सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए : सूची-I (भारत के संविधान का प्रावधान) A. संसद से संबंधित प्रावधान B. राज्यपाल की विधायी शक्तियाँ C. भारत सरकार द्वारा उधारी D. सहकारी समितियाँ सूची-II (भारत के संविधान का भाग) 1. भाग-6 2. भाग-9 ख 3. भाग-12 4. भाग-5 कूट :
- (a)A-4, B-3, C-1, D-2
- (b)A-2, B-1, C-3, D-4
- (c)A-2, B-3, C-1, D-4
- (d)A-4, B-1, C-3, D-2
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) A-4, B-1, C-3, D-2। चारों प्रावधानों को एक-एक करके लीजिए; हर बार भाग स्वयं इसी से निकल आता है कि वह भाग किस विषय का है।
A. संसद से संबंधित प्रावधान — भाग-5। भाग 5 'संघ' है। उसका दूसरा अध्याय संसद है: दोनों सदनों का गठन, पदाधिकारी, कार्य-संचालन, विधायी प्रक्रिया और विशेषाधिकार, जो अनुच्छेद 79 से 122 तक चलते हैं। इसलिए A का जोड़ 4 से बनता है।
B. राज्यपाल की विधायी शक्तियाँ — भाग-6। भाग 6 'राज्य' है, और उसी में राज्यपाल का पूरा पद आता है: अध्याय 2 में नियुक्ति और शक्तियाँ, और अध्याय 3 में राज्य विधानमंडल, विधेयकों पर अनुमति, राष्ट्रपति के लिए विधेयक आरक्षित रखना, तथा वह उपबंध जिस ओर 'राज्यपाल की विधायी शक्तियाँ' सामान्यतः संकेत करता है — अनुच्छेद 213, यानी राज्य विधानमंडल के सदन या सदनों के सत्र में न रहते समय अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति। इसलिए B का जोड़ 1 से बनता है।
C. भारत सरकार द्वारा उधारी — भाग-12। भाग 12 'वित्त, संपत्ति, संविदाएँ और वाद' है। अनुच्छेद 292 उपबंध करता है कि संघ की कार्यपालिका शक्ति भारत की संचित निधि की प्रतिभूति पर उधार लेने तक विस्तृत है, उन सीमाओं के भीतर जो संसद नियत करे; अनुच्छेद 293 राज्यों के लिए वही काम करता है। इसलिए C का जोड़ 3 से बनता है।
D. सहकारी समितियाँ — भाग-9 ख। भाग 9 ख (अनुच्छेद 243ठ से 243ढ तक) संविधान (सत्तानवेवाँ संशोधन) अधिनियम, 2011 द्वारा जोड़ा गया, और उसी संशोधन ने अनुच्छेद 19(1)(ग) में सहकारी समिति बनाने का अधिकार तथा नीति-निदेशक तत्वों में अनुच्छेद 43ख भी जोड़ा। वह सहकारी समितियों के बोर्ड का आकार, पाँच वर्ष की अवधि, चुनाव और अधिक्रमण की सीमाएँ तय करता है। इसलिए D का जोड़ 2 से बनता है।
कूट के रूप में पढ़ने पर यह A-4, B-1, C-3, D-2 बनता है — विकल्प (d)।
एक विधि-निर्णय की टिप्पणी साथ रखने योग्य है: भारत संघ बनाम राजेंद्र एन. शाह (2021) में उच्चतम न्यायालय ने भाग 9 ख को उस सीमा तक अभिखंडित किया जहाँ तक वह एक ही राज्य के भीतर काम करने वाली सहकारी समितियों पर लागू होता है, क्योंकि उस संशोधन का राज्यों द्वारा अनुसमर्थन नहीं हुआ था, जो अनुच्छेद 368(2) के अंतर्गत राज्य की विधायी शक्ति को छूने वाले संशोधन के लिए अपेक्षित है; बहु-राज्य सहकारी समितियों के लिए वह भाग बना हुआ है। भाग की संख्या, जो इस प्रश्न का विषय है, इससे अप्रभावित