निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं ? 1. भारत का मुख्य न्यायाधीश, भारत के सर्वोच्च न्यायालय का उच्चतम प्रशासनिक अधिकारी है । 2. सर्वोच्च न्यायालय और उसकी रजिस्ट्री की कार्य संरचना के निर्धारण हेतु प्रशासनिक शक्तियाँ, अनन्य रूप से भारत के मुख्य न्यायाधीश में निहित हैं । 3. एक व्यक्ति जो भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहा हो, सेवानिवृत्ति के पश्चात केवल भारत के सर्वोच्च न्यायालय में ही वकालत कर सकता है, न कि भारत में किसी अन्य न्यायालय में । 4. भारत के सर्वोच्च न्यायालय का एक नामित वरिष्ठ अधिवक्ता, भारत के सर्वोच्च न्यायालय में अभिलेख अधिवक्ता (एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड) के बिना, प्रस्तुत होने के लिए अधिकृत नहीं है । नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1 और 2
- (b)1, 2 और 3
- (c)केवल 3 और 4
- (d)केवल 2 और 4
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) केवल 2 और 4।
कथन 3 सबसे जल्दी तय होता है और वही आधे विकल्प हटा देता है। संविधान का अनुच्छेद 124(7) उपबंध करता है कि जो व्यक्ति उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के पद पर रह चुका हो वह भारत के राज्यक्षेत्र में किसी भी न्यायालय में या किसी भी प्राधिकारी के समक्ष अभिवचन या कार्य नहीं करेगा। यह प्रतिबंध पूर्ण है। उच्चतम न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश न उच्चतम न्यायालय में वकालत कर सकता है, न किसी उच्च न्यायालय में, न किसी अधीनस्थ न्यायालय में, न किसी अधिकरण के समक्ष — यह निर्बंधन निरपेक्ष है और उस पद पर रह चुकने के साथ जुड़ी शर्तों में से एक है। कथन, जो केवल उच्चतम न्यायालय में वकालत की अनुमति देता है, वस्तुतः उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वाली स्थिति को उलटकर लिखता है — अनुच्छेद 220 उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त स्थायी न्यायाधीश को उच्चतम न्यायालय और अन्य उच्च न्यायालयों को छोड़कर भारत के किसी भी न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष वकालत करने से रोकता है — और उसे ग़लत पद पर लागू कर देता है। कथन 3 के ग़लत होते ही विकल्प (b) और (c) गिर जाते हैं।
कथन 4 सही है। उच्चतम न्यायालय नियम, 2013 के अनुसार वरिष्ठ अधिवक्ता उच्चतम न्यायालय में अभिलेख अधिवक्ता के बिना उपस्थित नहीं होगा, और न वकालतनामा दाख़िल करेगा और न किसी पक्षकार के लिए कार्य करेगा। अभिलेख अधिवक्ता की व्यवस्था केवल उच्चतम न्यायालय की है: उसी नामावली का अधिवक्ता, जिसने न्यायालय की अपनी परीक्षा उत्तीर्ण की हो और जो न्यायालय से निर्धारित दूरी के भीतर पंजीकृत कार्यालय रखता हो, कार्यवाही दाख़िल कर सकता है और किसी पक्षकार के लिए अभिलेख पर रह सकता है। वरिष्ठ अधिवक्ता, चाहे कितना ही प्रतिष्ठित हो, अभिलेख अधिवक्ता के निर्देश पर बहस करता है। कथन 4 के सही होने से वह उत्तर टिक नहीं सकता जो उसे छोड़ दे, इसलिए विकल्प (a) भी शेष के साथ गिरता है।
अब बचता है विकल्प (d), जिसके लिए कथन 2 का सही और कथन 1 का ग़लत होना आवश्यक है — और यह भेद वास्तविक है तथा सावधानी से कहने योग्य।
कथन 2 सही है। न्यायालय के अपने प्रतिष्ठान पर प्रशासनिक प्राधिकार मुख्य न्यायाधीश का है। अनुच्छेद 146(1) उपबंध करता है कि उच्चतम न्यायालय के अधिकारियों और सेवकों की नियुक्तियाँ भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा या न्यायालय के ऐसे अन्य न्यायाधीश या अधिकारी द्वारा की जाएँगी जिसे वे निदेश दें। मुख्य न्यायाधीश ही 'रोस्टर के स्वामी' भी हैं, जो न्यायपीठों का गठन और न्यायिक कार्य का आवंटन तय करते हैं, और न्यायालय तथा उसकी रजिस्ट्री की कार्य-व्यवस्था उन्हीं के प्राधिकार से तय होती है।
