा सकती हैं। हज़ारों कोर बेकार रह जाएँगे यदि उन तक आँकड़े पर्याप्त तेज़ी से न पहुँचें, इसलिए ये दोनों गुण साथ-साथ चलते हैं। गणना की समांतरता और आँकड़े की तेज़ आवाजाही — इन्हीं दो कारणों से यह विकल्प बाक़ी तीनों से आगे निकल जाता है।
ध्यान रहे कि प्रश्न 'वरीय' पूछ रहा है, 'एकमात्र संभव' नहीं। बड़े मॉडल केंद्रीय प्रक्रम एकक पर भी चलाए जा सकते हैं; बात केवल यह है कि वहाँ वही काम कई गुना अधिक समय लेगा।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केंद्रीय प्रक्रम एकक (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट) — केंद्रीय प्रक्रम एकक कंप्यूटर का सामान्य-प्रयोजन मस्तिष्क है और वह हर काम कर सकता है, इसलिए यह विकल्प बिलकुल असंभव नहीं लगता — बड़े मॉडल इस पर चलाए भी जा सकते हैं, बस बहुत धीरे। भेद बनावट का है। इसमें कुछ ही कोर होते हैं, पर हर कोर शक्तिशाली और जटिल होता है, क्योंकि उसे शाखा-निर्णय, क्रमिक तर्क और नियंत्रण का काम करना है। यह डिज़ाइन उन कामों के लिए श्रेष्ठ है जिनमें अगला चरण पिछले चरण के परिणाम पर निर्भर हो। तंत्रिका-जाल की गणना उलटी प्रकृति की है — लाखों स्वतंत्र गुणा-जोड़ — और वहाँ कुछ शक्तिशाली कोर हज़ारों सरल कोरों से पिछड़ जाते हैं। प्रश्न भी 'वरीय' पूछ रहा है, 'संभव' नहीं।
- (c)केवल पठनीय स्मृति (रीड ओनली मेमोरी) — केवल पठनीय स्मृति इस प्रश्न के दायरे से ही बाहर है, क्योंकि वह कोई प्रक्रम इकाई है ही नहीं। उसका काम ऐसी सामग्री सहेजना है जो सामान्य उपयोग में बदली न जाए — जैसे मशीन चालू होते समय चलने वाला आरंभिक प्रोग्राम। वह गणना नहीं करती, केवल स्थायी रूप से रखे हुए आँकड़े या निर्देश देती है, और उसकी क्षमता भी बहुत सीमित होती है। मॉडल के प्रशिक्षण में लाखों बार गुणा और जोड़ करना पड़ता है, और यह काम किसी संचयन युक्ति से हो ही नहीं सकता। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह विकल्प और विकल्प (d) दोनों संचयन की श्रेणी के हैं, जबकि प्रश्न प्रक्रमण की श्रेणी में उत्तर माँग रहा है।
- (d)सॉलिड स्टेट ड्राइव — सॉलिड स्टेट ड्राइव तेज़ है, पर तेज़ भंडारण है, प्रक्रमक नहीं। उसका काम आँकड़े सहेजना और उन्हें माँगे जाने पर देना है; कोई गणित वह नहीं करता। प्रशिक्षण की प्रक्रिया में उसकी भूमिका सचमुच होती है — प्रशिक्षण-सामग्री उसी से पढ़ी जाती है, और धीमी डिस्क होने पर प्रक्रमक को आँकड़ों की प्रतीक्षा करनी पड़ती है — पर यह सहायक भूमिका है, केंद्रीय नहीं। तेज़ भंडारण गणना की गति नहीं बढ़ाता, केवल गणना को भूखा रहने से बचाता है। इसीलिए प्रशिक्षण की क्षमता ग्राफ़िक्स इकाइयों की संख्या से नापी जाती है, ड्राइव की गति से नहीं।
अवधारणा
कंप्यूटर की दो प्रमुख प्रक्रम इकाइयों का भेद उनके उद्देश्य से निकलता है, और वही भेद इस प्रश्न का उत्तर तय करता है।
केंद्रीय प्रक्रम एकक विलंब घटाने के लिए बना है : वह चाहता है कि एक कठिन काम जितनी जल्दी हो सके पूरा हो जाए। इसलिए उसमें थोड़े पर बहुत सक्षम कोर होते हैं, बड़ी अनुप्रस्थ स्मृति होती है, और शाखा-पूर्वानुमान जैसी जटिल युक्तियाँ होती हैं, जो क्रमिक और निर्णय-भरे काम में सहायक हैं।
ग्राफ़िक्स प्रक्रम एकक निर्गम बढ़ाने के लिए बना है : वह चाहता है कि एक ही प्रकार के लाखों सरल काम एक साथ निपट जाएँ। इसलिए उसमें हज़ारों छोटे कोर होते हैं और स्मृति की चौड़ाई बहुत अधिक रखी जाती है।
तंत्रिका-जाल का गणित दूसरी श्रेणी में आता है। एक परत का निर्गम निकालना आव्यूह-गुणन है, और आव्यूह-गुणन के भीतर के सारे गुणनफल एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं। इसीलिए इस क्षेत्र की प्रगति के साथ-साथ विशेष रूप से इसी काम के लिए बने त्वरक भी बनने लगे हैं, जो उसी सिद्धांत को और आगे ले जाते हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता की वर्तमान लहर तीन चीज़ों के एक साथ आने से बनी है : विशाल आँकड़ा, बेहतर कलन-विधियाँ, और सस्ती समांतर गणना-शक्ति। तीसरी चीज़ का श्रेय बड़ी हद तक ग्राफ़िक्स इकाइयों को जाता है, जो मूलतः खेल और चित्रण के लिए बनी थीं और बाद में शोध के काम आ गईं।
