निम्नलिखित में से कौन-सा कार्बोलिक अम्ल कहलाता है ?
- (a)फ़ीनोल
- (b)ऐल्कोहॉल
- (c)ईथर
- (d)ऐसीटोन
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) फ़ीनोल — कार्बोलिक अम्ल फ़ीनोल का ही पुराना, व्यापारिक नाम है। रासायनिक दृष्टि से यह बेंज़ीन के वलय पर सीधे जुड़ा एक हाइड्रॉक्सिल समूह है, सूत्र C6H5OH, और इसी बनावट से उसका पूरा व्यवहार निकलता है।
नाम में 'अम्ल' क्यों आया, यह अपने-आप में पढ़ने योग्य है। साधारण ऐल्कोहॉल में भी हाइड्रॉक्सिल समूह होता है, पर वह व्यावहारिक रूप से उदासीन रहता है। फ़ीनोल में वही समूह ऐरोमैटिक वलय से जुड़ा है, इसलिए हाइड्रोजन छोड़ने पर बनने वाला फ़ीनॉक्साइड ऋणायन अपना ऋण-आवेश वलय भर में फैलाकर स्थिर हो जाता है। जो ऋणायन जितना स्थिर होगा, उसका मूल अणु उतनी ही सरलता से हाइड्रोजन छोड़ेगा — यही अम्लता है।
इस बात को अंकों में देखिए तो पूरा क्रम एक पंक्ति में बैठ जाता है। ऐसीटिक जैसे कार्बोक्सिलिक अम्ल का pKa लगभग 5 होता है, फ़ीनोल का लगभग 10, और साधारण ऐल्कोहॉल का लगभग 16। pKa जितना कम, अम्ल उतना प्रबल। इसलिए फ़ीनोल ऐल्कोहॉल से लगभग दस लाख गुना अधिक अम्लीय है, और फिर भी कार्बोक्सिलिक अम्लों से लाखों गुना दुर्बल — ठीक बीच में। प्रयोगशाला की एक सीधी परख इसी अंतर पर टिकी है : फ़ीनोल सोडियम हाइड्रॉक्साइड में घुल जाता है, पर सोडियम बाइकार्बोनेट के साथ बुदबुदाता नहीं; कार्बोक्सिलिक अम्ल दोनों के साथ अभिक्रिया करता है और ऐल्कोहॉल किसी के साथ नहीं। इसी एक परख से तीनों अलग हो जाते हैं।
नाम का ऐतिहासिक पक्ष भी है, और वह नाम को याद रखने में सहायक है। उन्नीसवीं सदी में यह कोलतार से निकाला जाता था, और 'कार्बोलिक' शब्द कोयले तथा तेल के लैटिन नामों से बना है — यानी 'कोयले का तेल'। सन् 1867 के आसपास जोसेफ़ लिस्टर ने शल्य-चिकित्सा में इसे रोगाणुरोधी के रूप में प्रयोग करके संक्रमण से होने वाली मृत्यु में भारी कमी की, और यही इसकी सबसे प्रसिद्ध भूमिका बनी।
आज इसका उपयोग विसंक्रामक बनाने में, बेकेलाइट जैसे रेज़िन बनाने में, ऐस्पिरिन तथा अन्य औषधियों के मध्यवर्ती के रूप में होता है। सांद्र रूप में यह त्वचा को जला देता है, इसलिए घरेलू विसंक्रामकों में इसे तनु करके ही मिलाया जाता है — और उसी जलाने वाले गुण के कारण उसे 'अम्ल' कहा जाना सामान्य बोलचाल में और भी स्वाभाविक लगा।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)ऐल्कोहॉल — ऐल्कोहॉल किसी एक यौगिक का नाम नहीं, एक पूरे वर्ग का नाम है — वे यौगिक जिनमें हाइड्रॉक्सिल समूह किसी संतृप्त कार्बन से जुड़ा हो, जैसे मेथेनॉल और एथेनॉल। इनका सामान्य नाम 'अम्ल' कभी नहीं रहा, और होता भी क्यों : इनका हाइड्रॉक्सिल हाइड्रोजन छोड़ने में अनिच्छुक है, क्योंकि छोड़ने पर बना ऋणायन स्थिर नहीं होता। इसीलिए ऐल्कोहॉल जल से भी दुर्बल अम्ल माने जाते हैं और लिटमस पर कोई प्रभाव नहीं डालते। यह विकल्प इसलिए रखा गया है कि फ़ीनोल और ऐल्कोहॉल दोनों में हाइड्रॉक्सिल समूह है; भेद इसी में है कि वह समूह किससे जुड़ा है — ऐरोमैटिक वलय से या साधारण कार्बन से।
