निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. भारत की जैव-अर्थव्यवस्था का भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 4·25% योगदान है । 2. BioE3, पुनर्योजी जैव-विनिर्माण को प्रोत्साहित करती है और चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था का समर्थन करती है, जो भारत के शुद्ध-शून्य (नेट-ज़ीरो) लक्ष्यों से एकरेखित है । उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)1 और 2 दोनों
- (d)न तो 1 और न ही 2
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) 1 और 2 दोनों। दोनों कथन जैव-अर्थव्यवस्था के सरकारी लेखे से आते हैं और दोनों ठीक हैं।
कथन 1 सही है। भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 के लगभग 10 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024 में लगभग 165·7 अरब डॉलर तक पहुँची है, और इस क्षेत्र का राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में योगदान 4·25 प्रतिशत दर्ज है; पिछले चार वर्षों में इसकी चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर लगभग 17·9 प्रतिशत रही। घोषित नीतिगत लक्ष्य 2030 तक 300 अरब डॉलर की जैव-अर्थव्यवस्था का है। कथन का आँकड़ा प्रकाशित आँकड़े से दशमलव सहित मेल खाता है, और इतनी सटीकता स्वयं इस बात का संकेत है कि वह स्रोत से उठाया गया है।
कथन 2 सही है और वह नीति के आधिकारिक वर्णन को लगभग शब्दशः दोहराता है। BioE3 — बायोटेक्नोलॉजी फ़ॉर इकॉनमी, एनवायरनमेंट एंड एम्प्लॉयमेंट — को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 अगस्त 2024 को स्वीकृति दी, और सरकारी सामग्री में उसका सार इन्हीं शब्दों में दिया जाता है कि वह पुनर्योजी जैव-विनिर्माण को प्रोत्साहित करती है और भारत के शुद्ध-शून्य लक्ष्यों से एकरेखित चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था का समर्थन करती है। उसके तीन घोषित उद्देश्य उसके नाम में ही हैं: उच्च-प्रदर्शन जैव-विनिर्माण से आर्थिक वृद्धि, रासायनिक आधार से जैव आधार की ओर उत्पादन खिसकाकर कम कार्बन-पदचिह्न वाला पर्यावरणीय लाभ, और रोज़गार — विशेष रूप से छोटे शहरों में स्थानीय जैव-भार के उपयोग से। उसके साधन हैं जैव-विनिर्माण सुविधाएँ, बायो-फ़ाउंड्री क्लस्टर और बायो-एआई हब।
दोनों कथनों को साथ पढ़ने पर वे एक ही नीति-क्षेत्र को दो ओर से दिखाते हैं: पहला अर्थव्यवस्था में इस क्षेत्र का वर्तमान भार बताता है, और दूसरा उसे बढ़ाने के लिए बना ढाँचा। किसी में कोई फेरबदल नहीं है, इसलिए उत्तर वही विकल्प है जो दोनों को स्वीकार करता है।
छपाई पर एक टिप्पणी: कथन 1 का दशमलव पूर्ण विराम के बजाय उठे हुए मध्य-बिंदु से छपा है — 4·25% — जो इस आयोग की परिपाटी है और आँकड़े को नहीं बदलता। यह पढ़ते समय ठिठकने की बात नहीं है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1 — यह जैव-अर्थव्यवस्था वाला आँकड़ा स्वीकार करता है और BioE3 का वर्णन अस्वीकार कर देता है। वह वर्णन कोई भावानुवाद नहीं, लगभग आधिकारिक सूत्र ही है: पुनर्योजी जैव-विनिर्माण, चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था, और शुद्ध-शून्य लक्ष्यों से एकरेखण — इन्हीं तीन वाक्यांशों में यह नीति नियमित रूप से संक्षेपित की जाती है। अभ्यर्थी को इसलिए झिझक हो सकती है कि वाक्य नीति-शब्दावली की एक लड़ी जैसा पढ़ा जाता है, और यहाँ स्पष्ट रहना चाहिए कि जिस सामग्री से यह आया है वहाँ नीति का वर्णन ठीक ऐसे ही किया जाता है — यह लहजा संदेह का नहीं, भरोसे का कारण है।
