निम्नलिखित में से कौन-सा ऐमीन का प्रमुख व्यापारिक (व्यावसायिक) उपयोग है ?
- (a)विस्फोटकों का विकास
- (b)औषधियों और तंतुओं का संश्लेषण
- (c)बैटरियों का विकास
- (d)स्टेम कोशिका रोगोपचार (स्टेम सेल थेरेपी)
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) औषधियों और तंतुओं का संश्लेषण — ऐमीन का सबसे बड़ा व्यापारिक उपयोग यही दो क्षेत्र हैं, और दोनों का कारण एक ही है : ऐमीन का नाइट्रोजन दूसरे अणुओं से जुड़ने का सुविधाजनक स्थान देता है।
औषधि उद्योग की ओर देखिए तो आधुनिक दवाओं का बहुत बड़ा भाग ऐमीन समूह लिए हुए है। प्रकृति से मिलने वाले क्षाराभ — जैसे मॉर्फ़ीन, कुनैन और निकोटीन — ऐमीन ही हैं, और संश्लेषित दवाओं में सल्फ़ा औषधियाँ, प्रतिहिस्टामिन तथा अनेक हृदय और तंत्रिका-तंत्र की दवाएँ इसी समूह पर टिकी हैं। कारण यह है कि नाइट्रोजन पर बचा एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म अणु को क्षारीय बनाता है। इसका एक बहुत व्यावहारिक परिणाम है : क्षारीय दवा को अम्ल से मिलाकर उसका लवण बना लिया जाता है, और वह लवण मूल अणु से कहीं अधिक जल में घुलनशील तथा भंडारण में स्थिर होता है। दवाओं के नामों के साथ लगा 'हाइड्रोक्लोराइड' इसी का चिह्न है, और वह चिह्न लगभग हमेशा किसी ऐमीन की उपस्थिति बताता है।
तंतु उद्योग की ओर देखिए तो नायलॉन का उदाहरण सबसे स्पष्ट है। नायलॉन 6,6 दो अणुओं के जुड़ने से बनता है — एक ऐडिपिक अम्ल और दूसरा हेक्सामेथिलीन डाइऐमीन, यानी दो सिरों पर ऐमीन समूह वाला अणु। दोनों के सिरों पर दो-दो क्रियात्मक समूह होने के कारण शृंखला अनिश्चित लंबाई तक बढ़ती जाती है : ऐमीन समूह अम्ल से जुड़कर ऐमाइड बंध बनाता है, और यही बंध बार-बार दोहराकर पॉलिएमाइड तंतु खड़ा करता है। नाम में आए दोनों छक्के इसी बात के हैं कि दोनों अणुओं में छह-छह कार्बन हैं। केवलार जैसे उच्च-शक्ति तंतु भी इसी परिवार से आते हैं, जहाँ ऐरोमैटिक डाइऐमीन का उपयोग होता है।
पैमाने का अंदाज़ा ऐनिलीन से मिलता है, जो सबसे बड़ी मात्रा में बनने वाली ऐरोमैटिक ऐमीन है और बहुलक, रंजक तथा रबड़-रसायन उद्योगों का आधार-रसायन है। कृत्रिम रंजकों का पूरा उद्योग ही उन्नीसवीं सदी में ऐनिलीन से आरंभ हुआ था।
विकल्पों की तुलना इसी बिंदु पर तय हो जाती है। चारों में केवल (b) ऐसे क्षेत्र नामित करता है जहाँ ऐमीन स्वयं कच्चा माल है, न कि कोई गौण सहायक। बैटरी का क्षेत्र धातुओं और विद्युत-अपघट्यों का है, स्टेम कोशिका चिकित्सा किसी अणु के संश्लेषण का प्रश्न ही नहीं, और विस्फोटकों का मुख्य मार्ग नाइट्रीकरण से जाता है, ऐमीन से नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)विस्फोटकों का विकास — विस्फोटकों का संबंध नाइट्रोजन के रसायन से है, इसलिए यह विकल्प पूरी तरह अजनबी नहीं लगता — और ईमानदारी से कहा जाए तो इसमें सच्चाई का एक अंश भी है। कुछ आधुनिक विस्फोटक सचमुच ऐमीन से बनते हैं : आरडीएक्स हेक्सामीन से बनाया जाता है, जो एक ऐमीन ही है, और उस वर्ग को नाइट्रैमीन कहा भी जाता है। इसलिए यह कहना ग़लत होगा कि ऐमीन का विस्फोटकों से कोई नाता नहीं। फिर भी उद्योग का मुख्य मार्ग यहाँ से नहीं जाता। परंपरागत और सबसे बड़ी मात्रा में बनने वाले विस्फोटक नाइट्रीकरण से बनते हैं, यानी किसी ऐरोमैटिक यौगिक या ग्लिसरॉल पर सीधे नाइट्रो समूह चढ़ाकर, जैसे टीएनटी और नाइट्रोग्लिसरीन। यह अभिक्रिया ऐमीन बनाने की नहीं, नाइट्रो समूह जोड़ने की है, और