निम्नलिखित में से कौन-से प्रकाश-रासायनिक (फोटोकेमिकल) धुंध के मूल अभिकारक हैं ?
- (a)सल्फर हेक्साफ्लुओराइड और कालिख (सूट)
- (b)कार्बन मोनोक्साइड और ओज़ोन
- (c)नाइट्रिक ऑक्साइड और अदग्ध (अनबर्न्ट) हाइड्रोकार्बन
- (d)पेरोक्सी मूलक (रेडिकल्स) और उप-ऑक्साइड (सब-ऑक्साइड)
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) नाइट्रिक ऑक्साइड और अदग्ध (अनबर्न्ट) हाइड्रोकार्बन — प्रकाश-रासायनिक धुंध इन्हीं दो प्राथमिक प्रदूषकों से आरंभ होती है, और दोनों एक ही स्रोत से आते हैं : वाहनों तथा कारख़ानों में ईंधन का जलना।
प्रश्न का निर्णायक शब्द 'मूल अभिकारक' है, और वायु-प्रदूषण की शब्दावली में उसका एक निश्चित अर्थ है। जो पदार्थ स्रोत से सीधे हवा में छोड़ा जाता है वह प्राथमिक प्रदूषक कहलाता है; जो हवा में ही अभिक्रिया से बनता है वह द्वितीयक प्रदूषक कहलाता है। यह प्रश्न पहले वर्ग का नाम माँग रहा है, और चारों विकल्पों को इसी एक कसौटी पर तौलना पर्याप्त है।
नाइट्रिक ऑक्साइड इंजन के भीतर बनता है। दहन-कक्ष का तापमान इतना ऊँचा होता है कि हवा की अपनी नाइट्रोजन और ऑक्सीजन आपस में जुड़ जाती हैं, और यही नाइट्रोजन ऑक्साइड बाहर निकलकर हवा में ऑक्सीकृत होते रहते हैं। अदग्ध हाइड्रोकार्बन दूसरी ओर से आते हैं — ईंधन का जो अंश जल नहीं पाता वह वाष्प बनकर निकल जाता है, और पेट्रोल के भंडारण तथा भराई से भी वाष्प उड़ती रहती है।
अब इसमें तीसरा घटक जुड़ता है, जो प्रदूषक नहीं है : सूर्य का प्रकाश। यही 'प्रकाश-रासायनिक' शब्द का अर्थ है। पराबैंगनी प्रकाश नाइट्रोजन डाइऑक्साइड को तोड़ता है, टूटने से मुक्त ऑक्सीजन परमाणु निकलता है, और वह वायुमंडल की ऑक्सीजन से जुड़कर ओज़ोन बना देता है।
यहीं वह बात आती है जो बताती है कि हाइड्रोकार्बन का नाम विकल्प में साथ क्यों है, और यह इस प्रश्न का सबसे गहरा अंश है। अकेले नाइट्रोजन ऑक्साइड और धूप से बनने वाला चक्र स्वयं को काट देता है : जो ओज़ोन बनता है वही तुरंत नाइट्रिक ऑक्साइड से मिलकर फिर नाइट्रोजन डाइऑक्साइड बना देता है और स्वयं समाप्त हो जाता है। इसलिए ओज़ोन जमा नहीं हो पाता। अदग्ध हाइड्रोकार्बन इसी संतुलन को तोड़ते हैं — वे प्रकाश की उपस्थिति में पेरॉक्सी मूलक बनाते हैं, और ये मूलक नाइट्रिक ऑक्साइड को ओज़ोन ख़र्च किए बिना ही नाइट्रोजन डाइऑक्साइड में बदल देते हैं। ओज़ोन का ख़र्च रुकते ही वह इकट्ठा होने लगता है, और धुंध खड़ी हो जाती है। इसीलिए उत्तर कोई एक पदार्थ नहीं, यह विशेष जोड़ी है — दोनों में से कोई एक हटा दीजिए तो धुंध बनती ही नहीं।
इसलिए ओज़ोन और पेरॉक्सी यौगिक इस धुंध के परिणाम हैं, आरंभिक अभिकारक नहीं — और यही भेद इस प्रश्न का पूरा आधार है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)सल्फर हेक्साफ्लुओराइड और कालिख (सूट) — यह विकल्प दो पदार्थ जोड़ता है जिनका इस धुंध से कोई संबंध नहीं। सल्फर हेक्साफ्लुओराइड एक अत्यंत स्थायी और रासायनिक रूप से निष्क्रिय गैस है, जिसका उपयोग विद्युत उपकरणों में विसंवाहक के रूप में होता है; उसकी असली चिंता यह है कि वह बहुत शक्तिशाली हरितगृह गैस है, न कि यह कि वह धुंध बनाती है। कालिख का संबंध दूसरे ही प्रकार की धुंध से है — कोयला जलने से बनने वाली सल्फर डाइऑक्साइड और धुएँ वाली शीत, आर्द्र धुंध, जिसे लंदन-प्रकार की या अपचायक धुंध कहते हैं। प्रकाश-रासायनिक धुंध उससे उलटी परिस्थितियों में बनती है : गरम, शुष्क और तेज़ धूप वाले दिन।