कथन 1 सही नहीं है, क्योंकि वह शक्ति की नहीं, पद की भाषा काम में लेता है। उच्चतम न्यायालय का उच्चतम प्रशासनिक अधिकारी महासचिव है, जो रजिस्ट्री का प्रमुख होता है और जिसके अधीन रजिस्ट्रार तथा न्यायालय का शेष प्रतिष्ठान काम करता है। मुख्य न्यायाधीश संस्था के प्रमुख हैं और उसकी प्रशासनिक शक्तियों के धारक; वे उसके प्रतिष्ठान के अधिकारी नहीं हैं। दोनों कथन साथ-साथ ठीक इसलिए रखे गए हैं कि शक्ति रखने और अधिकारी होने का अंतर पकड़ना पड़े।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1 और 2 — यह कथन 1 और 2 स्वीकार करता है और कथन 4 अस्वीकार कर देता है। कथन 4 को अस्वीकार करना ही निर्णायक भूल है: उच्चतम न्यायालय नियम, 2013 स्पष्ट हैं कि वरिष्ठ अधिवक्ता उच्चतम न्यायालय में अभिलेख अधिवक्ता के बिना उपस्थित नहीं होगा, और न्यायालय ने हाल के आदेशों में भी यही स्थिति दोहराई है। यह विकल्प कथन 1 भी स्वीकार करता है, जो मुख्य न्यायाधीश को न्यायालय का उच्चतम प्रशासनिक अधिकारी बताता है — जबकि वह वर्णन महासचिव का है, जो रजिस्ट्री का प्रमुख है। यह जोड़ी इसलिए आकर्षक है कि कथन 1 और 2 एक ही बात कहने के दो तरीक़े लगते हैं; वे नहीं हैं, और उनमें से केवल दूसरा ठीक है।
- (b)1, 2 और 3 — इसमें कथन 3 आ जाता है, जो अनुच्छेद 124(7) के विरुद्ध है। वह उपबंध उस व्यक्ति को, जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के पद पर रह चुका हो, भारत के राज्यक्षेत्र में किसी भी न्यायालय में या किसी भी प्राधिकारी के समक्ष अभिवचन या कार्य करने से रोकता है, बिना किसी अपवाद के। कथन का सूत्र — केवल उच्चतम न्यायालय में वकालत की अनुमति — अनुच्छेद 220 के अंतर्गत उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों वाले नियम का बिगड़ा हुआ रूप है, जिन्हें उच्चतम न्यायालय और अन्य उच्च न्यायालयों को छोड़कर वकालत से रोका जाता है। किसी एक पद का नियम दूसरे पद पर चढ़ा देना इन प्रश्नों की मानक रचना है, और उसके विरुद्ध बचाव यह जाँचना है कि कोई अनुच्छेद किस पद को शासित करता है।
- (c)केवल 3 और 4 — यह सही कथन 4 को ग़लत कथन 3 के साथ जोड़ देता है। कथन 3 वाले दोनों विकल्पों में यह अधिक ख़तरनाक है, क्योंकि इसका दूसरा आधा ठीक है और उसी से इसे विश्वसनीयता मिल जाती है। पकड़ने योग्य बात संवैधानिक प्रतिबंध है: उच्चतम न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश भारत में वकालत करता ही नहीं, और सेवानिवृत्ति के बाद के निर्बंधनों में यह सबसे कड़ा है। यही एक कारण है कि ऐसे न्यायाधीश प्रायः अधिकरणों, आयोगों और माध्यस्थम् में नियुक्त किए जाते हैं, जहाँ न्यायालय में अभिवचन और कार्य करने का प्रतिबंध लागू नहीं होता।
अवधारणा
यह प्रश्न उच्चतम न्यायालय से संबंधित विधि के तीन अलग-अलग हिस्सों को समेटता है, और हर एक को अपने आप में याद रखना चाहिए।
न्यायालय का प्रशासन। अनुच्छेद 146 न्यायालय के अधिकारियों और सेवकों को शासित करता है: नियुक्तियाँ भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा या उनके निदेश पर ऐसे अन्य न्यायाधीश या अधिकारी द्वारा की जाती हैं, और सेवा-शर्तें मुख्य न्यायाधीश द्वारा बनाए नियमों से विहित होती हैं, जिनमें व्यय से जुड़े विषयों पर राष्ट्रपति का अनुमोदन अपेक्षित है। रजिस्ट्री का प्रमुख स्वयं महासचिव होता है, जिसकी सहायता रजिस्ट्रार करते हैं। इसलिए शक्ति मुख्य न्यायाधीश की है और पद महासचिव का। इसके साथ-साथ मुख्य न्यायाधीश 'रोस्टर के स्वामी' के रूप में न्यायपीठों का गठन करते हैं और न्यायिक कार्य आवंटित करते हैं — इस प्राधिकार को न्यायालय ने बार-बार पुष्ट किया है।