इसी कारण यह विषय अब केवल प्रौद्योगिकी का नहीं रह गया। इन इकाइयों की आपूर्ति, उनका निर्यात-नियंत्रण, और देशों की अपनी गणना-क्षमता खड़ी करने की होड़ अब आर्थिक और सामरिक चर्चा का हिस्सा है। भारत में भी राष्ट्रीय स्तर पर साझा गणना-क्षमता खड़ी करने की पहल इसी संदर्भ में आती है।
प्रश्न की रचना पर भी ध्यान दीजिए। चार विकल्पों में से दो प्रक्रम इकाइयाँ हैं और दो संचयन युक्तियाँ। यह असंतुलन स्वयं मार्ग दिखा देता है : पहले श्रेणी छाँटिए, फिर बची हुई दो में से बनावट के आधार पर चुनिए। हिन्दी स्तंभ में विकल्प (a) और (c) हिन्दी पद के बाद कोष्ठक में देवनागरी लिप्यंतरण देते हैं, जबकि (b) और (d) केवल लिप्यंतरण हैं।
मुख्य तथ्य
- ग्राफ़िक्स प्रक्रम एकक में हज़ारों छोटे कोर होते हैं, जो एक ही निर्देश को अनेक आँकड़ों पर एक साथ चलाते हैं; यही समांतरता तंत्रिका-जाल की गणना के अनुकूल है।
- तंत्रिका-जाल का प्रशिक्षण मुख्यतः आव्यूह-गुणन है, और उसके भीतर के गुणनफल एक-दूसरे से स्वतंत्र होते हैं, इसलिए उन्हें एक साथ किया जा सकता है।
- केंद्रीय प्रक्रम एकक में थोड़े पर शक्तिशाली कोर होते हैं और वह क्रमिक, निर्णय-भरे कामों के लिए बना है; इसीलिए वह इस काम में धीमा पड़ता है।
- ग्राफ़िक्स इकाइयों की स्मृति-चौड़ाई बहुत अधिक होती है, जिससे बड़े आँकड़ा-खंड तेज़ी से भीतर-बाहर आ जा सकते हैं।
- केवल पठनीय स्मृति और सॉलिड स्टेट ड्राइव दोनों संचयन की श्रेणी में आते हैं और कोई गणना नहीं करते; तेज़ भंडारण गणना को भूखा रहने से बचाता है, तेज़ नहीं करता।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- संचयन युक्ति को प्रक्रम इकाई मान लेना; केवल पठनीय स्मृति और सॉलिड स्टेट ड्राइव दोनों गणना करते ही नहीं, इसलिए वे इस प्रश्न के दायरे से ही बाहर हैं।
- 'वरीय' शब्द की अनदेखी करके यह तर्क देना कि केंद्रीय प्रक्रम एकक पर भी मॉडल चलाया जा सकता है; संभव होना और उपयुक्त होना अलग बातें हैं, और प्रश्न दूसरी बात पूछ रहा है।
- तेज़ भंडारण को गणना की गति का पर्याय मान लेना; वह केवल आँकड़ों की आपूर्ति सुधारता है, यानी गणना को भूखा रहने से बचाता है, उसे तेज़ नहीं करता।
- कोर की शक्ति और कोर की संख्या को एक ही गुण समझ लेना; तंत्रिका-जाल की गणना लाखों स्वतंत्र टुकड़ों में बँटती है, इसलिए वहाँ हज़ारों सरल कोर कुछ शक्तिशाली कोरों से आगे निकल जाते हैं।
कंप्यूटर के अंगों पर प्रश्न इस परीक्षा में लगातार आते हैं और उनका सबसे आम रूप वर्गीकरण का है : कोई काम बताकर पूछना कि उसके लिए कौन-सा अंग उपयुक्त है, या कोई अंग बताकर उसका काम पूछना।
ऐसे प्रश्नों में सबसे तेज़ रास्ता श्रेणी से छाँटने का है। पहले देखिए कि प्रश्न प्रक्रमण की बात कर रहा है या संचयन की; फिर विकल्पों को इन्हीं दो खानों में बाँट दीजिए। यहाँ ऐसा करते ही आधे विकल्प निकल जाते हैं और निर्णय दो के बीच सिमट आता है।
दूसरा रूप स्मृति के पदानुक्रम का है, जिसमें रजिस्टर, कैश, मुख्य स्मृति और द्वितीयक भंडारण को गति या स्थान के क्रम में रखवाया जाता है। तीसरा रूप संक्षेपों का विस्तार पूछने का है। तीनों के लिए एक ही तैयारी काम आती है — हर अंग को उसके उद्देश्य के साथ याद रखना, केवल नाम के साथ नहीं।
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- (a)क्योंकि उसकी घड़ी की आवृत्ति सदैव अधिक होती है
- (b)क्योंकि उसमें हज़ारों सरल कोर होते हैं, जो परस्पर स्वतंत्र गुणा-जोड़ एक साथ कर सकते हैं
- (c)क्योंकि वह आँकड़ों को स्थायी रूप से सहेज लेता है
- (d)क्योंकि वह बिना किसी प्रोग्राम के स्वयं सीख जाता है
उत्तर(b) क्योंकि उसमें हज़ारों सरल कोर होते हैं, जो परस्पर स्वतंत्र गुणा-जोड़ एक साथ कर सकते हैं — तंत्रिका-जाल की गणना आव्यूह-गुणन है, जिसके भीतर के गुणनफल एक-दूसरे पर निर्भर नहीं होते, इसलिए वहाँ समांतरता सीधे लाभ देती है।