- (b)कार्बन मोनोक्साइड और ओज़ोन — यह सबसे आकर्षक जाल है, क्योंकि ओज़ोन का नाम इस धुंध के साथ सचमुच जुड़ा हुआ है — पर उल्टे सिरे पर। ओज़ोन प्रकाश-रासायनिक धुंध का द्वितीयक प्रदूषक है, यानी वह वायुमंडल में इसी अभिक्रिया-शृंखला से बनता है; उसे अभिकारक कहना कारण और परिणाम को आपस में बदल देना है। कार्बन मोनोक्साइड भी अधूरे दहन से निकलने वाला प्राथमिक प्रदूषक तो है, पर इस विशेष धुंध की शृंखला उसी से आरंभ नहीं होती। प्रश्न 'मूल अभिकारक' पूछ रहा है, और यही शब्द इस विकल्प को काट देता है।
- (d)पेरोक्सी मूलक (रेडिकल्स) और उप-ऑक्साइड (सब-ऑक्साइड) — पेरॉक्सी मूलक इस अभिक्रिया-शृंखला में सचमुच आते हैं, पर बीच में — वे अत्यंत क्रियाशील मध्यवर्ती हैं, जो हाइड्रोकार्बन के टूटने पर बनते हैं और आगे नाइट्रोजन ऑक्साइड से जुड़कर पेरॉक्सीएसिटिल नाइट्रेट जैसे उत्तेजक यौगिक बनाते हैं। जो पदार्थ अभिक्रिया के दौरान बनता है वह उसका मूल अभिकारक नहीं हो सकता। दूसरा नाम, उप-ऑक्साइड, वायु प्रदूषण की मानक शब्दावली का हिस्सा ही नहीं है और उसे यहाँ केवल विकल्प को तकनीकी रंग देने के लिए रखा गया लगता है। यह विकल्प भी (b) की तरह उत्पाद को कारण बताने की भूल दोहराता है।
अवधारणा
धुंध दो बिलकुल अलग प्रकार की होती है, और उन्हें अलग रखना इस विषय का सबसे उपयोगी विभाजन है।
पहली अपचायक या लंदन-प्रकार की धुंध है। वह कोयला जलाने से निकली सल्फर डाइऑक्साइड, कालिख और कोहरे के मिलने से बनती है, ठंडे और आर्द्र मौसम में जमती है, और उसका रंग धुएँ जैसा धूसर होता है।
दूसरी प्रकाश-रासायनिक या लॉस एंजेलिस-प्रकार की धुंध है, जिस पर यह प्रश्न है। उसके तीन घटक हैं : नाइट्रोजन ऑक्साइड, अदग्ध हाइड्रोकार्बन और तेज़ धूप। पहले दो वाहनों से आते हैं और तीसरा मौसम से। यह धुंध गरम, शुष्क, धूप वाले दिनों में बनती है और भूरे-पीले रंग की दिखती है।
इसी में प्राथमिक और द्वितीयक प्रदूषक का भेद खड़ा होता है। प्राथमिक प्रदूषक वह है जो सीधे स्रोत से निकलता है, जैसे नाइट्रिक ऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन। द्वितीयक प्रदूषक वह है जो वायुमंडल में ही अभिक्रिया से बनता है, जैसे ओज़ोन, पेरॉक्सीएसिटिल नाइट्रेट और एल्डिहाइड। परीक्षा में प्रायः यही भेद परखा जाता है।
प्रकाश-रासायनिक धुंध शहरी वायु प्रदूषण की सबसे चर्चित समस्याओं में है, और भारत के बड़े नगरों में गर्मी के महीनों में धरातलीय ओज़ोन का बढ़ना इसी प्रक्रिया का परिणाम है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि ऊपरी वायुमंडल की ओज़ोन-परत हमारी रक्षक है, पर वही ओज़ोन ज़मीन के पास प्रदूषक बन जाती है — वह आँखों और श्वास-नली में जलन पैदा करती है, फेफड़ों की क्षमता घटाती है, फ़सलों को हानि पहुँचाती है और रबड़ को भंगुर बना देती है।
इसी कारण नियंत्रण के उपाय भी उन्हीं दो अभिकारकों पर केंद्रित हैं जिन्हें यह प्रश्न पूछ रहा है। वाहनों में उत्प्रेरक परिवर्तक लगाना, ईंधन के मानक कड़े करना और वाष्प के रिसाव पर रोक लगाना — तीनों का उद्देश्य नाइट्रोजन ऑक्साइड और अदग्ध हाइड्रोकार्बन को हवा में पहुँचने से रोकना है।
प्रश्न के हिन्दी स्तंभ में हर विकल्प दो पदार्थों को 'और' से जोड़कर देता है, इसलिए वह जोड़ी एक ही विकल्प है, दो अलग विकल्प नहीं; स्तंभ का 'कौन-से' भी इसी बहुवचन को दर्शाता है।
