निम्नलिखित में से कौन-सा परिवर्णी शब्द AWACS का सही विस्तृत रूप है ?
- (a)एडवांस्ड वार्निंग एंड क्रिटिकल स्कैनिंग
- (b)एरिअल वारफेयर एंड केस स्टडी
- (c)एयरबोर्न वारफेयर एंड क्रिटिकल सोल्यूशन्स
- (d)एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम — AWACS का पूरा रूप Airborne Warning and Control System है। इस तरह के प्रश्न में सबसे भरोसेमंद तरीक़ा यह है कि संक्षेप के हर अक्षर को अलग-अलग खोलकर देखा जाए, क्योंकि यहाँ पाँच अक्षर हैं और पाँचों का हिसाब बनता है : A से Airborne, W से Warning, बीच का A केवल जोड़ने वाला And, C से Control और S से System। बीच के A को अलग शब्द न गिनना ही वह चूक है जिससे अभ्यर्थी चार-शब्दों वाले नाम में उलझ जाता है।
पहला अंश 'एयरबोर्न', यानी वायुवाहित। रडार ज़मीन पर नहीं, एक बड़े विमान की पीठ पर लदा रहता है, और यही पूरी अवधारणा की जड़ है। पृथ्वी गोल है, इसलिए ज़मीन पर टिका रडार अपनी क्षितिज-रेखा से नीचे उड़ रहे लक्ष्य को देख ही नहीं पाता — नीची उड़ान भरकर रडार से बचना इसीलिए एक पुरानी युक्ति है। उसी रडार को कुछ किलोमीटर ऊपर ले जाते ही उसका क्षितिज बहुत दूर खिसक जाता है और नीचे उड़ते लक्ष्य भी पकड़ में आ जाते हैं।
दूसरा अंश 'वार्निंग', यानी चेतावनी। प्रणाली का उद्देश्य लड़ना नहीं, पूर्व सूचना देना है — शत्रु का विमान, मिसाइल या जहाज़ तब दिख जाए जब वह अभी बहुत दूर है और प्रतिक्रिया के लिए समय बचा हो। इसी कारण इस पूरे वर्ग को अंग्रेज़ी में 'अर्ली वार्निंग', यानी पूर्व-चेतावनी का मंच कहा जाता है।
तीसरा अंश 'कंट्रोल', यानी नियंत्रण। AWACS केवल देखता नहीं; वह जो चित्र बनाता है उसी के आधार पर अपने लड़ाकू विमानों को दिशा भी देता है, कि कौन किस लक्ष्य की ओर जाए। इसी कारण इसे हवा में उड़ता नियंत्रण-कक्ष कहा जाता है, और यही 'कंट्रोल' शब्द को नाम में जगह दिलाता है।
अंतिम अंश 'सिस्टम' भी ध्यान देने योग्य है, क्योंकि वह नाम का सबसे कम पढ़ा जाने वाला हिस्सा है और अर्थ में सबसे सटीक। AWACS किसी एक विमान का नाम नहीं है; वह रडार, संचार-कड़ियों, आँकड़ा-संसाधन और संचालक दल का पूरा तंत्र है, और विमान उसे ढोने वाला मंच भर है। इसीलिए एक ही प्रणाली अलग-अलग देशों में अलग-अलग विमानों पर बैठती है — अमेरिका में बोइंग E-3, भारत में Il-76 पर आधारित A-50EI।
इन पाँचों अंशों पर परखने पर विकल्प (d) अकेला है जो चारों शब्द सही रखता है। बाक़ी तीनों में से कोई न कोई अक्षर ग़लत शब्द पर खुलता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)एडवांस्ड वार्निंग एंड क्रिटिकल स्कैनिंग — इस विकल्प में केवल पहला अक्षर बदला गया है, और वही सबसे भारी भूल है। A का विस्तार 'एडवांस्ड' (advanced) नहीं, 'एयरबोर्न' (airborne) है। 'उन्नत' कह देने से यह पता ही नहीं चलता कि प्रणाली की विशेषता क्या है, जबकि 'वायुवाहित' कहते ही उसका पूरा तर्क खुल जाता है — रडार को विमान पर चढ़ाकर ऊँचाई से देखना, ताकि पृथ्वी की गोलाई से बनी क्षितिज-सीमा पीछे छूट जाए। आगे 'क्रिटिकल स्कैनिंग' भी कोई प्रचलित तकनीकी पद नहीं है; प्रणाली का दूसरा काम स्कैन करना नहीं, स्कैन के बाद अपने विमानों का नियंत्रण करना है, और वह इस विकल्प में कहीं नहीं आता।