दोनों को एक मान लेना नाइट्रोजन वाले हर यौगिक को एक ही खाने में डाल देना होगा। ध्यान रहे कि रासायनिक दृष्टि से ये दोनों समूह लगभग विपरीत हैं — नाइट्रो समूह प्रबल इलेक्ट्रॉन-खींचक है और अणु को क्षारहीन कर देता है, जबकि ऐमीन समूह इलेक्ट्रॉन देता है और अणु को क्षारीय बनाता है। निर्णायक बात मात्रा की है, क्योंकि प्रश्न 'प्रमुख व्यापारिक उपयोग' पूछ रहा है, कोई भी उपयोग नहीं। विस्फोटक उद्योग की खपत औषधि, बहुलक, रंजक और पृष्ठसक्रियकारक उद्योगों की खपत के सामने बहुत छोटी है। जहाँ प्रश्न में 'प्रमुख' शब्द हो, वहाँ 'कहीं प्रयोग होता है या नहीं' पूछा ही नहीं जा रहा; पैमाना पूछा जा रहा है।
- (c)बैटरियों का विकास — बैटरियों का विकास मुख्यतः धातुओं, धातु-ऑक्साइडों और विद्युत-अपघट्यों का क्षेत्र है। सीसा-अम्ल बैटरी में सीसा और सल्फ्यूरिक अम्ल हैं, लिथियम-आयन कोशिका में लिथियम के यौगिक, ग्रैफ़ाइट और कार्बनिक विलायक। इस पूरे ढाँचे में ऐमीन की कोई केंद्रीय भूमिका नहीं है, और निश्चित रूप से वह उनका प्रमुख व्यापारिक उपयोग नहीं है। यह विकल्प इसलिए रखा गया लगता है कि आजकल बैटरी-प्रौद्योगिकी की चर्चा बहुत होती है और परिचित शब्द विश्वसनीय लगने लगता है। यही जाल इसी विकल्प-सूची में (a) के साथ दोहराया गया है, क्योंकि दोनों का ढाँचा एक जैसा है — 'किसी चीज़ का विकास'।
- (d)स्टेम कोशिका रोगोपचार (स्टेम सेल थेरेपी) — स्टेम कोशिका रोगोपचार जीव-विज्ञान और चिकित्सा का क्षेत्र है, कार्बनिक रसायन के किसी यौगिक-वर्ग का व्यापारिक उपयोग नहीं। उसमें रोगी के शरीर में विभेदन-क्षमता रखने वाली कोशिकाएँ प्रत्यारोपित की जाती हैं, और उसका आधार कोशिका-जीव विज्ञान है, किसी अणु का संश्लेषण नहीं। यह विकल्प कठिनाई इसलिए बढ़ाता है कि उसमें 'चिकित्सा' का संकेत है और सही उत्तर में भी 'औषधि' का, पर दोनों में अंतर मूल का है : औषधि-संश्लेषण में ऐमीन कच्चा माल है, जबकि स्टेम कोशिका चिकित्सा में कोई ऐमीन-आधारित उत्पाद केंद्र में नहीं होता।
अवधारणा
ऐमीन को समझने का सरलतम रास्ता अमोनिया से आरंभ करना है। अमोनिया में नाइट्रोजन के साथ तीन हाइड्रोजन जुड़े होते हैं। इनमें से एक, दो या तीनों हाइड्रोजन के स्थान पर कार्बन-समूह बैठा दिए जाएँ तो जो यौगिक बनते हैं वे क्रमशः प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीन कहलाते हैं।
नाइट्रोजन पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म बचा रहता है, और यही ऐमीन के लगभग सारे गुणों की जड़ है। उसी युग्म के कारण ऐमीन क्षारीय होते हैं और अम्ल से लवण बना लेते हैं; उसी से वे अन्य अणुओं पर आक्रमण करके नए बंध बनाते हैं; और उसी से वे जल के साथ हाइड्रोजन बंध बनाकर घुलनशील रहते हैं।
औद्योगिक दृष्टि से यह जुड़ने की क्षमता ही सबसे मूल्यवान है। दवा बनाने में अणु को टुकड़ों में जोड़ना पड़ता है, और ऐमीन समूह उस जोड़ का स्वाभाविक बिंदु बन जाता है। बहुलक बनाने में भी यही होता है : दो सिरों पर ऐमीन समूह रखने वाला अणु दो सिरों पर अम्ल समूह रखने वाले अणु से बारी-बारी जुड़कर लंबी शृंखला बना देता है, और वही शृंखला खींचकर तंतु बन जाती है।
कार्बनिक रसायन के प्रश्न इस परीक्षा में प्रायः किसी यौगिक-वर्ग का 'उपयोग' पूछते हैं, क्योंकि उससे यह जाँचा जा सकता है कि अभ्यर्थी ने केवल बनावट रटी है या उद्योग से उसका संबंध भी समझा है।