मुख्य तथ्य
- प्रकाश-रासायनिक धुंध के मूल अभिकारक नाइट्रोजन ऑक्साइड और अदग्ध हाइड्रोकार्बन हैं, और दोनों मुख्यतः वाहनों के ईंधन-दहन से निकलते हैं।
- तीसरा आवश्यक घटक प्रदूषक नहीं, सूर्य का प्रकाश है; पराबैंगनी किरणें नाइट्रोजन डाइऑक्साइड को तोड़कर पूरी शृंखला आरंभ करती हैं।
- ओज़ोन, पेरॉक्सीएसिटिल नाइट्रेट और एल्डिहाइड इस धुंध के द्वितीयक प्रदूषक हैं — वे वायुमंडल में बनते हैं, स्रोत से नहीं निकलते।
- लंदन-प्रकार की अपचायक धुंध इससे अलग है : वह सल्फर डाइऑक्साइड, कालिख और कोहरे से ठंडे, आर्द्र मौसम में बनती है।
- धरातलीय ओज़ोन आँखों तथा श्वास-नली में जलन पैदा करती है, फ़सलों को हानि पहुँचाती है और रबड़ को भंगुर बनाती है, जबकि समतापमंडल की ओज़ोन-परत रक्षक है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- ओज़ोन को इस धुंध का अभिकारक मान लेना; वह उसका सबसे प्रसिद्ध द्वितीयक उत्पाद है, और यही प्रश्न का मुख्य जाल है।
- कालिख और सल्फर वाले विकल्प को चुन लेना, जो दूसरे प्रकार की, अपचायक या लंदन-प्रकार की धुंध का वर्णन है — वह ठंडे, आर्द्र मौसम की धुंध है और उसमें धूप की कोई भूमिका नहीं।
- पेरॉक्सी मूलकों को आरंभिक पदार्थ समझ लेना, जबकि वे अभिक्रिया के बीच में बनने वाले मध्यवर्ती हैं — और ठीक वही मध्यवर्ती हैं जिनके कारण ओज़ोन जमा हो पाता है।
- यह मान लेना कि प्रश्न किसी एक पदार्थ का नाम माँग रहा है; यहाँ हर विकल्प एक जोड़ी है, और धुंध दोनों की उपस्थिति के बिना बनती ही नहीं।
पर्यावरण के प्रश्नों में यह रचना बार-बार लौटती है : किसी परिघटना के 'कारण' या 'मूल अभिकारक' पूछना और विकल्पों में उसका सबसे प्रसिद्ध परिणाम रख देना। ओज़ोन यहाँ ठीक वही भूमिका निभा रही है। इसलिए ऐसे प्रश्नों में पहले यह तय कीजिए कि पूछा गया शब्द कारण की ओर संकेत करता है या परिणाम की ओर।
दूसरा आम रूप जोड़ी बनाने का है — किसी धुंध, वर्षा या प्रदूषण को उसके ज़िम्मेदार पदार्थ से जोड़ना। अम्लीय वर्षा का सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड से, अपचायक धुंध का सल्फर डाइऑक्साइड और कालिख से, और प्रकाश-रासायनिक धुंध का नाइट्रोजन ऑक्साइड तथा हाइड्रोकार्बन से — ये तीन जोड़ियाँ याद रहें तो इस पूरे खंड के अधिकांश प्रश्न निकल आते हैं।
तीसरा रूप कथन-सूची का होता है, जिसमें प्राथमिक और द्वितीयक प्रदूषकों की सूची अलग-अलग परखनी पड़ती है।
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प्रकाश-रासायनिक धुंध के संदर्भ में धरातलीय ओज़ोन को द्वितीयक प्रदूषक क्यों कहा जाता है ? निम्नलिखित में से सबसे सही कारण चुनिए ।
- (a)क्योंकि वह वाहनों के निकास से सीधे कम मात्रा में निकलती है
- (b)क्योंकि वह वायुमंडल में ही सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में अन्य प्रदूषकों की अभिक्रिया से बनती है
- (c)क्योंकि वह समतापमंडल से नीचे उतरकर आती है
- (d)क्योंकि वह केवल रात में बनती है
उत्तर(b) क्योंकि वह वायुमंडल में ही सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में अन्य प्रदूषकों की अभिक्रिया से बनती है — द्वितीयक प्रदूषक की परिभाषा यही है कि वह स्रोत से नहीं निकलता, बल्कि हवा में प्राथमिक प्रदूषकों की अभिक्रिया से बनता है।