निम्नलिखित विषयों/उपबंधों में से कौन-सा/से भारत के संविधान के राज्य की नीति के निदेशक सिद्धांतों में अंतर्विष्ट है/हैं ? 1. भारत में रहने वाले सभी व्यक्तियों के लिए एकसमान सिविल संहिता 2. चौदह वर्ष की आयु तक के बालकों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा का उपबंध 3. अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
- (a)1, 2 और 3
- (b)केवल 2 और 3
- (c)केवल 1
- (d)केवल 3
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) केवल 3। तीनों प्रविष्टियाँ नीति-निदेशक तत्वों के अनुच्छेदों के शीर्षकों से बनाई गई हैं, और उनमें से दो को बनाते समय बदल दिया गया है।
प्रविष्टि 3 सही है, और वह ठीक-ठीक सही है। अनुच्छेद 51 का शीर्षक ही 'अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि' है, और वह राज्य को निदेश देता है कि वह अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि करे, राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत और सम्मानपूर्ण संबंध बनाए रखे, अंतर्राष्ट्रीय विधि और संधि-बाध्यताओं के प्रति आदर बढ़ाए, और अंतर्राष्ट्रीय विवादों का माध्यस्थम् द्वारा निपटारा प्रोत्साहित करे। इसमें कुछ भी बदला नहीं गया है।
प्रविष्टि 2 जैसी छपी है वैसी ग़लत है। अनुच्छेद 45 का शीर्षक 'छह वर्ष से कम आयु के बालकों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा का उपबंध' है, और उसका पाठ राज्य को यह निदेश देता है कि वह सभी बालकों के लिए तब तक प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा दे जब तक वे छह वर्ष की आयु पूरी न कर लें। चौदह वर्ष का आँकड़ा मूल अनुच्छेद 45 का था, जो चौदह वर्ष तक के सभी बालकों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का वचन देता था; संविधान (छियासीवाँ संशोधन) अधिनियम, 2002 उस वचन को नीति-निदेशक तत्वों से निकालकर अनुच्छेद 21क में मूल अधिकार के रूप में ले गया — छह से चौदह वर्ष के बालकों के लिए — और अनुच्छेद 45 को छह वर्ष से पहले के वर्षों के लिए फिर से लिखा। इसलिए यह प्रविष्टि किसी नीति-निदेशक तत्व की भाषा को उस आयु से जोड़ देती है जो अब मूल अधिकार की है।
प्रविष्टि 1 इसी प्रकार के कारण से ग़लत है। अनुच्छेद 44 का शीर्षक 'नागरिकों के लिए समान सिविल संहिता' है और वह कहता है कि राज्य भारत के पूरे राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता प्राप्त कराने का प्रयास करेगा। प्रविष्टि 'नागरिकों के लिए' के स्थान पर 'भारत में रहने वाले सभी व्यक्तियों के लिए' रख देती है — जो एक चौड़ा वर्ग है और उसमें वे व्यक्ति भी आते हैं जो भारत में रहते हैं पर उसके नागरिक नहीं हैं। अनुच्छेद का विषय निस्संदेह नीति-निदेशक तत्व है; पर प्रविष्टि में जैसा उपबंध बताया गया है वैसा उपबंध संविधान में नहीं है।
तीनों पर एक ही कसौटी क्यों लगानी पड़ती है, यह भी समझने योग्य है। प्रविष्टियों को ढीले ढंग से पढ़िए — यानी उन विषयों के नाम के रूप में जो नीति-निदेशक तत्वों में आते हैं — तो प्रविष्टि 1 और 2, दोनों निकल जाती हैं और उत्तर 1, 2 और 3 बनता है। कड़ाई से पढ़िए — यानी उपबंधों को दोहराने वाली प्रविष्टियों के रूप में — तो दोनों गिरती हैं और उत्तर केवल 3 बनता है। जो उपलब्ध नहीं है वह मिश्रित कसौटी है, प्रविष्टि 2 की आयु पर कड़ी और प्रविष्टि 1 के व्यक्ति-वर्ग पर उदार, क्योंकि उससे बनने वाला संयोजन — 1 और 3 — चारों विकल्पों में है ही नहीं। ऐसे प्रश्न के लिए, जो 'विषयों/उपबंधों' कहकर संवैधानिक शीर्षक उद्धृत करता है, कड़ा पाठ ही उचित है: प्रविष्टि उसी से आँकी जाती है जो वह कहती है। इस आधार पर केवल प्रविष्टि 3 खड़ी रहती है, और उत्तर 'केवल 3' है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)1, 2 और 3 — यही तर्क-योग्य विकल्प है और उसका निष्पक्ष कथन बनता है। समान सिविल संहिता और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख तथा शिक्षा, दोनों सचमुच नीति-निदेशक तत्वों के विषय हैं — अनुच्छेद 44 और 45 — इसलिए जो पाठक प्रविष्टियों को विषयों के नाम मानता है, उपबंधों का पाठ नहीं, वह तीनों को सही चिह्नित करेगा। इसे इसलिए अस्वीकार किया गया है कि पहली दो प्रविष्टियों में से हर एक उस अनुच्छेद के प्रवर्तनकारी शब्द बदल देती है जिससे वह ली गई है: 'नागरिकों के लिए' बदलकर 'भारत में रहने वाले सभी व्यक्तियों के लिए', और 'छह वर्ष' बदलकर 'चौदह वर्ष'। दूसरा परिवर्तन अधिक गंभीर है, क्योंकि चौदह वर्ष अब किसी नीति-निदेशक तत्व का नहीं, अनुच्छेद 21क के मूल अधिकार का चिह्न है।
- (b)केवल 2 और 3 — यह प्रविष्टि 1 की गड़बड़ी पकड़ लेता है और प्रविष्टि 2 को निकल जाने देता है, जो उलटा क्रम है यदि दोनों में से केवल एक पर संदेह करना हो: प्रविष्टि 2 की आयु अर्थ की कोई छाया नहीं, बल्कि ठीक वही संख्या है जिसे छियासीवें संशोधन ने बदला था। मूल अनुच्छेद 45 चौदह वर्ष तक के बालकों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का वचन देता था; 2002 के बाद वही वचन अनुच्छेद 21क में मूल अधिकार बन गया और अनुच्छेद 45 केवल छह वर्ष से पहले के वर्षों के लिए रह गया। यहाँ पहुँचने वाले अभ्यर्थी को यह याद रहा है कि अनुच्छेद 44 नागरिकों की बात करता है, और यह ध्यान नहीं रहा कि अनुच्छेद 45 फिर से लिखा गया। दोनों प्रविष्टियों पर एक ही कसौटी लगाना ही इस प्रश्न का मुख्य कौशल है।
- (c)केवल 1 — यह उन दोनों प्रविष्टियों को अस्वीकार करता है जिनमें दोष निकालना सबसे कठिन है और उसी एक को रख लेता है जो अनुच्छेद 44 को ग़लत बताती है। यह तभी सही होता जब अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि कोई नीति-निदेशक तत्व न होती, और वह स्पष्ट रूप से है — अनुच्छेद 51, नीति-निदेशक तत्वों में अंतिम, पूरी तरह उसी को समर्पित है। इस विकल्प का चुनाव प्रायः तब होता है जब अभ्यर्थी 'अंतर्राष्ट्रीय' शब्द देखकर मान लेता है कि यह विषय संविधान के किसी दूसरे भाग का होगा; वह भाग-4 का ही है और उसका अंतिम अनुच्छेद है।
अवधारणा
राज्य की नीति के निदेशक तत्व संविधान का भाग 4 हैं, अनुच्छेद 36 से 51 तक। वे किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, पर अनुच्छेद 37 उन्हें देश के शासन में मौलिक घोषित करता है और विधि बनाते समय उन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य बनाता है।
उनमें सबसे अधिक जाने-पहचाने हैं — अनुच्छेद 39, भौतिक संसाधनों के वितरण और समान वेतन पर; अनुच्छेद 39क, नि:शुल्क विधिक सहायता पर; अनुच्छेद 40, ग्राम पंचायतों पर; अनुच्छेद 41, काम के तथा लोक सहायता के अधिकार पर; अनुच्छेद 42, प्रसूति सहायता और काम की न्यायसंगत दशाओं पर; अनुच्छेद 43, निर्वाह मज़दूरी पर; अनुच्छेद 43क, प्रबंध में कर्मकारों की भागीदारी पर; अनुच्छेद 44, नागरिकों के लिए समान सिविल संहिता पर; अनुच्छेद 45, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा पर; अनुच्छेद 47, पोषण और लोक स्वास्थ्य पर; अनुच्छेद 48क, पर्यावरण पर; और अनुच्छेद 51, अंतर्राष्ट्रीय शांति पर।