रहती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)A-4, B-3, C-1, D-2 — यह संसद और सहकारी समितियों को ठीक बिठाता है और फिर बीच के दोनों को आपस में बदल देता है: राज्यपाल की विधायी शक्तियाँ भाग-12 में और संघ की उधारी भाग-6 में। इस अदला-बदली के दोनों हिस्से एक ही कारण से ग़लत हैं — भाग 12 वित्त वाला भाग है, जहाँ उधारी का स्थान है, और भाग 6 राज्यों वाला भाग है, जहाँ राज्यपाल का। यही सबसे संभावित ग़लत चुनाव है, क्योंकि कूट के दोनों सिरे सही दिखते हैं और अभ्यर्थी वहीं जाँचना बंद कर देता है। सुमेलन के प्रश्न में दोनों सिरों का ठीक होना कुछ सिद्ध नहीं करता; परीक्षक ग़लत कूट प्रायः सही कूट के क्रम-परिवर्तन से ही बनाता है।
- (b)A-2, B-1, C-3, D-4 — यह विकल्प (a) की दर्पण-छवि है: बीच की जोड़ी ठीक है और दोनों सिरे आपस में बदले हुए, इसलिए संसद भाग-9 ख में भेज दी गई है और सहकारी समितियाँ भाग-5 में। भाग 9 ख 2011 में विशेष रूप से सहकारी समितियों के लिए जोड़ा गया था, और भाग 5 1950 से संघ को — राष्ट्रपति, संसद, संघ की कार्यपालिका और न्यायपालिका को — उठाए हुए है। इन दोनों को आपस में बदलने के लिए संविधान के सबसे पुराने भागों में से एक और सबसे नए भागों में से एक को एक साथ ग़लत करना पड़ता है। यहाँ एक सामान्य सहायता भी काम आती है: संविधान के भाग मोटे तौर पर विषय के साथ आगे बढ़ते हैं — पहले संघ, फिर राज्य, फिर स्थानीय संस्थाएँ, फिर वित्त — इसलिए 'संसद' जैसा विषय किसी दो-अंकी उप-भाग में नहीं, आरंभिक भागों में ही मिलेगा।
- (c)A-2, B-3, C-1, D-4 — यहाँ हर जोड़ी ग़लत है। यह वह कूट है जो तब बनता है जब अभ्यर्थी विषय से नहीं, छपे हुए क्रम से सुमेलन करता है — A को सूची-II की दूसरी प्रविष्टि, B को तीसरी, और इसी तरह आगे। सुमेलन वाले प्रश्न में सूची-II का छपा हुआ क्रम परीक्षक ठीक इसीलिए तय करता है कि विषय से मिलाने वाले को पुरस्कार मिले और क्रम से चलने वाले को दंड। इस पृष्ठ पर दोनों सूचियाँ आमने-सामने दो समांतर स्तंभों में छपी हैं, जिससे एक ही पंक्ति में दिखने वाली प्रविष्टियाँ जुड़ी हुई लगती हैं; वह केवल पृष्ठ-सज्जा है और किसी जोड़ी का दावा नहीं करती।
अवधारणा
संविधान भागों में व्यवस्थित है, और प्रायः अनुच्छेद जानने से तेज़ यह जान लेना होता है कि विषय किस भाग में है।
इस प्रश्न में आए भाग: भाग 5, संघ — राष्ट्रपति, संसद, संघ की कार्यपालिका और न्यायपालिका। भाग 6, राज्य — राज्यपाल, राज्य की कार्यपालिका, राज्य विधानमंडल, उच्च न्यायालय। भाग 9, पंचायतें, और भाग 9 क, नगरपालिकाएँ, दोनों 1992 के संशोधनों से; भाग 9 ख, सहकारी समितियाँ, 2011 के सत्तानवेवें संशोधन से। भाग 11, संघ और राज्यों के संबंध, जिसमें विधायी और प्रशासनिक वितरण है। भाग 12, वित्त, संपत्ति, संविदाएँ और वाद — कराधान की शक्ति, संचित निधि, वित्त आयोग, और अनुच्छेद 292 तथा 293 पर संघ तथा राज्यों की उधारी।
