आजीविका और उद्यम के लिए हाशिए पर पड़े व्यक्तियों के लिए सहायता (स्माइल) योजना किसके/किनके पुनर्वास के लिए है ? 1. परलैंगिक (ट्रांसजेंडर) व्यक्ति 2. भिक्षावृत्ति में लगे हुए व्यक्ति नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)1 और 2 दोनों
- (d)न तो 1 और न ही 2
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) 1 और 2 दोनों।
स्माइल सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक छाता योजना है, जो फ़रवरी 2022 में शुरू हुई, और वह दो पहले से चली आ रही केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं को एक छत के नीचे लाकर बनाई गई: परलैंगिक व्यक्तियों के कल्याण के लिए व्यापक पुनर्वास, और भिक्षावृत्ति के कार्य में लगे व्यक्तियों का व्यापक पुनर्वास। इसलिए दोनों क्रमांकित प्रविष्टियाँ प्रश्न को ठीक-ठीक पूरा करती हैं।
प्रविष्टि 1 सही है। परलैंगिक व्यक्तियों वाली उप-योजना छात्रवृत्ति, एक अलग घटक के अंतर्गत कौशल विकास, एक स्वास्थ्य योजना के माध्यम से लिंग-पुष्टि देखभाल सहित चिकित्सा सहायता, समग्र चिकित्सा सहायता और आश्रय के लिए धन देती है। उसका सबसे प्रसिद्ध अंश गरिमा गृह है — वे आश्रय-गृह जो आवास, भोजन, चिकित्सा देखभाल और मनोरंजन की सुविधाओं के साथ-साथ कौशल-प्रशिक्षण भी देते हैं, और जो राज्यों तथा संघ राज्यक्षेत्रों में कार्यान्वयन एजेंसियों के माध्यम से चलाए जाते हैं।
प्रविष्टि 2 सही है। भिक्षावृत्ति वाली उप-योजना में भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों का सर्वेक्षण और पहचान, संग्रहण, बचाव और आश्रय, शिक्षा, कौशल और पुनर्वास सम्मिलित हैं, और वह भिक्षावृत्ति-मुक्त भारत के घोषित उद्देश्य के साथ शहर-दर-शहर कार्यान्वित होती है। उसका वितरण मुख्यतः चुने हुए शहरों में राज्य तथा नगर निकायों और स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से होता है।
दोनों मिलकर पूरी स्माइल योजना बनाते हैं, और इसीलिए वह विकल्प सही नहीं हो सकता जो इनमें से केवल एक को स्वीकार करे। योजना का पूरा नाम एक बार पढ़ लेने पर उत्तर उसी से निकल आता है: 'आजीविका और उद्यम के लिए हाशिए पर पड़े व्यक्तियों के लिए सहायता' जानबूझकर ऐसे शब्दों में रखा गया है कि वह एक से अधिक हाशिए पर पड़े समूह को समेट सके — बहुवचन 'व्यक्तियों' स्वयं संकेत है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1 — परलैंगिक व्यक्तियों वाला घटक दोनों में अधिक चर्चित है — गरिमा गृह और छात्रवृत्ति वाले अंश को ही सबसे अधिक कवरेज मिलता है — इसलिए जिस अभ्यर्थी ने केवल वही आधा पढ़ा है वह यहीं रुक जाता है। पर वह योजना का आधा हिस्सा है। भिक्षावृत्ति वाला घटक उसी दिन उसी छाते के भीतर लाया गया और वह उसी आवंटन से चलता है। यह विकल्प एक सामान्य भूल का उदाहरण है: किसी छाता योजना के बारे में प्रश्न आने पर सबसे अधिक चर्चित उप-योजना को ही पूरी योजना मान लेना। इसका उपाय यह है कि हर छाता योजना के साथ उसकी उप-योजनाओं की संख्या भी याद रखी जाए।
- (b)केवल 2 — यह विकल्प (a) की दर्पण-भूल है। जिसने स्माइल के बारे में अंतिम बार भिक्षावृत्ति-मुक्त शहरों के सर्वेक्षणों के प्रसंग में पढ़ा हो, वह इसे केवल निर्धनता से जुड़ी योजना मान सकता है। पर योजना की अपनी बनावट दो उप-योजनाओं की है, और परलैंगिक व्यक्तियों का पुनर्वास उनमें पहली है — वही, जिसके अंतर्गत गरिमा गृह, छात्रवृत्ति और लिंग-पुष्टि देखभाल आती है। इस भूल का स्रोत भी वही है जो (a) का — योजना को उस समाचार से पहचानना जिसमें वह अंतिम बार दिखी, न कि उसकी अपनी मार्गदर्शिका से। दोनों विकल्प एक साथ यह दिखाते हैं कि इस प्रश्न का पूरा भार 'दोनों' वाली सीढ़ी पर है, और उससे बचने का एक ही रास्ता है: छाता योजना को उसकी उप-योजनाओं की संख्या के साथ याद रखना।