- (b)केवल 2 — यह नीति का वर्णन स्वीकार करता है और आँकड़ा अस्वीकार कर देता है। आँकड़ा सटीक और प्रकाशित है: जैव-अर्थव्यवस्था का योगदान सकल घरेलू उत्पाद का 4·25 प्रतिशत दर्ज है, और वह 2014 के लगभग 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में लगभग 165·7 अरब डॉलर तक पहुँची। अभ्यर्थी इसे प्रायः इसलिए ठुकराता है कि वह बहुत बड़ा लगता है — अर्थव्यवस्था के चार प्रतिशत से अधिक की जैव-अर्थव्यवस्था सुनने में भारी लगती है — पर यह पद बहुत चौड़ा क्षेत्र समेटता है, जिसमें जैव-औषधि, औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी, जैव-कृषि, जैव-ईंधन और जैव-सेवाएँ आती हैं, और यह आँकड़ा किसी एक उद्योग से नहीं, इसी चौड़ाई से बनता है।
- (d)न तो 1 और न ही 2 — यह दोनों कथन अस्वीकार करता है, और यह उस अभ्यर्थी का उत्तर है जिसके लिए यह पूरा विषय अपरिचित है और जो आत्मविश्वास से लिखे दो दावों को 'सच होने के लिए बहुत अच्छा' मान लेता है। दोनों अभिलेख में हैं: 4·25 प्रतिशत का हिस्सा और 2024 के लिए 165·7 अरब डॉलर का मूल्यांकन इस क्षेत्र के दशकीय सरकारी लेखे के मुख्य आँकड़े हैं, और दूसरे कथन में दिया BioE3 का वर्णन उस नीति का मानक सार है जिसे मंत्रिमंडल ने 24 अगस्त 2024 को स्वीकृति दी। किसी कथन को केवल इसलिए अस्वीकार कर देना कि वह आत्मविश्वास से लिखा गया है, किसी बात की परख नहीं है।
अवधारणा
जैव-अर्थव्यवस्था आर्थिक गतिविधि का वह हिस्सा है जो वस्तुएँ और सेवाएँ बनाने के लिए जैविक संसाधनों, प्रक्रियाओं या ज्ञान का उपयोग करता है। यह जैव प्रौद्योगिकी उद्योग से चौड़ी श्रेणी है, और यही चौड़ाई मुख्य आँकड़े को बड़ा बनाती है। उसके प्रमुख खंड हैं — जैव-औषधि, यानी टीके, जैविक औषधियाँ और नैदानिक उत्पाद; औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी, जिसमें एंज़ाइम और जैव-आधारित रसायन आते हैं; जैव-कृषि, जिसमें बीज और जैविक निवेश आते हैं; जैव-ऊर्जा, जिसमें एथेनॉल और अन्य जैव-ईंधन हैं; तथा जैव-सूचना प्रौद्योगिकी और जैव-सेवाएँ, जैसे संविदा अनुसंधान और विनिर्माण।
मापी गई गति: 2014 में लगभग 10 अरब डॉलर, 2024 में लगभग 165·7 अरब डॉलर, सकल घरेलू उत्पाद में 4·25 प्रतिशत का योगदान, पिछले चार वर्षों में लगभग 17·9 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि, और 2030 तक 300 अरब डॉलर का घोषित लक्ष्य।
BioE3 अगले चरण का नीतिगत ढाँचा है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 अगस्त 2024 को स्वीकृति दी और जिसे जैव प्रौद्योगिकी विभाग प्रशासित करता है। उसका नाम ही उसके तीन उद्देश्य कहता है — अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार — और उसकी अंतर्वस्तु इन पेपरों के लिए रूपरेखा में जानने योग्य है।