अनुच्छेदों का एक जोड़ा विशेष रूप से याद रखने योग्य है। अनुच्छेद 213 राज्यपाल की अध्यादेश-शक्ति है और अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति की; दोनों का ढाँचा एक जैसा है और अंतर यह है कि कुछ विषयों में राज्यपाल को राष्ट्रपति के अनुदेश लेने पड़ते हैं। इसी तरह अनुच्छेद 292 और 293 का जोड़ा है, जिनमें दूसरा राज्य पर यह शर्त भी लगाता है कि जब तक संघ का कोई ऋण बक़ाया है तब तक वह संघ की सहमति के बिना उधार नहीं ले सकता।
सुमेलन वाला प्रश्न वस्तुतः चार स्वतंत्र प्रश्न हैं जिनका एक ही अंक मिलता है, इसलिए परीक्षक को अंक काटने के लिए केवल इतना चाहिए कि अभ्यर्थी किसी एक जोड़ी के बारे में अनिश्चित हो। कुशल विधि यह है कि जिन जोड़ियों के बारे में आप निश्चित हैं उन्हें पहले बिठा दीजिए और फिर देखिए कि कितने विकल्प बचते हैं: यहाँ अकेले C को भाग-12 से बिठाने पर दो विकल्प बचते हैं, और A को भाग-5 से बिठाने पर एक। यह भी देखिए कि ग़लत कूट कैसे बनाए गए हैं — एक दोनों सिरे बदलता है, एक बीच बदलता है, और एक सीधा क्रम है — और यह बनावट इन पेपरों में सामान्य है।
यही कारण है कि सुमेलन पर हमला चार अलग-अलग स्मृतियों के बजाय विकल्पों पर की जाने वाली गणना से किया जाना चाहिए। जिस जोड़ी पर आपको सबसे अधिक भरोसा हो उसे बिठाइए और हर उस विकल्प को काट दीजिए जो उसका खंडन करता हो। चूँकि इन पेपरों में ग़लत कूट सही कूट के क्रम-परिवर्तन होते हैं, गढ़ी हुई जोड़ियाँ नहीं, इसलिए दो निश्चित जोड़ियाँ लगभग हमेशा पर्याप्त होती हैं।
छपाई की बातें भी इस प्रश्न में महत्व रखती हैं। सूची-I और सूची-II आमने-सामने दो समांतर स्तंभों में छपी हैं, और यह तथ्य कि 'A. संसद से संबंधित प्रावधान' उसी पंक्ति में है जिसमें '1. भाग-6', किसी जोड़ी का दावा नहीं करता — वह पृष्ठ-सज्जा का परिणाम है। सूची-II की प्रविष्टि 2 'भाग-9 ख' छपी है — पश्चिमी अंक 9, एक स्पेस, फिर देवनागरी अक्षर ख — जो अंग्रेज़ी के Part IX B का हिन्दी रूप है, न कि '9ख' जुड़ा हुआ और न लैटिन B। यह इस प्रश्न का इकलौता सुमेलन है, इसलिए यह तकनीक यहाँ एक बार अंक देती है — पर यही तकनीक इस शृंखला के सहोदर पेपरों के लेखाकर्म खंड के सुमेलन प्रश्नों में भी काम आती है।
मुख्य तथ्य
- भाग-5, 'संघ', में राष्ट्रपति, संघ की कार्यपालिका, संसद और संघ की न्यायपालिका आते हैं; उसका दूसरा अध्याय संसद है और उसके प्रावधान अनुच्छेद 79 से 122 तक चलते हैं।
- भाग-6, 'राज्य', में राज्यपाल और राज्य विधानमंडल आते हैं; अनुच्छेद 213 राज्यपाल की अध्यादेश बनाने की शक्ति है, और वही 'राज्यपाल की विधायी शक्तियाँ' का केंद्र है।
- भाग-12, 'वित्त, संपत्ति, संविदाएँ और वाद', में अनुच्छेद 292 है, जो भारत की संचित निधि की प्रतिभूति पर भारत सरकार की उधारी को संसद द्वारा नियत सीमाओं के भीतर अनुज्ञात करता है; अनुच्छेद 293 राज्यों की उधारी शासित करता है और उसमें संघ का ऋण बक़ाया रहते संघ की सहमति की शर्त है।
