राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) के बारे में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ? 1. यह भारत सरकार के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम (DIP) के अंतर्गत एक मिशन मोड परियोजना (MMP) है । 2. यह एप्लीकेशन ‘एक राष्ट्र – एक एप्लीकेशन’ के सिद्धांत पर आधारित है । 3. यह संसद सचिवालय द्वारा विकसित की गई है । 4. इसका मुख्य उद्देश्य राज्य विधानमंडलों के सभी कार्यों का संपूर्ण डिजिटलीकरण करना है । नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
- (a)1, 2 और 3
- (b)1, 2 और 4
- (c)केवल 2 और 3
- (d)केवल 4
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) 1, 2 और 4। केवल कथन 3 ग़लत है, और (b) को छोड़कर हर विकल्प या तो उसे रख लेता है या किसी सही कथन को गिरा देता है।
कथन 1 सही है। राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत एक मिशन मोड परियोजना के रूप में चलती है। मिशन मोड परियोजनाएँ वे अलग-अलग, समयबद्ध और परिणाम-निर्धारित परियोजनाएँ हैं जिनमें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रयास बाँटा गया है, और हर एक का अपना नोडल मंत्रालय होता है; विधानमंडलों वाली परियोजना यही है।
कथन 2 सही है। 'एक राष्ट्र – एक एप्लीकेशन' इस परियोजना का अपना घोषित सिद्धांत है। उसका आशय यह है कि देश का हर सदन एक ही सॉफ़्टवेयर पर काम करे, न कि हर विधानमंडल अपना अलग सॉफ़्टवेयर बनवाए: सदस्यों को कहीं भी बैठकर एक ही अंतराफलक मिलता है, और हर सदन के काग़ज़ात एक ही तुलनीय डिजिटल रूप में आ जाते हैं।
कथन 3 ग़लत है, और यही वह भेद है जिस पर यह प्रश्न बनाया गया है। यह परियोजना संसदीय कार्य मंत्रालय की है, जो उसका नोडल मंत्रालय है, और उसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के साथ मिलकर विकसित किया गया है। संसद सचिवालय — अर्थात् लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय, जो अनुच्छेद 98 के अंतर्गत दोनों सदनों की सेवा करते हैं — विकास करने वाली एजेंसी नहीं है। जिस अभ्यर्थी को केवल इतना मालूम है कि परियोजना विधानमंडलों से संबंधित है, उसे 'संसद सचिवालय' विश्वसनीय लगेगा; सही निकाय संघ सरकार का एक मंत्रालय है।
कथन 4 सही है। उद्देश्य सदनों को काग़ज़-रहित 'डिजिटल हाउस' बनाना है — सूचनाएँ, प्रश्न, कार्य-सूचियाँ, विधेयक, समिति के काग़ज़ात और सदस्यों की सेवाएँ, सब कुछ आरंभ से अंत तक इसी एप्लीकेशन पर, ताकि किसी राज्य विधानमंडल के कार्य का पूरा चक्र डिजिटल रूप से चले।
चार में से एक कथन ग़लत, इसलिए शेष तीन का नाम लेने वाला विकल्प 1, 2 और 4 है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)1, 2 और 3 — यह कथन 1 और 2 के बारे में ठीक है, पर वह कथन 3 को भीतर ले लेता है और कथन 4 को छोड़ देता है — जबकि कथन 4 परियोजना का वास्तविक उद्देश्य बताता है। इसका आकर्षण यह मान लेने में है कि किसी विधानमंडल का सॉफ़्टवेयर किसी विधानमंडल के अपने सचिवालय से ही आया होगा; वह संसदीय कार्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के साथ मिलकर बनवाया है। ध्यान दीजिए कि संसदीय कार्य मंत्रालय और लोकसभा तथा राज्यसभा सचिवालय अलग-अलग नियोक्ता हैं और उनके कार्य भी अलग हैं — पहला संघ सरकार का मंत्रालय है, दूसरे सदनों के अपने सचिवालय, जिनका उपबंध अनुच्छेद 98 में है।
- (c)केवल 2 और 3 — यह उस एक कथन को रख लेता है जो ग़लत है और उन दोनों को छोड़ देता है जो बताते हैं कि यह परियोजना क्या है और किसलिए है। अभ्यर्थी यहाँ प्रायः इस रास्ते पहुँचता है कि वह 'एक राष्ट्र – एक एप्लीकेशन' वाला सूत्र पहचान लेता है और फिर विकास करने वाली संस्था को जाँचने के बजाय उसका अनुमान लगा लेता है। यह ध्यान देने योग्य है कि इस पेपर में स्वामित्व और कर्तृत्व वाले ब्योरे ही वे जगहें हैं जहाँ परीक्षक भूल रखता है, क्योंकि नाम और नारा व्यापक रूप से छपते हैं जबकि यह कि परियोजना किस मंत्रालय की है, उतना नहीं छपता।