- (b)एरिअल वारफेयर एंड केस स्टडी — यहाँ चारों में से एक भी अंश सही नहीं बैठता। पहला शब्द विमान से जुड़ा तो लगता है, पर नाम में जो शब्द है वह 'एयरबोर्न' है — प्रणाली विमान पर लदी है, यही उसकी परिभाषा है। दूसरा शब्द 'वारफेयर' यानी युद्ध, जबकि नाम में 'वार्निंग' यानी चेतावनी है; AWACS स्वयं कोई अस्त्र नहीं चलाता, वह निगरानी और समन्वय का साधन है। और अंतिम अंश 'केस स्टडी' किसी सैन्य प्रणाली के नाम में कभी नहीं आता — यह अध्ययन-पद्धति का शब्द है, उपकरण का नहीं। तीनों गड़बड़ियाँ एक साथ होने से यह विकल्प सबसे दूर पड़ता है।
- (c)एयरबोर्न वारफेयर एंड क्रिटिकल सोल्यूशन्स — यह सबसे निकट का जाल है, क्योंकि इसका पहला शब्द 'एयरबोर्न' सही है और पढ़ते ही भरोसा जगा देता है। भूल आगे है। W का विस्तार 'वारफेयर' नहीं, 'वार्निंग' है, और यह अंतर अर्थ का है, वर्तनी का नहीं : AWACS निगरानी और चेतावनी का मंच है, हथियार चलाने वाला युद्धक विमान नहीं। इसी तरह C का विस्तार 'क्रिटिकल सोल्यूशन्स' नहीं, 'कंट्रोल' है — यानी अपने लड़ाकू विमानों को लक्ष्य तक निर्देशित करना। 'सोल्यूशन्स' जैसा खुला शब्द किसी विशिष्ट सैन्य कार्य की ओर संकेत ही नहीं करता, इसलिए यह विस्तार अर्थहीन रह जाता है।
अवधारणा
वायुवाहित पूर्व-चेतावनी एवं नियंत्रण प्रणाली का विचार एक सीधी भौतिक बाध्यता से निकला है : रडार तरंगें सीधी रेखा में चलती हैं, और पृथ्वी गोल है। इसलिए ज़मीन पर लगे किसी भी रडार की एक क्षितिज-सीमा होती है, जिसके नीचे उड़ता लक्ष्य उसकी पकड़ से बाहर रहता है। इस सीमा को हटाने का सबसे प्रभावी उपाय रडार को ही ऊपर उठा देना है।
इसी से AWACS बना — एक बड़ा विमान, जिसकी पीठ पर घूमने वाले तश्तरीनुमा आवरण (रोटोडोम) या स्थिर पट्टिका में निगरानी रडार लगा होता है, और भीतर संचार तथा आँकड़ा-संसाधन के उपकरण एवं संचालक दल बैठते हैं। ऊँचाई पर पहुँचते ही उसका दृष्टि-क्षेत्र सैकड़ों किलोमीटर तक फैल जाता है, और वह एक साथ बड़ी संख्या में लक्ष्यों की गति, दिशा और ऊँचाई का चित्र बनाता रहता है।
दूसरा और उतना ही महत्वपूर्ण पक्ष 'नियंत्रण' है। यह प्रणाली अपने द्वारा बनाए गए हवाई चित्र को अपने ही लड़ाकू विमानों तक पहुँचाती है और उन्हें निर्देश देती है। इसलिए इसे केवल एक उड़ता रडार कहना अधूरा है; यह उड़ता हुआ युद्ध-प्रबंधन केंद्र है।