2002 के छियासीवें संशोधन ने इस क्षेत्र को फिर से व्यवस्थित किया: उसने अनुच्छेद 21क को मूल अधिकार के रूप में जोड़ा, अनुच्छेद 45 को फिर से लिखा, और अनुच्छेद 51क(ट) में माता-पिता या संरक्षक का यह कर्तव्य जोड़ा कि वे छह से चौदह वर्ष के अपने बालक को शिक्षा के अवसर दें। अनुच्छेद 21क के अंतर्गत बनी विधि नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 है, जो 1 अप्रैल 2010 से प्रवर्तन में आया।
ईपीएफ़ओ के अभ्यर्थी के लिए भाग-4 का श्रम वाला हिस्सा विशेष रूप से महत्व रखता है — अनुच्छेद 41, 42, 43 और 43क — क्योंकि वे उन्हीं संविधियों की पृष्ठभूमि हैं जिन्हें वह आगे प्रशासित करेगा।
यह प्रश्न इस बात की परख है कि अभ्यर्थी छियासीवें संशोधन के बाद नीति-निदेशक तत्वों और मूल अधिकारों को अलग-अलग रख पाता है या नहीं — उस संशोधन ने एक वचन को एक भाग से दूसरे भाग में पहुँचा दिया और दोनों दस्तावेज़ों को देखने में एक जैसा छोड़ दिया।
परीक्षक की विधि पहचानने योग्य है: किसी अनुच्छेद का अपना शीर्षक लीजिए और उसमें तीन-चार शब्द बदल दीजिए। बदला हुआ शीर्षक भी स्वाभाविक ही पढ़ा जाता है, और इसीलिए प्रविष्टियाँ परिचित लगती हैं और जाँच से निकल जाती हैं। बचाव यह है कि अनुच्छेद के विषय की नहीं, उसके शब्दों की स्मृति से मिलान किया जाए: पूछिए कि अनुच्छेद 44 वास्तव में किसके लिए क्या प्राप्त कराता है, और प्रतिस्थापन अपने आप दिखने लगता है।
विकल्प-सूची में किसी लुप्त संयोजन को खोज लेना भी लाभ देता है। यहाँ '1 और 3' वाला कोई विकल्प नहीं है, और यही पेपर का यह बताने का ढंग है कि प्रविष्टि 1 और प्रविष्टि 2 पर एक ही कसौटी लगानी होगी — यदि एक कड़ाई से आँकी जाए तो दूसरी भी।
छपाई की एक बात: प्रविष्टि 2 में आयु देवनागरी शब्द 'चौदह' में लिखी है, अंक में नहीं — इस पृष्ठ की यह अकेली शब्दों में लिखी संख्या है, जबकि यहाँ हर दूसरी संख्या पश्चिमी अंक में है। संख्या को शब्द में देखकर उस पर से ध्यान हट जाना आसान है, और इस प्रश्न का पूरा निर्णय उसी संख्या पर है।
मुख्य तथ्य
- नीति-निदेशक तत्व भाग-4, अनुच्छेद 36 से 51 तक हैं; अनुच्छेद 37 उन्हें न्यायालय द्वारा अप्रवर्तनीय पर शासन में मौलिक बनाता है।
- अनुच्छेद 44 का शीर्षक 'नागरिकों के लिए समान सिविल संहिता' है और वह राज्य को निदेश देता है कि वह भारत के पूरे राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए समान सिविल संहिता प्राप्त कराने का प्रयास करे।
- अनुच्छेद 45, जैसा संविधान (छियासीवाँ संशोधन) अधिनियम, 2002 ने फिर से लिखा, सभी बालकों के लिए तब तक प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा के बारे में है जब तक वे छह वर्ष की आयु पूरी न कर लें।
- उसी संशोधन से जोड़ा गया अनुच्छेद 21क छह से चौदह वर्ष के बालकों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मूल अधिकार बनाता है; मूल अनुच्छेद 45 ने संविधान के प्रारंभ से दस वर्ष के भीतर चौदह वर्ष तक के सभी बालकों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का वचन दिया था।