- भाग-9 ख, अनुच्छेद 243ठ से 243ढ, सहकारी समितियों पर है और उसे संविधान (सत्तानवेवाँ संशोधन) अधिनियम, 2011 द्वारा जोड़ा गया; उसी संशोधन ने अनुच्छेद 19(1)(ग) में सहकारी समिति बनाने का अधिकार और नीति-निदेशक तत्वों में अनुच्छेद 43ख जोड़ा।
- भारत संघ बनाम राजेंद्र एन. शाह (2021) में उच्चतम न्यायालय ने भाग 9 ख को एक ही राज्य के भीतर काम करने वाली सहकारी समितियों पर लागू होने की सीमा तक अभिखंडित किया, क्योंकि अनुच्छेद 368(2) के अंतर्गत अपेक्षित अनुसमर्थन नहीं हुआ था; बहु-राज्य सहकारी समितियों के लिए वह बना हुआ है।
- भाग-9 पंचायतों पर है (तिहत्तरवाँ संशोधन) और भाग-9 क नगरपालिकाओं पर (चौहत्तरवाँ संशोधन), दोनों 1992 के।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- विषय के बजाय छपे हुए क्रम से सुमेलन करना — सीधा क्रम वाला कूट जानबूझकर एक विकल्प के रूप में रखा जाता है।
- राज्यपाल को संघ वाले भाग में रख देना, क्योंकि उनकी अध्यादेश-शक्ति राष्ट्रपति की शक्ति से मिलती-जुलती है।
- उधारी को संघ-राज्य संबंधों वाले भाग में भेज देना; उधारी वित्त वाले भाग में है।
- यह भूल जाना कि भाग-9 ख 2011 का जोड़ा हुआ है, और 'भाग-9' तथा 'भाग-9 ख' को एक ही भाग पढ़ लेना।
- दो समांतर स्तंभों में छपी सूचियों की एक ही पंक्ति में दिखने वाली प्रविष्टियों को जुड़ी हुई मान लेना; वह केवल पृष्ठ-सज्जा है।
ईपीएफ़ओ के पेपरों में सुमेलन या तो अनुच्छेदों को विषयों के साथ जोड़ते हैं या भागों को विषयों के साथ, और ग़लत कूट जोड़ियाँ गढ़कर नहीं, बल्कि सही कूट का क्रम बदलकर बनाए जाते हैं। इसी कारण उस जोड़ी से काम शुरू करना, जिसके बारे में आप सबसे निश्चित हैं, चारों पर एक-एक करके सोचने से अधिक कुशल है; दो निश्चित जोड़ियाँ लगभग हमेशा ठीक एक विकल्प छोड़ जाती हैं। तैयारी के लिए संविधान के भागों का एक ही तालिका-रूप में नक्शा बना लीजिए, जिसमें हर भाग के सामने उसका शीर्षक और अनुच्छेदों का परिसर हो; यही तालिका सुमेलन, कथन-कूट और एक-उत्तर, तीनों रूपों में काम आती है। एक और सतर्कता: जिन भागों में क, ख, ग जैसे उप-भाग जुड़े हैं — भाग 9 क, भाग 9 ख, भाग 14 क — उन्हें मूल भाग से अलग खाने में रखिए, क्योंकि परीक्षक प्रायः वहीं फेरबदल करता है।
संबंधित PYQ
EPFO_APFC_2023_Q56Which of the following statements regarding the Ordinance-making power of the Governor is/are not correct? 1. It is a discretionary power and does not entail the advice of the Ministers. 2. The Ordinance-making power of the Governor is confined to subjects in all the three Lists of Schedule VII. 3. With regard to repugnancy with a Union Law relating to the concurrent subjects, the Governor’s Ordinance will prevail notwithstanding repugnancy, if the Ordinance had been made in pursuance of ‘instructions’ of the President of India. Select the correct answer using the code given below.