सेवानिवृत्ति के बाद वकालत। अनुच्छेद 124(7) उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को भारत में किसी भी न्यायालय में या किसी भी प्राधिकारी के समक्ष अभिवचन या कार्य करने से रोकता है। अनुच्छेद 220 अलग है और कम कड़ा: जो व्यक्ति उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के पद पर रह चुका हो वह उच्चतम न्यायालय और अन्य उच्च न्यायालयों को छोड़कर भारत में किसी भी न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष अभिवचन या कार्य नहीं कर सकता। दोनों अनुच्छेद नियमित रूप से आपस में मिला दिए जाते हैं, और इस क्षेत्र का हर प्रश्न उसी भ्रम का उपयोग करता है।
अभिलेख अधिवक्ता की व्यवस्था। उच्चतम न्यायालय नियम, 2013 के अंतर्गत केवल अभिलेख अधिवक्ता ही उच्चतम न्यायालय में कोई कार्यवाही दाख़िल कर सकता है या किसी पक्षकार के लिए कार्य कर सकता है। उस नामावली में आने के लिए किसी विद्यमान अभिलेख अधिवक्ता के साथ प्रशिक्षण और न्यायालय की परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक है, और धारक को न्यायालय से विहित दूरी के भीतर पंजीकृत कार्यालय रखना पड़ता है। वरिष्ठ अधिवक्ता, जो अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 16 के अंतर्गत योग्यता और प्रतिष्ठा के आधार पर नामित किए जाते हैं, मुक़दमे में बहस करते हैं पर उन्हें दाख़िल नहीं कर सकते और अभिलेख अधिवक्ता के बिना उपस्थित नहीं हो सकते।
इन पेपरों में राजव्यवस्था के प्रश्न संस्थाओं की रूपरेखा पर नहीं, उनके कामकाज के ब्योरे पर बनते हैं — कौन नियुक्त करता है, कौन उपस्थित हो सकता है, किसी पद का सेवानिवृत्त धारक क्या कर सकता है — और उच्चतम न्यायालय वह संस्था है जिसे सबसे अधिक चुना जाता है।
इस प्रश्न में तीन के बजाय चार कथन हैं, और प्रश्न पूछता है कि उनमें से कौन-से सही 'हैं', बहुवचन में, इसलिए एक से अधिक के योग्य होने की अपेक्षा है। यह बहुवचन एक छोटी-सी सूचना है: वह अपने आप किसी विकल्प को नहीं काटता, पर यह पुष्ट कर देता है कि प्रश्न किसी एक कथन वाला उत्तर नहीं खोज रहा।
यह बनावट एक विशेष क्रम में काम करने पर पुरस्कार देती है। कथन 3 किसी अनुच्छेद के पाठ से तय हो जाता है और एक साथ दो विकल्प हटा देता है; कथन 4 न्यायालय के नियम से तय हो जाता है और तीसरा विकल्प हटा देता है। तब जाकर कथन 1 और 2 के बीच का सूक्ष्म भेद सामने आता है, और उस चरण तक उत्तर पहले ही तय हो चुका होता है — यह ध्यान देने योग्य है, क्योंकि वही भेद इस प्रश्न की सबसे कठिन चीज़ है और जो अभ्यर्थी उसी से आरंभ करेगा वह सबसे अधिक समय उस हिस्से पर लगाएगा जो वैसे भी विलोपन से तय हो जाता है।
छपाई की एक बात: कथन 4 में निषेध — 'अधिकृत नहीं है' — साधारण अक्षरों में छपा है, गाढ़े में नहीं, जबकि इसी परिवार के 2023 के पेपर ऐसे निषेध गाढ़े करके छापते थे। सादे पाठ में यह चूकना आसान है, और पूरा कथन उसी पर टिका है।
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 124(7) उस व्यक्ति को, जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के पद पर रह चुका हो, भारत के राज्यक्षेत्र में किसी भी न्यायालय में या किसी भी प्राधिकारी के समक्ष अभिवचन या कार्य करने से रोकता है — पूर्ण प्रतिबंध, जिसमें स्वयं उच्चतम न्यायालय के लिए भी कोई अपवाद नहीं।