- (c)ईथर — ईथर में हाइड्रॉक्सिल समूह होता ही नहीं। उसकी बनावट में ऑक्सीजन परमाणु दो कार्बन समूहों के बीच पुल की तरह बैठा रहता है, और उससे जुड़ा कोई हाइड्रोजन नहीं होता जिसे वह छोड़ सके। इसीलिए ईथर उदासीन है और अम्ल की तरह बिलकुल नहीं बरतता। उसका असली परिचय दूसरा है : वह एक अच्छा विलायक है और डाइएथिल ईथर लंबे समय तक निश्चेतक के रूप में प्रयोग होता रहा। रोगाणुरोधी या विसंक्रामक की भूमिका उसकी कभी नहीं रही, और कोलतार से मिलने वाले उस पदार्थ से उसका कोई संबंध नहीं जिसे कार्बोलिक अम्ल कहा गया।
- (d)ऐसीटोन — ऐसीटोन सबसे सरल कीटोन है, जिसमें कार्बोनिल समूह दो मेथिल समूहों के बीच रहता है। इसमें भी कोई ऐसा हाइड्रोजन नहीं जो सामान्य परिस्थितियों में अम्ल की तरह अलग हो सके, इसलिए वह उदासीन है और उसे कभी किसी अम्ल का नाम नहीं दिया गया। उसका परिचय विलायक के रूप में है — नेल पॉलिश हटाने वाले द्रव और अनेक औद्योगिक विलायकों में वही मुख्य घटक है। शरीर में भी वह उपापचय के एक विशेष मार्ग में बनता है, पर वह प्रसंग अलग है। यहाँ विकल्प केवल इसलिए रखा गया है कि उसका देवनागरी रूप भी विकल्प (b) की तरह ऐ से आरंभ होता है।
अवधारणा
फ़ीनोल कार्बनिक रसायन का वह उदाहरण है जो दिखाता है कि एक ही क्रियात्मक समूह किस संदर्भ में लगा है, इससे उसका व्यवहार कितना बदल जाता है।
हाइड्रॉक्सिल समूह जब किसी साधारण संतृप्त कार्बन से जुड़ता है तो यौगिक ऐल्कोहॉल कहलाता है और लगभग उदासीन रहता है। वही समूह जब बेंज़ीन के वलय से सीधे जुड़ जाता है तो यौगिक फ़ीनोल कहलाता है और दुर्बल अम्ल बन जाता है। कारण यह है कि हाइड्रोजन निकलने पर बचा ऋणायन अपना ऋण-आवेश वलय भर में फैला लेता है और इसी अनुनाद से स्थिर हो जाता है; ऐल्कोहॉल में यह सुविधा नहीं है।
अम्लता का यह क्रम याद रखने योग्य है : कार्बोक्सिलिक अम्ल सबसे अधिक अम्लीय, उनके बाद फ़ीनोल, फिर जल, और सबसे कम ऐल्कोहॉल। इसी क्रम से यह भी समझ आता है कि फ़ीनोल सोडियम हाइड्रॉक्साइड जैसे प्रबल क्षार से तो लवण बना लेता है, पर सोडियम बाइकार्बोनेट से कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकालता, जबकि कार्बोक्सिलिक अम्ल निकाल देता है।
यह पेपर के इस पृष्ठ का सबसे छोटा प्रश्न है — एक पंक्ति का स्तंभ और चार एक-शब्दीय विकल्प, चारों अंग्रेज़ी रासायनिक नामों के देवनागरी लिप्यंतरण। इस तरह के प्रश्न स्मृति की सीधी परीक्षा लगते हैं, पर उनका उत्तर प्रायः किसी एक बनावटी भेद से निकलता है, जैसा यहाँ हाइड्रॉक्सिल समूह के जुड़ाव से निकल रहा है।
पुराने और प्रचलित नामों का यह क्षेत्र परीक्षा में लगातार आता है, क्योंकि वे नाम रोज़मर्रा की भाषा में बचे हुए हैं। कार्बोलिक अम्ल के अलावा इसी परिवार में हैं — खाने का सोडा, धोने का सोडा, नीला थोथा, शोरा, चूने का पानी, और मार्श गैस। इनमें से हर एक का रासायनिक नाम जोड़कर याद रखना उपयोगी है।
फ़ीनोल का व्यावहारिक महत्व आज भी बना हुआ है। घरेलू विसंक्रामक, जिसे 'फ़िनाइल' कहा जाता है, इसी परिवार के यौगिकों से बनता है, और लिस्टर की खोज के कारण चिकित्सा के इतिहास में इसका नाम विसंक्रमण की शुरुआत से जुड़ा है।
मुख्य तथ्य
- कार्बोलिक अम्ल फ़ीनोल का पुराना व्यापारिक नाम है; बनावट में यह बेंज़ीन के वलय पर सीधे जुड़ा हाइड्रॉक्सिल समूह है, सूत्र C6H5OH।
- फ़ीनोल दुर्बल अम्ल की तरह बरतता है क्योंकि हाइड्रोजन छोड़ने पर बना फ़ीनॉक्साइड ऋणायन अपना आवेश वलय भर में फैलाकर अनुनाद से स्थिर हो जाता है।