- (d)न तो 1 और न ही 2 — यह तभी सही होता जब स्माइल किसी तीसरे ही समूह के लिए होती। अभ्यर्थी यहाँ प्रायः 'आजीविका और उद्यम' शब्दों से अनुमान लगाकर पहुँचता है कि यह कोई सामान्य स्वरोज़गार या ऋण कार्यक्रम है। वह ऐसी योजना नहीं है: वह सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के पास है और अपनी मार्गदर्शिका में अपने दोनों लक्षित समूहों के नाम लेती है। योजनाओं के नामों से लाभार्थी का अनुमान लगाना इस खंड की सबसे भरोसेमंद भूल है, क्योंकि इन नामों में प्रायः आकांक्षा लिखी होती है, समूह नहीं — और यही उन्हें परीक्षा के लिए उपयोगी बनाता है।
अवधारणा
स्माइल — आजीविका और उद्यम के लिए हाशिए पर पड़े व्यक्तियों के लिए सहायता — सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की छाता योजना है, जो फ़रवरी 2022 में शुरू हुई।
छाता योजना एक प्रशासनिक व्यवस्था है: समान प्रयोजन वाली पहले से चल रही योजनाओं को एक नाम और एक बजट-मद के नीचे रख दिया जाता है, ताकि उनका वित्तपोषण, अनुवीक्षण और प्रतिवेदन एक साथ हो सके। स्माइल की दो भुजाएँ हैं — परलैंगिक व्यक्तियों का व्यापक पुनर्वास और भिक्षावृत्ति के कार्य में लगे व्यक्तियों का व्यापक पुनर्वास।
दोनों भुजाएँ एक ही पुनर्वास-तर्क पर चलती हैं — पहचानिए, आश्रय दीजिए, उपचार कीजिए, शिक्षा या कौशल दीजिए, और आजीविका में बिठाइए — और नाम में आए 'आजीविका और उद्यम' शब्द इसी अंतिम चरण की ओर संकेत करते हैं।
एक और भेद जो प्रायः आगे पूछा जाता है: स्माइल केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, यानी पूरी तरह संघ सरकार द्वारा वित्तपोषित, न कि केंद्र-प्रायोजित योजना जिसकी लागत राज्यों के साथ बाँटी जाती हो। परलैंगिक व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और उसके अंतर्गत बनी राष्ट्रीय परलैंगिक व्यक्ति परिषद इस दिशा का विधिक आधार हैं, और 2014 का नालसा निर्णय, जिसने तीसरे लिंग को विधिक मान्यता दी, उसकी पृष्ठभूमि है।
इस पेपर में कल्याणकारी योजनाओं के प्रश्न लगभग हमेशा किसी योजना को उसके लाभार्थियों से या उसके मंत्रालय से मिलाने के बारे में होते हैं, क्योंकि ये वही दो तथ्य हैं जिन पर अभ्यर्थी को बिना किसी अस्पष्टता के परखा जा सकता है। स्माइल परीक्षकों की पसंद है, क्योंकि उसका संक्षिप्त नाम यह संकेत नहीं देता कि वह किसके लिए है, और क्योंकि जो अभ्यर्थी उसकी दो में से एक भुजा जानते हैं वे आत्मविश्वास के साथ 'केवल एक' वाला विकल्प चुन लेते हैं। यह प्रश्न जिस आदत को पुरस्कार देता है वह यह है कि हर छाता योजना के बारे में यह पूछा जाए कि उसमें कितनी उप-योजनाएँ हैं।
छपाई की दो बातें दर्ज करने योग्य हैं। पहली, प्रश्न प्रश्नवाचक चिह्न से समाप्त होता है और उसकी क्रमांकित प्रविष्टियाँ उत्तर का हिस्सा हैं — प्रश्न और हर प्रविष्टि को एक निरंतर वाक्य की तरह पढ़ने पर अस्पष्टता समाप्त हो जाती है। दूसरी, इस हिन्दी पृष्ठ पर योजना का लघु नाम देवनागरी में — (स्माइल) — छपा है, लैटिन लिपि में नहीं, इसलिए यहाँ SMILE शब्द कहीं दिखाई नहीं देगा।