- (a) 1 and 2 only
- (b) 1, 2 and 3
- (c) 2 and 3 only
- (d) 3 only
उत्तर(a) 1 and 2 only
राज्यपाल की अध्यादेश बनाने की शक्ति पर कौन-से कथन सही नहीं हैं — इसी सुमेलन का भाग-6 वाला आधा, सीधे पूछा गया।
EPFO_EOAO_2023_Q57The board of a cooperative society can be superseded or kept under suspension if : 1. There is negligence in the performance of duties. 2. There is any act prejudicial to the interest of the co-operative society or its members. 3. The body has failed to conduct elections in accordance with the provisions of the State Act. 4. There is no Government shareholdings or loan or financial assistance or any guarantee by the Government. Select the correct answer using the code given below :
- (a) 1 and 2 only
- (b) 1 and 3 only
- (c) 3 and 4 only
- (d) 1, 2 and 3
उत्तर(d) 1, 2 and 3
किन आधारों पर सहकारी समिति का बोर्ड अधिक्रांत या निलंबित किया जा सकता है — भाग-9 ख के विषय पर सीधा प्रश्न।
EPFO_APFC_2016_Q38Under the Constitution of India, which of the following statements are correct ? 1. The Constitution is supreme. 2. There is a clear division of powers between the Union and the State Governments. 3. Amendments to the Constitution have to follow the prescribed procedure. 4. The Union Parliament and the State Legislatures are sovereign. 5. The Preamble to the Constitution cannot be invoked to determine the ambit of Fundamental Rights. Select the correct answer using the codes given below :
- (a) 1, 2, 3, 4 and 5
- (b) 2, 3 and 4 only
- (c) 1, 4 and 5 only
- (d) 1, 2 and 3 only
उत्तर(d) 1, 2 and 3 only
संविधान की मूल विशेषताओं पर पाँच कथनों वाला प्रश्न, जिसमें संघ और राज्यों के बीच शक्ति-विभाजन आता है — संविधान की बनावट पर वही परख।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
भारत के संविधान का कौन-सा भाग सहकारी समितियों से संबंधित है ?
- (a)भाग-9
- (b)भाग-9 क
- (c)भाग-9 ख
- (d)भाग-14 क
उत्तर(c) भाग-9 ख — सहकारी समितियाँ सत्तानवेवें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 से जोड़े गए इसी भाग में हैं; भाग-9 पंचायतों का है और भाग-9 क नगरपालिकाओं का, दोनों 1992 के संशोधनों से।
- practice — not a real PYQ
भारत सरकार द्वारा उधार लेने से संबंधित अनुच्छेद कौन-सा है ?
- (a)अनुच्छेद 266
- (b)अनुच्छेद 280
- (c)अनुच्छेद 292
- (d)अनुच्छेद 293
उत्तर(c) अनुच्छेद 292 — यह भाग-12 में है और भारत सरकार की उधारी से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 293 राज्यों की उधारी से; अनुच्छेद 266 समेकित निधि से और अनुच्छेद 280 वित्त आयोग से संबंधित है।