- (d)केवल 4 — कथन 4 सचमुच सही है, पर कथन 1 और 2 भी सही हैं, और जो विकल्प तीन सही कथनों में से केवल एक स्वीकार करे वह अपर्याप्त है। यह उस अभ्यर्थी का सुरक्षित दिखने वाला चुनाव है जिसने काग़ज़-रहित विधानमंडल वाला उद्देश्य सुना है पर डिजिटल इंडिया से जुड़ाव या उस नारे पर कोई राय देने को तैयार नहीं। ध्यान दीजिए कि जिन दो कथनों को वह छोड़ रहा है वे दोनों परियोजना के अपने विवरण से आते हैं — मिशन मोड परियोजना होना उसकी प्रशासनिक श्रेणी है और 'एक राष्ट्र – एक एप्लीकेशन' उसका घोषित सिद्धांत — इसलिए वे अनुमान नहीं, अभिलेख हैं। 'कौन-से कथन सही हैं' वाले प्रश्न में राय न देना उतना ही महँगा पड़ता है जितना ग़लत राय देना, क्योंकि विकल्प वहाँ आंशिक स्वीकृति की कोई व्यवस्था नहीं रखते और अधूरा उत्तर पूरा ग़लत उत्तर ही होता है।
अवधारणा
राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन एक ही, उपकरण-निरपेक्ष और सदस्य-केंद्रित एप्लीकेशन है, जिस पर भारत का कोई भी विधानमंडल बिना काग़ज़ के अपना काम चला सकता है। जो सदन इसे अपनाता है वह अपनी सूचनाएँ, तारांकित तथा अतारांकित प्रश्न, कार्य-सूची, विधेयक, संशोधन, समिति-प्रतिवेदन और सदस्यों का जीवन-वृत्त इसी मंच पर रखता है; सदस्य टैबलेट या फ़ोन पर कार्य प्राप्त करते और दाख़िल करते हैं।
यह डिजिटल इंडिया के अंतर्गत एक मिशन मोड परियोजना के रूप में प्रशासित होती है, जिसका नोडल मंत्रालय संसदीय कार्य मंत्रालय है और तकनीकी साझेदार राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र। इसे सरकारी क्लाउड अवसंरचना पर रखा गया है, ताकि किसी सदन को अपना तंत्र न ख़रीदना पड़े और न बनाए रखना पड़े। चूँकि हर अपनाने वाला सदन एक ही मंच पर काम करता है, इसलिए अलग-अलग विधानमंडलों के काग़ज़ात एक समान डिजिटल रूप में आ जाते हैं — और यही सदनों के बीच तुलना को संभव बनाता है।
मिशन मोड परियोजना क्या है, यह भी जान लेना चाहिए, क्योंकि यही कथन 1 का आधार है। वह राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस ढाँचे के अंतर्गत एक अलग परियोजना होती है जिसका दायरा, समय-सीमा और नोडल मंत्रालय निर्धारित होता है, और आज यह ढाँचा डिजिटल इंडिया कार्यक्रम आगे ले जाता है। ऐसी परियोजनाएँ केंद्रीय, राज्य और एकीकृत — तीन श्रेणियों में बाँटी जाती हैं।
एक भेद जो इस प्रश्न में निर्णायक है: संसदीय कार्य मंत्रालय संघ सरकार का मंत्रालय है, जो सदनों में सरकार के कामकाज का प्रबंध करता है, जबकि लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय सदनों के अपने सचिवालय हैं, जिनका उपबंध अनुच्छेद 98 में है और जिनका कर्मचारी-वर्ग कार्यपालिका से अलग है।
इस पेपर में शासन और ई-गवर्नेंस के प्रश्न प्रायः किसी शृंखला की एक कड़ी जाँचते हैं — कोई योजना किस मंत्रालय की है, किस एजेंसी ने बनाई, किस छाता-कार्यक्रम के भीतर बैठती है — क्योंकि यही वह हिस्सा है जो उस अभ्यर्थी को अलग करता है जिसने परियोजना के बारे में पढ़ा है उससे जिसने केवल नाम सुना है। राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन इसका अच्छा उदाहरण है: नाम, नारा और उद्देश्य व्यापक रूप से छपते हैं, जबकि स्वामित्व नहीं, इसलिए झूठा कथन वहीं रखा गया है।