विकल्प-सीढ़ी 'दोनों / न तो … न ही' वाली है, जो इस पेपर के राजव्यवस्था और शासन खंड में बार-बार लौटती है। यह सीढ़ी दो स्वतंत्र निर्णयों को एक अंक में बदल देती है, इसलिए जो अभ्यर्थी एक प्रविष्टि के बारे में निश्चित हो और दूसरी के बारे में अनिश्चित, उसके सामने वस्तुतः आधा-आधा चुनाव रह जाता है; योजनाओं के प्रश्न में इस स्थिति से बचने का रास्ता यही है कि हर छाता योजना उसकी उप-योजनाओं की संख्या के साथ याद रखी जाए।
मुख्य तथ्य
- स्माइल सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने फ़रवरी 2022 में छाता योजना के रूप में शुरू की; उसका पूरा रूप है आजीविका और उद्यम के लिए हाशिए पर पड़े व्यक्तियों के लिए सहायता।
- पहली उप-योजना — परलैंगिक व्यक्तियों के कल्याण के लिए व्यापक पुनर्वास की केंद्रीय क्षेत्र योजना, जिसमें छात्रवृत्ति, कौशल विकास और लिंग-पुष्टि देखभाल सहित चिकित्सा सहायता आती है।
- दूसरी उप-योजना — भिक्षावृत्ति के कार्य में लगे व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास की केंद्रीय क्षेत्र योजना, जो सर्वेक्षण और पहचान, बचाव, आश्रय, शिक्षा, कौशल और पुनर्वास के चरणों में चुने हुए शहरों में चलती है।
- परलैंगिक व्यक्तियों के लिए गरिमा गृह आश्रय-गृह आवास, भोजन, चिकित्सा देखभाल, कौशल-प्रशिक्षण और मनोरंजन की सुविधाएँ देते हैं।
- स्माइल केंद्रीय क्षेत्र की योजना है — पूरी तरह संघ सरकार द्वारा वित्तपोषित — न कि केंद्र-प्रायोजित योजना, जिसकी लागत राज्यों के साथ बाँटी जाती है।
- परलैंगिक व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और उसके अंतर्गत बनी राष्ट्रीय परलैंगिक व्यक्ति परिषद इस दिशा का विधिक आधार हैं; 2014 का नालसा निर्णय तीसरे लिंग की विधिक मान्यता का आधार है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- दो हिस्सों वाली किसी छाता योजना का उत्तर 'केवल एक' वाले विकल्प से दे देना, क्योंकि उसका केवल एक हिस्सा मालूम है।
- योजना के संक्षिप्त नाम से लाभार्थियों का अनुमान लगाना; स्माइल जैसे नाम किसी आकांक्षा का वर्णन करते हैं, किसी समूह का नहीं।
- केंद्रीय क्षेत्र और केंद्र-प्रायोजित को मिला देना — वित्तपोषण का यह ढर्रा इस विषय का मानक अगला प्रश्न है।
- यह मान लेना कि प्रश्न की क्रमांकित प्रविष्टियाँ आपस में अनन्य विकल्प हैं; 'दोनों / न तो … न ही' वाली सीढ़ी पर वे प्रायः नहीं होतीं।
- योजना को उस समाचार से पहचानना जिसमें वह अंतिम बार दिखी थी, न कि उसकी अपनी मार्गदर्शिका से; यही (a) और (b), दोनों भूलों का साझा स्रोत है।
ईपीएफ़ओ के सामान्य योग्यता पेपर में योजना वाला प्रश्न प्रायः एक पंक्ति और एक तथ्य का होता है: कौन-सा मंत्रालय, कौन-से लाभार्थी, या कौन-सा उद्देश्य। यहाँ काम में ली गई 'दोनों / न तो … न ही' सीढ़ी परीक्षक का वह तरीक़ा है जिससे वह जाँचता है कि आप योजना की सुर्ख़ी जानते हैं या उसका पूरा दायरा। इसलिए योजनाओं के नोट्स मंत्रालय, लाभार्थी, वर्ष और उप-योजनाओं के नाम — इन चार खानों में बनाइए। इस विषय का दूसरा प्रचलित रूप वित्तपोषण का है — केंद्रीय क्षेत्र बनाम केंद्र-प्रायोजित — और तीसरा उस अधिनियम का, जिस पर योजना खड़ी है। जिन योजनाओं के नाम उनके लाभार्थी छिपाते हैं, उनकी एक अलग सूची रखना विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि परीक्षक ठीक वैसी ही योजनाएँ चुनता है।
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- (b) 2, 3, 4 and 5
- (c) 2, 4, 5 and 6
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