उसका केंद्रीय विचार उच्च-प्रदर्शन जैव-विनिर्माण है: जो आज रासायनिक विधि से बनता है उसे जैविक प्रणालियों से बनाना। उसके वर्णन में दो पद बार-बार आते हैं और उन्हें अलग-अलग समझना चाहिए। पुनर्योजी जैव-विनिर्माण का अर्थ ऐसा उत्पादन है जो जिस संसाधन-आधार से लेता है उसे क्षीण करने के बजाय पुनर्जीवित करे। चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था का अर्थ जैविक सामग्री को उपयोग में बनाए रखना है — जैसे कृषि-अवशेषों को ईंधन और सामग्री में बदलना — न कि उन्हें अपशिष्ट मानना। दोनों शुद्ध-शून्य संकल्प से जुड़े हैं, क्योंकि जैव-आधारित उत्पादन का उद्देश्य कार्बन-प्रधान रासायनिक मार्गों को हटाना है।
उसके साधन हैं जैव-विनिर्माण सुविधाएँ, बायो-फ़ाउंड्री क्लस्टर और बायो-एआई हब, तथा रोज़गार का ज़ोर उन दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों पर है जहाँ स्थानीय जैव-भार उपलब्ध है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी की नीति इन पेपरों के करेंट अफ़ेयर्स खंड का नियमित हिस्सा है, और प्रश्न अंतर्निहित विज्ञान पर नहीं, नामित नीतियों और उनके मुख्य आँकड़ों पर बनते हैं। BioE3, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, अर्धचालक मिशन और अंतरिक्ष नीति — इसी तरह की सामग्री की अपेक्षा रखनी चाहिए।
यहाँ का दो-कथन वाला रूप एक आँकड़े को एक नीति-वर्णन के साथ जोड़ता है, और यही मानक जोड़ी है। असामान्य बात यह है कि दोनों में से किसी में फेरबदल नहीं किया गया — यह उन प्रश्नों में है जिनमें दोनों कथन सही हैं, और जो अभ्यर्थी यह मान लेता है कि कम-से-कम एक ग़लत होना चाहिए, वह उनमें से जो कम परिचित लगे उसी के बारे में संदेह गढ़ लेगा।
इस आदत को नाम देकर कहना उचित है, क्योंकि इससे दोनों दिशाओं में अंक जाते हैं। प्रश्न इसलिए नहीं बनाया जाता कि उसमें कोई भूल हो; वह इसलिए बनाया जाता है कि देखा जाए कि हर कथन अपने आप में परखा जा सकता है या नहीं। अनुशासन यही है कि हर कथन को जो ज्ञात है उसके विरुद्ध तौला जाए और जो संयोजन बने उसे स्वीकार किया जाए, भले ही वह बहुत आसान लगे।
छपाई की दो बातें भी ध्यान देने योग्य हैं: कथन 1 का दशमलव उठे हुए मध्य-बिंदु से छपा है, और कथन 2 में नीति का नाम केवल लैटिन लिपि में — 'BioE3' — देवनागरी रूप के बिना, देवनागरी पंक्ति के भीतर बैठाया गया है। दोनों इस पुस्तिका की परिपाटी हैं।
मुख्य तथ्य
- भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 के लगभग 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में लगभग 165·7 अरब डॉलर हुई और वह सकल घरेलू उत्पाद में 4·25 प्रतिशत का योगदान देती है; पिछले चार वर्षों की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर लगभग 17·9 प्रतिशत रही।
- घोषित नीतिगत लक्ष्य 2030 तक 300 अरब डॉलर की जैव-अर्थव्यवस्था का है, और BioE3 वही नीतिगत ढाँचा है जिसके सहारे उस लक्ष्य तक पहुँचने की बात कही जाती है — इसलिए दोनों कथन एक ही नीति-क्षेत्र के दो पक्ष हैं।