- अम्लता का क्रम अंकों में देखिए : कार्बोक्सिलिक अम्ल का pKa लगभग 5, फ़ीनोल का लगभग 10 और साधारण ऐल्कोहॉल का लगभग 16 — यानी फ़ीनोल ठीक बीच में पड़ता है।
- प्रयोगशाला की परख इसी अंतर पर टिकी है : फ़ीनोल सोडियम हाइड्रॉक्साइड में घुल जाता है पर सोडियम बाइकार्बोनेट के साथ बुदबुदाता नहीं, जबकि कार्बोक्सिलिक अम्ल दोनों से अभिक्रिया करता है और ऐल्कोहॉल किसी से नहीं।
- 'कार्बोलिक' नाम कोयले और तेल के लैटिन नामों से बना है, क्योंकि यह कोलतार से निकाला जाता था; जोसेफ़ लिस्टर ने 1867 के आसपास इसे शल्य-चिकित्सा में रोगाणुरोधी के रूप में प्रचलित किया।
- आज इसका उपयोग विसंक्रामक बनाने, बेकेलाइट जैसे रेज़िन बनाने और औषधियों के मध्यवर्ती के रूप में होता है; सांद्र रूप में यह त्वचा के लिए संक्षारक है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- नाम में 'अम्ल' देखकर कार्बोक्सिलिक अम्लों में उत्तर खोजना; फ़ीनोल का अम्लीय गुण दुर्बल है और वलय से आता है।
- फ़ीनोल और ऐल्कोहॉल को एक मान लेना, क्योंकि दोनों में हाइड्रॉक्सिल समूह है; भेद यह है कि वह समूह किससे जुड़ा है।
- ईथर या ऐसीटोन को अम्लीय समझ लेना; दोनों उदासीन हैं और उनका परिचय विलायक के रूप में है।
रसायन के इस खंड में प्रश्नों का सबसे आम रूप नाम-मिलान का है : कोई प्रचलित नाम देकर उसका रासायनिक यौगिक पूछना, या यौगिक देकर उसका प्रचलित नाम। कार्बोलिक अम्ल, मार्श गैस, नीला थोथा और खाने का सोडा जैसे नाम इसी श्रेणी में बार-बार लौटते हैं।
दूसरा रूप गुण से पहचान करवाने का है — जैसे 'निम्नलिखित में से कौन दुर्बल अम्ल की तरह बरतता है' या 'किसका जलीय विलयन लिटमस को लाल करता है'। इसके लिए क्रियात्मक समूह और उससे मिलने वाला गुण साथ-साथ याद रखना पड़ता है।
तीसरा रूप उपयोग से जोड़ने का है : विसंक्रामक, विलायक, निश्चेतक और रेज़िन जैसे उपयोगों को यौगिक से जोड़ना। इस प्रश्न में तीनों रूप एक साथ काम आते हैं, क्योंकि फ़ीनोल का नाम, गुण और उपयोग तीनों एक ही बनावट से निकलते हैं।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2023_Q89Tartaric acid is found in :
- (a) Tamarind
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उत्तर(a) Tamarind
किसी कार्बनिक अम्ल को उसके स्रोत से जोड़ने वाला प्रश्न, जो नाम और यौगिक की उसी जोड़ी पर टिका है।
EPFO_EOAO_2023_Q90Which one of the following is an example of chemical change ?
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उत्तर(d) Burning of magnesium in air
रासायनिक परिवर्तन का उदाहरण पहचानने वाला प्रश्न, जो बनावट और गुण के संबंध की वही समझ माँगता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
ऐल्कोहॉल की तुलना में फ़ीनोल अधिक अम्लीय क्यों होता है, जबकि दोनों में हाइड्रॉक्सिल समूह उपस्थित रहता है ?
- (a)क्योंकि फ़ीनोल में हाइड्रॉक्सिल समूहों की संख्या अधिक होती है
- (b)क्योंकि हाइड्रोजन निकलने पर बना ऋणायन बेंज़ीन वलय पर आवेश फैलाकर स्थिर हो जाता है
- (c)क्योंकि फ़ीनोल जल में अधिक घुलनशील है
- (d)क्योंकि फ़ीनोल का अणुभार अधिक होता है
उत्तर(b) क्योंकि हाइड्रोजन निकलने पर बना ऋणायन बेंज़ीन वलय पर आवेश फैलाकर स्थिर हो जाता है — यही अनुनाद से मिलने वाली स्थिरता फ़ीनोल को हाइड्रोजन छोड़ने में सहज बनाती है, जबकि ऐल्कोहॉल में यह सुविधा नहीं होती।