- अनुच्छेद 220 उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को शासित करता है और कम कड़ा है: उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त स्थायी न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय और अन्य उच्च न्यायालयों को छोड़कर भारत के किसी भी न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष वकालत नहीं कर सकता।
- उच्चतम न्यायालय नियम, 2013 के अनुसार वरिष्ठ अधिवक्ता उच्चतम न्यायालय में अभिलेख अधिवक्ता के बिना उपस्थित नहीं होगा, वकालतनामा दाख़िल नहीं करेगा और किसी पक्षकार के लिए कार्य नहीं करेगा।
- केवल अभिलेख अधिवक्ता — जो न्यायालय द्वारा संचालित प्रशिक्षण और परीक्षा के बाद नामावली में आता है और न्यायालय से विहित दूरी के भीतर पंजीकृत कार्यालय रखता है — उच्चतम न्यायालय में कार्यवाही दाख़िल कर सकता है।
- अनुच्छेद 146(1) उच्चतम न्यायालय के अधिकारियों और सेवकों की नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश में या उनके निदेशित न्यायाधीश या अधिकारी में निहित करता है, जबकि रजिस्ट्री का प्रमुख महासचिव होता है, जो न्यायालय का वरिष्ठतम प्रशासनिक अधिकारी है।
- वरिष्ठ अधिवक्ता का पद अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 16 के अंतर्गत योग्यता और प्रतिष्ठा के आधार पर नामित किया जाता है, और वह बहस करने का अधिकार देता है, दाख़िल करने या अकेले उपस्थित होने का नहीं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- अनुच्छेद 220 को, जो उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों पर लागू है, उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों पर लगा देना; सेवानिवृत्ति के दोनों नियम अलग हैं और नरम वाला नियमित रूप से कड़े वाले पद पर चढ़ा दिया जाता है।
- 'उच्चतम प्रशासनिक अधिकारी' और 'प्रशासनिक शक्तियों का धारक' को एक ही बात मान लेना; रजिस्ट्री का प्रमुख महासचिव है, जबकि अनुच्छेद 146 की शक्तियाँ मुख्य न्यायाधीश की हैं।
- यह मान लेना कि वरिष्ठ अधिवक्ता की प्रतिष्ठा प्रक्रियागत अपेक्षाओं से छूट दे देती है; नामांकन बहस करने का अधिकार देता है, दाख़िल करने या अकेले उपस्थित होने का नहीं।
- उस प्रश्न में बहुवचन क्रिया को अनदेखा कर देना जो पूछता है कि कौन-से कथन सही 'हैं' — यह संकेत है कि एक से अधिक के योग्य होने की अपेक्षा है।
- सबसे कठिन कथन से आरंभ करना, जबकि यहाँ चार में से दो सीधे किसी संवैधानिक उपबंध और न्यायालय के नियम से तय हो जाते हैं।
इन पेपरों में राजव्यवस्था के प्रश्न कार्य-संबंधी ब्योरे पर बनते हैं — कौन कोई शक्ति प्रयोग करता है, कौन उपस्थित हो सकता है, कोई व्यक्ति पद छोड़ने के बाद क्या कर सकता है — और कथन किसी पड़ोसी उपबंध का नियम उठाकर बनाए जाते हैं। अनुच्छेद 124(7) की जगह अनुच्छेद 220, राष्ट्रपति की शक्तियों की जगह राज्यपाल की, उच्चतम न्यायालय की अधिकारिता की जगह उच्च न्यायालय की — यह ढर्रा इतना नियमित है कि उसकी तैयारी की जा सकती है। जो विधि काम करती है वह यह है कि हर नियम को उस पद के साथ जोड़ा जाए जिसे वह शासित करता है और उस अनुच्छेद के साथ जिसमें वह है; और चार कथनों वाले प्रश्न में उन कथनों से आरंभ किया जाए जो किसी पाठ के विरुद्ध तय हो सकते हैं, न कि उनसे जो भाषा के किसी सूक्ष्म भेद पर टिके हों। यही क्रम यहाँ समय बचाता है।
संबंधित PYQ
EPFO_APFC_2023_Q57Which of the following statements about curative petition is/are correct? 1. It can be entertained by the Supreme Court of India only. 2. It can be entertained by the Supreme Court of India and the High Courts of India. 3. Certification by a Senior Advocate is necessary to file a curative petition. Select the correct answer using the code given below.