परिवर्णी शब्दों का विस्तार पूछना इस पेपर की एक पहचान है, और यह प्रश्न उसी शैली का है : संक्षेप बड़े रोमन अक्षरों में छपा है और चारों विकल्प अंग्रेज़ी वाक्यांशों को देवनागरी में लिखकर दिए गए हैं, अनुवाद करके नहीं। इसलिए इन्हें अंग्रेज़ी की तरह पढ़ना पड़ता है — 'एयरबोर्न' को Airborne, 'वार्निंग' को Warning।
रक्षा-क्षेत्र के ऐसे संक्षेपों में परीक्षक प्रायः एक ही अक्षर बदलकर विकल्प गढ़ता है, क्योंकि यही परखता है कि अभ्यर्थी ने नाम रटा है या प्रणाली का काम समझा है। यहाँ चारों विकल्पों में A, W और C ही घुमाए गए हैं।
भारत के संदर्भ में यह विषय पढ़ने योग्य है। भारतीय वायुसेना के पास इस श्रेणी के तीन A-50EI विमान हैं, जिनमें रूसी Il-76 के ढाँचे पर इज़रायली फ़ाल्कन रडार लगाया गया है। इसके साथ DRDO द्वारा विकसित स्वदेशी 'नेत्र' AEW&C प्रणाली भी सेवा में है, जो एम्ब्रेयर विमान पर आधारित है। ध्यान रहे कि AEW&C और AWACS एक ही परिवार के हैं, पर आकार और क्षमता में अलग वर्ग माने जाते हैं।
मुख्य तथ्य
- AWACS का पूरा रूप Airborne Warning and Control System है — तीनों अंश क्रमशः वायुवाहित होना, पूर्व चेतावनी देना, और अपने विमानों का नियंत्रण करना बताते हैं।
- रडार को ऊँचाई पर ले जाने का कारण पृथ्वी की गोलाई है : ज़मीनी रडार अपनी क्षितिज-रेखा से नीचे उड़ते लक्ष्य को नहीं देख पाता, और ऊँचाई बढ़ते ही वह क्षितिज दूर खिसक जाता है।
- यह प्रणाली केवल निगरानी का साधन नहीं है; 'कंट्रोल' शब्द इसके दूसरे काम को दर्शाता है — अपने लड़ाकू विमानों को लक्ष्य की ओर निर्देशित करना, इसीलिए इसे उड़ता युद्ध-प्रबंधन केंद्र कहा जाता है।
- भारतीय वायुसेना के पास तीन A-50EI विमान हैं, जिनमें Il-76 के ढाँचे पर इज़रायली फ़ाल्कन रडार लगा है; इनके अतिरिक्त DRDO की स्वदेशी 'नेत्र' AEW&C प्रणाली एम्ब्रेयर विमान पर आधारित है।
- पश्चिमी देशों में इस श्रेणी का सबसे परिचित विमान बोइंग E-3 सेंट्री है, जिसकी पीठ पर लगा घूमता तश्तरीनुमा आवरण इस पूरी श्रेणी की पहचान बन गया है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'एयरबोर्न' को 'एडवांस्ड' या 'एरिअल' समझ लेना — A का सही विस्तार वायुवाहित होना है, जो प्रणाली की परिभाषा ही है।
- 'वार्निंग' के स्थान पर 'वारफेयर' पढ़ लेना — यह चेतावनी देने वाला मंच है, अस्त्र चलाने वाला युद्धक विमान नहीं।
- AWACS को AEW&C का पर्याय मान लेना; दोनों निकट हैं पर परीक्षा में इन्हें अलग-अलग नामों से पूछा जाता है।
संक्षेपों पर आधारित प्रश्न इस परीक्षा में दो रूपों में आते हैं। पहला रूप यही है — संक्षेप देकर उसका पूरा रूप पूछना, और विकल्पों में एक-एक अक्षर घुमाकर मिलते-जुलते वाक्यांश रख देना। दूसरा रूप उलटा है : प्रणाली का काम बताकर पूछना कि वह किस संक्षेप से जानी जाती है।