ऐमीन इस दृष्टि से अच्छा विषय है, क्योंकि उसका उपयोग रोज़ की चीज़ों तक पहुँचता है। नायलॉन की साड़ी और रस्सी, केवलार का बुलेटप्रूफ़ कपड़ा, कपड़ों के रंग, रबड़ के टायर में मिलाए जाने वाले रसायन, और दवा की लगभग हर पेटी — इन सबके पीछे कहीं न कहीं ऐमीन है।
इस प्रश्न के हिन्दी स्तंभ में एक बात ध्यान देने योग्य है। स्तंभ में 'व्यापारिक' के बाद कोष्ठक में 'व्यावसायिक' दिया गया है, यानी यह कोष्ठक हिन्दी से हिन्दी का पर्याय है, अंग्रेज़ी पद का लिप्यंतरण नहीं — जबकि इसी पृष्ठ पर बाक़ी कोष्ठक अंग्रेज़ी शब्द का देवनागरी रूप देते हैं। विकल्प (d) का कोष्ठक फिर उसी सामान्य ढंग का है।
मुख्य तथ्य
- ऐमीन अमोनिया के व्युत्पन्न हैं, जिनमें एक, दो या तीनों हाइड्रोजन के स्थान पर कार्बन-समूह जुड़ जाते हैं; इसी से प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीन बनते हैं।
- नाइट्रोजन पर बचा एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म ऐमीन को क्षारीय बनाता है और उसे दूसरे अणुओं से जुड़ने का सुविधाजनक स्थान देता है।
- आधुनिक औषधियों का बड़ा भाग ऐमीन समूह लिए हुए है, और प्रकृति के क्षाराभ जैसे मॉर्फ़ीन, कुनैन तथा निकोटीन भी ऐमीन ही हैं।
- नायलॉन 6,6 हेक्सामेथिलीन डाइऐमीन और एक द्वि-अम्ल के जुड़ने से बनता है; ऐमीन समूह ही ऐमाइड बंध बनाकर पॉलिएमाइड तंतु खड़ा करता है।
- परंपरागत विस्फोटक नाइट्रीकरण से बनते हैं, यानी नाइट्रो समूह चढ़ाकर, जो ऐमीन बनाने की अभिक्रिया से अलग प्रक्रिया है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- नाइट्रोजन वाले हर यौगिक को एक मान लेना; ऐमीन और नाइट्रो यौगिक अलग वर्ग हैं और उनके उपयोग भी अलग हैं।
- 'प्रमुख व्यापारिक उपयोग' के प्रश्न में किसी छोटे या गौण उपयोग को चुन लेना, जबकि पूछ मात्रा और महत्व की है।
- 'स्टेम कोशिका रोगोपचार' जैसे चिकित्सा-शब्द को औषधि-संश्लेषण का पर्याय समझ लेना।
यौगिक-वर्गों पर प्रश्न तीन दिशाओं से आते हैं। पहली दिशा बनावट की है — कोई सूत्र या वर्णन देकर वर्ग पहचानवाना। दूसरी दिशा गुण की है, जैसे क्षारकता का क्रम या जल में घुलनशीलता। तीसरी दिशा उपयोग की है, और यह प्रश्न उसी का उदाहरण है।
उपयोग वाले प्रश्नों में सबसे उपयोगी आदत यह है कि हर वर्ग के लिए एक-दो ठोस उदाहरण याद रखे जाएँ, न कि सामान्य वाक्य। ऐमीन के लिए नायलॉन का हेक्सामेथिलीन डाइऐमीन और औषधियों का क्षाराभ-परिवार पर्याप्त हैं; ईथर के लिए विलायक और निश्चेतक; ऐल्डिहाइड के लिए फ़ॉर्मेलिन।
विकल्पों की बनावट भी संकेत देती है। यहाँ दो विकल्प एक ही ढाँचे के हैं — 'किसी चीज़ का विकास' — और एक विकल्प चिकित्सा-पद्धति का नाम है। केवल एक विकल्प संश्लेषण की बात करता है, और रसायन के प्रश्न में यही सबसे स्वाभाविक उत्तर-दिशा है।
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नायलॉन 6,6 के निर्माण में डाइऐमीन की भूमिका के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है ?
- (a)वह बहुलक को रंग देता है
- (b)उसके दोनों सिरों के ऐमीन समूह अम्ल से जुड़कर ऐमाइड बंध बनाते हैं, जिससे लंबी शृंखला खड़ी होती है
- (c)वह केवल उत्प्रेरक का काम करता है और शृंखला में नहीं जुड़ता
- (d)वह बहुलक को जल में घुलनशील बना देता है
उत्तर(b) उसके दोनों सिरों के ऐमीन समूह अम्ल से जुड़कर ऐमाइड बंध बनाते हैं, जिससे लंबी शृंखला खड़ी होती है — दो सिरों वाले दो भिन्न अणु बारी-बारी जुड़ते जाते हैं, और यही संघनन बहुलकीकरण पॉलिएमाइड तंतु बनाता है।