- (a) 1 only
- (b) 3 only
- (c) 2 and 3
- (d) 1 and 3
उत्तर(d) 1 and 3
उपचारात्मक याचिका पर कथन — कि वह केवल उच्चतम न्यायालय में होती है और उस पर वरिष्ठ अधिवक्ता का प्रमाणन अपेक्षित है — उच्चतम न्यायालय की प्रैक्टिस और प्रक्रिया का वही क्षेत्र।
EPFO_EOAO_2023_Q56Which of the following statements regarding the attendance of retired judges at sittings of the Supreme Court of India is/are correct ? 1. Article 128 permits the attendance of retired judges at the sittings of the Supreme Court. 2. The Chief Justice of India may at any time request anyone who has held office as a Judge of the Supreme Court or of a High Court to sit and act as a Judge of the Supreme Court. 3. The Chief Justice of India may at any time, with the previous consent of the President of India, request any person who has held the office of Chief Justice of a High Court to sit and act as a Judge of the Supreme Court. 4. The Chief Justice of India may at any time, with the previous consent of the President of India, request any person who has held the office of a Judge of the Supreme Court to sit and act as a Judge of the Supreme Court. Select the correct answer using the code given below :
- (a) 1 and 4
- (b) 1 and 3
- (c) 2 and 4
- (d) 4 only
उत्तर(a) 1 and 4
अनुच्छेद 128 के अंतर्गत सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का उच्चतम न्यायालय की बैठकों में उपस्थित होना — सेवानिवृत्ति के बाद के नियमों की वही परख, दूसरे उपबंध से।
EPFO_APFC_2016_Q38Under the Constitution of India, which of the following statements are correct ? 1. The Constitution is supreme. 2. There is a clear division of powers between the Union and the State Governments. 3. Amendments to the Constitution have to follow the prescribed procedure. 4. The Union Parliament and the State Legislatures are sovereign. 5. The Preamble to the Constitution cannot be invoked to determine the ambit of Fundamental Rights. Select the correct answer using the codes given below :
- (a) 1, 2, 3, 4 and 5
- (b) 2, 3 and 4 only
- (c) 1, 4 and 5 only
- (d) 1, 2 and 3 only
उत्तर(d) 1, 2 and 3 only
संविधान की मूल विशेषताओं पर पाँच कथनों वाला प्रश्न, जिसमें शक्ति-विभाजन और संशोधन-प्रक्रिया आती है — हर कथन अलग-अलग तय करने वाला वही ढाँचा।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की वकालत पर रोक लगाता है ?
- (a)अनुच्छेद 121
- (b)अनुच्छेद 124(7)
- (c)अनुच्छेद 217
- (d)अनुच्छेद 220
उत्तर(b) अनुच्छेद 124(7) — यह उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश पर भारत के राज्यक्षेत्र में कहीं भी वकालत करने से पूर्ण रोक लगाता है; अनुच्छेद 220 उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए है और उसका प्रतिबंध आंशिक है।
- practice — not a real PYQ
उच्चतम न्यायालय में कोई मामला अभिलेख पर दाख़िल करने का अधिकार किसे है ?
- (a)किसी भी अधिवक्ता को
- (b)केवल नामित वरिष्ठ अधिवक्ता को
- (c)केवल अभिलेख अधिवक्ता को
- (d)केवल महान्यायवादी को
उत्तर(c) केवल अभिलेख अधिवक्ता को — उच्चतम न्यायालय में मामला दाख़िल करने और पक्षकार की ओर से अभिलेख पर आने का अधिकार केवल अभिलेख अधिवक्ता को है; वरिष्ठ अधिवक्ता तो वकालतनामा भी दाख़िल नहीं कर सकता।