- अनुच्छेद 51 का शीर्षक 'अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि' है और उसमें राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत तथा सम्मानपूर्ण संबंध, अंतर्राष्ट्रीय विधि तथा संधि-बाध्यताओं के प्रति आदर, और माध्यस्थम् द्वारा विवाद-निपटारा भी आते हैं।
- 2002 में जोड़ा गया अनुच्छेद 51क(ट) माता-पिता या संरक्षक का यह मूल कर्तव्य बनाता है कि वे छह से चौदह वर्ष के बालक को शिक्षा के अवसर दें; अनुच्छेद 21क के अंतर्गत बनी विधि नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 2002 से पहले वाले अनुच्छेद 45 और उसके चौदह वर्ष के वचन को वर्तमान नीति-निदेशक तत्व मानकर बोल देना।
- छह से चौदह वर्ष के बालकों की नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा को भाग-4 में रख देना; 2002 से वह भाग-3 का मूल अधिकार है।
- किसी संवैधानिक उपबंध में 'नागरिकों' और 'भारत में रहने वाले सभी व्यक्तियों' को आपस में बदल देने योग्य मान लेना; ये दो अलग वर्ग हैं।
- एक ही समुच्चय के अलग-अलग कथनों पर अलग-अलग कड़ाई लगाना; यहाँ विकल्पों में '1 और 3' का न होना ही यह बता देता है कि कसौटी एक रखनी है।
- 'अंतर्राष्ट्रीय' शब्द देखकर यह मान लेना कि विषय संविधान के किसी दूसरे भाग का होगा; अनुच्छेद 51 भाग-4 का अंतिम अनुच्छेद है।
इन पेपरों में भाग-4 के प्रश्न प्रायः यह पूछते हैं कि दिए हुए उपबंधों में से कौन नीति-निदेशक तत्व है, या अनुच्छेदों को विषयों के साथ सुमेलन में रखते हैं। जो उपबंध हिले हैं — बयालीसवें और छियासीवें संशोधनों से छुए गए — वे अनुपात से कहीं अधिक पूछे जाते हैं, क्योंकि उन्हीं से परीक्षक पुराने पाठ के सहारे कोई विश्वसनीय झूठा कथन गढ़ सकता है। इसलिए भाग-4 की तैयारी में हर अनुच्छेद के आगे यह भी लिख लीजिए कि वह मूल है या संशोधन से जोड़ा गया, और यदि बदला गया है तो किस वर्ष। दूसरा प्रचलित रूप यह है कि किसी अनुच्छेद का शीर्षक लेकर उसमें व्यक्ति-वर्ग, आयु या अवधि बदल दी जाए — जैसे यहाँ दो प्रविष्टियों में किया गया है — इसलिए विषय से नहीं, शब्दों से मिलान कीजिए।
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- (a) With the consent of all the States
- (b) With the consent of majority of the States
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उत्तर(d) Without the consent of any State
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- practice — not a real PYQ
छियासीवें संविधान संशोधन के बाद अनुच्छेद 45 किस आयु-वर्ग के बालकों की देखरेख और शिक्षा से संबंधित है ?
- (a)छह वर्ष से कम
- (b)छह से चौदह वर्ष
- (c)चौदह से अठारह वर्ष
- (d)तीन से आठ वर्ष
उत्तर(a) छह वर्ष से कम — छियासीवें संशोधन, 2002 के बाद अनुच्छेद 45 इसी आयु-वर्ग की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा से संबंधित है; छह से चौदह वर्ष वाली सीमा अनुच्छेद 21क की है, जो मूल अधिकार है।
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समान सिविल संहिता से संबंधित निदेशक तत्व किस अनुच्छेद में है ?
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- (b)अनुच्छेद 43
- (c)अनुच्छेद 44
- (d)अनुच्छेद 47
उत्तर(c) अनुच्छेद 44 — यही राज्य को नागरिकों के लिए पूरे भारत के राज्यक्षेत्र में समान सिविल संहिता प्राप्त कराने का प्रयास करने का निदेश देता है; अनुच्छेद 40 पंचायतों से, 43 कुटीर उद्योगों तथा जीवन-निर्वाह मज़दूरी से और 47 पोषण तथा मद्य-निषेध से संबंधित है।