इस पेपर में संक्षेप-विस्तार वाले प्रश्न देवनागरी लिप्यंतरण के साथ छपते हैं, इसलिए पढ़ते समय विकल्प को मन में अंग्रेज़ी में लौटाना पड़ता है; जो अभ्यर्थी इसे हिन्दी शब्दों की तरह पढ़ता है वह अक्सर अटक जाता है।
तैयारी की दृष्टि से सबसे उपयोगी आदत यह है कि संक्षेप को रटा न जाए, बल्कि हर अक्षर को उस प्रणाली के किसी एक काम से जोड़कर याद रखा जाए। तब एक अक्षर बदला हुआ विकल्प अपने-आप बेतुका लगने लगता है, क्योंकि वह प्रणाली के किसी वास्तविक काम की ओर संकेत ही नहीं करता।
संबंधित PYQ
EPFO_APFC_2016_Q88SMPS is the acronym for
- (a) Store Mode Power Supply
- (b) Single Mode Power Supply
- (c) Switch Mode Power Supply
- (d) Start Mode Power Supply
उत्तर(c) Switch Mode Power Supply
इसी परिवार का एक और संक्षेप-विस्तार प्रश्न, जिसमें चारों विकल्प केवल पहले शब्द में भिन्न हैं — वही रचना जो यहाँ A, W और C को घुमाकर बनाई गई है।
EPFO_APFC_2016_Q81LAN, WAN and MAN are computer networks covering different areas. Their first alphabets L, W and M respectively stand for
- (a) Local, World and Middle
- (b) Long, Wireless and Metropolitan
- (c) Local, Wide and Metropolitan
- (d) Least, Wireless and Maximum
उत्तर(c) Local, Wide and Metropolitan
तीन संक्षेपों के पहले अक्षरों का विस्तार एक साथ पूछने वाला प्रश्न, जो दिखाता है कि परीक्षक एक-एक अक्षर बदलकर कैसे विकल्प गढ़ता है।
EPFO_APFC_2016_Q79Consider the following statements on Global Positioning System (GPS) : 1. GPS allows accurate time-stamping on ATM transactions. 2. GPS relies on a set of satellites for transferring signals worldwide. Which of the above statements is/are correct ?
- (a) 1 only
- (b) 2 only
- (c) Both 1 and 2
- (d) Neither 1 nor 2
उत्तर(c) Both 1 and 2
वायु और अंतरिक्ष आधारित प्रणालियों पर कथन-सूची वाला प्रश्न, जो उपग्रह-आधारित तंत्र के व्यावहारिक उपयोगों की जाँच करता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
वायुवाहित पूर्व-चेतावनी प्रणालियों में रडार को विमान पर ऊँचाई तक ले जाने का मुख्य कारण निम्नलिखित में से कौन-सा है ?
- (a)ऊँचाई पर वायुदाब कम होने से रडार की शक्ति बढ़ जाती है
- (b)पृथ्वी की गोलाई से बनी क्षितिज-सीमा दूर खिसक जाती है, जिससे नीची उड़ान भरते लक्ष्य भी दिखने लगते हैं
- (c)ऊँचाई पर रडार तरंगें मुड़कर पृथ्वी के चारों ओर चली जाती हैं
- (d)विमान की गति रडार तरंगों की गति में जुड़ जाती है
उत्तर(b) पृथ्वी की गोलाई से बनी क्षितिज-सीमा दूर खिसक जाती है, जिससे नीची उड़ान भरते लक्ष्य भी दिखने लगते हैं — रडार तरंगें सीधी रेखा में चलती हैं, इसलिए ज़मीनी रडार अपने क्षितिज के नीचे नहीं देख पाता; रडार जितना ऊपर जाता है, उसका क्षितिज उतना ही दूर होता जाता है।