विकल्प-सूची को किसी स्मृति से पहले देख लेना यहाँ फल देता है। कथन 1 विकल्प (a) और (b) में है, कथन 3 विकल्प (a) और (c) में, और कथन 4 विकल्प (b) और (d) में। कथन 3 को ग़लत तय करते ही (a) और (c), दोनों गिर जाते हैं; कथन 1 को सही तय करते ही (d) भी उनके साथ गिरता है, और (b) बच जाता है — बिना चौथे कथन को कभी जाँचे। यही इस पेपर के लगभग हर चार-कथन वाले प्रश्न की बनावट है, और इसका अर्थ यह है कि जो अभ्यर्थी दो कथनों के बारे में निश्चित हो उसे शेष दो की प्रायः आवश्यकता ही नहीं पड़ती।
छपाई की एक बात: प्रश्न में संक्षिप्त रूप मिश्रित अक्षरों में — NeVA — छपा है, और यह छपाई का दोष नहीं, परियोजना का अपना रूप है। कथन 2 का नारा युग्मक एकल उद्धरण चिह्नों के भीतर और बीच में स्पेस सहित डैश के साथ छपा है।
मुख्य तथ्य
- राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत एक मिशन मोड परियोजना है — यानी निर्धारित दायरे, समय-सीमा और नोडल मंत्रालय वाली उन अलग-अलग परियोजनाओं में से एक, जिनमें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रयास बाँटा गया है।
- नोडल मंत्रालय संसदीय कार्य मंत्रालय है, और इसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के साथ मिलकर विकसित किया गया है; संसद सचिवालय इसका विकासकर्ता नहीं है।
- इसका कार्य-सिद्धांत 'एक राष्ट्र – एक एप्लीकेशन' है — हर सदन के लिए अलग सॉफ़्टवेयर के बजाय सब के लिए एक साझा मंच।
- उद्देश्य काग़ज़-रहित 'डिजिटल हाउस' है, जिसमें विधानमंडल का कार्य आरंभ से अंत तक इसी एप्लीकेशन पर चले।
- यह राज्य विधानमंडलों के सदनों के साथ-साथ संसद को भी समेटता है, और यही एक साझा एप्लीकेशन बनाने को सार्थक बनाता है; इसे सरकारी क्लाउड पर रखा गया है, इसलिए किसी सदन को अपना तंत्र नहीं ख़रीदना पड़ता।
- मिशन मोड परियोजना राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस ढाँचे के अंतर्गत एक अलग परियोजना होती है जिसका दायरा, समय-सीमा और नोडल मंत्रालय निर्धारित होता है, और वे केंद्रीय, राज्य तथा एकीकृत श्रेणियों में बाँटी जाती हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- विधानमंडल से जुड़ी किसी परियोजना को किसी विधानमंडल के सचिवालय के नाम कर देना, न कि उस मंत्रालय के जिसकी वह है।
- किसी सही कथन को इसलिए छोड़ देना कि उसी विकल्प में कोई परिचित लगने वाला ग़लत कथन भी है।
- संसदीय कार्य मंत्रालय को लोकसभा और राज्यसभा सचिवालयों से मिला देना — ये अलग नियोक्ता हैं और उनके कार्य भी अलग हैं।
- यह मान लेना कि 'एक राष्ट्र – एक एप्लीकेशन' प्रश्न के लिए गढ़ा गया नारा है; वह परियोजना का अपना घोषित सिद्धांत है।
- 'कौन-से कथन सही हैं' वाले प्रश्न में सबसे कम कथन वाला विकल्प चुनकर सुरक्षित रहने की कोशिश करना; अधूरा उत्तर पूरा ग़लत उत्तर ही होता है।
प्रति पेपर एक-दो प्रश्न किसी नामित सरकारी डिजिटल पहल पर आने की अपेक्षा रखिए, जो या तो इसी तरह चार कथनों के समुच्चय के रूप में पूछे जाते हैं या एक पंक्ति के 'यह किस उद्देश्य की पूर्ति करती है' वाले प्रश्न के रूप में। हर पहल को चार अक्षों पर तैयार कीजिए — पूरा रूप, नोडल मंत्रालय, छाता-कार्यक्रम, और वह एक पंक्ति जो उसका उद्देश्य बताती है — क्योंकि परीक्षक ठीक इन्हीं चार में से एक को झूठा करता है। इन चारों में जो सबसे कम छपता है वह नोडल मंत्रालय है, इसलिए वही सबसे अधिक बार बदला जाता है। चार-कथन वाले प्रश्न में विकल्पों की बनावट भी देख लीजिए: एक कथन तय कर लेने से प्रायः दो विकल्प एक साथ कटते हैं, और दो कथन तय कर लेने से उत्तर बच जाता है।
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- (a) 1 and 4 only
- (b) 1, 2 and 3 only
- (c) 2, 3 and 4 only
- (d) 1, 2, 3 and 4
उत्तर(b) 1, 2 and 3 only
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