- BioE3 का विस्तार है बायोटेक्नोलॉजी फ़ॉर इकॉनमी, एनवायरनमेंट एंड एम्प्लॉयमेंट; इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 अगस्त 2024 को स्वीकृति दी और यह जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत है।
- नीति का आधिकारिक वर्णन यही है कि वह पुनर्योजी जैव-विनिर्माण को प्रोत्साहित करती है और शुद्ध-शून्य लक्ष्यों से एकरेखित चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था का समर्थन करती है, जिसमें उत्पादन रासायनिक आधार से जैव आधार की ओर खिसकाया जाता है।
- उसके साधन जैव-विनिर्माण सुविधाएँ, बायो-फ़ाउंड्री क्लस्टर और बायो-एआई हब हैं, और रोज़गार का ज़ोर उन दूसरी तथा तीसरी श्रेणी के शहरों पर है जो स्थानीय जैव-भार दे सकते हैं।
- जैव-अर्थव्यवस्था के प्रमुख खंड जैव-औषधि, औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी, जैव-कृषि, जैव-ऊर्जा तथा जैव-सेवाएँ हैं — और यही चौड़ाई इसके आँकड़े को इतना बड़ा बनाती है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- यह मान लेना कि दो कथनों वाले प्रश्न में कोई भूल होनी ही चाहिए, और जो कथन कम परिचित लगे उसी को अस्वीकार कर देना।
- 4·25 प्रतिशत के आँकड़े को बहुत बड़ा मानकर ठुकरा देना, जबकि जैव-अर्थव्यवस्था औषधि, औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी, कृषि, ऊर्जा और सेवाओं तक फैली चौड़ी श्रेणी है।
- जैव-अर्थव्यवस्था के डॉलर-मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद में उसके हिस्से से मिला देना; ये दो अलग माप हैं जो साथ-साथ बताए जाते हैं।
- सरकारी नीति-शब्दावली में लिखे कथन को संदिग्ध मान लेना; यहाँ वही शब्दावली इस बात का प्रमाण है कि कथन स्रोत से आया है।
- छपे हुए आँकड़े के उठे हुए मध्य-बिंदु को दशमलव के अतिरिक्त कुछ और पढ़ लेना; यह इस पुस्तिका की छपाई की परिपाटी है।
इन पेपरों में नीति और मिशन वाले प्रश्न एक मात्रा को एक वर्णन के साथ जोड़ते हैं, और मात्रा प्रायः किसी सरकारी विज्ञप्ति से शब्दशः ली जाती है — इसका अर्थ यह है कि दशमलव भी महत्व रखते हैं और गोल करके याद की गई संख्या दो विकल्पों में अंतर करने के लिए पर्याप्त न हो सकती। चूँकि वर्णन भी आधिकारिक सामग्री से ही उठाए जाते हैं, वे नीति-शब्दों की लड़ी जैसे पढ़े जाते हैं, और जो अभ्यर्थी उस लहजे पर अविश्वास करते हैं वे अंक गँवाते हैं। जो तैयारी काम करती है वह यह है कि हर महत्वपूर्ण मिशन या नीति के लिए उसका पूर्ण रूप, स्वीकृति देने वाला प्राधिकरण और तिथि, उसका मुख्य आँकड़ा, और वे दो-तीन वाक्यांश याद रखे जाएँ जिनमें उसका आधिकारिक सार दिया जाता है। दूसरा प्रचलित रूप यह है कि नीति का नोडल विभाग बदल दिया जाए — यहाँ वह जैव प्रौद्योगिकी विभाग है।
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- (b) 1 and 4 only
- (c) 2, 3 and 4 only
- (d) 1, 2, 3 and 4
उत्तर(d) 1, 2, 3 and 4
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- (a) 1 only
- (b) 2 only
- (c) Both 1 and 2
- (d) Neither 1 nor 2
उत्तर(b) 2 only
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